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शिकंजा : मेहुल चोकसी पर फैसला कल तक के लिए टला, पत्नी बोलीं- क्यों की जा रही पति से मारपीट?

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, रोसो
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 02 Jun 2021 10:31 PM IST

सार
पिछले हफ्ते मेहुल चोकसी एंटीगुआ से क्यूबा भागते वक्त डोमिनिका में पकड़ा गया। मेहुल चोकसी के पास एंटीगुआ की नागरिकता है। वहीं चोकसी को वापस लाने के लिए सीबीआई और ईडी की टीम डोमिनिका पहुंच गई है।

मेहुल चोकसी

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पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले का आरोपी और भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी मामले में डोमिनिका की अदालत में आज यानी बुधवार की सुनवाई खत्म हो गई है और फैसले को कल तक के लिए टाल दिया गया है। वहीं सुनवाई के दौरान  मेहुल ने कहा कि वह डोमिनिका में सुरक्षित नहीं है जबकि डोमिनिका की सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को भारत को सौंपा जाए।  वहीं सुनवाई शुरू होने से पहले मेहुल की पत्नी प्रीति चोकसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि मेरे पति को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हैं। वह एंटीगुआ के नागरिक हैं और उन्हें यहां के संविधान के तहत सभी अधिकार और सुरक्षा का लाभ लेने का हक है।  प्रीति ने कहा कि यहां के कानून पर पूरा भरोसा है। हमें उम्मीद है कि मेहुल जल्द से जल्द एंटीगुआ वापस आएंगे। प्रीति ने कहा कि वे डोमिनिका नहीं गए थे बल्कि अगवा किए गए थे।वहीं मेहुल के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में कई बातें फर्जी तरीके से दिखाई जा रही हैं। उन्होंने मेहुल के भाई द्वारा डोमिनिका में विपक्षी पार्टियों से बातचीत को महज अफवाह बताया। प्रीति चोकसी ने मेहुल के गर्लफ्रैंड को लेकर भी किया खुलासामेहुल की पत्नी ने कहा कि वो महिला मेरे पति को जानती थी, जब वह एंटीगुआ आती थी तो वह मेरे पति से मिलने जाती थी। लेकिन मीडिया में जिस महिला की तस्वीर दिखाई जा रही है उसे मैं नहीं जानती। प्रीति ने कहा कि ये सच है कि मेहुल किसी महिला को डिनर पर लेकर गए थे। जिसके बाद वो महिला चली गई और मेहुल को अगवा कर लिया गया।जानिए कौन है प्रीति चोकसीप्रीति चोकसी भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की पत्नी हैं। कथित तौर पर उसका फेसबुक या ट्विटर पर कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। प्रीति चोकसी बिजनेसमैन नीरव मोदी की भी करीबी रिश्तेदार हैं। उनकी एक बेटी है जिसका नाम प्रियंका चोकसी है।एंटीगुआ के प्रधानमंत्री की चिट्ठी आई सामनेएंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउने की एक चिट्ठी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि मेहुल ने नागरिकता से संबंधित जानकारी छिपाई थी। वहीं दूसरी ओर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेहुल चोकसी के बड़े भाई ने मामले को रफा दफा करने के लिए डोमिनिका के विपक्षी नेता को मोटी रकम दी।14 अक्तूबर, 2019 को लिखे पत्र में ब्राउने ने लिखा था, ”मैं एंटीगुआ और बारबुडा नागरिकता अधिनियम, कैप 22 की धारा 8 के मुताबिक एक आदेश देने का प्रस्ताव करता हूं ताकि आपको सामग्री तथ्यों को जानबूझकर छिपाने के आधार पर एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता से वंचित किया जा सके। मैं आपको एंटीगुआ और बारबुडा नागरिकता अधिनियम की धारा 10 के तहत जांच करने के आपके अधिकार और इस जांच में अपनी पसंद का कानूनी प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के अधिकार की भी सलाह देता हूं। आपको इस नोटिस के प्राप्त होने के एक महीने के भीतर जवाब देना होगा।जानें कैसे पकड़ा गया चोकसीबता दें कि भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी 23 मई की शाम को एंटीगुआ स्थित अपने घर से गायब हो गया था। उसके बाद उसके लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। हालांकि, उसके पहचान के एक शख्स ने दावा किया था कि वो क्यूबा भाग गया है। मेहुल चोकसी एंटीगुआ का नागरिक है और वो पानी के रास्ते भागने की फिराक में था, लेकिन जैसे ही वो डोमिनिका पहुंचा, उसे अधिकारियों ने पकड़ लिया।एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउने ने रविवार को डोमिनिका की कोर्ट से चोकसी को सीधे भारत भेजने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि डोमिनिका में मेहुल गर्लफ्रेंड के चक्कर में पकड़ा गया। वहीं पीएनबी घोटाले का आरोपी चोकसी के वकीलों ने डोमिनिका की कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाली थी। 28 मई को डोमिनिका की अदालत ने चोकसी की याचिका का स्वीकार करते हुए सुनवाई पूरी होने तक उसे देश में ही रखने का आदेश दिया था।

विस्तार

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले का आरोपी और भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी मामले में डोमिनिका की अदालत में आज यानी बुधवार की सुनवाई खत्म हो गई है और फैसले को कल तक के लिए टाल दिया गया है। वहीं सुनवाई के दौरान  मेहुल ने कहा कि वह डोमिनिका में सुरक्षित नहीं है जबकि डोमिनिका की सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को भारत को सौंपा जाए।  

वहीं सुनवाई शुरू होने से पहले मेहुल की पत्नी प्रीति चोकसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि मेरे पति को स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं हैं। वह एंटीगुआ के नागरिक हैं और उन्हें यहां के संविधान के तहत सभी अधिकार और सुरक्षा का लाभ लेने का हक है।  प्रीति ने कहा कि यहां के कानून पर पूरा भरोसा है। हमें उम्मीद है कि मेहुल जल्द से जल्द एंटीगुआ वापस आएंगे। प्रीति ने कहा कि वे डोमिनिका नहीं गए थे बल्कि अगवा किए गए थे।

वहीं मेहुल के वकील विजय अग्रवाल ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में कई बातें फर्जी तरीके से दिखाई जा रही हैं। उन्होंने मेहुल के भाई द्वारा डोमिनिका में विपक्षी पार्टियों से बातचीत को महज अफवाह बताया। 
प्रीति चोकसी ने मेहुल के गर्लफ्रैंड को लेकर भी किया खुलासा
मेहुल की पत्नी ने कहा कि वो महिला मेरे पति को जानती थी, जब वह एंटीगुआ आती थी तो वह मेरे पति से मिलने जाती थी। लेकिन मीडिया में जिस महिला की तस्वीर दिखाई जा रही है उसे मैं नहीं जानती। प्रीति ने कहा कि ये सच है कि मेहुल किसी महिला को डिनर पर लेकर गए थे। जिसके बाद वो महिला चली गई और मेहुल को अगवा कर लिया गया।
जानिए कौन है प्रीति चोकसी
प्रीति चोकसी भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की पत्नी हैं। कथित तौर पर उसका फेसबुक या ट्विटर पर कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। प्रीति चोकसी बिजनेसमैन नीरव मोदी की भी करीबी रिश्तेदार हैं। उनकी एक बेटी है जिसका नाम प्रियंका चोकसी है।

एंटीगुआ के प्रधानमंत्री की चिट्ठी आई सामने

एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउने की एक चिट्ठी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि मेहुल ने नागरिकता से संबंधित जानकारी छिपाई थी। वहीं दूसरी ओर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मेहुल चोकसी के बड़े भाई ने मामले को रफा दफा करने के लिए डोमिनिका के विपक्षी नेता को मोटी रकम दी।
14 अक्तूबर, 2019 को लिखे पत्र में ब्राउने ने लिखा था, ”मैं एंटीगुआ और बारबुडा नागरिकता अधिनियम, कैप 22 की धारा 8 के मुताबिक एक आदेश देने का प्रस्ताव करता हूं ताकि आपको सामग्री तथ्यों को जानबूझकर छिपाने के आधार पर एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता से वंचित किया जा सके। मैं आपको एंटीगुआ और बारबुडा नागरिकता अधिनियम की धारा 10 के तहत जांच करने के आपके अधिकार और इस जांच में अपनी पसंद का कानूनी प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के अधिकार की भी सलाह देता हूं। आपको इस नोटिस के प्राप्त होने के एक महीने के भीतर जवाब देना होगा।
जानें कैसे पकड़ा गया चोकसी
बता दें कि भगोड़ा कारोबारी मेहुल चोकसी 23 मई की शाम को एंटीगुआ स्थित अपने घर से गायब हो गया था। उसके बाद उसके लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज की गई थी। हालांकि, उसके पहचान के एक शख्स ने दावा किया था कि वो क्यूबा भाग गया है। मेहुल चोकसी एंटीगुआ का नागरिक है और वो पानी के रास्ते भागने की फिराक में था, लेकिन जैसे ही वो डोमिनिका पहुंचा, उसे अधिकारियों ने पकड़ लिया।
एंटीगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउने ने रविवार को डोमिनिका की कोर्ट से चोकसी को सीधे भारत भेजने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि डोमिनिका में मेहुल गर्लफ्रेंड के चक्कर में पकड़ा गया। वहीं पीएनबी घोटाले का आरोपी चोकसी के वकीलों ने डोमिनिका की कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका डाली थी। 28 मई को डोमिनिका की अदालत ने चोकसी की याचिका का स्वीकार करते हुए सुनवाई पूरी होने तक उसे देश में ही रखने का आदेश दिया था।

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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