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लॉक हो या अनलॉक : पेट्रोल 100 रुपये के पार, आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम

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सार
देश में ईंधन के दाम फिर आसमान चूमने लगे हैं। कुछ शहरों में पेट्रोल 100 के पार पहुंच गया है। ऐसे में बार-बार सवाल यही उठता है कि कच्चे तेल सस्ता है तो फिर पेट्रोल इतना महंगा क्यों है? खास बात यह है कि पिछले छह सालों में यानी साल 2014 के बाद से अब तक पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में दोगुने से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है। 

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देश के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 101 से 103 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। कई हिस्सों में लॉकडाउन के कारण तेल की खपत भी कम हो रही है और विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम भी कम हैं, फिर भी भारत में तेल क्यों महंगा है? यह समझने के लिए हमें पेट्रोल डीजल के दामों का गणित समझना होगा। इसका कच्चे तेल की कीमत व टैक्स ही आधार नहीं हैं।दरअसल एक फॉर्मूला है, जिसके आधार पर पेट्रोल पंप पर बिकने वाले ईंधन के दाम तय होते हैं। इसमें कच्चे तेल के दाम, परिवहन, रिफाइनरी का खर्च, केंद्र व राज्य सरकारों के कर, पंपों का कमीशन जैसी तमाम चीजें शामिल होती हैं। यह सच है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा तय की जाती है। भारत को भी ओपेक द्वारा तय दर पर कच्चा तेल खरीदना पड़ता है। लेकिन जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तब भी भारत में उपभोक्ता पेट्रोल और डीजल के लिए ऊंची कीमत चुकाते हैं, यह माजरा समझना होगा। टीपीपी फॉर्मूले से तय होते हैं दामपंपों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले तेल की कीमत ट्रेड पैरिटी प्राइसिंग (टीपीपी) फॉर्मूले से तय होती है। इसका 80:20 का अनुपात रहता है। यानी देश में बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल के मूल्य का 80 प्रतिशत हिस्सा विश्व बाजार में वर्तमान में बेचे जा रहे ईंधन के दामों से जुड़ा होता है। शेष 20 फीसदी हिस्सा अनुमानित मूल्य के अनुसार जोड़ा जाता है। जानकारों का कहना है कि भारत में कच्चे तेल के शोधन और मार्केटिंग की लागत का पंपों पर ईंधन के असल दामों से कोई लेना-देना नहीं है।रिजर्व बैंक ने बताई यह वजहपेट्रोल की कीमत मुंबई व भोपाल जैसे शहरों में 100 के पार पहुंच चुकी हैं। दिल्ली में दाम लगभग 95 रुपये प्रति लीटर हैं। रिजर्व बैंक ने तेल के दामों में उछाल पर लगाम के लिए सुझाव दिए हैं। बैंक के अनुसार मूल्यवृद्धि की मुख्य वजह केंद्र और राज्यों द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए जाने वाले टैक्स हैं।
पेट्रोलियम पदार्थों पर प्रत्येक राज्य अपनी दरों के अनुसार कर वसूलता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क के अलावा राज्यों के कर व स्थानीय कर शहरों द्वारा वसूले जाते हैं। दिल्ली के उदाहरण से इसे समझते हैं। 16 मई को दिल्ली में पेट्रोल करीब 92.58 रुपये लीटर था। इंडियन ऑयल का इस दिन आधार मूल्य 34.19 रुपये लीटर था। इस पर 0.36 रुपये लीटर ढुलाई खर्च जुड़ा।इस तरह डीलर को 34.55 रुपये प्रति लीटर में पड़ा। इसके बाद इस पर उत्पाद शुल्क भी लगा 32.89 रुपये लीटर, डीलर का कमीशन लगा 3.77 रुपये लीटर, 22 फीसदी दिल्ली सरकार का वैट करीब 21.36 रुपये लगा। इस तरह सब मिलाकर प्रति लीटर का अंतिम बिक्री मूल्य हो गया 92.578 रुपये लीटर।इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष दिसंबर में पेट्रोल के आधार मूल्य पर दिल्ली में केंद्र व राज्य 180 फीसदी कर वसूलते थे, जबकि डीजल पर 141 फीसदी। दूसरी और जर्मनी में 65 फीसदी ईंधन पर कुल 65 फीसदी और इटली में मात्र 20 फीसदी कर वसूला जाता है।
देश में बीते छह सालों में केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल से कमाई 307 फीसदी तक बढ़ा ली है। सरकार की कमाई का यह बड़ा जरिया बना हुआ है। इस बीच शनिवार को मुंबई व भोपाल में पेट्रोल के दाम 100 रुपये लीटर के पार पहुंच गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में पेट्रोल-डीजल से सरकार को टैक्स से कमाई तीन गुना से ज्यादा तक बढ़ चुकी है। अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच सरकार ने तेल पर टैक्स के माध्यम से 2.94 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। इस दौरान विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आईं, इसके बाद भी इस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी जारी रही। 2020-21 में यह 12.2 फीसदी तक पहुंच गया, जबकि 2014-15 में यह 5.4 फीसदी था।बीते दिनों लोकसभा में वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि पिछले छह सालों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के माध्यम से कुल कर संग्रह में 307.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसमें अकेले पेट्रोल से कर संग्रह 206 फीसदी और डीजल से 377 फीसदी बढ़ा है।

शहर
कीमत

दिल्ली
94.76

मुंबई
100.98

भोपाल
102

कोलकाता
94.76

चेन्नई
96.24

बंगलूरू
87.92

डीजल के दाम (रुपये प्रति लीटर)

शहर
कीमत

दिल्ली
85.66

कोलकाता
88.51

मुंबई
92.99

चेन्नई
90.38

बंगलूरू
90.81

 

विस्तार

देश के कई शहरों में पेट्रोल के दाम 101 से 103 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। कई हिस्सों में लॉकडाउन के कारण तेल की खपत भी कम हो रही है और विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम भी कम हैं, फिर भी भारत में तेल क्यों महंगा है? यह समझने के लिए हमें पेट्रोल डीजल के दामों का गणित समझना होगा। इसका कच्चे तेल की कीमत व टैक्स ही आधार नहीं हैं।

दरअसल एक फॉर्मूला है, जिसके आधार पर पेट्रोल पंप पर बिकने वाले ईंधन के दाम तय होते हैं। इसमें कच्चे तेल के दाम, परिवहन, रिफाइनरी का खर्च, केंद्र व राज्य सरकारों के कर, पंपों का कमीशन जैसी तमाम चीजें शामिल होती हैं। 

यह सच है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन आयात करता है। कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा तय की जाती है। भारत को भी ओपेक द्वारा तय दर पर कच्चा तेल खरीदना पड़ता है। लेकिन जब कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तब भी भारत में उपभोक्ता पेट्रोल और डीजल के लिए ऊंची कीमत चुकाते हैं, यह माजरा समझना होगा। 
टीपीपी फॉर्मूले से तय होते हैं दाम
पंपों पर ग्राहकों को बेचे जाने वाले तेल की कीमत ट्रेड पैरिटी प्राइसिंग (टीपीपी) फॉर्मूले से तय होती है। इसका 80:20 का अनुपात रहता है। यानी देश में बेचे जाने वाले पेट्रोल-डीजल के मूल्य का 80 प्रतिशत हिस्सा विश्व बाजार में वर्तमान में बेचे जा रहे ईंधन के दामों से जुड़ा होता है। शेष 20 फीसदी हिस्सा अनुमानित मूल्य के अनुसार जोड़ा जाता है। जानकारों का कहना है कि भारत में कच्चे तेल के शोधन और मार्केटिंग की लागत का पंपों पर ईंधन के असल दामों से कोई लेना-देना नहीं है।
रिजर्व बैंक ने बताई यह वजह
पेट्रोल की कीमत मुंबई व भोपाल जैसे शहरों में 100 के पार पहुंच चुकी हैं। दिल्ली में दाम लगभग 95 रुपये प्रति लीटर हैं। रिजर्व बैंक ने तेल के दामों में उछाल पर लगाम के लिए सुझाव दिए हैं। बैंक के अनुसार मूल्यवृद्धि की मुख्य वजह केंद्र और राज्यों द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए जाने वाले टैक्स हैं।

सभी राज्य वसूलते हैं अपनी दरों से कर, दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल का यह है गणित

पेट्रोलियम पदार्थों पर प्रत्येक राज्य अपनी दरों के अनुसार कर वसूलता है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क के अलावा राज्यों के कर व स्थानीय कर शहरों द्वारा वसूले जाते हैं। दिल्ली के उदाहरण से इसे समझते हैं। 16 मई को दिल्ली में पेट्रोल करीब 92.58 रुपये लीटर था। इंडियन ऑयल का इस दिन आधार मूल्य 34.19 रुपये लीटर था। इस पर 0.36 रुपये लीटर ढुलाई खर्च जुड़ा।इस तरह डीलर को 34.55 रुपये प्रति लीटर में पड़ा। इसके बाद इस पर उत्पाद शुल्क भी लगा 32.89 रुपये लीटर, डीलर का कमीशन लगा 3.77 रुपये लीटर, 22 फीसदी दिल्ली सरकार का वैट करीब 21.36 रुपये लगा। इस तरह सब मिलाकर प्रति लीटर का अंतिम बिक्री मूल्य हो गया 92.578 रुपये लीटर।इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष दिसंबर में पेट्रोल के आधार मूल्य पर दिल्ली में केंद्र व राज्य 180 फीसदी कर वसूलते थे, जबकि डीजल पर 141 फीसदी। दूसरी और जर्मनी में 65 फीसदी ईंधन पर कुल 65 फीसदी और इटली में मात्र 20 फीसदी कर वसूला जाता है।

बीते छह साल में केंद्र सरकार की कमाई भी 307 फीसदी तक बढ़ी

देश में बीते छह सालों में केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल से कमाई 307 फीसदी तक बढ़ा ली है। सरकार की कमाई का यह बड़ा जरिया बना हुआ है। इस बीच शनिवार को मुंबई व भोपाल में पेट्रोल के दाम 100 रुपये लीटर के पार पहुंच गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में पेट्रोल-डीजल से सरकार को टैक्स से कमाई तीन गुना से ज्यादा तक बढ़ चुकी है। अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 के बीच सरकार ने तेल पर टैक्स के माध्यम से 2.94 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है। इस दौरान विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे आईं, इसके बाद भी इस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी जारी रही। 2020-21 में यह 12.2 फीसदी तक पहुंच गया, जबकि 2014-15 में यह 5.4 फीसदी था।बीते दिनों लोकसभा में वित्त मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि पिछले छह सालों में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क के माध्यम से कुल कर संग्रह में 307.3 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसमें अकेले पेट्रोल से कर संग्रह 206 फीसदी और डीजल से 377 फीसदी बढ़ा है।

शनिवार को प्रमुख शहरों में पेट्रोल के दाम (रुपये प्रति लीटर)

शहर
कीमत

दिल्ली
94.76

मुंबई
100.98

भोपाल
102

कोलकाता
94.76

चेन्नई
96.24

बंगलूरू
87.92

डीजल के दाम (रुपये प्रति लीटर)

शहर
कीमत

दिल्ली
85.66

कोलकाता
88.51

मुंबई
92.99

चेन्नई
90.38

बंगलूरू
90.81

 

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सभी राज्य वसूलते हैं अपनी दरों से कर, दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल का यह है गणित

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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