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उद्धव-मोदी मुलाकात: मैं नवाज शरीफ से मिलने नहीं गया था… पीएम संग रिश्तों के सवाल पर बोले ठाकरे

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Tue, 08 Jun 2021 12:39 PM IST

सार
पीएम मोदी और उद्धव ठाकरे के बीच बैठक हुई। पीएम से मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी सभी बातों को गंभीरता पूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण, जीएसटी समेत कई संवदेनशील मुद्दों पर वार्ता हुई। पीएम मोदी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की यह मुलाकात काफी अहम है।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार यानी आज दिल्ली पहुंच कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पीएम नरेंद्र मोदी से रिश्तों और मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उद्धव ठाकरे ने बेबाकी से जवाब दिया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि भले ही राजनीतिक रूप से साथ नहीं हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हमारा रिश्ता खत्म हो गया है। मैं कोई नवाज शरीफ से मिलने नहीं गया था। इसलिए यदि मैं उनसे व्यक्तिगत मुलाकात करता हूं तो इसमें गलत क्या है।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पीएम से मुलाकात के बाद कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी सभी बातों को गंभीरता पूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण, जीएसटी समेत कई संवदेनशील मुद्दों पर वार्ता हुई। पीएम मोदी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की यह मुलाकात काफी अहम है। मुख्यमंत्री बनने के बाद दिल्ली में पीएम मोदी और उद्धव ठाकरे के बीच यह दूसरी मुलाकात है। उद्धव साथ के उप मुख्यमंत्री अजित पवार, मंत्री अशोक चव्हाण भी मौजूद रहे। 
पीएम संग इन मुद्दों पर हुई चर्चाप्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ठाकरे ने बताया कि पीएम मोदी ने हमारे सभी मुद्दों को ध्यान से सुना है और गंभीरता से विचार करने की बात कही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बताया कि पीएम मोदी के साथ मराठा आरक्षण, राजनीतिक आरक्षण, मेट्रो शेड, जीएसटी कलेक्शन, फसल बीमा और चक्रवात से हुए नुकसान समेत 12 जरूरी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से मराठी भाषा को केंद्र की ओर से स्टेटस दिए जाने की मांग की गई। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया है।मराठा आरक्षण पर एक्शन ले केंद्र : चव्हाणमराठा आरक्षण के मसले पर राज्य सरकार के मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि अब आरक्षण को लेकर राज्य से ज्यादा ताकत केंद्र के पास है, ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में आगे बढ़कर कदम उठाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सभी का पक्ष रखना चाहिए। अजित पवार ने कहा कि आरक्षण का मसला सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं है बल्कि देशभर का है। वहीं, जीएसटी को लेकर कहा कि हमारा 24 हजार करोड़ रुपये का हिस्सा मिलना बाकी है। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि इसे जल्द से जल्द हमें दिया जाए।

पिछले साल मिले थे ठाकरे-मोदी
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पीएम मोदी से यह मुलाकात भले ही राज्य के मुद्दों को लेकर हो, लेकिन इसके सियासी मायने तो निकाले ही जाएंगे। पिछले दिनों जिस प्रकार विपक्षी दल के नेता एकजुट हुए और प्रधानमंत्री के खिलाफ हमला बोला। उसके बाद यह मुलाकात काफी अहम है। पिछले साल फरवरी महीने में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान, उनके साथ बेटे आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि सीएए से किसी को डरने की जरूरत नहीं है और एनपीआर से किसी को भी देश से बाहर निकाला नहीं जाएगा। 

विस्तार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार यानी आज दिल्ली पहुंच कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पीएम नरेंद्र मोदी से रिश्तों और मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उद्धव ठाकरे ने बेबाकी से जवाब दिया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि भले ही राजनीतिक रूप से साथ नहीं हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हमारा रिश्ता खत्म हो गया है। मैं कोई नवाज शरीफ से मिलने नहीं गया था। इसलिए यदि मैं उनसे व्यक्तिगत मुलाकात करता हूं तो इसमें गलत क्या है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पीएम से मुलाकात के बाद कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी सभी बातों को गंभीरता पूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण, जीएसटी समेत कई संवदेनशील मुद्दों पर वार्ता हुई। पीएम मोदी और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की यह मुलाकात काफी अहम है। मुख्यमंत्री बनने के बाद दिल्ली में पीएम मोदी और उद्धव ठाकरे के बीच यह दूसरी मुलाकात है। उद्धव साथ के उप मुख्यमंत्री अजित पवार, मंत्री अशोक चव्हाण भी मौजूद रहे।

 

We may not be politically together but that doesn’t mean our relationship has broken. ‘Main koi Nawaz Sharif se nahi milne gaya tha’ (I didn’t go to meet Nawaz Sharif). So if I meet him (PM) separately in person, there is nothing wrong with it: Maharashtra CM Thackeray in Delhi pic.twitter.com/zQQir5t5ZD

— ANI (@ANI) June 8, 2021

पीएम संग इन मुद्दों पर हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ठाकरे ने बताया कि पीएम मोदी ने हमारे सभी मुद्दों को ध्यान से सुना है और गंभीरता से विचार करने की बात कही है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बताया कि पीएम मोदी के साथ मराठा आरक्षण, राजनीतिक आरक्षण, मेट्रो शेड, जीएसटी कलेक्शन, फसल बीमा और चक्रवात से हुए नुकसान समेत 12 जरूरी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से मराठी भाषा को केंद्र की ओर से स्टेटस दिए जाने की मांग की गई। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया है।
मराठा आरक्षण पर एक्शन ले केंद्र : चव्हाण
मराठा आरक्षण के मसले पर राज्य सरकार के मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि अब आरक्षण को लेकर राज्य से ज्यादा ताकत केंद्र के पास है, ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में आगे बढ़कर कदम उठाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सभी का पक्ष रखना चाहिए। अजित पवार ने कहा कि आरक्षण का मसला सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं है बल्कि देशभर का है। वहीं, जीएसटी को लेकर कहा कि हमारा 24 हजार करोड़ रुपये का हिस्सा मिलना बाकी है। केंद्र सरकार से अनुरोध है कि इसे जल्द से जल्द हमें दिया जाए।

Chief Minister of Maharashtra Shri Uddhav Thackeray, Deputy Chief Minister Shri @AjitPawarSpeaks and Cabinet Minister Shri @AshokChavanINC called on PM @narendramodi. @OfficeofUT @CMOMaharashtra pic.twitter.com/aiJRzKRiyl
— PMO India (@PMOIndia) June 8, 2021

पिछले साल मिले थे ठाकरे-मोदी

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पीएम मोदी से यह मुलाकात भले ही राज्य के मुद्दों को लेकर हो, लेकिन इसके सियासी मायने तो निकाले ही जाएंगे। पिछले दिनों जिस प्रकार विपक्षी दल के नेता एकजुट हुए और प्रधानमंत्री के खिलाफ हमला बोला। उसके बाद यह मुलाकात काफी अहम है। पिछले साल फरवरी महीने में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान, उनके साथ बेटे आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि सीएए से किसी को डरने की जरूरत नहीं है और एनपीआर से किसी को भी देश से बाहर निकाला नहीं जाएगा।
 

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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