Connect with us

India

CBSE-ISC 12th Exams: सीबीएससी-आईएससी बोर्ड ने रद्द की 12वीं की परीक्षा, इन राज्यों में भी लिया जा सकता है ऐसा फैसला

Published

on

सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं रद्द
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

कोरोना महामारी की दूसरी लहर का असर 12वीं के छात्रों पर भी पड़ा। कोरोना संक्रमण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सीबीएसई और आईएससी 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण की गंभीर स्थिति को देखते हुए बोर्ड परीक्षाओं को लेकर मंगलवार को हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द कर दिया। पीएम मोदी ने मंत्रियों के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया।पीएम मोदी ने कहा कि सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा पर फैसला छात्रों के हित में लिया गया है। सीबीएसई के बाद आईएससी बोर्ड ने भी 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है। इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) बोर्ड परीक्षा (12वीं कक्षा) रद्द करने का निर्णय प्रधानमंत्री के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद किया गया है। भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई) के अध्यक्ष डॉ जी इम्मानुएल ने बताया कि परिणामों को तैयार करने के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। CBSE News: सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द, पीएम मोदी ने कहा- छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकताप्रधानमंत्री की उच्च स्तरीय बैठक में बड़ा फैसला करते हुए सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा रद्द करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा भी रद्द कर दी गई है। बैठक में सहमति बनी है कि यदि पिछले साल की तरह कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा उन्हें परीक्षा में बैठने का विकल्प प्रदान किया जाएगा। यहां पढ़ें पूरी खबर…

ISC 12th Board Exam 2021 cancelled: सीबीएसई के बाद आईएससी बोर्ड ने भी रद्द की 12वीं की परीक्षा
ISC 12th Board Exam 2021 cancelled: सीबीएसई के बाद आईएससी बोर्ड ने भी 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है। इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) बोर्ड परीक्षा (कक्षा 12) रद्द करने का निर्णय प्रधानमंत्री के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद किया गया है। भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई)  के अध्यक्ष डॉ जी इम्मानुएल ने बताया कि परिणामों को तैयार करने के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
यहां पढ़ें पूरी खबर…Board Exam 2021: यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान समेत इन राज्यों में भी रद्द हो सकती हैं 12वीं की परीक्षाएं
अब इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर पुनर्विचार किया जाएगा। संभव है इन राज्यों के साथ ही कई अन्य राज्यों में भी प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाए।
यहां पढ़ें पूरी खबर…सीबीएसई के बाद अब उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं भी होगी रद्द, शिक्षा मंत्री ने दिए संकेत
सीबीएसई की 12 वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। उत्तराखंड में भी 12 वीं की परीक्षा के लिए तैयारी पूरी कर ली गई थी। देहरादून रीजन में 333 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक रणवीर सिंह के मुताबिक 1100 स्कूलों के 87000 बच्चे बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत थे, लेकिन हालातों को देखते हुए परीक्षा रद्द करने का फैसला ठीक है।
यहां पढ़ें पूरी खबर…हरियाणा सरकार का फैसला: 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं की रद्द, छात्रों के पास होगा परीक्षा देने का विकल्पसीबीएसई की तर्ज पर हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। हालांकि, कोविड की स्थिति सामान्य होने पर विद्यार्थियों के पास परीक्षा देने का विकल्प मौजूद रहेगा। सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा रद्द होने के बाद हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने मंगलवार देर शाम यह जानकारी दी। यहां पढ़ें पूरी खबर…सीबीएसई 12वीं बोर्ड: संतुष्ट न होने पर दे सकते हैं परीक्षा, ऐसे तैयार होगा अंतिम परिणाम, पढ़िए पूरी खबरसीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद अब अभिभावकों और विद्यार्थियों को परिणाम का इंतजार है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीबीएसई के अधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि अभी मूल्यांकन मानदंड तैयार करने में समय लग सकता है। यहां पढ़ें पूरी खबर… 
12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द: यह निर्णय अकादमिक से अधिक राजनीतिक, विशेषज्ञों की आई मिली-जुली प्रतिक्रिया
सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय लेने के बाद से ही प्रतिक्रियाओं का दौर थम नहीं रहा है। कुछ शिक्षकों द्वारा फैसले का स्वागत किया गया है। वहीं कुछ ने इसका विरोध भी किया है। भोपाल के एक निजी विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश शर्मा ने अमर उजाला से खास बातचीत की है। इसमें उन्होंने कहा है कि मेरी राय में बारहवीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने का निर्णय अकादमिक से अधिक राजनीतिक है। 
यहां पढ़ें पूरी खबर…

विद्यार्थियों में खुशी की लहर, फैसले के बाद से सोशल मीडिया पर उत्सव शुरू
बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले की घोषणा के बाद से ही सोशल मीडिया पर उत्सव शुरू हो गया है। 
यहां पढ़ें पूरी खबर…

विस्तार

कोरोना महामारी की दूसरी लहर का असर 12वीं के छात्रों पर भी पड़ा। कोरोना संक्रमण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सीबीएसई और आईएससी 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण की गंभीर स्थिति को देखते हुए बोर्ड परीक्षाओं को लेकर मंगलवार को हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द कर दिया। पीएम मोदी ने मंत्रियों के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया।

पीएम मोदी ने कहा कि सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा पर फैसला छात्रों के हित में लिया गया है। सीबीएसई के बाद आईएससी बोर्ड ने भी 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी है। इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) बोर्ड परीक्षा (12वीं कक्षा) रद्द करने का निर्णय प्रधानमंत्री के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद किया गया है। भारतीय स्कूल प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई) के अध्यक्ष डॉ जी इम्मानुएल ने बताया कि परिणामों को तैयार करने के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है। 

CBSE News: सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द, पीएम मोदी ने कहा- छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता
प्रधानमंत्री की उच्च स्तरीय बैठक में बड़ा फैसला करते हुए सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा रद्द करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षा भी रद्द कर दी गई है। बैठक में सहमति बनी है कि यदि पिछले साल की तरह कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा उन्हें परीक्षा में बैठने का विकल्प प्रदान किया जाएगा। 
यहां पढ़ें पूरी खबर…

अब इसके बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को लेकर पुनर्विचार किया जाएगा। संभव है इन राज्यों के साथ ही कई अन्य राज्यों में भी प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाए।

यहां पढ़ें पूरी खबर…
सीबीएसई के बाद अब उत्तराखंड बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं भी होगी रद्द, शिक्षा मंत्री ने दिए संकेत

सीबीएसई की 12 वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। उत्तराखंड में भी 12 वीं की परीक्षा के लिए तैयारी पूरी कर ली गई थी। देहरादून रीजन में 333 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक रणवीर सिंह के मुताबिक 1100 स्कूलों के 87000 बच्चे बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकृत थे, लेकिन हालातों को देखते हुए परीक्षा रद्द करने का फैसला ठीक है।

यहां पढ़ें पूरी खबर…
हरियाणा सरकार का फैसला: 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं की रद्द, छात्रों के पास होगा परीक्षा देने का विकल्प
सीबीएसई की तर्ज पर हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गई हैं। हालांकि, कोविड की स्थिति सामान्य होने पर विद्यार्थियों के पास परीक्षा देने का विकल्प मौजूद रहेगा। सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा रद्द होने के बाद हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने मंगलवार देर शाम यह जानकारी दी। 
यहां पढ़ें पूरी खबर…
सीबीएसई 12वीं बोर्ड: संतुष्ट न होने पर दे सकते हैं परीक्षा, ऐसे तैयार होगा अंतिम परिणाम, पढ़िए पूरी खबर

सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद अब अभिभावकों और विद्यार्थियों को परिणाम का इंतजार है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सीबीएसई के अधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि अभी मूल्यांकन मानदंड तैयार करने में समय लग सकता है। 
यहां पढ़ें पूरी खबर…
 

12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द: यह निर्णय अकादमिक से अधिक राजनीतिक, विशेषज्ञों की आई मिली-जुली प्रतिक्रिया

सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय लेने के बाद से ही प्रतिक्रियाओं का दौर थम नहीं रहा है। कुछ शिक्षकों द्वारा फैसले का स्वागत किया गया है। वहीं कुछ ने इसका विरोध भी किया है। भोपाल के एक निजी विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेश शर्मा ने अमर उजाला से खास बातचीत की है। इसमें उन्होंने कहा है कि मेरी राय में बारहवीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने का निर्णय अकादमिक से अधिक राजनीतिक है। 

यहां पढ़ें पूरी खबर…

विद्यार्थियों में खुशी की लहर, फैसले के बाद से सोशल मीडिया पर उत्सव शुरू

बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले की घोषणा के बाद से ही सोशल मीडिया पर उत्सव शुरू हो गया है। 

यहां पढ़ें पूरी खबर…

Continue Reading

India

केंद्र ने कहा: प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कोविड-19 बताने में किसी भी चूक पर दंडात्मक कार्रवाई होगी

Published

on

By

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 20 Jun 2021 05:13 PM IST

सार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कोविड-19 को बताने में किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी, चाहे वह डॉक्टर ही क्यों न हो।

सर्वोच्च न्यायालय
– फोटो : पीटीआई

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कोविड-19 को बताने में किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी, चाहे वह डॉक्टर ही क्यों न हो।सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि यह अनिवार्य है कि कोविड-19 से होने वाली किसी भी मौत को कोविड मौत के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिए। ऐसा न करने पर प्रमाणित करने वाले डॉक्टर सहित सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कोविड-19 मौतों को रिकॉर्ड करने के लिए दिशा-निर्देशों का कोई भी उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा-188 के तहत अपराध माना जाएगा।केंद्र ने कहा है कि कोविड-19 डायग्नोस होने पर होने वाली मौतों को कोविड मौतों के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिए। इस नियम का एकमात्र अपवाद यह है कि जब मृत्यु का एक स्पष्ट वैकल्पिक कारण हो, मसलन आकस्मिक आघात, विषाक्तता आदि।मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि कोविड-19 वायरस से मरने वालों के मृत्यु प्रमाणपत्र में अक्सर तथ्यों को छुपाने की कोशिश की जाती है। कोर्ट ने कहा था ऐसी खबरें मिल रही हैं कि अस्पतालों में कोविड से मरने वाले व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाणपत्र में फेफड़े या हृदय की समस्या आदि कारण बताए जाते हैं।

विस्तार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मृत्यु प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कोविड-19 को बताने में किसी भी चूक के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी, चाहे वह डॉक्टर ही क्यों न हो।

सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में केंद्र सरकार ने कहा है कि यह अनिवार्य है कि कोविड-19 से होने वाली किसी भी मौत को कोविड मौत के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिए। ऐसा न करने पर प्रमाणित करने वाले डॉक्टर सहित सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। कोविड-19 मौतों को रिकॉर्ड करने के लिए दिशा-निर्देशों का कोई भी उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा-188 के तहत अपराध माना जाएगा।

केंद्र ने कहा है कि कोविड-19 डायग्नोस होने पर होने वाली मौतों को कोविड मौतों के रूप में प्रमाणित किया जाना चाहिए। इस नियम का एकमात्र अपवाद यह है कि जब मृत्यु का एक स्पष्ट वैकल्पिक कारण हो, मसलन आकस्मिक आघात, विषाक्तता आदि।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि कोविड-19 वायरस से मरने वालों के मृत्यु प्रमाणपत्र में अक्सर तथ्यों को छुपाने की कोशिश की जाती है। कोर्ट ने कहा था ऐसी खबरें मिल रही हैं कि अस्पतालों में कोविड से मरने वाले व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाणपत्र में फेफड़े या हृदय की समस्या आदि कारण बताए जाते हैं।

Continue Reading

India

दाढ़ी काटने का मामला: सपा नेता उम्मेद पहलवान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया जेल

Published

on

By

गाजियाबाद के लोनी में बुजुर्ग तांत्रिक को पीटने के बाद उसकी दाढ़ी काटने के का वीडियो सोशल मीडिया पर डालने वाले उम्मेद पहलवान को कोर्ट ने रविवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा दिया है। पुलिस सोमवार को रिमांड के लिए अर्जी देगी। बता दें कि उम्मेद को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को लोक नारायण जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) के पास से गिरफ्तार किया था। उम्मेद पहलवान ने रची साजिश, अब्दुल समद ने सच को छिपायादाढ़ी काटे जाने की घटना की जांच में पूरा सच सामने आ जाने का दावा पुलिस ने किया है। पुलिस का कहना है कि असली घटना समद के साथ मारपीट और दाढ़ी काटे जाने की हुई थी। इसी को सांप्रदायिक रंग देने की साजिश उम्मेद पहलवान ने रची। समद ने सच्चाई को छिपाए रखा। पुलिस ने केस डायरी में सभी आरोपियों की भूमिका साफ कर दी है। पुलिस ने तीन मामले किए हैं दर्जदाढ़ी काटने की घटना 5 जून को हुई और उसका केस 7 जून को दर्ज हुआ। नौ दिन बाद 14 जून को घटना की वीडियो वायरल हुई तो बखेड़ा हो गया। पुलिस ने कुल तीन मामले दर्ज किए हैं। ट्विटर पर दर्ज केस के अलावा एक मामला दाढ़ी काटने का तो दूसरा मामला भड़काऊ वीडियो वायरल करने का है। सीओ लोनी ने अब्दुल समद और सभी आरोपियों की भूमिका के बारे में जानकारी दी है…अब्दुल समद- दाढ़ी काटने के आरोपी प्रवेश गुर्जर को पहले से जानता था, फिर भी एफआईआर में उसे नामजद नहीं कराया। इस सच्चाई को भी छिपा लिया कि उसने प्रवेश को ताबीज दिया था। (घर से चला गया है)उम्मेद पहलवान – ताबीज का असर न होने की घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। फेसबुक लाइव पर समद का वीडियो दिखाते हुए भड़काऊ बातें कहीं। (गिरफ्तार है)प्रवेश गुर्जर- समद द्वारा दिए ताबीज का उल्टा असर होने के शक पर उसे घर में बंधक बनाया। दर्जन भर साथियों को बुलाकर सूफी समद के साथ मारपीट की और उनकी दाढ़ी काटी। (रंगदारी मामले में जेल में है)इंतजार- प्रवेश को तांत्रिक  समद से मिलवाया था। दो बार उसे प्रवेश के घर लेकर गया। घटना वाले दिन अपने साले सद्दाम के साथ बाइक पर तांत्रिक को प्रवेश के पास भेजा। घटना के दौरान मौके पर मौजूद था। (गिरफ्तार हो चुका है)सद्दाम – बहनोई इंतजार के कहने पर सूफी को बाइक से प्रवेश के घर ले गया। समद के साथ मारपीट व दाढ़ी काटने की घटना के दौरान मौके पर मौजूद था। (गिरफ्तार हो चुका है)आदिल- प्रवेश का दोस्त है। घटना वाले दिन प्रवेश का फोन आने पर ही वह अपने दोस्तों को लेकर प्रवेश के पास पहुंचा। सूफी समद के साथ हुई घटना में शामिल रहा। (गिरफ्तार हो चुका है)अभय उर्फ कल्लू- आदिल के साथ प्रवेश के पास पहुंचा और सूफी समद के सात हुई घटना में शामिल रहा। (गिरफ्तार हो चुका है)हिमांशु, अनस, बाबू, शावेज- प्रवेश और आदिल के दोस्त हैं। सूफी समद के साथ हुई घटना में शामिल रहे। (गिरफ्तार हो चुके हैं)गुलशन उर्फ पोली- प्रवेश और आदिल का दोस्त हैं। सूफी समद के साथ हुई घटना में शामिल रहे। (गिरफ्तार हुआ)आवेश चौधरी- प्रवेश और आदिल का दोस्त है। सूफी समद के साथ हुई घटना में शामिल रहा। (अभी फरार चल रहा है) 

Continue Reading

India

वो पांच राज्य: जहां आज भी सबसे ज्यादा कोरोना के एक्टिव मरीज, देखें सूची

Published

on

By

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 20 Jun 2021 06:22 PM IST

सार
महाराष्ट्र में अभी भी एक लाख पैंतीस हजार से ज्यादा मरीज अस्पतालों और घरों में इलाज करा रहे हैं। जबकि सवा लाख से ज्यादा कर्नाटक में मरीज हैं। केरल में भी एक लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज अस्पताल और घरों में चल रहा है।

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

एक ओर देश के कई राज्यों में कोरोना के मामले ना सिर्फ कम होते जा रहे हैं बल्कि उन राज्यों में जनजीवन भी सामान्य होता जा रहा है। वही देश के कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर कोरोना के लगातार मरीजों का मिलना जारी है। यही नहीं इन राज्यों में कोरोना से संक्रमित एक्टिव मरीजों की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामलेमहाराष्ट्र में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे जा रहे राज्य के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में इस वक्त 1,35,708 कोरोना के सक्रिय मामले हैं। हालांकि प्रदेश में यह संख्या बीते महीने की तुलना में कम हुई है। परंतु इसके बावजूद अभी भी रोजाना औसतन 10 हजार से ज्यादा मरीज कोविड की चपेट में आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र को जारी एडवाइजरी में स्पष्ट कहा है कि कोविड से बचाव के अनुकूल जो प्रोटोकॉल है, उसका पालन किया जाना चाहिए। इससे मामलों कमी आएगी और जनजीवन सामान्य हो सकेगा।महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा सक्रिय मामले कर्नाटक मेंमहाराष्ट्र के बाद पूरे देश में कर्नाटक एक ऐसा राज्य है जहां पर सबसे ज्यादा कोरोना के सक्रिय मामले हैं। रविवार को कर्नाटक की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए आंकड़ों के मुताबिक दोपहर 12 बजे तक राज्य में 1,30,894 सक्रिय मामले थे। हालांकि इतने ज्यादा सक्रिय मामले होने के बाद भी कर्नाटक के पांच जिलों को लॉकडाउन की पाबंदी से छूट दे दी गई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिलों की मॉनिटरिंग टीम लगातार घटते मामलों को ना सिर्फ दर्ज कर रही है, बल्कि जनजीवन सामान्य रहे इसके लिए भी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रही है।केरल में भी एक लाख से ज्यादा हैं मरीजकहने को तो पूरे देश में केरल में महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद सबसे ज्यादा कोरोना के सक्रिय मरीज हैं। लेकिन उससे भी ज्यादा भयावह स्थिति यह है कि राज्य में कोरोना संक्रमण के मरीजों के मिलने का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक केरल में रविवार को 1,07,300 सक्रिय मरीज थे। वहीं 12 हजार से ज्यादा नए मरीज भी मिले। यह पूरे देश में किसी भी राज्य में बीते 24 घंटे में एक दिन में मिलने वाले मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने केरल में ज्यादा से ज्यादा मरीजों की ट्रैकिंग और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की सलाह दी है। हालांकि केरल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक राज्य में ज्यादा से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं, यही वजह है कि मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। क्योंकि इस राज्य में अभी चुनाव हुए हैं इस वजह से सक्रिय मामलों की संख्या में इजाफा हो रहा है।तमिलनाडु चौथे पर और आंध्रप्रदेश पांचवें नंबर परकोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या में तमिलनाडु चौथे नंबर पर है। जबकि आंध्र प्रदेश पांचवें नंबर पर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु में रविवार को 78,780 जबकि आंध्र प्रदेश में 65,244 मरीज अस्पतालों या घरों में अपना इलाज करा रहे हैं। तमिलनाडु में अभी भी रोजाना आठ हजार के करीब मामले सामने आ रहे हैं। जबकि आंध्र प्रदेश में यह संख्या 5 हजार के करीब है। इन दोनों राज्यों में कुछ जिलों में लॉकडाउन में ढील दी गई है। जबकि आंध्र प्रदेश से अलग होकर नए बने तेलंगाना में सोमवार से लॉकडाउन में पूरी तरह से ढील दे दी गई है।

विस्तार

एक ओर देश के कई राज्यों में कोरोना के मामले ना सिर्फ कम होते जा रहे हैं बल्कि उन राज्यों में जनजीवन भी सामान्य होता जा रहा है। वही देश के कुछ राज्य ऐसे हैं जहां पर कोरोना के लगातार मरीजों का मिलना जारी है। यही नहीं इन राज्यों में कोरोना से संक्रमित एक्टिव मरीजों की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है। 

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले
महाराष्ट्र में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या कम नहीं हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे जा रहे राज्य के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में इस वक्त 1,35,708 कोरोना के सक्रिय मामले हैं। हालांकि प्रदेश में यह संख्या बीते महीने की तुलना में कम हुई है। परंतु इसके बावजूद अभी भी रोजाना औसतन 10 हजार से ज्यादा मरीज कोविड की चपेट में आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र को जारी एडवाइजरी में स्पष्ट कहा है कि कोविड से बचाव के अनुकूल जो प्रोटोकॉल है, उसका पालन किया जाना चाहिए। इससे मामलों कमी आएगी और जनजीवन सामान्य हो सकेगा।

महाराष्ट्र के बाद सबसे ज्यादा सक्रिय मामले कर्नाटक में
महाराष्ट्र के बाद पूरे देश में कर्नाटक एक ऐसा राज्य है जहां पर सबसे ज्यादा कोरोना के सक्रिय मामले हैं। रविवार को कर्नाटक की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए आंकड़ों के मुताबिक दोपहर 12 बजे तक राज्य में 1,30,894 सक्रिय मामले थे। हालांकि इतने ज्यादा सक्रिय मामले होने के बाद भी कर्नाटक के पांच जिलों को लॉकडाउन की पाबंदी से छूट दे दी गई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिलों की मॉनिटरिंग टीम लगातार घटते मामलों को ना सिर्फ दर्ज कर रही है, बल्कि जनजीवन सामान्य रहे इसके लिए भी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रही है।
केरल में भी एक लाख से ज्यादा हैं मरीज
कहने को तो पूरे देश में केरल में महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाद सबसे ज्यादा कोरोना के सक्रिय मरीज हैं। लेकिन उससे भी ज्यादा भयावह स्थिति यह है कि राज्य में कोरोना संक्रमण के मरीजों के मिलने का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक केरल में रविवार को 1,07,300 सक्रिय मरीज थे। वहीं 12 हजार से ज्यादा नए मरीज भी मिले। यह पूरे देश में किसी भी राज्य में बीते 24 घंटे में एक दिन में मिलने वाले मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। 
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने केरल में ज्यादा से ज्यादा मरीजों की ट्रैकिंग और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की सलाह दी है। हालांकि केरल के स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक राज्य में ज्यादा से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं, यही वजह है कि मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। क्योंकि इस राज्य में अभी चुनाव हुए हैं इस वजह से सक्रिय मामलों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

तमिलनाडु चौथे पर और आंध्रप्रदेश पांचवें नंबर पर

कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या में तमिलनाडु चौथे नंबर पर है। जबकि आंध्र प्रदेश पांचवें नंबर पर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक तमिलनाडु में रविवार को 78,780 जबकि आंध्र प्रदेश में 65,244 मरीज अस्पतालों या घरों में अपना इलाज करा रहे हैं। तमिलनाडु में अभी भी रोजाना आठ हजार के करीब मामले सामने आ रहे हैं। जबकि आंध्र प्रदेश में यह संख्या 5 हजार के करीब है। इन दोनों राज्यों में कुछ जिलों में लॉकडाउन में ढील दी गई है। जबकि आंध्र प्रदेश से अलग होकर नए बने तेलंगाना में सोमवार से लॉकडाउन में पूरी तरह से ढील दे दी गई है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2017 Zox News Theme. Theme by MVP Themes, powered by WordPress.