Connect with us

India

साइबर ठगी: विदेशों में बैठे ठगों ने भारतीयों को लगाई 250 करोड़ रुपये की चपत, ऐसे बनाया शिकार

Published

on

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Wed, 09 Jun 2021 01:00 AM IST

सार
साइबर ठगी के इतिहास में एसटीएफ उत्तराखंड की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। इसका खुलासा करते हुए उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता एडीजी अभिनव कुमार ने बताया कि रोहित कुमार निवासी श्यामपुर और राहुल कुमार गोयल निवासी कनखल हरिद्वार ने साइबर थाने को एक शिकायत की थी।

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

विदेशों में बैठे व्यापारियों (ठग) ने एक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से भारतीयों को 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई है। विदेशों के इन ठगों ने लोगों को 15 दिनों में पैसे दोगुना करने का लालच दिया था। तीन स्थानीय (राज्य के) पीड़ितों की शिकायत पर एसीएफ ने कार्रवाई करते हुए ठगों के एक भारतीय साथी को गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ के अनुसार यह मामला 250 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है। इस मामले में अभी विवेचना के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। साइबर ठगी के इतिहास में एसटीएफ उत्तराखंड की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। इसका खुलासा करते हुए उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता एडीजी अभिनव कुमार ने बताया कि रोहित कुमार निवासी श्यामपुर और राहुल कुमार गोयल निवासी कनखल हरिद्वार ने साइबर थाने को एक शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार दोनों ने गूगल प्ले स्टोर से पावर बैंक नाम से एक एप्लीकेशन डाउनलोड की थी। निवेश संबंधी इस एप्लीकेशन में 15 दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा किया गया था। इस लालच में आकर दोनों ने क्रमश: 91 हजार और 73 हजार रुपये गंवा दिए। इन मामलों में साइबर थाने में दो मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की गई। जिन बैंकों खातों, ऑनलाइन वॉलेट में धनराशि ट्रांसफर हुई उनकी जानकारी ली गई। पता चला कि रोजर पे और पेयू वॉलेट के माध्यम से यह पैसा आईसीआईसीआई और पेटीएम बैंक के खातों में गया है। आगे जांच में आया कि पेटीएम बैंक का खाता प्रमुख संदिग्ध खाता है और इसका संचालन पवन कुमार पांडेय निवासी, सेक्टर 99, नोएडा कर रहा है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह की अगुवाई में पवन कुमार पांडेय को मंगलवार को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। पवन कुमार के खिलाफ अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया। 
एसटीएफ के अनुसार शुरूआती जांच में पता चला कि यह पॉवर बैंक नाम की एप्लीकेशन फरवरी 2021 में शुरू की गई थी। यह एप 12 मई 2021 तक संचालन में रही। इसके बाद एकाएक क्रैश हो गई। इसके अब तक कुल 50 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। साइबर थाने ने वित्तीय लेनदेन का अध्ययन किया तो पता चला कि इसके माध्यम से 250 करोड़ रुपये से ज्यादा ठगे गए हैं। एसटीएफ के अनुसार यह धनराशि 500 करोड़ या इससे भी ज्यादा होने की आशंका है। भारतीयों को मिलता है कमीशन एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इस पूरी फर्जी योजना के तार विदेशों के व्यापारियों से से जुड़े हैं। पता चला कि वहां के कुछ व्यापारी भारतीय निवेशकों से दोस्ती कर अपने साथ कमीशन के नाम पर जोड़ते हैं। पॉवर बैंक नाम की यह एप्लीकेशन पहले ऑनलाइन लोन प्रदान करती थी। अब अपराध के तरीके में बदलाव कर ये लोग विश्वास जीतकर पैसा दोगुना करने का प्रलोभन देकर धनराशि निवेश कराते हैं। भारत के नागरिको के ही बैंक खाते और उनके मोबाईल नम्बर का प्रयोग किया जाता है।शुरूआत में कुछ लोगों के पैसे हुए वापस शुरूआत में इस एप्लीकेशन के माध्यम से लोगों को उनकी धनराशि बढ़ाकर वापस भी की गई। इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार इसे और बढ़ाया गया। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध पूरे देश में फैल गया। हर दिन करोड़ों रुपये की धनराशि एक खाते से दूसरे खाते और आगे विभिन्न खातों में ट्रांसफर की जाने लगी। ऐसा करने से पुलिस भी भ्रमित हो गई। 25 और इसी तरह की एप्लीकेशन आईं सामने ठगी में प्रयोग किए गए खाते विभिन्न फर्जी कंपनियों के नाम से रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर्ड हैं। एसटीएफ के मुताबिक इसी तरह की 25 मोबाइल एप्लीकेशन की सूची हाथ आई है। यह सब एप्लीकेशन संदिग्ध कार्यों में लगी हुई हैं। इन सबके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

विस्तार

विदेशों में बैठे व्यापारियों (ठग) ने एक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से भारतीयों को 250 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई है। विदेशों के इन ठगों ने लोगों को 15 दिनों में पैसे दोगुना करने का लालच दिया था। तीन स्थानीय (राज्य के) पीड़ितों की शिकायत पर एसीएफ ने कार्रवाई करते हुए ठगों के एक भारतीय साथी को गिरफ्तार कर लिया है। एसटीएफ के अनुसार यह मामला 250 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का हो सकता है। इस मामले में अभी विवेचना के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। 

साइबर ठगी के इतिहास में एसटीएफ उत्तराखंड की यह सबसे बड़ी कार्रवाई है। इसका खुलासा करते हुए उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता एडीजी अभिनव कुमार ने बताया कि रोहित कुमार निवासी श्यामपुर और राहुल कुमार गोयल निवासी कनखल हरिद्वार ने साइबर थाने को एक शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार दोनों ने गूगल प्ले स्टोर से पावर बैंक नाम से एक एप्लीकेशन डाउनलोड की थी। निवेश संबंधी इस एप्लीकेशन में 15 दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा किया गया था। इस लालच में आकर दोनों ने क्रमश: 91 हजार और 73 हजार रुपये गंवा दिए। 

इन मामलों में साइबर थाने में दो मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की गई। जिन बैंकों खातों, ऑनलाइन वॉलेट में धनराशि ट्रांसफर हुई उनकी जानकारी ली गई। पता चला कि रोजर पे और पेयू वॉलेट के माध्यम से यह पैसा आईसीआईसीआई और पेटीएम बैंक के खातों में गया है। आगे जांच में आया कि पेटीएम बैंक का खाता प्रमुख संदिग्ध खाता है और इसका संचालन पवन कुमार पांडेय निवासी, सेक्टर 99, नोएडा कर रहा है। एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह की अगुवाई में पवन कुमार पांडेय को मंगलवार को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया गया। पवन कुमार के खिलाफ अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया। 

50 लाख डाउनलोड, 21 मई तक चली एप 

एसटीएफ के अनुसार शुरूआती जांच में पता चला कि यह पॉवर बैंक नाम की एप्लीकेशन फरवरी 2021 में शुरू की गई थी। यह एप 12 मई 2021 तक संचालन में रही। इसके बाद एकाएक क्रैश हो गई। इसके अब तक कुल 50 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। साइबर थाने ने वित्तीय लेनदेन का अध्ययन किया तो पता चला कि इसके माध्यम से 250 करोड़ रुपये से ज्यादा ठगे गए हैं। एसटीएफ के अनुसार यह धनराशि 500 करोड़ या इससे भी ज्यादा होने की आशंका है। भारतीयों को मिलता है कमीशन एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि इस पूरी फर्जी योजना के तार विदेशों के व्यापारियों से से जुड़े हैं। पता चला कि वहां के कुछ व्यापारी भारतीय निवेशकों से दोस्ती कर अपने साथ कमीशन के नाम पर जोड़ते हैं। पॉवर बैंक नाम की यह एप्लीकेशन पहले ऑनलाइन लोन प्रदान करती थी। अब अपराध के तरीके में बदलाव कर ये लोग विश्वास जीतकर पैसा दोगुना करने का प्रलोभन देकर धनराशि निवेश कराते हैं। भारत के नागरिको के ही बैंक खाते और उनके मोबाईल नम्बर का प्रयोग किया जाता है।शुरूआत में कुछ लोगों के पैसे हुए वापस शुरूआत में इस एप्लीकेशन के माध्यम से लोगों को उनकी धनराशि बढ़ाकर वापस भी की गई। इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार इसे और बढ़ाया गया। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध पूरे देश में फैल गया। हर दिन करोड़ों रुपये की धनराशि एक खाते से दूसरे खाते और आगे विभिन्न खातों में ट्रांसफर की जाने लगी। ऐसा करने से पुलिस भी भ्रमित हो गई। 25 और इसी तरह की एप्लीकेशन आईं सामने ठगी में प्रयोग किए गए खाते विभिन्न फर्जी कंपनियों के नाम से रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर्ड हैं। एसटीएफ के मुताबिक इसी तरह की 25 मोबाइल एप्लीकेशन की सूची हाथ आई है। यह सब एप्लीकेशन संदिग्ध कार्यों में लगी हुई हैं। इन सबके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

आगे पढ़ें

50 लाख डाउनलोड, 21 मई तक चली एप 

Continue Reading

India

एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

Published

on

By

विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

आगे पढ़ें

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

Continue Reading

India

नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

Published

on

By

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

Continue Reading

India

शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

Published

on

By

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2017 Zox News Theme. Theme by MVP Themes, powered by WordPress.