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कैसे लड़ेंगे कोरोना से: मई में अभी तक 13 दिन मृतकों की संख्या चार हजार के ऊपर रही

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 26 May 2021 09:58 PM IST

सार
देश इस समय कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। दूसरी लहर के दौरान जहां दैनिक मामलों की संख्या में नए रिकॉर्ड बने तो इस बीमारी के चलते होने वाली मौतों का आंकड़ा भी तेजी से ऊपर गया। हालांकि, रोज सामने आने वाले मामलों में कुछ कमी आई है लेकिन मौतों की संख्या नीचे नहीं जा रही। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं मई महीने में रोज होने वाली मौतों के आंकड़े।

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एक मई से 25 मई के बीच 13 दिन ऐसे रहे हैं जब कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या चार हजार के पार रही है। 18 मई को यह आंकड़ा सबसे अधिक रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस दिन 4529 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। वहीं, दो मई को सबसे कम मौतें दर्ज की गई थीं। दो मई को यह संख्या 3417 रही थी। 25 मई को देश में कोरोना के कुल दो लाख आठ हजार 921 नए मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा इस दिन कोरोना के 4157 मरीजों की मौत हुई। उल्लेखनीय है कि अब देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर दो करोड़ 71 लाख 57 हजार 795 हो गई। वहीं, देश में अबतक तीन लाख 11 हजार 726 लोगों की मौत हो चुकी है।

तारीख
मृतकों की संख्या

01 मई
3689

02 मई
3417

03 मई
3449

04 मई
3780

05 मई
3980

06 मई
3915

07 मई
4187

08 मई
4077

09 मई
3769

10 मई
3876

11 मई
4205

12 मई
4120

13 मई
4000

14 मई
3890

15 मई
4077

16 मई
4106

17 मई
4329

18 मई
4529

19 मई
3874

20 मई
4209

21 मई
4194

22 मई
3741

23 मई
4454

24 मई
3511

25 मई
4157

 
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बुधवार सुबह आठ बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को एक दिन में सर्वाधिक 22 लाख 17 हजार 320 नमूनों की जांच की गई। देश में अभी तक कुल 33 करोड़ 48 लाख 11 हजार 496 नमूनों की जांच की गई है और नमूनों के संक्रमित आने की दर 9.42 फीसदी है।देश में अभी 24 लाख 95 हजार 591 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 9.19 फीसदी है। वहीं, कुल दो करोड़ 43 लाख 50 हजार 816 लोग अभी तक संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं और मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 89.66 फीसदी है। कोविड-19 से मृत्यु दर 1.15 फीसदी है।

विस्तार

एक मई से 25 मई के बीच 13 दिन ऐसे रहे हैं जब कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या चार हजार के पार रही है। 18 मई को यह आंकड़ा सबसे अधिक रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस दिन 4529 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई। वहीं, दो मई को सबसे कम मौतें दर्ज की गई थीं। दो मई को यह संख्या 3417 रही थी। 

25 मई को देश में कोरोना के कुल दो लाख आठ हजार 921 नए मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा इस दिन कोरोना के 4157 मरीजों की मौत हुई। उल्लेखनीय है कि अब देश में संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर दो करोड़ 71 लाख 57 हजार 795 हो गई। वहीं, देश में अबतक तीन लाख 11 हजार 726 लोगों की मौत हो चुकी है।

मई में किस दिन हुई कितने लोगों की मौत

तारीख
मृतकों की संख्या

01 मई
3689

02 मई
3417

03 मई
3449

04 मई
3780

05 मई
3980

06 मई
3915

07 मई
4187

08 मई
4077

09 मई
3769

10 मई
3876

11 मई
4205

12 मई
4120

13 मई
4000

14 मई
3890

15 मई
4077

16 मई
4106

17 मई
4329

18 मई
4529

19 मई
3874

20 मई
4209

21 मई
4194

22 मई
3741

23 मई
4454

24 मई
3511

25 मई
4157

 

मंगलवार को ऐसे रहे हालात

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बुधवार सुबह आठ बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को एक दिन में सर्वाधिक 22 लाख 17 हजार 320 नमूनों की जांच की गई। देश में अभी तक कुल 33 करोड़ 48 लाख 11 हजार 496 नमूनों की जांच की गई है और नमूनों के संक्रमित आने की दर 9.42 फीसदी है।देश में अभी 24 लाख 95 हजार 591 लोगों का कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जो कुल मामलों का 9.19 फीसदी है। वहीं, कुल दो करोड़ 43 लाख 50 हजार 816 लोग अभी तक संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं और मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 89.66 फीसदी है। कोविड-19 से मृत्यु दर 1.15 फीसदी है।

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मई में किस दिन हुई कितने लोगों की मौत

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

विस्तार

कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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