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खुलासा: पेंटागन ने वुहान लैब को वित्तीय सहायता पहुंचाने वाली संस्था को दिए थे करीब तीन अरब रुपये

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 06 Jun 2021 02:18 AM IST

सार
खुलासा हुआ है कि पेंटागन ने इकोहेल्थ एलायंस को करीब तीन अरब रुपये दिए, जिसने 2013 और 2020 के बीच चीन के वुहान में एक प्रयोगशाला को वित्तीय मदद पहुंचाई थी।

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दुनियाभर में कोहराम मचाने वाला कोरोना वायरस की उत्पत्ति कैसे और कहां से हुई है यह अब भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम चीन स्थित वुहान लैब का दौरा करने के बावजूद इस तथ्य को स्पष्ट नहीं कर सकी कि इसकी वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई है, लेकिन अमेरिका इस बात पर शुरू से ही जोर देता रहा है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन के वुहान वायरोलॉजी लैब से हुई है। इतना ही नहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे चीनी वायरस का नाम भी दिया था, जिसे लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई थी।इसी बीच अमेरिका के फेडरल डाटा से एक बड़ा खुलासा हुआ है। फेडरल डाटा के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन ने ब्रिटिश मूल के डॉक्टर पीटर दासजक की इकोहेल्थ एलायंस संस्था को करीब तीन अरब रुपये (39 मिलिनन डॉलर ) दिए थे। इकोहेल्थ एलायंस वह चैरिटी संस्था है जिसने चीन के वुहान लैब में कोरोना वायरस अनुसंधान को वित्तीय सहायता पहुंचाई। इसी वुहान लैब पर कोरोना वायरस का स्रोत होने का आरोप लगाया गया है।यह खबर ऐसे वक्त में सामने आई जब इकोहेल्थ एलायंस संस्था के प्रमुख, ब्रिटिश मूल के वैज्ञानिक डॉ. पीटर दासजक को हितों के टकराव का दोषी पाया गया था। साथ ही लैब से कोरोना वायरस के लीक होने पर उठ रहे सवालों के विपरीत चलाए जा रहे अभियान को लेकर भी उनका नाम सामने आया था।इस मामले के सामने आने के बाद इकोहेल्थ एलायंस संस्था गहन जांच के दायरे में आ गया है। जांच की जा रही है कि यह संस्था चीन में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में कोरोना वायरस के अनुसंधान के लिए संघीय अनुदान का उपयोग कर रहा था। 
नई बीमारियों पर शोध करने के लिए स्थापित अमेरिका की गैर-लाभकारी संस्था इकोहेल्थ एलायंस ने आंशिक रूप से गहन विवादास्पद ‘काम के लाभ’ के लिए किए जाने वाले प्रयोगों को भी वित्त पोषित किया है, जहां मानव कोशिकाओं पर उनके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए खतरनाक वायरस को अधिक संक्रामक बना दिया जाता है।

बता दें कि अमेरिका में उस वक्त एक राजनीतिक भूचाल आ गया था जब दावा किया गया था कि कोविड-19 वायरस इकोहेल्थ एलायंस द्वारा वित्त पोषित वुहान लैब में बनाया गया था, या उससे लीक हुआ था। उस वक्त तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संस्था के लिए 27 करोड़ रुपये (3.7 मिलियन डॉलर) का अनुदान रद्द कर दिया था।लेकिन स्वतंत्र शोधकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए संघीय अनुदान के आंकड़ों से पता चलता है कि संस्था को 2017 से 2020 तक सरकार से नौ अरब रुपये (123 मिलियन डॉलर) से अधिक राशि प्राप्त हुई है और इसके सबसे बड़े वित्तीय सहायता पहुंचाने वालों में से एक रक्षा विभाग है, जो 2013 से संगठन को लगभग 39 मिलियन डॉलर की राशि दे चुका है। वास्तव में उस पैसे का कितना हिस्सा वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में शोध के लिए गया, यह अज्ञात है।

विस्तार

दुनियाभर में कोहराम मचाने वाला कोरोना वायरस की उत्पत्ति कैसे और कहां से हुई है यह अब भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम चीन स्थित वुहान लैब का दौरा करने के बावजूद इस तथ्य को स्पष्ट नहीं कर सकी कि इसकी वायरस की उत्पत्ति कहां से हुई है, लेकिन अमेरिका इस बात पर शुरू से ही जोर देता रहा है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन के वुहान वायरोलॉजी लैब से हुई है। इतना ही नहीं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे चीनी वायरस का नाम भी दिया था, जिसे लेकर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

इसी बीच अमेरिका के फेडरल डाटा से एक बड़ा खुलासा हुआ है। फेडरल डाटा के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय, पेंटागन ने ब्रिटिश मूल के डॉक्टर पीटर दासजक की इकोहेल्थ एलायंस संस्था को करीब तीन अरब रुपये (39 मिलिनन डॉलर ) दिए थे। इकोहेल्थ एलायंस वह चैरिटी संस्था है जिसने चीन के वुहान लैब में कोरोना वायरस अनुसंधान को वित्तीय सहायता पहुंचाई। इसी वुहान लैब पर कोरोना वायरस का स्रोत होने का आरोप लगाया गया है।

यह खबर ऐसे वक्त में सामने आई जब इकोहेल्थ एलायंस संस्था के प्रमुख, ब्रिटिश मूल के वैज्ञानिक डॉ. पीटर दासजक को हितों के टकराव का दोषी पाया गया था। साथ ही लैब से कोरोना वायरस के लीक होने पर उठ रहे सवालों के विपरीत चलाए जा रहे अभियान को लेकर भी उनका नाम सामने आया था।

इस मामले के सामने आने के बाद इकोहेल्थ एलायंस संस्था गहन जांच के दायरे में आ गया है। जांच की जा रही है कि यह संस्था चीन में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में कोरोना वायरस के अनुसंधान के लिए संघीय अनुदान का उपयोग कर रहा था।
 
नई बीमारियों पर शोध करने के लिए स्थापित अमेरिका की गैर-लाभकारी संस्था इकोहेल्थ एलायंस ने आंशिक रूप से गहन विवादास्पद ‘काम के लाभ’ के लिए किए जाने वाले प्रयोगों को भी वित्त पोषित किया है, जहां मानव कोशिकाओं पर उनके प्रभाव का अध्ययन करने के लिए खतरनाक वायरस को अधिक संक्रामक बना दिया जाता है।

बता दें कि अमेरिका में उस वक्त एक राजनीतिक भूचाल आ गया था जब दावा किया गया था कि कोविड-19 वायरस इकोहेल्थ एलायंस द्वारा वित्त पोषित वुहान लैब में बनाया गया था, या उससे लीक हुआ था। उस वक्त तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संस्था के लिए 27 करोड़ रुपये (3.7 मिलियन डॉलर) का अनुदान रद्द कर दिया था।
लेकिन स्वतंत्र शोधकर्ताओं द्वारा एकत्र किए गए संघीय अनुदान के आंकड़ों से पता चलता है कि संस्था को 2017 से 2020 तक सरकार से नौ अरब रुपये (123 मिलियन डॉलर) से अधिक राशि प्राप्त हुई है और इसके सबसे बड़े वित्तीय सहायता पहुंचाने वालों में से एक रक्षा विभाग है, जो 2013 से संगठन को लगभग 39 मिलियन डॉलर की राशि दे चुका है। वास्तव में उस पैसे का कितना हिस्सा वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में शोध के लिए गया, यह अज्ञात है।

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

विस्तार

कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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