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बड़ा बयान: मुकुल रॉय बोले- बंगाल में जैसी स्थिति है, कोई बीजेपी में नहीं रहेगा, दीदी बोलीं- गद्दारों की वापसी नहीं होगी

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सार
बंगाल में भाजपा को बृहस्पतिवार को बड़ा झटका लगा। किसी समय ममता बनर्जी के खास रहे और बाद में भाजपा में आए मुकुल रॉय ने फिर दीदी का दामन थाम लिया।  

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घर वापसी के बाद मुकुल रॉय ने पत्रकारों से चर्चा में कहा- मैं बीजेपी छोड़कर टीएमसी में आया हूं, अभी बंगाल में जो स्थिति है, उस स्थिति में कोई बीजेपी में नहीं रहेगा।’  दादा ने टीएमसी में वापसी के बाद उनकी विचारधारा को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही। रॉय ने कहा कि सभी जाने-पहचाने चेहरों को एकबार फिर से देखकर, भाजपा से बाहर निकलकर अच्छा लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि दीदी के साथ कोई मतभेद नहीं था और वह देश की नेता हैं।तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय की घर वापसी पर स्वागत किया। ममता बनर्जी ने इस मौके पर कहा कि भाजपा में मुकुल रॉय को धमकाया गया, इससे उनकी सेहत पर असर पड़ा। ममता ने मुकुल रॉय को क्लीनचिट देते हुए कहा, ‘हमारा दल शक्तिशाली है, लोगों ने हमारी पार्टी के साथ गद्दारी की, लेकिन मुकुल ने चुनाव के दौरान भी हमारे साथ गद्दारी नहीं की। जिन लोगों ने हमारी पार्टी के साथ गद्दारी की, उन्हें वापस नहीं लेंगे।” टीएमसी महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु भी तृणमूल कांग्रेस में लौट आए हैं। 

ममता बनर्जी ने पत्रकारों से चर्चा में कहा- वे (मुकुल रॉय) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, पहले वे जो भूमिका निभाते थे, भविष्य में भी वे वही भूमिका निभाएंगे। टीएमसी एक परिवार है। ममता बनर्जी से पूछा गया था कि मुकुल रॉय को भविष्य में किस पद की ज़िम्मेदारी दी जाएगी? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही। 

राजीव बनर्जी व अन्य की वापसी के सवाल को ममता ने टाला
ममता बनर्जी ने राजीव बनर्जी सहित टीएमसी के अन्य बागियों की घर वापसी के सवाल को टाल दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस बारे में कुछ कह पाएंगी। ममता ने कहा ‘आप लोगों ने देखा कि लैंडस्लाइड विक्ट्री हासिल की। मुकुल अच्छा लड़का है, उसे डरा, धमका कर और एजेंसियों से डराकर बीजेपी ले गई थी, लेकिन उसे यहां वापस आकर मानसिक शांति मिलेगी। बीजेपी में बहुत अधिक शोषण है। सुवेंदु अधिकारी बनाम मुकुल रॉय का अंजाममाना जा रहा है कि मुकुल के भाजपा से खफा होने की वजह सुवेंदु अधिकारी का बंगाल भाजपा में बढ़ता कद रहा। पहले मुकुल रॉय राज्य में पार्टी के अग्रणी नेताओं में थे, लेकिन हालिया चुनाव से पूर्व सुवेंदु अधिकारी को तवज्जो मिलने लगी थी। इससे मुकुल रॉय खफा थे। पीएम ने की 10 मिनट बात, पर नहीं माने मुकुल रॉयबीते कुछ दिनों से मुकुल रॉय ने भाजपा की बैठकों से दूरी बना ली थी। इसी बीच उनकी पत्नी बीमार हो गईं तो ममता बनर्जी के भतीजे व टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी उनसे मिलने गए। इसी बीच मुकुल रॉय की नाराजगी की भनक लगने पर पीएम मोदी ने तीन जून को खुद उनसे फोन पर करीब 10 मिनट तक बात की थी। इसके बाद भी मुकुल रॉय नहीं माने और आखिरकार ‘घर’ लौट गए। 2017 में छोड़ा था दीदी का साथ मुकुल रॉय ने 2017 में ममता बनर्जी की टीएमसी छोड़कर भाजपा में प्रवेश किया था। उन्हें भाजपा ने अपना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक बना दिया था। हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद से ही उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया था। 35 हजार वोट से जीते चुनावबंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुकुल रॉय को कृष्णनगर उत्तर सीट से प्रत्याशी बनाया था। वह टीएमसी की कौशानी मुखर्जी को 35 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर विजयी हुए। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय भी भाजपा प्रत्याशी बनाए गए थे, लेकिन वह हार गए।

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घर वापसी के बाद मुकुल रॉय ने पत्रकारों से चर्चा में कहा- मैं बीजेपी छोड़कर टीएमसी में आया हूं, अभी बंगाल में जो स्थिति है, उस स्थिति में कोई बीजेपी में नहीं रहेगा।’  दादा ने टीएमसी में वापसी के बाद उनकी विचारधारा को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही। 

रॉय ने कहा कि सभी जाने-पहचाने चेहरों को एकबार फिर से देखकर, भाजपा से बाहर निकलकर अच्छा लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि दीदी के साथ कोई मतभेद नहीं था और वह देश की नेता हैं।

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख व बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय की घर वापसी पर स्वागत किया। ममता बनर्जी ने इस मौके पर कहा कि भाजपा में मुकुल रॉय को धमकाया गया, इससे उनकी सेहत पर असर पड़ा। ममता ने मुकुल रॉय को क्लीनचिट देते हुए कहा, ‘हमारा दल शक्तिशाली है, लोगों ने हमारी पार्टी के साथ गद्दारी की, लेकिन मुकुल ने चुनाव के दौरान भी हमारे साथ गद्दारी नहीं की। जिन लोगों ने हमारी पार्टी के साथ गद्दारी की, उन्हें वापस नहीं लेंगे।” टीएमसी महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु भी तृणमूल कांग्रेस में लौट आए हैं। 

#WATCH मैं बीजेपी छोड़कर TMC में आया हूं, अभी बंगाल में जो स्थिति है, उस स्थिति में कोई बीजेपी में नहीं रहेगा: मुकुल रॉय pic.twitter.com/bdbD5t7kBW

— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 11, 2021

ममता बनर्जी ने पत्रकारों से चर्चा में कहा- वे (मुकुल रॉय) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, पहले वे जो भूमिका निभाते थे, भविष्य में भी वे वही भूमिका निभाएंगे। टीएमसी एक परिवार है। ममता बनर्जी से पूछा गया था कि मुकुल रॉय को भविष्य में किस पद की ज़िम्मेदारी दी जाएगी? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही। 

वे (मुकुल रॉय) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, पहले वे जो भूमिका निभाते थे, भविष्य में भी वे वही भूमिका निभाएंगे। TMC एक परिवार है: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, ‘मुकुल रॉय को भविष्य में किस पद की ज़िम्मेदारी दी जाएगी’ सवाल का जवाब देते हुए pic.twitter.com/1NzIJQ22Gy

— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 11, 2021

राजीव बनर्जी व अन्य की वापसी के सवाल को ममता ने टाला

ममता बनर्जी ने राजीव बनर्जी सहित टीएमसी के अन्य बागियों की घर वापसी के सवाल को टाल दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस बारे में कुछ कह पाएंगी। ममता ने कहा ‘आप लोगों ने देखा कि लैंडस्लाइड विक्ट्री हासिल की। मुकुल अच्छा लड़का है, उसे डरा, धमका कर और एजेंसियों से डराकर बीजेपी ले गई थी, लेकिन उसे यहां वापस आकर मानसिक शांति मिलेगी। बीजेपी में बहुत अधिक शोषण है। 
सुवेंदु अधिकारी बनाम मुकुल रॉय का अंजाम
माना जा रहा है कि मुकुल के भाजपा से खफा होने की वजह सुवेंदु अधिकारी का बंगाल भाजपा में बढ़ता कद रहा। पहले मुकुल रॉय राज्य में पार्टी के अग्रणी नेताओं में थे, लेकिन हालिया चुनाव से पूर्व सुवेंदु अधिकारी को तवज्जो मिलने लगी थी। इससे मुकुल रॉय खफा थे। 
पीएम ने की 10 मिनट बात, पर नहीं माने मुकुल रॉय
बीते कुछ दिनों से मुकुल रॉय ने भाजपा की बैठकों से दूरी बना ली थी। इसी बीच उनकी पत्नी बीमार हो गईं तो ममता बनर्जी के भतीजे व टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी उनसे मिलने गए। इसी बीच मुकुल रॉय की नाराजगी की भनक लगने पर पीएम मोदी ने तीन जून को खुद उनसे फोन पर करीब 10 मिनट तक बात की थी। इसके बाद भी मुकुल रॉय नहीं माने और आखिरकार ‘घर’ लौट गए। 
2017 में छोड़ा था दीदी का साथ 
मुकुल रॉय ने 2017 में ममता बनर्जी की टीएमसी छोड़कर भाजपा में प्रवेश किया था। उन्हें भाजपा ने अपना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक बना दिया था। हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद से ही उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया था। 
35 हजार वोट से जीते चुनाव
बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मुकुल रॉय को कृष्णनगर उत्तर सीट से प्रत्याशी बनाया था। वह टीएमसी की कौशानी मुखर्जी को 35 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर विजयी हुए। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय भी भाजपा प्रत्याशी बनाए गए थे, लेकिन वह हार गए।

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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