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अनलॉक: कल से पाबंदियों में और भी मिलेगी ढील, जानें किन राज्यों को मिली छूट और कहां बढ़ा लॉकडाउन?

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Sun, 06 Jun 2021 12:29 PM IST

सार
देश में कोविड-19 की दूसरी लहर में अब मरीजों की संख्या में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में अधिकांश उत्तरी और पश्चिमी राज्यों ने लॉकडाउन प्रतिबंधों को सावधानी से एक-एक कर हटाने का फैसला लिया है। वहीं, कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां अभी भी बड़ी संख्या में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ प्रदेशों ने लॉकडाउन को बढ़ा दिया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : पीटीआई

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कोरोना की दूसरी लहर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और इसके चलते देशभर के कई राज्यों में लागू लॉकडाउन के कड़े नियमों से व्यापार, रोजगार और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि, अब कोरोना के नए मामलों में कमी दर्ज की जा रही है। ऐसे में राज्य सरकारों ने सावधानी के साथ लॉकडाउन के नियमों में लोगों को छूट देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकारों ने कुछ भी एक साथ खोलने की अनुमति नहीं दी है, पाबंदियों में एक-एक कर छूट दी जा रही है। इस बीच कुछ राज्यों में कल यानी सोमवार (7 जून) से सख्त नियमों में थोड़ी और छूट मिलने जा रही है। आपको बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कम हुआ है जबकि दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन से राज्य सोमवार से प्रतिबंधों में और भी ढील दे रहे हैं और किन राज्यों ने लॉकडाउन के तहत कड़े नियमों को जारी रखने का फैसला किया है। 

नई दिल्ली- मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में 31 मई से अनलॉक प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। साथ ही दिल्ली में सोमवार (7 जून) को सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन समाप्त हो रहा था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, इस दौरान कड़े प्रतिबंधों में कई छूट दी जाएगी। सरकारी और निजी कार्यालयों को 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ फिर से खोलने की अनुमति होगी। दिल्ली मेट्रो 50 प्रतिशत क्षमता पर काम करेगी और बाजार और मॉल को 7 जून से ऑड-ईवन के आधार पर सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक खोलने की अनुमति होगी। 
महाराष्ट्र- मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य में लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों को 15 जून तक बढ़ा दिया है। हालांकि सात जून से लॉकडाउन के नियमों में कुछ ढील दी जाएगी। राज्य में साप्ताहिक कोविड सकारात्मकता दर और ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता के आधार पर प्रतिबंधों को कम करने के लिए पांच-स्तरीय योजना लागू किया गया है। पांच प्रतिशत से कम की सकारात्मकता दर और 25 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता वाले शहर और जिले पूरी तरह से खुलेंगे। अन्य शहरों और जिलों में अलग-अलग मानकों के प्रतिबंध जारी रहेंगे। जिन जगहों पर पॉजिटिविटी रेट 20 फीसदी से ज्यादा है और ऑक्सीजन बेड की क्षमता 75 फीसदी से ज्यादा है, वहां सिर्फ जरूरी दुकानें ही शाम 4 बजे तक खुली रहेंगी और ऑफिस में 15 फीसद कर्मचारी ही काम करेंगे।  
उत्तर प्रदेश- यूपी में अब सिर्फ चार जिलों में ही कोरोना कर्फ्यू लागू रहेगा। बाकी प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना संक्रमितों की संख्या 600 से कम हो गई है।अब सिर्फ लखनऊ, मेरठ, सहारनपुर और गोरखपुर में ही कोरोना कर्फ्यू लागू रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश के 71 जिले कोरोना कर्फ्यू मुक्त हो गए।
पंजाब में शनिवार (5 जून) को कोरोना के 1,907 नए मामले दर्ज किए गए, जिससे राज्य में कुल कोरोना के मामले 5,77,997 के आंकड़े तक पहुंच गए। वहीं, यहां पिछले 24 घंटे में इस घातक बीमारी से 79 लोगों की मौत भी हुई। इससे अब तक यहां कुल मरने वालों की संख्या 15,009 तक पहुंच गई। ऐसी स्थिति को देखते हुए राज्य में सरकार ने 10 जून तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया है। 
तमिलनाडु- मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने सोमवार से प्रतिबंधों में कुछ ढील के साथ 14 जून तक लॉकडाउन को एक सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की। राज्य ने 11 हॉटस्पॉट जिलों की पहचान की है, जहां उच्च संक्रमण दर होने के कारण प्रतिबंध जारी रहेगा। ये जिले कोयंबटूर, नीलगिरी, तिरुपुर, इरोड, सलेम, करूर, नमक्कल, तंजौर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम और मयिलादुथुराई हैं।
कर्नाटक- राज्य में 14 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में शुक्रवार को 13,800 नए कोविड मामले और 365 मौतें दर्ज की गईं। 2,686 मामलों और 206 मौतों के साथ राजधानी बंगलुरू कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला रहा।  
केरल- एलडीएफ सरकार ने कुछ रियायतों के साथ लॉकडाउन को नौ जून तक के लिए बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार (5 जून) को राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को 15 जुलाई तक टीका लगाया जाए। 
मध्यप्रदेश- राज्य में कोरोना कर्फ्यू की पाबंदियों में ढील देते हुए 15 जून तक कर्फ्यू को बढ़ा दिया गया है। जिलों के लिए अलग से अनलॉक दिशा-निर्देशों की घोषणा की गई है।
पंजाब- पंजाब में शनिवार (5 जून) को कोरोना के 1,907 नए मामले दर्ज किए गए। इससे कुल कोरोना मामलों का आंकड़ा 5,77,997 पर पहुंच गया। साथ ही यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के कारण 79 लोगों की मौत दर्ज की गई। इससे राज्य में कुल कोविड से हुई मौतों का आंकड़ा 15,009 की संख्या को पार कर गया। ऐसी स्थिति को देखते हुए पंजाब में 10 जून तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। इस दौरान प्रदेश में सख्त नियम लागू होंगे। 

गुजरात- राज्य के 36 शहरों में रात का कर्फ्यू 4 जून से एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। 
बिहार- बिहार में 5 मई से लागू किए गए लॉकडाउन को 8 जून तक बढ़ा दिया गया है।
झारखंड- झारखंड में लॉकडाउन को 10 जून तक बढ़ा दिया है।
ओडिशा- ओडिशा में 17 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा।
राजस्थान- अशोक गहलोत सरकार ने 2 जून से कुछ प्रतिबंधों में ढील देकर अनलॉक प्रक्रिया शुरू की।
तेलंगाना- तेलंगाना ने लॉकडाउन को 9 जून तक बढ़ा दिया है। 
आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश ने कर्फ्यू 10 जून तक बढ़ा दिया है।
हिमाचल प्रदेश और गोवा- दोनों राज्यों ने 14 जून तक कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया। गोवा में आवश्यक वस्तुओं को बेचने वाली दुकानों को हर दिन सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच संचालित करने की अनुमति है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में दुकानों, रेस्तरां और भोजनालयों को खोलने से संबंधित प्रतिबंधों में ढील दी गई है।
हरियाणा और सिक्किम- दोनों राज्य 7 जून तक लॉकडाउन प्रतिबंध लागू रखेंगे। हरियाणा ने कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की घोषणा की है।
जम्मू और कश्मीर-प्रशासन ने पाबंदियों में ढील दी है, लेकिन रात का कर्फ्यू और वीकेंड लॉकडाउन रहेगा। राज्य में पिछले 24 घंटें में कोरोना से 25 मौतें और 1,448 नए मामले दर्ज किए हैं।

असम- भाजपा शासित राज्य ने पाबंदियों को 15 जून तक बढ़ा दिया है। हालांकि 4 जून को उसने कर्फ्यू में ढील में एक घंटे की बढ़ोतरी कर दी। 
मेघालय और त्रिपुरा- कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी खासी हिल्स जिले में सात जून तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। त्रिपुरा सरकार ने राज्य में अगरतला नगर निगम क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में कोरोना कर्फ्यू को 10 जून तक बढ़ा दिया है। 
मिजोरम- राज्य में आइजोल और अन्य जिला मुख्यालयों में लॉकडाउन को 6 जून तक बढ़ा दिया गया है। 
मणिपुर और नागालैंड- मणिपुर सरकार ने इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, उखरूल, थौबल, काकचिंग और चुराचंदपुर के सात जिलों में 11 जून तक कर्फ्यू लगा दिया है। नागालैंड ने लॉकडाउन को 11 जून तक बढ़ा दिया है। 
अरुणाचल प्रदेश- राज्य ने अंजॉ, दिबांग घाटी, निचली सुबनसिरी, लोहित और तवांग जिलों और राजधानी परिसर क्षेत्र में 7 जून तक पूर्ण लॉकडाउन रहेगा।
उत्तराखंड- राज्य ने 8 जून तक के लिए कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया है।
छत्तीसगढ़- सरकार ने 31 मई को लॉकडाउन को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है।
पुडुचेरी- पुडुचेरी में 7 जून तक लॉकडाउन रहेगा।
लक्षद्वीप- लक्षद्वीप प्रशासन ने लॉकडाउन को 10 जून तक बढ़ा दिया है।

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और इसके चलते देशभर के कई राज्यों में लागू लॉकडाउन के कड़े नियमों से व्यापार, रोजगार और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। हालांकि, अब कोरोना के नए मामलों में कमी दर्ज की जा रही है। ऐसे में राज्य सरकारों ने सावधानी के साथ लॉकडाउन के नियमों में लोगों को छूट देना शुरू कर दिया है। राज्य सरकारों ने कुछ भी एक साथ खोलने की अनुमति नहीं दी है, पाबंदियों में एक-एक कर छूट दी जा रही है। इस बीच कुछ राज्यों में कल यानी सोमवार (7 जून) से सख्त नियमों में थोड़ी और छूट मिलने जा रही है। आपको बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में कम हुआ है जबकि दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन से राज्य सोमवार से प्रतिबंधों में और भी ढील दे रहे हैं और किन राज्यों ने लॉकडाउन के तहत कड़े नियमों को जारी रखने का फैसला किया है। 

नई दिल्ली- मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में 31 मई से अनलॉक प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। साथ ही दिल्ली में सोमवार (7 जून) को सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन समाप्त हो रहा था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, इस दौरान कड़े प्रतिबंधों में कई छूट दी जाएगी। सरकारी और निजी कार्यालयों को 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ फिर से खोलने की अनुमति होगी। दिल्ली मेट्रो 50 प्रतिशत क्षमता पर काम करेगी और बाजार और मॉल को 7 जून से ऑड-ईवन के आधार पर सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक खोलने की अनुमति होगी। 

महाराष्ट्र- मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य में लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों को 15 जून तक बढ़ा दिया है। हालांकि सात जून से लॉकडाउन के नियमों में कुछ ढील दी जाएगी। राज्य में साप्ताहिक कोविड सकारात्मकता दर और ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता के आधार पर प्रतिबंधों को कम करने के लिए पांच-स्तरीय योजना लागू किया गया है। पांच प्रतिशत से कम की सकारात्मकता दर और 25 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन बेड की उपलब्धता वाले शहर और जिले पूरी तरह से खुलेंगे। अन्य शहरों और जिलों में अलग-अलग मानकों के प्रतिबंध जारी रहेंगे। जिन जगहों पर पॉजिटिविटी रेट 20 फीसदी से ज्यादा है और ऑक्सीजन बेड की क्षमता 75 फीसदी से ज्यादा है, वहां सिर्फ जरूरी दुकानें ही शाम 4 बजे तक खुली रहेंगी और ऑफिस में 15 फीसद कर्मचारी ही काम करेंगे।  
उत्तर प्रदेश- यूपी में अब सिर्फ चार जिलों में ही कोरोना कर्फ्यू लागू रहेगा। बाकी प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना संक्रमितों की संख्या 600 से कम हो गई है।अब सिर्फ लखनऊ, मेरठ, सहारनपुर और गोरखपुर में ही कोरोना कर्फ्यू लागू रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश के 71 जिले कोरोना कर्फ्यू मुक्त हो गए।

पंजाब में शनिवार (5 जून) को कोरोना के 1,907 नए मामले दर्ज किए गए, जिससे राज्य में कुल कोरोना के मामले 5,77,997 के आंकड़े तक पहुंच गए। वहीं, यहां पिछले 24 घंटे में इस घातक बीमारी से 79 लोगों की मौत भी हुई। इससे अब तक यहां कुल मरने वालों की संख्या 15,009 तक पहुंच गई। ऐसी स्थिति को देखते हुए राज्य में सरकार ने 10 जून तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया है। 

तमिलनाडु- मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने सोमवार से प्रतिबंधों में कुछ ढील के साथ 14 जून तक लॉकडाउन को एक सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की। राज्य ने 11 हॉटस्पॉट जिलों की पहचान की है, जहां उच्च संक्रमण दर होने के कारण प्रतिबंध जारी रहेगा। ये जिले कोयंबटूर, नीलगिरी, तिरुपुर, इरोड, सलेम, करूर, नमक्कल, तंजौर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम और मयिलादुथुराई हैं।
कर्नाटक- राज्य में 14 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कर्नाटक में शुक्रवार को 13,800 नए कोविड मामले और 365 मौतें दर्ज की गईं। 2,686 मामलों और 206 मौतों के साथ राजधानी बंगलुरू कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला रहा।  

केरल- एलडीएफ सरकार ने कुछ रियायतों के साथ लॉकडाउन को नौ जून तक के लिए बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार (5 जून) को राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को 15 जुलाई तक टीका लगाया जाए। 
मध्यप्रदेश- राज्य में कोरोना कर्फ्यू की पाबंदियों में ढील देते हुए 15 जून तक कर्फ्यू को बढ़ा दिया गया है। जिलों के लिए अलग से अनलॉक दिशा-निर्देशों की घोषणा की गई है।
पंजाब- पंजाब में शनिवार (5 जून) को कोरोना के 1,907 नए मामले दर्ज किए गए। इससे कुल कोरोना मामलों का आंकड़ा 5,77,997 पर पहुंच गया। साथ ही यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना के कारण 79 लोगों की मौत दर्ज की गई। इससे राज्य में कुल कोविड से हुई मौतों का आंकड़ा 15,009 की संख्या को पार कर गया। ऐसी स्थिति को देखते हुए पंजाब में 10 जून तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया है। इस दौरान प्रदेश में सख्त नियम लागू होंगे। 

जानें गुजरात, बिहार, झारखंड, आदि राज्यों का हाल

गुजरात- राज्य के 36 शहरों में रात का कर्फ्यू 4 जून से एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। 
बिहार- बिहार में 5 मई से लागू किए गए लॉकडाउन को 8 जून तक बढ़ा दिया गया है।
झारखंड- झारखंड में लॉकडाउन को 10 जून तक बढ़ा दिया है।
ओडिशा- ओडिशा में 17 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा।
राजस्थान- अशोक गहलोत सरकार ने 2 जून से कुछ प्रतिबंधों में ढील देकर अनलॉक प्रक्रिया शुरू की।
तेलंगाना- तेलंगाना ने लॉकडाउन को 9 जून तक बढ़ा दिया है। 
आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश ने कर्फ्यू 10 जून तक बढ़ा दिया है।
हिमाचल प्रदेश और गोवा- दोनों राज्यों ने 14 जून तक कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया। गोवा में आवश्यक वस्तुओं को बेचने वाली दुकानों को हर दिन सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच संचालित करने की अनुमति है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में दुकानों, रेस्तरां और भोजनालयों को खोलने से संबंधित प्रतिबंधों में ढील दी गई है।
हरियाणा और सिक्किम- दोनों राज्य 7 जून तक लॉकडाउन प्रतिबंध लागू रखेंगे। हरियाणा ने कुछ प्रतिबंधों में ढील देने की घोषणा की है।
जम्मू और कश्मीर-प्रशासन ने पाबंदियों में ढील दी है, लेकिन रात का कर्फ्यू और वीकेंड लॉकडाउन रहेगा। राज्य में पिछले 24 घंटें में कोरोना से 25 मौतें और 1,448 नए मामले दर्ज किए हैं।

इन राज्यों में भी बढ़ा लॉकडाउन

असम- भाजपा शासित राज्य ने पाबंदियों को 15 जून तक बढ़ा दिया है। हालांकि 4 जून को उसने कर्फ्यू में ढील में एक घंटे की बढ़ोतरी कर दी। 
मेघालय और त्रिपुरा- कोरोना से सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी खासी हिल्स जिले में सात जून तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया गया है। त्रिपुरा सरकार ने राज्य में अगरतला नगर निगम क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में कोरोना कर्फ्यू को 10 जून तक बढ़ा दिया है। 
मिजोरम- राज्य में आइजोल और अन्य जिला मुख्यालयों में लॉकडाउन को 6 जून तक बढ़ा दिया गया है। 
मणिपुर और नागालैंड- मणिपुर सरकार ने इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, उखरूल, थौबल, काकचिंग और चुराचंदपुर के सात जिलों में 11 जून तक कर्फ्यू लगा दिया है। नागालैंड ने लॉकडाउन को 11 जून तक बढ़ा दिया है। 
अरुणाचल प्रदेश- राज्य ने अंजॉ, दिबांग घाटी, निचली सुबनसिरी, लोहित और तवांग जिलों और राजधानी परिसर क्षेत्र में 7 जून तक पूर्ण लॉकडाउन रहेगा।
उत्तराखंड- राज्य ने 8 जून तक के लिए कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया है।
छत्तीसगढ़- सरकार ने 31 मई को लॉकडाउन को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है।
पुडुचेरी- पुडुचेरी में 7 जून तक लॉकडाउन रहेगा।
लक्षद्वीप- लक्षद्वीप प्रशासन ने लॉकडाउन को 10 जून तक बढ़ा दिया है।

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राजनीति: शरद पवार के मन में कौन सी खिचड़ी पक रही है, क्या पीके के साथ मिल कर हो रही महागठबंधन बनाने की तैयारी?

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सार
शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मायावती, अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है…

शरद पवार और प्रशांत किशोर की मुलाकात
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।
क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।
होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

विस्तार

एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।

क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।

ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।
संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।

होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।

क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

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महाराष्ट्र में कोरोना : 24 घंटे में 6270 नए मामले, 21 लोगों में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, 94 की मौत

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एएनआई, मुुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:59 PM IST

सार
महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है।  

कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : PTI

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महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

विस्तार

महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।

बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

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कोलकाता: ममता का गंभीर आरोप, कहा- यूपी से बहकर बंगाल में आ रहीं लाशें, राज्य में फैल सकता है कोरोना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 21 Jun 2021 09:44 PM IST

सार
ममता ने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
– फोटो : ANI

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।ममता को हाईकोर्ट से झटकावहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। 

बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।
ममता को हाईकोर्ट से झटका

वहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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