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आमने-सामने : जीडीपी पर अनुराग ठाकुर का चिदंबरम को जवाब, बोले- आंकड़ों की हेराफेरी ठीक नहीं

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बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 02 Jun 2021 05:31 PM IST

सार
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम द्वारा जीडीपी को लेकर सरकार को घेरने पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान भी कांग्रेस राजनीति करने से बाज नहीं आती है।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर
– फोटो : amar ujala

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केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को जारी किए गए जीडीपी के आंकड़ों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती दिख रही है। जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 7.3 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसे लेकर पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम ने बीते रोज केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था। अब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी चिदंबरम पर पलटवार किया है।जीडीपी को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान भी कांग्रेस राजनीति करने से बाज नहीं आती है। कांग्रेस नेतृत्व ने इस अनजान दृष्टिकोण को अपनाते हुए सदा ही इसे अपना हथियार बनाया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपदा के दौर में यह कठिन समय जरूर है मगर भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी काफी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पता नहीं पूर्व वित्तमंत्री ने क्यों कठिन आंकड़ों को नजरअंदाज किया।उन्होंने कहा कि लगातार सुधारों और मजबूत बुनियादी सिद्धांतों ने यह सुनिश्चित किया है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में भारत को 24.4 फीसदी के संकुचन से वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में 1.6 फीसदी की वृद्धि हुई है।ठाकुर ने कहा कि जब आप भारतीय उद्यमियों, छोटे व्यवसायों और एमएसएमई को खुद को पुनर्जीवित करने के लिए किए गए प्रयास पर संदेह करते हैं तो यह आपकी मंशा को दर्शाती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की अर्थव्यवस्था में 12.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाई है लेकिन फिर भी आप इसपर सवाल उठाते हैं।उन्होंने कहा कि नवीनतम जीडीपी आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 6.9 फीसदी की वृद्धि हुई, निर्माण में 14.5 फीसदी की वृद्धि हुई, स्टील और सीमेंट में क्रमशः 27.3 फीसदी और 32.7 फीसदी की वृद्धि हुई। यह वृद्धि मार्च की पूर्व-लॉकडाउन अवधि से अधिक है। अप्रैल 2021 में दोनों क्षेत्रों में 400 फीसदी और 549 फीसदी की वृद्धि हुई।ठाकुर ने पूर्व वित्त मंत्री से सवाल करते हुए पूछा कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था अलग-थलग द्वीप है,  क्या इस महामारी में विश्व की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को जीडीपी संकुचन का सामना नहीं करना पड़ा है?  क्या आप नहीं जानते कि फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूके में क्रमश: 8.2 फीसदी, 4.9 फीसदी, 8.9 फीसदी और 9.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।नकद हस्तांतरण के मुद्दे पर भी किया पलटवारनकद हस्तांतरण के मुद्दे पर ठाकुर ने पी चिदंबरम को जवाब देते हुए कहा कि एनडीए कार्यकाल 2014-19 के दौरान मोदी सरकार ने यूपीए कार्यकाल 2009-14 के दौरान गेहूं और चावल की खरीद पर 8 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 3.74 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया। मोदी सरकार ने 2009-14 में यूपीए के कार्यकाल के दौरान खरीदी गई दाल की तुलना में एमएसपी पर 74 गुना अधिक दाल खरीदी।ठाकुर ने चिदंबरम से पूछा कि एक ओर तो वह ‘नकद हस्तांतरण’ चाहते हैं, लेकिन दूसरी ओर यूपीए ने अपने कार्यकाल के दौरान गरीबों के लिए कितने बैंक खाते खोले? मोदी सरकार ने 42 करोड़ जन धन खाता खोलकर सिस्टम में लीकेज को रोक दिया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर रुपया सीधा पात्र लाभार्थी तक तेजी से पहुंचे। यहां तक कि प्रत्यक्ष बैंक हस्तांतरण के माध्यम से कोरोना महामारी के दौरान भी इसने लाखों लोगों को वित्तीय सहायता  प्रदान की है।मनरेगा के मुद्दे पर ठाकुर ने चिदंबरम से सवाल करते हुए पूछा कि क्या आपको यूपीए के दौरान मनरेगा को आवंटन याद है? एनडीए सरकार ने पिछले साल कोरोना अवधि के दौरान आवंटन को 61500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर दिया।  हमने मजदूरी को भी बढ़ाकर 202 रुपये कर दिया जिससे कुल मिलाकर 300 करोड़ व्यक्ति दिवस काम सुनिश्चित हो गया। क्या यह श्रमिकों के हाथ में नकद नहीं है?2020-21 अर्थव्यवस्था के लिए बुरा साल रहा : चिदंबरमपूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था कि  2020-21 में जीडीपी 2018-19 की जीडीपी से भी कम है। उन्होंने कहा था कि 2020-21 पिछले चार दशकों में अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बुरा साल साबित हुआ है। 2020-21 की चार तिमाहियों का प्रदर्शन से साफ जाहिर हो रहा है कि देश की क्या हालत हो गई है। उन्होंने कहा कि अभी जो स्थिति है उसकी सबसे बड़ी वजह कोरोना महामारी है। लेकिन उससे भी अधिक इसके लिए भाजपा जिम्मेदार है। आखिर चिंदबरम ने जीडीपी को लेकर और क्या कुछ कहा था यहां क्लिक कर पढ़ें।

विस्तार

केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को जारी किए गए जीडीपी के आंकड़ों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती दिख रही है। जीडीपी के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी में 7.3 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसे लेकर पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम ने बीते रोज केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला था। अब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी चिदंबरम पर पलटवार किया है।

जीडीपी को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान भी कांग्रेस राजनीति करने से बाज नहीं आती है। कांग्रेस नेतृत्व ने इस अनजान दृष्टिकोण को अपनाते हुए सदा ही इसे अपना हथियार बनाया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपदा के दौर में यह कठिन समय जरूर है मगर भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी काफी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पता नहीं पूर्व वित्तमंत्री ने क्यों कठिन आंकड़ों को नजरअंदाज किया।

उन्होंने कहा कि लगातार सुधारों और मजबूत बुनियादी सिद्धांतों ने यह सुनिश्चित किया है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में भारत को 24.4 फीसदी के संकुचन से वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में 1.6 फीसदी की वृद्धि हुई है।
ठाकुर ने कहा कि जब आप भारतीय उद्यमियों, छोटे व्यवसायों और एमएसएमई को खुद को पुनर्जीवित करने के लिए किए गए प्रयास पर संदेह करते हैं तो यह आपकी मंशा को दर्शाती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की अर्थव्यवस्था में 12.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाई है लेकिन फिर भी आप इसपर सवाल उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि नवीनतम जीडीपी आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में 6.9 फीसदी की वृद्धि हुई, निर्माण में 14.5 फीसदी की वृद्धि हुई, स्टील और सीमेंट में क्रमशः 27.3 फीसदी और 32.7 फीसदी की वृद्धि हुई। यह वृद्धि मार्च की पूर्व-लॉकडाउन अवधि से अधिक है। अप्रैल 2021 में दोनों क्षेत्रों में 400 फीसदी और 549 फीसदी की वृद्धि हुई।

ठाकुर ने पूर्व वित्त मंत्री से सवाल करते हुए पूछा कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था अलग-थलग द्वीप है,  क्या इस महामारी में विश्व की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को जीडीपी संकुचन का सामना नहीं करना पड़ा है?  क्या आप नहीं जानते कि फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूके में क्रमश: 8.2 फीसदी, 4.9 फीसदी, 8.9 फीसदी और 9.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
नकद हस्तांतरण के मुद्दे पर भी किया पलटवार
नकद हस्तांतरण के मुद्दे पर ठाकुर ने पी चिदंबरम को जवाब देते हुए कहा कि एनडीए कार्यकाल 2014-19 के दौरान मोदी सरकार ने यूपीए कार्यकाल 2009-14 के दौरान गेहूं और चावल की खरीद पर 8 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 3.74 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया। मोदी सरकार ने 2009-14 में यूपीए के कार्यकाल के दौरान खरीदी गई दाल की तुलना में एमएसपी पर 74 गुना अधिक दाल खरीदी।
ठाकुर ने चिदंबरम से पूछा कि एक ओर तो वह ‘नकद हस्तांतरण’ चाहते हैं, लेकिन दूसरी ओर यूपीए ने अपने कार्यकाल के दौरान गरीबों के लिए कितने बैंक खाते खोले? मोदी सरकार ने 42 करोड़ जन धन खाता खोलकर सिस्टम में लीकेज को रोक दिया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर रुपया सीधा पात्र लाभार्थी तक तेजी से पहुंचे। यहां तक कि प्रत्यक्ष बैंक हस्तांतरण के माध्यम से कोरोना महामारी के दौरान भी इसने लाखों लोगों को वित्तीय सहायता  प्रदान की है।

मनरेगा के मुद्दे पर ठाकुर ने चिदंबरम से सवाल करते हुए पूछा कि क्या आपको यूपीए के दौरान मनरेगा को आवंटन याद है? एनडीए सरकार ने पिछले साल कोरोना अवधि के दौरान आवंटन को 61500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर दिया।  हमने मजदूरी को भी बढ़ाकर 202 रुपये कर दिया जिससे कुल मिलाकर 300 करोड़ व्यक्ति दिवस काम सुनिश्चित हो गया। क्या यह श्रमिकों के हाथ में नकद नहीं है?
2020-21 अर्थव्यवस्था के लिए बुरा साल रहा : चिदंबरम
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम ने सोमवार को केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा था कि  2020-21 में जीडीपी 2018-19 की जीडीपी से भी कम है। उन्होंने कहा था कि 2020-21 पिछले चार दशकों में अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बुरा साल साबित हुआ है। 
2020-21 की चार तिमाहियों का प्रदर्शन से साफ जाहिर हो रहा है कि देश की क्या हालत हो गई है। उन्होंने कहा कि अभी जो स्थिति है उसकी सबसे बड़ी वजह कोरोना महामारी है। लेकिन उससे भी अधिक इसके लिए भाजपा जिम्मेदार है। आखिर चिंदबरम ने जीडीपी को लेकर और क्या कुछ कहा था यहां क्लिक कर पढ़ें।

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राजनीति: शरद पवार के मन में कौन सी खिचड़ी पक रही है, क्या पीके के साथ मिल कर हो रही महागठबंधन बनाने की तैयारी?

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सार
शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मायावती, अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है…

शरद पवार और प्रशांत किशोर की मुलाकात
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।
क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।
होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

विस्तार

एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।

क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।

ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।
संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।

होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।

क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

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महाराष्ट्र में कोरोना : 24 घंटे में 6270 नए मामले, 21 लोगों में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, 94 की मौत

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एएनआई, मुुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:59 PM IST

सार
महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है।  

कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : PTI

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महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

विस्तार

महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।

बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

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कोलकाता: ममता का गंभीर आरोप, कहा- यूपी से बहकर बंगाल में आ रहीं लाशें, राज्य में फैल सकता है कोरोना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 21 Jun 2021 09:44 PM IST

सार
ममता ने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
– फोटो : ANI

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।ममता को हाईकोर्ट से झटकावहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

विस्तार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। 

बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।
ममता को हाईकोर्ट से झटका

वहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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