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कोरोना : आज से इन राज्यों में शुरू हुआ अनलॉक तो यहां बढ़ा लॉकडाउन, जानें अपने प्रदेश का हाल

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सार
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए कई राज्यों ने अपने यहां लॉकडाउन की अवधि को बढ़ा दिया है जबकि कुछ प्रदेश कोरोना के मामलों में कमी दर्ज करने के बाद पाबंदियों में छूट दे रहे हैं।

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कोरोना महामारी के प्रकोप से पूरा देश प्रभावित है। तेजी से हो रहे इस घातक वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कई राज्यों ने अपने यहां पहले से लागू लॉकडाउन को आगे बढ़ा दिया है तो कुछ संक्रमण की रफ्तार को कम होता देख धीरे-धीरे पाबंदियों में ढील दे रहे हैं। विभिन्न राज्य की सरकारों ने अपने यहां लॉकडाउन के दौरान लागू होने वाले नियमों और अनलॉक के नियमों के लिए अलग-अलग तरह के दिशानिर्देश जारी किए हैं।   इन राज्यों में लॉकडाउन बढ़ा

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार 14 अप्रैल से लागू पाबंदियों को पहले ही 15 दिनों के लिए बढ़ा चुकी है। यह पाबंदियां एक जून को खत्म हो रही थीं पर कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए राज्य में अब 15 जून तक लॉकडाउन जारी रहेगा। हालांकि, राज्य सरकार समीक्षा करने के बाद कुछ जिलों में लॉकडाउन में ढील देने पर विचार करेगी। 
दिल्ली: दिल्ली में सोमवार (1 जून) से लॉकडाउन में कुछ ढील देने का फैसला किया गया है। हालांकि, लॉकडाउन सात जून तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान सुबह 5 बजे तक दिल्ली में आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करते हुए कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया गया है। हालांकि, बंद परिसर में और कंटेनमेंट जोन के बाहर इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को अनुमति दी गई है। लॉकडाउन के दौरान निर्माण स्थलों पर कामगारों और कर्मचारियों को जाने की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें आवाजाही के लिए ई-पास लेने होंगे। 
पंजाब: यहां कोरोना कर्फ्यू को 10 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार (27 मई) को कोरोना से जुड़ी पाबंदियों की अवधि को बढ़ाने की घोषणा की थी। अब राज्य में 10 जून तक कोरोना से जुड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे। 
हिमाचल: यहां प्रतिबंध 7 जून तक लागू रहेंगे। हालांकि, आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पहले की तरह ही खुलेंगी। अन्य दुकानों को पांच घंटे के लिए खोलने की अनुमति दी गई है। 
हरियाणा: हरियाणा में भी लॉकडाउन को 7 जून तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान दुकानें अब सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक चल सकती हैं। दुकानदारों को ऑड-ईवन फॉर्मूले का पालन करना होगा। शिक्षण संस्थान 15 जून तक बंद रहेंगे। इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू भी लागू रहेगा। 
पश्चिम बंगाल: यहां 15 जून तक कोरोना संबंधी प्रतिबंध लागू रहेंगे। राज्य में लागू प्रतिबंध 30 मई को खत्म हो होने थे, लेकिन इन्हें बढ़ा दिया गया। बंगाल चुनाव के बाद राज्य में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े, जिसके बाद सरकार ने कोरोना को लेकर सख्ती दिखाई और कड़े प्रतिबंध लगाए।
राजस्थान: अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान में 8 जून तक लॉकडाउन लागू रहने का आदेश दिया है। 
झारखंड: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड में 3 जून तक के लॉकडाउन लागू रखने की घोषणा की है। 

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में अब कोरोना संक्रमण के कम मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में जारी लॉकडाउन में 1 जून से छूट देने का फैसला किया है। इसके तहत प्रदेश में शनिवार, रविवार को छोड़कर हफ्ते में 5 दिन दुकानें खुलेंगी। हालांकि, 600 से ज्यादा कोरोना के एक्टिव केस वाले जिलों में किसी भी तरीके की छूट नहीं दी जाएगी। पूरे प्रदेश में नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। योगी सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक, लखनऊ समेत 20 जिलों में कोरोना कर्फ्यू में कोई छूट नहीं मिलेगी। ये जिले हैं- मेरठ, मुरादाबाद, गाजीपुर, बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, बरेली, देवरिया, गोरखपुर, झांसी, प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, बुलंदशहर, जौनपुर और सोनभद्र. नोएडा में भी कोरोना कर्फ्यू जारी रहेगा। डीएम के मुताबिक इन जगहों पर 30 मई तक 600 से ज्यादा एक्टिव केस हैं। लिहाजा सरकार के आदेशों के मुताबिक कर्फ्यू जारी रहेगा।
मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश में 1 जून से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होगी। यहां अब पॉजिटिविटी रेट के आधार पर कोरोना कर्फ्यू या प्रतिबंध के नियम तय होंगे। 5 फीसद से ज्यादा संक्रमण वाले और 5फीसद से कम संक्रमण वाले जिलों के लिए अनलॉक की अलग-अलग गाइडलाइंस तय की गई हैं।
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में 31 मई से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होगी। आउटडोर मार्केट और एरिया रोटेशन के आधार पर खुलेंगे। सार्वजनिक परिवहन की सुविधा 50 प्रतिशत की क्षमता के साथ खुलेंगी। तीन दिनों के लिए सैलून की दुकानें, पार्लर खुलेंगे। तीन दिनों तक शराब की दुकानें खुलेंगी। 25 प्रतिशत की क्षमता के साथ इंडोर मॉल खुलेंगे। रेस्तरां केवल होम डिलीवरी कर सकेंगे। सप्ताहांत कर्फ्यू जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में लागू रहेगा।

तमिलनाडु और पुडुचेरी में लॉकडाउन 7 जून तक जारी रहेगा। वहीं केरल सरकार ने आवश्यक गतिविधियों के लिए कुछ छूट के साथ, लॉकडाउन को 9 जून तक बढ़ा दिया है जबकि कर्नाटक के मुख्यंमत्री बीएस येदियुरप्पा ने राज्य में 7 जून लॉकडाउन रखने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन बढ़ाने के बारे में फैसला कोरोना केसों पर निर्भर करेगा। आंध्र प्रदेश में तिरुपति और पूरे चित्तूर जिले में कोरोना कर्फ्यू को और सख्त किया गया है। कोविड के मामलों को देखते हुए प्रदेश में 1 से 15 जून तक के लिए लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। वहीं, तेलंगाना में लॉकडाउन 10 दिनों के लिए बढ़ाया गया।  
उत्तर-पूर्व के राज्यो के लिए जारी दिशानिर्देशमिजोरम की राजधानी आईजोल में 6 जून तक लॉकडाउन रहेगा। वहीं, मेघालय के ईस्ट खासी हिल जिले में 7 जून तक लॉकडाउन रहेगा। अरुणाचल के 7 जिलों ईटानगर, नामसाई, अपर सुबनसिरी, तवांग, लोवर सुबनसिरी, अंजाव और लोहित में भी 7 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा। मणिपुर की बात करें तो यहां के 7 जिलों इम्फाल वेस्ट और ईस्ट, बिष्णुपुर, उखरुल, थौबल, काकचिंग और चूराचंदपुर में 11 जून तक के लिए लॉकडाउन बढ़ाया गया है जबकि नागालैंड में लॉकडाउन 11 जून तक रहेगा। 

विस्तार

कोरोना महामारी के प्रकोप से पूरा देश प्रभावित है। तेजी से हो रहे इस घातक वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कई राज्यों ने अपने यहां पहले से लागू लॉकडाउन को आगे बढ़ा दिया है तो कुछ संक्रमण की रफ्तार को कम होता देख धीरे-धीरे पाबंदियों में ढील दे रहे हैं। विभिन्न राज्य की सरकारों ने अपने यहां लॉकडाउन के दौरान लागू होने वाले नियमों और अनलॉक के नियमों के लिए अलग-अलग तरह के दिशानिर्देश जारी किए हैं।   

इन राज्यों में लॉकडाउन बढ़ा

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र सरकार 14 अप्रैल से लागू पाबंदियों को पहले ही 15 दिनों के लिए बढ़ा चुकी है। यह पाबंदियां एक जून को खत्म हो रही थीं पर कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए राज्य में अब 15 जून तक लॉकडाउन जारी रहेगा। हालांकि, राज्य सरकार समीक्षा करने के बाद कुछ जिलों में लॉकडाउन में ढील देने पर विचार करेगी। 

दिल्ली: दिल्ली में सोमवार (1 जून) से लॉकडाउन में कुछ ढील देने का फैसला किया गया है। हालांकि, लॉकडाउन सात जून तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान सुबह 5 बजे तक दिल्ली में आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करते हुए कोरोना कर्फ्यू को बढ़ा दिया गया है। हालांकि, बंद परिसर में और कंटेनमेंट जोन के बाहर इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों को अनुमति दी गई है। लॉकडाउन के दौरान निर्माण स्थलों पर कामगारों और कर्मचारियों को जाने की अनुमति होगी, लेकिन उन्हें आवाजाही के लिए ई-पास लेने होंगे। 
पंजाब: यहां कोरोना कर्फ्यू को 10 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बृहस्पतिवार (27 मई) को कोरोना से जुड़ी पाबंदियों की अवधि को बढ़ाने की घोषणा की थी। अब राज्य में 10 जून तक कोरोना से जुड़े प्रतिबंध लागू रहेंगे। 
हिमाचल: यहां प्रतिबंध 7 जून तक लागू रहेंगे। हालांकि, आवश्यक वस्तुओं की दुकानें पहले की तरह ही खुलेंगी। अन्य दुकानों को पांच घंटे के लिए खोलने की अनुमति दी गई है। 

हरियाणा: हरियाणा में भी लॉकडाउन को 7 जून तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान दुकानें अब सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक चल सकती हैं। दुकानदारों को ऑड-ईवन फॉर्मूले का पालन करना होगा। शिक्षण संस्थान 15 जून तक बंद रहेंगे। इसके अलावा रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू भी लागू रहेगा। 
पश्चिम बंगाल: यहां 15 जून तक कोरोना संबंधी प्रतिबंध लागू रहेंगे। राज्य में लागू प्रतिबंध 30 मई को खत्म हो होने थे, लेकिन इन्हें बढ़ा दिया गया। बंगाल चुनाव के बाद राज्य में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े, जिसके बाद सरकार ने कोरोना को लेकर सख्ती दिखाई और कड़े प्रतिबंध लगाए।

राजस्थान: अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान में 8 जून तक लॉकडाउन लागू रहने का आदेश दिया है। 
झारखंड: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड में 3 जून तक के लॉकडाउन लागू रखने की घोषणा की है। 

इन राज्यों को पाबंदियों में मिली छूट

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में अब कोरोना संक्रमण के कम मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी ने प्रदेश में जारी लॉकडाउन में 1 जून से छूट देने का फैसला किया है। इसके तहत प्रदेश में शनिवार, रविवार को छोड़कर हफ्ते में 5 दिन दुकानें खुलेंगी। हालांकि, 600 से ज्यादा कोरोना के एक्टिव केस वाले जिलों में किसी भी तरीके की छूट नहीं दी जाएगी। पूरे प्रदेश में नाइट कर्फ्यू जारी रहेगा। योगी सरकार की नई गाइडलाइन के मुताबिक, लखनऊ समेत 20 जिलों में कोरोना कर्फ्यू में कोई छूट नहीं मिलेगी। ये जिले हैं- मेरठ, मुरादाबाद, गाजीपुर, बिजनौर, सहारनपुर, वाराणसी, गाजियाबाद, बरेली, देवरिया, गोरखपुर, झांसी, प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, बुलंदशहर, जौनपुर और सोनभद्र. नोएडा में भी कोरोना कर्फ्यू जारी रहेगा। डीएम के मुताबिक इन जगहों पर 30 मई तक 600 से ज्यादा एक्टिव केस हैं। लिहाजा सरकार के आदेशों के मुताबिक कर्फ्यू जारी रहेगा।
मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश में 1 जून से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होगी। यहां अब पॉजिटिविटी रेट के आधार पर कोरोना कर्फ्यू या प्रतिबंध के नियम तय होंगे। 5 फीसद से ज्यादा संक्रमण वाले और 5फीसद से कम संक्रमण वाले जिलों के लिए अनलॉक की अलग-अलग गाइडलाइंस तय की गई हैं।
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में 31 मई से अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होगी। आउटडोर मार्केट और एरिया रोटेशन के आधार पर खुलेंगे। सार्वजनिक परिवहन की सुविधा 50 प्रतिशत की क्षमता के साथ खुलेंगी। तीन दिनों के लिए सैलून की दुकानें, पार्लर खुलेंगे। तीन दिनों तक शराब की दुकानें खुलेंगी। 25 प्रतिशत की क्षमता के साथ इंडोर मॉल खुलेंगे। रेस्तरां केवल होम डिलीवरी कर सकेंगे। सप्ताहांत कर्फ्यू जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में लागू रहेगा।

दक्षिण के हालात

तमिलनाडु और पुडुचेरी में लॉकडाउन 7 जून तक जारी रहेगा। वहीं केरल सरकार ने आवश्यक गतिविधियों के लिए कुछ छूट के साथ, लॉकडाउन को 9 जून तक बढ़ा दिया है जबकि कर्नाटक के मुख्यंमत्री बीएस येदियुरप्पा ने राज्य में 7 जून लॉकडाउन रखने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि लॉकडाउन बढ़ाने के बारे में फैसला कोरोना केसों पर निर्भर करेगा। आंध्र प्रदेश में तिरुपति और पूरे चित्तूर जिले में कोरोना कर्फ्यू को और सख्त किया गया है। कोविड के मामलों को देखते हुए प्रदेश में 1 से 15 जून तक के लिए लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। वहीं, तेलंगाना में लॉकडाउन 10 दिनों के लिए बढ़ाया गया।  
उत्तर-पूर्व के राज्यो के लिए जारी दिशानिर्देशमिजोरम की राजधानी आईजोल में 6 जून तक लॉकडाउन रहेगा। वहीं, मेघालय के ईस्ट खासी हिल जिले में 7 जून तक लॉकडाउन रहेगा। अरुणाचल के 7 जिलों ईटानगर, नामसाई, अपर सुबनसिरी, तवांग, लोवर सुबनसिरी, अंजाव और लोहित में भी 7 जून तक लॉकडाउन लागू रहेगा। मणिपुर की बात करें तो यहां के 7 जिलों इम्फाल वेस्ट और ईस्ट, बिष्णुपुर, उखरुल, थौबल, काकचिंग और चूराचंदपुर में 11 जून तक के लिए लॉकडाउन बढ़ाया गया है जबकि नागालैंड में लॉकडाउन 11 जून तक रहेगा। 

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इन राज्यों को पाबंदियों में मिली छूट

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राजनीति: शरद पवार के मन में कौन सी खिचड़ी पक रही है, क्या पीके के साथ मिल कर हो रही महागठबंधन बनाने की तैयारी?

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सार
शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मायावती, अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है…

शरद पवार और प्रशांत किशोर की मुलाकात
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।
क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।
होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

विस्तार

एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।

क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।

ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।
संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।

होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।

क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

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महाराष्ट्र में कोरोना : 24 घंटे में 6270 नए मामले, 21 लोगों में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, 94 की मौत

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एएनआई, मुुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:59 PM IST

सार
महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है।  

कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : PTI

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महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

विस्तार

महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।

बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

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कोलकाता: ममता का गंभीर आरोप, कहा- यूपी से बहकर बंगाल में आ रहीं लाशें, राज्य में फैल सकता है कोरोना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 21 Jun 2021 09:44 PM IST

सार
ममता ने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
– फोटो : ANI

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।ममता को हाईकोर्ट से झटकावहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

विस्तार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। 

बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।
ममता को हाईकोर्ट से झटका

वहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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