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सीएम योगी लखनऊ रिटर्न: एक-दो दिन में सियासी हलचलें तेज होने के आसार

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 11 Jun 2021 09:26 PM IST

सार
सीएम योगी के दिल्ली दौरे के बाद इसके संकेत हैं कि एक-दो दिन में राजधानी में सियासी हलचलें तेज हो सकती हैं।

दिल्ली से लखनऊ लौटे सीएम योगी
– फोटो : amar ujala

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिनी दिल्ली दौरे के बाद शुक्रवार देर शाम लखनऊ लौट आए। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भेंट की। जबकि गुरुवार को उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। औपचारिक तौर पर बताया जा रहा है कि इन नेताओं के बीच यूपी में कोरोना प्रबंधन और विकास कार्यों पर बात हुई है। मगर यह माना जा रहा है कि पिछले एक पखवारे से चल रही मंत्रिमंडल विस्तार, प्रदेश भाजपा संगठन में फेरबदल और आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के चेहरे को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों आदि पर चर्चा हुई है। इस दौरान केंद्रीय नेतृत्व ने यूपी को लेकर अपनी अपेक्षाओं से योगी को अवगत कराया है। सीएम योगी के दिल्ली दौरे के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि एक-दो दिन में लखनऊ में सियासी हलचलें तेज हो सकती हैं।सीएम के दिल्ली रवाना होते शुरू हो गया था चर्चाओं का दौरमुख्यमंत्री योगी जब गुरुवार दोपहर अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए तो प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। योगी की केंद्रीय नेताओं से भेंट के बाद प्रदेश में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार के कयास लगाए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन में भी बदलाव किया जा सकता है। क्योंकि सरकार व संगठन में सामाजिक संतुलन बनाने पर केंद्रीय नेताओं का खास जोर है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अपनी अपेक्षाएं सीएम योगी को बता दी है। जहां तक समय का सवाल है तो यह योगी पर छोड़ दिया गया है। पर, इतना जरूर है कि विधानसभा चुनाव में काफी कम वक्त होने की वजह से उन्हें जल्द इस पर निर्णय करना होगा। केंद्रीय नेतृत्व आयोगों, निगमों व परिषदों आदि में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं का समायोजन भी जल्द से जल्द चाहता है। जिससे चुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिल सके। सूत्रों का कहना है कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो किसे जगह देनी है और किन मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन में लाया जाना है, यह कवायद इसी महीने पूरी कर ली जाएगी। जिससे जुलाई से पार्टी चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार रहे। ऐसे में अगले तीन-चार दिन काफी अहम रहेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर आयोगों, निगमों व परिषदों में नियुक्तियों का सिलसिला जल्द शुरू हो सकता है।पीएम मोदी ने यूपी के कोविड प्रबंधन की सराहना कीयोगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत के साथ प्रदेश में कोरोना प्रबंधन का रिपोर्ट कार्ड भी रखा। उन्होंने कोविड प्रबंधन में केंद्र सरकार की ओर से मिले दिशा-निर्देशों और त्वरित सहयोग के लिए भी आभार जताया। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने यूपी के कोविड प्रबंधन की सराहना की।दोनों नेताओं के बीच यूपी में विकास कार्यों व अन्य कई मुद्दों को लेकर भी चर्चा हुई। योगी ने सरकार द्वारा कराए गए प्रमुख विकास कार्यों और निकट भविष्य में पूरे होने वाली परियोजनाओं आदि के बारे में जानकारी दी।जीवन के साथ जीविका को भी प्राथमिकतासीएम योगी ने पीएम मोदी को बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में किस प्रकार से यूपी में जीवन के साथ जीविका को भी प्राथमिकता दी और अन्य राज्यों की अपेक्षा प्रदेश में आंशिक कोरोना कर्फ्यू लागू किया। कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए उद्योग संचालित होते रहे और गेहूं खरीद भी होती रही। किसान हितों को देखते हुए मंडियां और चीनी मिलें भी संचालित होती रहीं।पीएम को भेंट की तीन पुस्तकेंसीएम योगी ने पीएम मोदी को तीन पुस्तकें भेंट की हैं। पहली पुस्तक यूपी में कोरोना की पहली लहर में प्रवासियों के बेहतर मैनेजमेंट को लेकर हावर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के बारे में है। दूसरी पुस्तक यूपी में जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी द्वारा प्रवासी संकट के बेहतर प्रबंधन को लेकर किए गए अध्ययन पर आधारित है और तीसरी पुस्तक जिला स्तर की जीडीपी पर आधारित है। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिनी दिल्ली दौरे के बाद शुक्रवार देर शाम लखनऊ लौट आए। दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भेंट की। जबकि गुरुवार को उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। औपचारिक तौर पर बताया जा रहा है कि इन नेताओं के बीच यूपी में कोरोना प्रबंधन और विकास कार्यों पर बात हुई है। मगर यह माना जा रहा है कि पिछले एक पखवारे से चल रही मंत्रिमंडल विस्तार, प्रदेश भाजपा संगठन में फेरबदल और आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी के चेहरे को लेकर लगाई जा रहीं अटकलों आदि पर चर्चा हुई है। इस दौरान केंद्रीय नेतृत्व ने यूपी को लेकर अपनी अपेक्षाओं से योगी को अवगत कराया है। सीएम योगी के दिल्ली दौरे के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि एक-दो दिन में लखनऊ में सियासी हलचलें तेज हो सकती हैं।

सीएम के दिल्ली रवाना होते शुरू हो गया था चर्चाओं का दौर
मुख्यमंत्री योगी जब गुरुवार दोपहर अचानक दिल्ली के लिए रवाना हुए तो प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। योगी की केंद्रीय नेताओं से भेंट के बाद प्रदेश में जल्द मंत्रिमंडल विस्तार के कयास लगाए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन में भी बदलाव किया जा सकता है। क्योंकि सरकार व संगठन में सामाजिक संतुलन बनाने पर केंद्रीय नेताओं का खास जोर है। 

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय नेतृत्व ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अपनी अपेक्षाएं सीएम योगी को बता दी है। जहां तक समय का सवाल है तो यह योगी पर छोड़ दिया गया है। पर, इतना जरूर है कि विधानसभा चुनाव में काफी कम वक्त होने की वजह से उन्हें जल्द इस पर निर्णय करना होगा। केंद्रीय नेतृत्व आयोगों, निगमों व परिषदों आदि में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं का समायोजन भी जल्द से जल्द चाहता है। जिससे चुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिल सके। 

सूत्रों का कहना है कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो किसे जगह देनी है और किन मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन में लाया जाना है, यह कवायद इसी महीने पूरी कर ली जाएगी। जिससे जुलाई से पार्टी चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार रहे। ऐसे में अगले तीन-चार दिन काफी अहम रहेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर आयोगों, निगमों व परिषदों में नियुक्तियों का सिलसिला जल्द शुरू हो सकता है।
पीएम मोदी ने यूपी के कोविड प्रबंधन की सराहना की
योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत के साथ प्रदेश में कोरोना प्रबंधन का रिपोर्ट कार्ड भी रखा। उन्होंने कोविड प्रबंधन में केंद्र सरकार की ओर से मिले दिशा-निर्देशों और त्वरित सहयोग के लिए भी आभार जताया। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने यूपी के कोविड प्रबंधन की सराहना की।

दोनों नेताओं के बीच यूपी में विकास कार्यों व अन्य कई मुद्दों को लेकर भी चर्चा हुई। योगी ने सरकार द्वारा कराए गए प्रमुख विकास कार्यों और निकट भविष्य में पूरे होने वाली परियोजनाओं आदि के बारे में जानकारी दी।
जीवन के साथ जीविका को भी प्राथमिकता
सीएम योगी ने पीएम मोदी को बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में किस प्रकार से यूपी में जीवन के साथ जीविका को भी प्राथमिकता दी और अन्य राज्यों की अपेक्षा प्रदेश में आंशिक कोरोना कर्फ्यू लागू किया। कोरोना की गाइड लाइन का पालन करते हुए उद्योग संचालित होते रहे और गेहूं खरीद भी होती रही। किसान हितों को देखते हुए मंडियां और चीनी मिलें भी संचालित होती रहीं।

पीएम को भेंट की तीन पुस्तकें
सीएम योगी ने पीएम मोदी को तीन पुस्तकें भेंट की हैं। पहली पुस्तक यूपी में कोरोना की पहली लहर में प्रवासियों के बेहतर मैनेजमेंट को लेकर हावर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के बारे में है। दूसरी पुस्तक यूपी में जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी द्वारा प्रवासी संकट के बेहतर प्रबंधन को लेकर किए गए अध्ययन पर आधारित है और तीसरी पुस्तक जिला स्तर की जीडीपी पर आधारित है।
 

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

विस्तार

कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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