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बड़ा सवाल: आखिर भारत में ही महामारी के साथ क्यों फैल रहा ब्लैक फंगस?

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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : अमर उजाला

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भारत में कोरोना के साथ ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमायकोसिस) भी बेकाबू हो गया है। कोई कमजोर इम्युनिटी तो कोई स्टेरॉयड को जिम्मेदार बता रहा है। वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि इलाज के लिए दुनियाभर में सभी जगह स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी हुआ, लेकिन भारत में जिस तरह से ब्लैक फंगस फैला वैसा किसी देश में नहीं देखा गया। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं। ऐसे ही कारणों पर विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट….।खास तथ्य….

99.5 फीसदी होती है मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की शुद्धता
0.5 फीसदी भी शुद्धता में कमी तो जान को खतरा संभव
100 में से करीब 15 मरीजों को मधुमेह का पता ही नहीं
6 से 10 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट लेता है स्वस्थ व्यक्ति
60 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन कोरोना रोगियों को दी जा रही

विशेषज्ञ अलग-अलग कारण बता रहे पर…. पुष्टि कैसे हो

कहीं एचएफएनसी तो नहीं फंगस की वजह?
केजीएमयू, लखनऊ के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर के हेड डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि एक स्वस्थ्य व्यक्ति छह से दस लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट लेता है। कोरोना मरीजों को हाई फ्लो नेजल कैनुला (एचएफएनसी) से प्रति मिनट 60 लीटर तक ऑक्सीजन दी जा रही है। इससे नाक की पैरानेजल साइनस और म्यूकोसा सूख रही है। घाव हो रहा है। इसी पर फंगस जम रहा है जो महामारी के बीच नई मुसीबत का कारण हो।स्टेरॉयड की गलत डोजिंग भी वजह तो नहीं…डॉ. वेद बताते हैं कि कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड की टेपरिंग डोज नहीं देने से भी फंगस हावी हो सकता है। वह बताते हैं कि स्टेरॉयड पांच से दस दिन के लिए हाई डोज से लोज डोज के तौर पर देना चाहिए। होम आइसोलेशन में मरीजों को लो डोज की स्टेरॉयड दी जा रही है। हालत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती के दौरान दोबारा हाई डोज दी जा रही है। इस कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो रही है और फंगस हमला कर रहा है।रक्त संचार में दिक्कत से ऐसी तकलीफमुंबई के कोकिला बेन अस्पताल के ईएनटी विभाग के हेड डॉ. संजीव बधवार बताते हैं कि भारत में ब्लैक फंगस के मामले दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अधिक है लेकिन आए सभी जगह हैं। वे बताते हैं कि विदेशों कोरोना से मरे लोगों के शवों के पोस्टमार्टम में पता चला है कि संक्रमण से रक्त संचार प्रभावित होता है। इससे उत्तकों के खराब होने से नेक्रसेसिस यानी उस जगह कालापन हो जाता है। शवों में फंगस देखा गया है। कोरोना संक्त्रस्मण के कारण ब्लड क्लॉट से शरीर के उत्तक खराब होते हैं जिसपर फंगस हमला कर रहा है। संभव है कि इसी कारण मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।संदेह : क्या दवा के रूप में जिंक फंगस के पनपने की वजहबनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि बैक्टीरिया शरीर से आयरन (लोहा) खाता है। फंगस को भी जीवित रहने के लिए जिंक समेत अन्य सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है। इसी लिए शरीर जिंक समेत अन्य पोषक तत्त्वों को छुपाकर रखता है ताकि वो आसानी से फंगस को न मिले।अब दवाई के रूप में जिंक…डॉ. मिश्रा का कहना है कि कोरोना के इलाज में मरीजों को चार से पांच दिन या इससे अधिक समय तक इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जिंक की गोलियां दी जा रही हैं। संभावना है कि ये जिंक ब्लैक फंगस को शरीर के भीतर पनपने का एक कारण हो सकता है। जिंक सिर्फ ब्लैक ही नहीं दूसरे तरह के पैरासाइट्स के पनपने की भी वजह बन सकता है। ऐसे में दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी और सही सलाह जरूरी है।मेडिकल ऑक्सीजन की गुणवत्ता पर संदेह…कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के हेड डॉ. परवेज खान का कहना है कि महामारी की पहली लहर में ब्लैक फंगस न के बराबर था। मेडिकल ऑक्सीजन का संकट भी नहीं था। दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन का संकट गहराया तो औद्योगिक ईकाइयों में इस्तेताल होने वाला ऑक्सीजन भी इस्तेमाल हुआ है। मेडिकल ऑक्सीजन की शुद्धता 99.5 फीसदी तक होती है। अस्पतालों में मांग बढ़ने के साथ आई ऑक्सीजन की शुद्धता क्या थी उस पर भी फंगस के लिए संदेह कर सकते हैं।

भारत मधुमेह की राजधानी है, यहां 30 से 40 फीसदी ऐसे लोग जिन्हें पता ही नहीं है कि उन्हें मधुमेह है।
ऐसे लोगों को स्टेरॉयड की डोज दी जा रही है, शुगर लेवल बढ़ जा रहा है जो फंगस का एक कारण हो सकता है।
वार्ड, एचडीयू, आईसीयू, वेंटिलेटर यूनिट की नियमित साफ सफाई जरूरी है। गंदगी से फंगस को बल मिल सकता है।
ऑक्सीजन मास्क का गलत इस्तेमाल यानी एक मरीज का ऑक्सीजन दूसरे मरीज को लगाना भी एक बड़ा कारण।
आरटी-पीसीआर सैंपल लेने के लिए इस्तेमाल हो रही कॉटन स्टिक की हाईजीन पर भी संदेह किया जा सकता है।

क्यों अस्पतालों में तेजी से बढ़ रहा फंगस
लखनऊ के लोहिया संस्थान के फिजिशियन डॉ. संदीप चौधरी बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों में फंगस के मामले अधिक दिख रहे हैं। ऑक्सीजन डिलीवरी सिस्टम में गंदगी, उक्त ऑक्सीजन में पर्याप्त मात्रा में नमी का न होना, ऑक्सीजन पाइपलाइन में गंदगी भी इसका एक कारण हो सकता है। इसके अलावा वेंटिलेटर और आईसीयू मरीजों को लगी नली (ट्यूब) की समय पर सफाई न होने या बदलने से भी फंगस का खतरा संभव है।फंगस को खत्म करना मुश्किल हो जाएगाविशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना भविष्य में खत्म हो सकता है लेकिन फंगस ने अपना दायरा बढ़ा लिया तो इसे खत्म करना मुश्किल हो जाएग। फंगस का अंत तभी संभव है जब इसके पनपने का सही कारण पता चले और समय रहते उसका निदान हो।नाक की क्रीब्रीफॉर्म प्लेट तो नहीं हो रही चोटिलडॉ. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि न्यूरो के मरीजों को छह से आठ महीने तक स्टेरॉयड चलाई है। उनमें ऐसा कोई संक्रमण नहीं दिखा है। अचानक केस बढ़ने से आंशका की फेहरिस्त भी बढ़ रही है। वह बताते हैं कि नाक में क्रीब्रीफॉर्म प्लेट (नाक की छत) होती है। आरटी-पीसीआर का सैंपल लेते वक्त अगर गलती से चोटिल हो जाए तो फंगस का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि फंगस चोटिल स्थानों पर आसानी से अपनी जगह बनाता है। सवाल ये है कि फंगस के जो भी मामले अब तक सामने आए हैं उनमें क्या क्रीब्रीफॉर्म प्लेट चोटिल हुई है, इसका पता लगाना जरूरी है। वे बताते हैं कि हेड इंजरी होने पर सबसे पहले यही हड्डी टूटती है।गंदे पानी से तो नहीं कर रहें जलनीति क्रियाएम्स ऋषिकेश के ईएनटी विभाग के प्रो. एसपी अग्रवाल बताते हैं कि फंगस से बचाव के लिए जल नीति क्रिया कारगर है। इससे नाक को साफ रखा जा सकता है। डर और भय के बीच लोग जलनीति क्रिया तो कर रहे हैं लेकिन ध्यान देने की बात है कि ये सामान्य या गंदे पानी से तो नहीं कर रहे हैं। जलनीति क्रिया के लिए पानी को अच्छे से उबाल लें और ठंडा करने के बाद ही इस प्रक्रिया को करें।सुझाव…. ब्लैक फंगस को भयावह महामारी होने से कैसे रोकेंविशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस महामारी को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बॉडी का गठन हो, उसके निर्देशों के मुताबिक कोरोना मरीजों के लिए दवा दी जाए। मनमाने ढंग से दवा का इस्तेमाल बंद हो। मेडिकल ऑक्सीजन की गुणवत्ता इस्तेमाल से पहले जांची जाए। ब्लैक फंगस की तह तक जाने के लिए सभी अनुमानित कारणों के आधार पर एक विशेष पैनल नामित किया जाए जो शोध के जरिए इसकी तह तक पहुंचे।पैन्क्रियाज को प्रभावित तो नहीं कर रहा वायरसमहाराष्ट्र के डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल रिसर्च एंड एजुकेशन के निदेशक डॉ. तात्यराव लहाने का कहना है कि कोरोना के इलाज को ब्लैक फंगस के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। संभव है कि कोविड-19 म्यूटेंट पैन्क्रियाज में मौजूद बीटा सेल्स को प्रभावित कर रहा है। इस कारण ब्लड शुगर लेवल में बढ़ोतरी हो रही है और कम इम्युनिटी के कारण ब्लैक फंगस शरीर पर हमला बोल अपना दायरा बढ़ा रहा है।

विस्तार

भारत में कोरोना के साथ ब्लैक फंगस (म्यूकॉरमायकोसिस) भी बेकाबू हो गया है। कोई कमजोर इम्युनिटी तो कोई स्टेरॉयड को जिम्मेदार बता रहा है। वहीं, चिकित्सकों का कहना है कि इलाज के लिए दुनियाभर में सभी जगह स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी हुआ, लेकिन भारत में जिस तरह से ब्लैक फंगस फैला वैसा किसी देश में नहीं देखा गया। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं। ऐसे ही कारणों पर विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट….।

खास तथ्य….

99.5 फीसदी होती है मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की शुद्धता
0.5 फीसदी भी शुद्धता में कमी तो जान को खतरा संभव

100 में से करीब 15 मरीजों को मधुमेह का पता ही नहीं
6 से 10 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट लेता है स्वस्थ व्यक्ति
60 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन कोरोना रोगियों को दी जा रही

विशेषज्ञ अलग-अलग कारण बता रहे पर…. पुष्टि कैसे हो

कहीं एचएफएनसी तो नहीं फंगस की वजह?

केजीएमयू, लखनऊ के पल्मोनरी क्रिटिकल केयर के हेड डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि एक स्वस्थ्य व्यक्ति छह से दस लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट लेता है। कोरोना मरीजों को हाई फ्लो नेजल कैनुला (एचएफएनसी) से प्रति मिनट 60 लीटर तक ऑक्सीजन दी जा रही है। इससे नाक की पैरानेजल साइनस और म्यूकोसा सूख रही है। घाव हो रहा है। इसी पर फंगस जम रहा है जो महामारी के बीच नई मुसीबत का कारण हो।

स्टेरॉयड की गलत डोजिंग भी वजह तो नहीं…
डॉ. वेद बताते हैं कि कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड की टेपरिंग डोज नहीं देने से भी फंगस हावी हो सकता है। वह बताते हैं कि स्टेरॉयड पांच से दस दिन के लिए हाई डोज से लोज डोज के तौर पर देना चाहिए। होम आइसोलेशन में मरीजों को लो डोज की स्टेरॉयड दी जा रही है। हालत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती के दौरान दोबारा हाई डोज दी जा रही है। इस कारण शरीर की इम्युनिटी कमजोर हो रही है और फंगस हमला कर रहा है।
रक्त संचार में दिक्कत से ऐसी तकलीफ
मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल के ईएनटी विभाग के हेड डॉ. संजीव बधवार बताते हैं कि भारत में ब्लैक फंगस के मामले दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अधिक है लेकिन आए सभी जगह हैं। वे बताते हैं कि विदेशों कोरोना से मरे लोगों के शवों के पोस्टमार्टम में पता चला है कि संक्रमण से रक्त संचार प्रभावित होता है। इससे उत्तकों के खराब होने से नेक्रसेसिस यानी उस जगह कालापन हो जाता है। शवों में फंगस देखा गया है। कोरोना संक्त्रस्मण के कारण ब्लड क्लॉट से शरीर के उत्तक खराब होते हैं जिसपर फंगस हमला कर रहा है। संभव है कि इसी कारण मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
संदेह : क्या दवा के रूप में जिंक फंगस के पनपने की वजह
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि बैक्टीरिया शरीर से आयरन (लोहा) खाता है। फंगस को भी जीवित रहने के लिए जिंक समेत अन्य सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की जरूरत होती है। इसी लिए शरीर जिंक समेत अन्य पोषक तत्त्वों को छुपाकर रखता है ताकि वो आसानी से फंगस को न मिले।

अब दवाई के रूप में जिंक…

डॉ. मिश्रा का कहना है कि कोरोना के इलाज में मरीजों को चार से पांच दिन या इससे अधिक समय तक इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जिंक की गोलियां दी जा रही हैं। संभावना है कि ये जिंक ब्लैक फंगस को शरीर के भीतर पनपने का एक कारण हो सकता है। जिंक सिर्फ ब्लैक ही नहीं दूसरे तरह के पैरासाइट्स के पनपने की भी वजह बन सकता है। ऐसे में दवाओं के इस्तेमाल को लेकर सावधानी और सही सलाह जरूरी है।
मेडिकल ऑक्सीजन की गुणवत्ता पर संदेह…
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के हेड डॉ. परवेज खान का कहना है कि महामारी की पहली लहर में ब्लैक फंगस न के बराबर था। मेडिकल ऑक्सीजन का संकट भी नहीं था। दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन का संकट गहराया तो औद्योगिक ईकाइयों में इस्तेताल होने वाला ऑक्सीजन भी इस्तेमाल हुआ है। मेडिकल ऑक्सीजन की शुद्धता 99.5 फीसदी तक होती है। अस्पतालों में मांग बढ़ने के साथ आई ऑक्सीजन की शुद्धता क्या थी उस पर भी फंगस के लिए संदेह कर सकते हैं।

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ब्लैक फंगस पर संदेह इससे भी गहराया

भारत मधुमेह की राजधानी है, यहां 30 से 40 फीसदी ऐसे लोग जिन्हें पता ही नहीं है कि उन्हें मधुमेह है।
ऐसे लोगों को स्टेरॉयड की डोज दी जा रही है, शुगर लेवल बढ़ जा रहा है जो फंगस का एक कारण हो सकता है।
वार्ड, एचडीयू, आईसीयू, वेंटिलेटर यूनिट की नियमित साफ सफाई जरूरी है। गंदगी से फंगस को बल मिल सकता है।
ऑक्सीजन मास्क का गलत इस्तेमाल यानी एक मरीज का ऑक्सीजन दूसरे मरीज को लगाना भी एक बड़ा कारण।
आरटी-पीसीआर सैंपल लेने के लिए इस्तेमाल हो रही कॉटन स्टिक की हाईजीन पर भी संदेह किया जा सकता है।

क्यों अस्पतालों में तेजी से बढ़ रहा फंगस
लखनऊ के लोहिया संस्थान के फिजिशियन डॉ. संदीप चौधरी बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों में फंगस के मामले अधिक दिख रहे हैं। ऑक्सीजन डिलीवरी सिस्टम में गंदगी, उक्त ऑक्सीजन में पर्याप्त मात्रा में नमी का न होना, ऑक्सीजन पाइपलाइन में गंदगी भी इसका एक कारण हो सकता है। इसके अलावा वेंटिलेटर और आईसीयू मरीजों को लगी नली (ट्यूब) की समय पर सफाई न होने या बदलने से भी फंगस का खतरा संभव है।फंगस को खत्म करना मुश्किल हो जाएगाविशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना भविष्य में खत्म हो सकता है लेकिन फंगस ने अपना दायरा बढ़ा लिया तो इसे खत्म करना मुश्किल हो जाएग। फंगस का अंत तभी संभव है जब इसके पनपने का सही कारण पता चले और समय रहते उसका निदान हो।नाक की क्रीब्रीफॉर्म प्लेट तो नहीं हो रही चोटिलडॉ. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि न्यूरो के मरीजों को छह से आठ महीने तक स्टेरॉयड चलाई है। उनमें ऐसा कोई संक्रमण नहीं दिखा है। अचानक केस बढ़ने से आंशका की फेहरिस्त भी बढ़ रही है। वह बताते हैं कि नाक में क्रीब्रीफॉर्म प्लेट (नाक की छत) होती है। आरटी-पीसीआर का सैंपल लेते वक्त अगर गलती से चोटिल हो जाए तो फंगस का खतरा बढ़ सकता है क्योंकि फंगस चोटिल स्थानों पर आसानी से अपनी जगह बनाता है। सवाल ये है कि फंगस के जो भी मामले अब तक सामने आए हैं उनमें क्या क्रीब्रीफॉर्म प्लेट चोटिल हुई है, इसका पता लगाना जरूरी है। वे बताते हैं कि हेड इंजरी होने पर सबसे पहले यही हड्डी टूटती है।गंदे पानी से तो नहीं कर रहें जलनीति क्रियाएम्स ऋषिकेश के ईएनटी विभाग के प्रो. एसपी अग्रवाल बताते हैं कि फंगस से बचाव के लिए जल नीति क्रिया कारगर है। इससे नाक को साफ रखा जा सकता है। डर और भय के बीच लोग जलनीति क्रिया तो कर रहे हैं लेकिन ध्यान देने की बात है कि ये सामान्य या गंदे पानी से तो नहीं कर रहे हैं। जलनीति क्रिया के लिए पानी को अच्छे से उबाल लें और ठंडा करने के बाद ही इस प्रक्रिया को करें।सुझाव…. ब्लैक फंगस को भयावह महामारी होने से कैसे रोकेंविशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस महामारी को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बॉडी का गठन हो, उसके निर्देशों के मुताबिक कोरोना मरीजों के लिए दवा दी जाए। मनमाने ढंग से दवा का इस्तेमाल बंद हो। मेडिकल ऑक्सीजन की गुणवत्ता इस्तेमाल से पहले जांची जाए। ब्लैक फंगस की तह तक जाने के लिए सभी अनुमानित कारणों के आधार पर एक विशेष पैनल नामित किया जाए जो शोध के जरिए इसकी तह तक पहुंचे।पैन्क्रियाज को प्रभावित तो नहीं कर रहा वायरसमहाराष्ट्र के डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल रिसर्च एंड एजुकेशन के निदेशक डॉ. तात्यराव लहाने का कहना है कि कोरोना के इलाज को ब्लैक फंगस के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। संभव है कि कोविड-19 म्यूटेंट पैन्क्रियाज में मौजूद बीटा सेल्स को प्रभावित कर रहा है। इस कारण ब्लड शुगर लेवल में बढ़ोतरी हो रही है और कम इम्युनिटी के कारण ब्लैक फंगस शरीर पर हमला बोल अपना दायरा बढ़ा रहा है।

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ब्लैक फंगस पर संदेह इससे भी गहराया

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राजनीति: शरद पवार के मन में कौन सी खिचड़ी पक रही है, क्या पीके के साथ मिल कर हो रही महागठबंधन बनाने की तैयारी?

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सार
शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मायावती, अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है…

शरद पवार और प्रशांत किशोर की मुलाकात
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।
क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।
होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।

क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।

ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।
संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।

होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।

क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

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महाराष्ट्र में कोरोना : 24 घंटे में 6270 नए मामले, 21 लोगों में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, 94 की मौत

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एएनआई, मुुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:59 PM IST

सार
महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है।  

कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : PTI

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महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

विस्तार

महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।

बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

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कोलकाता: ममता का गंभीर आरोप, कहा- यूपी से बहकर बंगाल में आ रहीं लाशें, राज्य में फैल सकता है कोरोना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 21 Jun 2021 09:44 PM IST

सार
ममता ने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
– फोटो : ANI

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।ममता को हाईकोर्ट से झटकावहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। 

बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।
ममता को हाईकोर्ट से झटका

वहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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