Connect with us

India

केंद्र बनाम बंगाल: पीएम के 30 मिनट इंतजार पर महुआ का तंज, हम भी तो 15 लाख के लिए 7 साल से कर रहे वेट

Published

on

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Sat, 29 May 2021 10:09 AM IST

सार
ममता बनर्जी के पीएम मोदी को इंतजार कराने के मामले को लेकर भाजपा और तृणमूल नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि 15 लाख के लिए 7 साल से वेट कर रहे हैं, थोड़ा आप भी करें। वहीं अब इस मामले में कांग्रेस पार्टी भी कूद गई है।

पीएम मोदी, महुआ मोइत्रा, सिंघवी
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। चक्रवात यास से हुई तबाही का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को बंगाल पहुंचे, जहां ममता बनर्जी पीएम की रिव्यू मीटिंग में आधा घंटे की देरी से पहुंचीं। इसके बाद बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया। इस मामले को लेकर भाजपा और तृणमूल नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि 15 लाख के लिए 7 साल से वेट कर रहे हैं, थोड़ा आप भी करें। वहीं अब इस मामले में कांग्रेस पार्टी भी कूद गई है।बैठक में ममता बनर्जी के देरी से पहुंचने की वजह से मच रहे हंगामे को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तंज कसा। महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर लिखा, “30 मिनट की कथित देरी पर इतना हंगामा? 15 लाख रुपये के लिए भारतीय 7 साल से इंतजार कर रहे। एटीएम के बाहर घंटों इंतजार कर रहे। वैक्सीन के लिए महीनों से इंतजार कर रहे। थोड़ा आप भी इंतजार कर लीजिए कभी-कभी…।।” 
ओडिशा के सीएम ने जताया पीएम का अभारबंगाल बनाम केंद्र विवाद के बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी शुक्रिया अदा किया। पटनायक ने ट्वीट किया,” चक्रवात यास प्रभावित क्षेत्रों के पुर्नवास के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता मुहैया कराने के लिए पीएम मोदी का आभार। साथ ही आपदा रोधी विद्युत अवसंरचना के निर्माण के लिए उठाए गए कदम भी सराहनीय हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पटनायक के ट्वीट पर जवाब देते कहा कि भुवनेश्वर में एक बहुत ही उपयोगी समीक्षा बैठक हुई। हम आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।  

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया है। बतौर मुख्य सचिव उनका कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन चार दिन पहले ही ममता सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। इस पर कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने निशाना साधा। 
 
शाह बोले- दीदी का अहंकार जनकल्याण से ऊपर गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को ही ट्वीट किया, “ममता दीदी का आज का आचरण दुर्भाग्यपूर्ण रहा। चक्रवात यास से प्रभावित लोगों की मदद करना समय की मांग है, लेकिन दुख की बात है कि दीदी ने अहंकार को जनकल्याण से ऊपर रखा। उनका आज का तुच्छ व्यवहार यही दर्शाता है।
चक्रवाती तूफान की से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के कलाईकोंडा में बैठक की थी। इस बैठक में ममता बनर्जी से देरी से पहुंचीं। यही नहीं, उन्होंने 20 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की रिपोर्ट दी और ये कहते हुए वापस चली गईं कि उन्हें दूसरी मीटिंग्स में भी शामिल होना है। वहीं, मीटिंग में देरी से पहुंचने पर ममता बनर्जी के ऑफिस की तरफ से कहा गया कि पीएम मोदी को कलाईकोंडा पहुंचने में 20 मिनट से ज्यादा का वक्त लगने वाला था। इसलिए उनसे भी 20 मिनट देरी से आने को कहा गया।

विस्तार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। चक्रवात यास से हुई तबाही का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को बंगाल पहुंचे, जहां ममता बनर्जी पीएम की रिव्यू मीटिंग में आधा घंटे की देरी से पहुंचीं। इसके बाद बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया। इस मामले को लेकर भाजपा और तृणमूल नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने पीएम पर तंज कसते हुए कहा कि 15 लाख के लिए 7 साल से वेट कर रहे हैं, थोड़ा आप भी करें। वहीं अब इस मामले में कांग्रेस पार्टी भी कूद गई है।

बैठक में ममता बनर्जी के देरी से पहुंचने की वजह से मच रहे हंगामे को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तंज कसा। महुआ मोइत्रा ने ट्वीट कर लिखा, “30 मिनट की कथित देरी पर इतना हंगामा? 15 लाख रुपये के लिए भारतीय 7 साल से इंतजार कर रहे। एटीएम के बाहर घंटों इंतजार कर रहे। वैक्सीन के लिए महीनों से इंतजार कर रहे। थोड़ा आप भी इंतजार कर लीजिए कभी-कभी…।।”

 

So much fuss over an alleged 30 min wait?
Indians waiting 7 years for ₹15 lakhs
Waiting hours at ATM queues
Waiting months for vaccines due
Thoda aap bhi wait kar lijiye kabhi kabhi…
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) May 28, 2021

ओडिशा के सीएम ने जताया पीएम का अभार
बंगाल बनाम केंद्र विवाद के बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी शुक्रिया अदा किया। पटनायक ने ट्वीट किया,” चक्रवात यास प्रभावित क्षेत्रों के पुर्नवास के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता मुहैया कराने के लिए पीएम मोदी का आभार। साथ ही आपदा रोधी विद्युत अवसंरचना के निर्माण के लिए उठाए गए कदम भी सराहनीय हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पटनायक के ट्वीट पर जवाब देते कहा कि भुवनेश्वर में एक बहुत ही उपयोगी समीक्षा बैठक हुई। हम आपदा प्रबंधन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। 
 

Had a very productive review meeting in Bhubaneswar. We will continue working together to strengthen disaster management capabilities, an area where Odisha has made commendable strides. https://t.co/1mcAxub4nE
— Narendra Modi (@narendramodi) May 29, 2021

 

बंगाल के मुख्य सचिव के तबादले पर कांग्रेस ने कसा तंज

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को केंद्र ने दिल्ली बुला लिया है। बतौर मुख्य सचिव उनका कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन चार दिन पहले ही ममता सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। अलपन बंदोपाध्याय को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। इस पर कांग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी ने निशाना साधा। 
 

Has any chief secy anywhere in india ever in 74 yrs of independence been mandatorily/non consensually asked 2join central service within 48 hrs on date of retirement 31/5 wo state Govt consent or even consultation? Let #Centre educate me on this bt answer must be NO anr 1st 4 #WB
— Abhishek Singhvi (@DrAMSinghvi) May 29, 2021
शाह बोले- दीदी का अहंकार जनकल्याण से ऊपर गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को ही ट्वीट किया, “ममता दीदी का आज का आचरण दुर्भाग्यपूर्ण रहा। चक्रवात यास से प्रभावित लोगों की मदद करना समय की मांग है, लेकिन दुख की बात है कि दीदी ने अहंकार को जनकल्याण से ऊपर रखा। उनका आज का तुच्छ व्यवहार यही दर्शाता है।

20 करोड़ रुपये लिस्ट थमाकर निकल गईं ममता

चक्रवाती तूफान की से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के कलाईकोंडा में बैठक की थी। इस बैठक में ममता बनर्जी से देरी से पहुंचीं। यही नहीं, उन्होंने 20 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की रिपोर्ट दी और ये कहते हुए वापस चली गईं कि उन्हें दूसरी मीटिंग्स में भी शामिल होना है। वहीं, मीटिंग में देरी से पहुंचने पर ममता बनर्जी के ऑफिस की तरफ से कहा गया कि पीएम मोदी को कलाईकोंडा पहुंचने में 20 मिनट से ज्यादा का वक्त लगने वाला था। इसलिए उनसे भी 20 मिनट देरी से आने को कहा गया।

आगे पढ़ें

बंगाल के मुख्य सचिव के तबादले पर कांग्रेस ने कसा तंज

Continue Reading

India

एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

Published

on

By

विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

आगे पढ़ें

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

Continue Reading

India

नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

Published

on

By

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

Continue Reading

India

शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

Published

on

By

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2017 Zox News Theme. Theme by MVP Themes, powered by WordPress.