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हंगामा क्यों है बरपा: क्या वाकई वामपंथी विचार की होती हैं टेक कंपनियां, ट्विटर के सीईओ से सुनिए सच

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टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रदीप पाण्डेय
Updated Sat, 05 Jun 2021 06:01 PM IST

सार
क डॉर्सी ने यह इंटरव्यू उस वक्त दिया था जब टेक कंपनियों पर सार्वजनिक विचारों को प्रभावित करने का विवाद चल रहा था। उस दौरान एपल से लेकर स्पॉटिफाई तक ने दक्षिणपंथी टॉक शो होस्ट और सिद्धांतकार एलेक्स जोन्स के खिलाफ उनकी अभद्र भाषा को लेकर एक्शन लिए थे।

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5 जून 2021 को पूरे दिन भारत में भारत सरकार बनाम ट्विटर की लड़ाई चली है। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू समेत कई आरएसएस नेताओं के निजी हैंडल को अनवेरिफाइड करके ब्लू टिक को हटा दिया था। विरोध और बवाल के बाद ट्विटर ने वेंकैंया नायडू और मोहन भागवत सहित कई अन्य नेताओं के ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक वापस कर दिया। मोदी सरकार और ट्विटर की लड़ाई पिछले साल से ही चल रही है। इस साल फरवरी में एक विवाद के बाद ट्विटर इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर (इंडिया एवं साउथ एशिया) महिमा कौल ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। सोशल मीडिया पर कई लोग ट्विटर को मोदी विरोधी बताते हैं। मोदी सरकार से पहले ट्विटर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप से भी उलझ चुका है और मोदी-ट्रंप की दोस्ती जगजाहिर है। सीईओ ने कहा- मैं लेफ्ट विचारधारा का व्यक्ति हूंपिछले साल डोनाल्ड ट्रंप से विवाद के ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि जो लोग सोशल मीडिया दिग्गज के लिए काम करते हैं, उनके अपने पूर्वाग्रह हैं और उनका झुकाव वामपंथ की ओर अधिक है, हालांकि उन्होंने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी विचारधारा निजी और उससे उनकी कंपनी की पॉलिसी प्रभावित नहीं होती है।उस इंटरव्यू में डॉर्सी से एक और सवाल पूछा गया कि क्या राजनीति को लेकर उनकी कोई विचारधारा है जिससे प्रभावित होकर ट्विटर फैसले लेता है? इस सवाल के जवाब में जैक डॉर्सी ने कहा कि नहीं, ट्विटर राजनीतिक चश्मे से फैसले नहीं लेता है, बल्कि कंटेंट के लिहाज से फैसले लिए जाते हैं और उसी के आधार पर किसी ट्वीट पर कार्रवाई होती है। 
उन्होंने आगे कहा, ‘हमें यह लगातार बताने की जरूरत है कि हम अपना पूर्वाग्रह किसी पर थोप नहीं रहे हैं, जिसे मैं पूरी तरह से वामपंथी झुकाव मानता हूं। मुझे लगता है कि हमारे अपने पूर्वाग्रह को स्पष्ट करना और इसे लोगों के साथ साझा करना महत्वपूर्ण है ताकि लोग हमें समझें, लेकिन साथ ही हमें अपने काम करने के तरीके और अपनी नीतियों से अपने पूर्वाग्रह को अलग रखने की भी जरूरत है।’जैक डॉर्सी ने यह इंटरव्यू उस वक्त दिया था जब टेक कंपनियों पर सार्वजनिक विचारों को प्रभावित करने का विवाद चल रहा था। उस दौरान एपल से लेकर स्पॉटिफाई तक ने दक्षिणपंथी टॉक शो होस्ट और सिद्धांतकार एलेक्स जोन्स के खिलाफ उनकी अभद्र भाषा को लेकर एक्शन लिए थे। Spotify, Facebook और YouTube ने जोन्स को ब्लॉक कर दिया था, जबकि एपल ने जोन्स की वेबसाइट Infowars के अधिकतर पॉडकास्ट को iTunes और पॉडकास्ट एप से डिलीट कर दिया था। ट्विटर ने भी जोन्स के अकाउंट को सस्पेंड कर दिया था।

विस्तार

5 जून 2021 को पूरे दिन भारत में भारत सरकार बनाम ट्विटर की लड़ाई चली है। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू समेत कई आरएसएस नेताओं के निजी हैंडल को अनवेरिफाइड करके ब्लू टिक को हटा दिया था। विरोध और बवाल के बाद ट्विटर ने वेंकैंया नायडू और मोहन भागवत सहित कई अन्य नेताओं के ट्विटर अकाउंट पर ब्लू टिक वापस कर दिया। मोदी सरकार और ट्विटर की लड़ाई पिछले साल से ही चल रही है। इस साल फरवरी में एक विवाद के बाद ट्विटर इंडिया की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर (इंडिया एवं साउथ एशिया) महिमा कौल ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। सोशल मीडिया पर कई लोग ट्विटर को मोदी विरोधी बताते हैं। मोदी सरकार से पहले ट्विटर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप से भी उलझ चुका है और मोदी-ट्रंप की दोस्ती जगजाहिर है। 

सीईओ ने कहा- मैं लेफ्ट विचारधारा का व्यक्ति हूं
पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप से विवाद के ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि जो लोग सोशल मीडिया दिग्गज के लिए काम करते हैं, उनके अपने पूर्वाग्रह हैं और उनका झुकाव वामपंथ की ओर अधिक है, हालांकि उन्होंने सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी विचारधारा निजी और उससे उनकी कंपनी की पॉलिसी प्रभावित नहीं होती है।

उस इंटरव्यू में डॉर्सी से एक और सवाल पूछा गया कि क्या राजनीति को लेकर उनकी कोई विचारधारा है जिससे प्रभावित होकर ट्विटर फैसले लेता है? इस सवाल के जवाब में जैक डॉर्सी ने कहा कि नहीं, ट्विटर राजनीतिक चश्मे से फैसले नहीं लेता है, बल्कि कंटेंट के लिहाज से फैसले लिए जाते हैं और उसी के आधार पर किसी ट्वीट पर कार्रवाई होती है।
 

“We do not look at content with regards to political viewpoint or ideology,” @Jack told me. But he knows some people do not believe him. “I think we need to constantly show that we are not adding our own bias, which I fully admit is left, is more left-leaning,” he says… pic.twitter.com/1i8jJunhfz

— Brian Stelter (@brianstelter) August 18, 2018

उन्होंने आगे कहा, ‘हमें यह लगातार बताने की जरूरत है कि हम अपना पूर्वाग्रह किसी पर थोप नहीं रहे हैं, जिसे मैं पूरी तरह से वामपंथी झुकाव मानता हूं। मुझे लगता है कि हमारे अपने पूर्वाग्रह को स्पष्ट करना और इसे लोगों के साथ साझा करना महत्वपूर्ण है ताकि लोग हमें समझें, लेकिन साथ ही हमें अपने काम करने के तरीके और अपनी नीतियों से अपने पूर्वाग्रह को अलग रखने की भी जरूरत है।’
जैक डॉर्सी ने यह इंटरव्यू उस वक्त दिया था जब टेक कंपनियों पर सार्वजनिक विचारों को प्रभावित करने का विवाद चल रहा था। उस दौरान एपल से लेकर स्पॉटिफाई तक ने दक्षिणपंथी टॉक शो होस्ट और सिद्धांतकार एलेक्स जोन्स के खिलाफ उनकी अभद्र भाषा को लेकर एक्शन लिए थे। Spotify, Facebook और YouTube ने जोन्स को ब्लॉक कर दिया था, जबकि एपल ने जोन्स की वेबसाइट Infowars के अधिकतर पॉडकास्ट को iTunes और पॉडकास्ट एप से डिलीट कर दिया था। ट्विटर ने भी जोन्स के अकाउंट को सस्पेंड कर दिया था।

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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