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यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : घर बनवाने, मरम्मत कराने, विस्तार के लिए अब जीपीएफ से 75 हजार निकाल सकेंगे कर्मचारी 

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सार
किसी स्थल, घर, फ्लैट के पूरी तरह से खरीद के लिए या इन कार्यों के लिए ऋण के भुगतान के लिए एक किस्त के रूप में भी धनराशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है।

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प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को घर बनवाने, पुनर्निर्माण कराने, वृद्धि या बदलाव आदि के लिए जीपीएफ से 75 हजार रुपये तक निकालने की सुविधा देने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में कार्मिक 40 हजार रुपये तक ही निकाल सकते हैं। सरकार ने मंगलवार को यह फैसला कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया है।
 
प्रदेश के सरकारी कार्मिकों को तय समय की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद विभिन्न कार्यों के लिए अपने सामान्य भविष्य निधि खाते से धनराशि निकालने की सुविधा मिलती है। सामान्य भविष्य निधि (उत्तर प्रदेश) नियमावली-1985 के नियम-17(1) (क) के अंतर्गत पहले से स्वामित्व में रखे गए या अर्जित किए गए घर/फ्लैट के पुनर्निर्माण या उसमें परिवर्धन (वृद्धि) या परिवर्तन करने के लिए खाताधारक वर्तमान में 40 हजार रुपये निकाल सकता है। पैतृक गृह के  पुनरुद्धार, परिवर्तन व परिवर्धन या अनुरक्षण के लिए भी इतनी ही धनराशि निकालने की सुविधा है। प्रदेश के कर्मचारी भवन निर्माण सामग्री व श्रम आदि की दरों में हुई वृद्धि तथा लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे।प्रदेश सरकार ने इन कार्यों के लिए जीपीएफ से धनराशि निकालने की सीमा बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया है। घर निर्माण के मामले में यदि ली जाने वाली धनराशि 40 हजार से अधिक हो तो सामान्यत: दो किस्तों में निकालने की अनुमति होगी। हालांकि यदि कार्मिक पूरी राशि एकमुश्त निकालाना चाहता है तो स्वीकृति प्राधिकारी औचित्य से संतुष्ट होकर अनुमति दे सकेगा।जमीन, घर व फ्लैट खरीदने, किस्त देने में भी निकाल सकेंगे धनराशिकिसी स्थल, घर, फ्लैट के पूरी तरह से खरीद के लिए या इन कार्यों के लिए, लिए जा रहे ऋण के भुगतान के लिए एक किस्त के रूप में भी धनराशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है। खरीदी गई जमीन, घर या फ्लैट के लिए या किसी योजना के अंतर्गत किसी विकास प्राधिकरण, आवास परिषद, स्थानीय निकाय या गृह निर्माण सहकारी समिति की स्ववित्त पोषित योजना में बनाए गए घर या फ्लैट के लिए किस्तों के भुगतान के लिए भी धनराशि स्वीकृत की जा सकेगी। 
राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति अब अखिल भारतीय प्राविधिक शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मानकों के मुताबिक होगी। अब तक यह उप्र प्राविधिक शिक्षा परिषद के मानकों के आधार पर होती थी। इसमें कई विसंगतियां थी। इसे दूर करने के लिए सरकार ने एआईसीटीई के मानकों को प्रदेश में लागू करने का फैसला किया है।बता दें, एआईसीटीई ने देश के सभी राज्यों में प्राविधिक शिक्षा (डिप्लोमा सेक्टर) में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2019 में ही नया मानक लागू किया था। अधिकांश राज्यों ने इस मानक को लागू कर दिया था, लेकिन यूपी में इसे लागू नहीं किया गया था। शिक्षकों की मांग को देखते हुए सरकार ने पिछले साल ही एआईसीटीई के मानक लागू करने की सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। अब इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।पीपीपी मोड पर दिए जाएंगे 6 पॉलीटेक्निक व 6 आईटीआईप्रदेश सरकार राजकीय पॉलीटेक्निक और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) का संचालन पीपीपी मोड पर करने का फैसला किया है। इस क्रम में सरकार ने 6 पॉलीटेक्निक और 6 आईटीआई को पीपीपी मोड पर देने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को भी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। प्रधानाचार्य आवास को ध्वस्त करने को मंजूरीकानपुर के राजकीय चर्म संस्थान परिसर स्थित प्रधानाचार्य आवास को ध्वस्त करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। यह आवास काफी दिनों से जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा था।
सरकार ने अयोध्या के विकास में जमीन की उपलब्धता की समस्या का समाधान करने का रास्ता निकाल लिया है। सरकार ने तय किया है कि जरूरत के मुताबिक नजूल की भूमि संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि विभाग जरूरत के मुताबिक व्यावसायिक कांप्लेक्स, भूमिगत पार्किंग और बहुउद्देश्यीय हॉल आदि का निर्माण करा सकें। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।प्रस्ताव के मुताबिक कैबिनेट ने फिलहाल नजूल की 14 भूमि को दूसरे विभागों को देने को मंजूरी दी है। इसमें मछरहटा में 9586.79 वर्गमीटर जमीन नगर निगम को व्यावसायिक कांप्लेक्स व बहुउद्देश्यीय हॉल व भूमिगत पार्किंग के लिए दी जाएगी। टेड़ी बाजार में स्थित 3416.07 वर्गमीटर भूमि व्यावसायिक कांप्लेक्स, बहुउद्देशीय हॉल व भूमिगत पार्किंग के लिए दी जाएगी। जबकि यहीं स्थित 750 वर्गमीटर विशेष शाखा अभिसूचना विभाग अयोध्या को और बाग बिजेसी में 1750 वर्गमीटर भूमि विद्युत उपकेंद्र बनाने के लिए दी जाएगी। बाग बिजेसी में ही 2823.99 वर्गमीटर थाना कोतवाली परिसर, कार्यालय व आवासीय भवन और 5200 वर्गमीटर जमीन अग्निशमन केंद्र व उसके कर्मचारियों के लिए आवास और कार्यालय के लिए देने का फैसला किया गया है।प्रस्ताव के मुताबिक सिविल लाइंस में 300 वर्ग मीटर जमीन विधिक माप विज्ञान विभाग, वजीरगंज में 1600 वर्गमीटर जमीन मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और 1500 वर्गमीटर जमीन स्थापना सहायक अभिसूचना ब्यूरो को देने का फैसला किया गया है। जबकि रेतिया में 3600 वर्गमीटर नगर निगम को जलाशय व भूमिगत जलाशय के लिए और 100 वर्गमीटर जमीन नगर निगम को ट्यूबवेल लगाने के लिए दिया जाएगा।  वजीरगंज में भी नगर निगम को ट्यूबवेल लगाने के लिए 60.70 वर्गमीटर और 900 वर्गमीटर जमीन जलाशय व भूमिगत जलाशय के लिए दी जाएगी। इसी प्रकार चक्रतीरथ में भी 429.09 वर्गमीटर जमीन को नगर निगम को जलाशय के लिए दिया गया है।
विधानसभा क्षेत्र जलेसर में रोडवेज डिपो एवं बुलंदशहर स्थित शिकारपुर में  बस अड्डा बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। बाईसर्कुलेशन से इसे हरी झंडी देेते हुए सीएम ने संबंधित विभाग के मंत्री के पास प्रस्ताव को अभिमत के लिए भेजा जिस पर मंत्री ने भी सहमति जता दी।प्रमुख सचिव परिवहन राजेश कुमार के मुताबिक परिवहन विभाग से संबंधित दो प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। एक जलेसर में रोडवेज डिपो तथा दूसरा शिकारपुर में बस अड्डा बनाए जाने का था। जलेसर में डिपो बनाने की मांग काफी समय से चल रही थी। उधर शिकारपुर में भी इसके लिए लोगों ने स्थानीय प्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन दिया था। दरअसल इन दोनों ही प्रस्तावों में परिवहन विभाग को निशुल्क जमीन देना प्रस्तावित था। स्थानीय प्रशासन ने जमीन का चिह्ननांकन कर प्रस्ताव प्रेषित कर दिया था। लगभग डेढ़ – डेढ़ एकड़ जमीन का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। मंगलवार को इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। सीएम के निर्देश पर इन प्रस्तावों को अभिमत के लिए संबंधित विभाग के मंत्री के पास भेजा गया । परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने बताया कि उनका अभिमत इसके लिए स्पष्ट है और दोनों ही प्रस्ताव स्वीकार हो गए हैं।

विस्तार

प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को घर बनवाने, पुनर्निर्माण कराने, वृद्धि या बदलाव आदि के लिए जीपीएफ से 75 हजार रुपये तक निकालने की सुविधा देने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में कार्मिक 40 हजार रुपये तक ही निकाल सकते हैं। सरकार ने मंगलवार को यह फैसला कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया है।

 

प्रदेश के सरकारी कार्मिकों को तय समय की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद विभिन्न कार्यों के लिए अपने सामान्य भविष्य निधि खाते से धनराशि निकालने की सुविधा मिलती है। सामान्य भविष्य निधि (उत्तर प्रदेश) नियमावली-1985 के नियम-17(1) (क) के अंतर्गत पहले से स्वामित्व में रखे गए या अर्जित किए गए घर/फ्लैट के पुनर्निर्माण या उसमें परिवर्धन (वृद्धि) या परिवर्तन करने के लिए खाताधारक वर्तमान में 40 हजार रुपये निकाल सकता है। पैतृक गृह के  पुनरुद्धार, परिवर्तन व परिवर्धन या अनुरक्षण के लिए भी इतनी ही धनराशि निकालने की सुविधा है। प्रदेश के कर्मचारी भवन निर्माण सामग्री व श्रम आदि की दरों में हुई वृद्धि तथा लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे।

प्रदेश सरकार ने इन कार्यों के लिए जीपीएफ से धनराशि निकालने की सीमा बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया है। घर निर्माण के मामले में यदि ली जाने वाली धनराशि 40 हजार से अधिक हो तो सामान्यत: दो किस्तों में निकालने की अनुमति होगी। हालांकि यदि कार्मिक पूरी राशि एकमुश्त निकालाना चाहता है तो स्वीकृति प्राधिकारी औचित्य से संतुष्ट होकर अनुमति दे सकेगा।
जमीन, घर व फ्लैट खरीदने, किस्त देने में भी निकाल सकेंगे धनराशि
किसी स्थल, घर, फ्लैट के पूरी तरह से खरीद के लिए या इन कार्यों के लिए, लिए जा रहे ऋण के भुगतान के लिए एक किस्त के रूप में भी धनराशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है। खरीदी गई जमीन, घर या फ्लैट के लिए या किसी योजना के अंतर्गत किसी विकास प्राधिकरण, आवास परिषद, स्थानीय निकाय या गृह निर्माण सहकारी समिति की स्ववित्त पोषित योजना में बनाए गए घर या फ्लैट के लिए किस्तों के भुगतान के लिए भी धनराशि स्वीकृत की जा सकेगी। 

एआईसीटीई के मानकों के आधार पर होगी पॉलीटेक्निक में शिक्षकों की भर्ती

राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति अब अखिल भारतीय प्राविधिक शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मानकों के मुताबिक होगी। अब तक यह उप्र प्राविधिक शिक्षा परिषद के मानकों के आधार पर होती थी। इसमें कई विसंगतियां थी। इसे दूर करने के लिए सरकार ने एआईसीटीई के मानकों को प्रदेश में लागू करने का फैसला किया है।बता दें, एआईसीटीई ने देश के सभी राज्यों में प्राविधिक शिक्षा (डिप्लोमा सेक्टर) में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2019 में ही नया मानक लागू किया था। अधिकांश राज्यों ने इस मानक को लागू कर दिया था, लेकिन यूपी में इसे लागू नहीं किया गया था। शिक्षकों की मांग को देखते हुए सरकार ने पिछले साल ही एआईसीटीई के मानक लागू करने की सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। अब इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।पीपीपी मोड पर दिए जाएंगे 6 पॉलीटेक्निक व 6 आईटीआईप्रदेश सरकार राजकीय पॉलीटेक्निक और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) का संचालन पीपीपी मोड पर करने का फैसला किया है। इस क्रम में सरकार ने 6 पॉलीटेक्निक और 6 आईटीआई को पीपीपी मोड पर देने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को भी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। प्रधानाचार्य आवास को ध्वस्त करने को मंजूरीकानपुर के राजकीय चर्म संस्थान परिसर स्थित प्रधानाचार्य आवास को ध्वस्त करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। यह आवास काफी दिनों से जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा था।

अयोध्या में विकास के लिए दी जाएगी नजूल की जमीन

सरकार ने अयोध्या के विकास में जमीन की उपलब्धता की समस्या का समाधान करने का रास्ता निकाल लिया है। सरकार ने तय किया है कि जरूरत के मुताबिक नजूल की भूमि संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि विभाग जरूरत के मुताबिक व्यावसायिक कांप्लेक्स, भूमिगत पार्किंग और बहुउद्देश्यीय हॉल आदि का निर्माण करा सकें। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।प्रस्ताव के मुताबिक कैबिनेट ने फिलहाल नजूल की 14 भूमि को दूसरे विभागों को देने को मंजूरी दी है। इसमें मछरहटा में 9586.79 वर्गमीटर जमीन नगर निगम को व्यावसायिक कांप्लेक्स व बहुउद्देश्यीय हॉल व भूमिगत पार्किंग के लिए दी जाएगी। टेड़ी बाजार में स्थित 3416.07 वर्गमीटर भूमि व्यावसायिक कांप्लेक्स, बहुउद्देशीय हॉल व भूमिगत पार्किंग के लिए दी जाएगी। जबकि यहीं स्थित 750 वर्गमीटर विशेष शाखा अभिसूचना विभाग अयोध्या को और बाग बिजेसी में 1750 वर्गमीटर भूमि विद्युत उपकेंद्र बनाने के लिए दी जाएगी। बाग बिजेसी में ही 2823.99 वर्गमीटर थाना कोतवाली परिसर, कार्यालय व आवासीय भवन और 5200 वर्गमीटर जमीन अग्निशमन केंद्र व उसके कर्मचारियों के लिए आवास और कार्यालय के लिए देने का फैसला किया गया है।प्रस्ताव के मुताबिक सिविल लाइंस में 300 वर्ग मीटर जमीन विधिक माप विज्ञान विभाग, वजीरगंज में 1600 वर्गमीटर जमीन मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और 1500 वर्गमीटर जमीन स्थापना सहायक अभिसूचना ब्यूरो को देने का फैसला किया गया है। जबकि रेतिया में 3600 वर्गमीटर नगर निगम को जलाशय व भूमिगत जलाशय के लिए और 100 वर्गमीटर जमीन नगर निगम को ट्यूबवेल लगाने के लिए दिया जाएगा।  वजीरगंज में भी नगर निगम को ट्यूबवेल लगाने के लिए 60.70 वर्गमीटर और 900 वर्गमीटर जमीन जलाशय व भूमिगत जलाशय के लिए दी जाएगी। इसी प्रकार चक्रतीरथ में भी 429.09 वर्गमीटर जमीन को नगर निगम को जलाशय के लिए दिया गया है।

जलेसर में डिपो और शिकारपुर में बस स्टेशन बनाए जाने को सीएम की हरी झंडी

विधानसभा क्षेत्र जलेसर में रोडवेज डिपो एवं बुलंदशहर स्थित शिकारपुर में  बस अड्डा बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। बाईसर्कुलेशन से इसे हरी झंडी देेते हुए सीएम ने संबंधित विभाग के मंत्री के पास प्रस्ताव को अभिमत के लिए भेजा जिस पर मंत्री ने भी सहमति जता दी।प्रमुख सचिव परिवहन राजेश कुमार के मुताबिक परिवहन विभाग से संबंधित दो प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। एक जलेसर में रोडवेज डिपो तथा दूसरा शिकारपुर में बस अड्डा बनाए जाने का था। जलेसर में डिपो बनाने की मांग काफी समय से चल रही थी। उधर शिकारपुर में भी इसके लिए लोगों ने स्थानीय प्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन दिया था। दरअसल इन दोनों ही प्रस्तावों में परिवहन विभाग को निशुल्क जमीन देना प्रस्तावित था। स्थानीय प्रशासन ने जमीन का चिह्ननांकन कर प्रस्ताव प्रेषित कर दिया था। लगभग डेढ़ – डेढ़ एकड़ जमीन का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। मंगलवार को इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। सीएम के निर्देश पर इन प्रस्तावों को अभिमत के लिए संबंधित विभाग के मंत्री के पास भेजा गया । परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने बताया कि उनका अभिमत इसके लिए स्पष्ट है और दोनों ही प्रस्ताव स्वीकार हो गए हैं।

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एआईसीटीई के मानकों के आधार पर होगी पॉलीटेक्निक में शिक्षकों की भर्ती

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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