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इतिहास: भारत की आजादी हेतु करते रहे संघर्ष, फिर क्यों ली जापान की नागरिकता, जानिए इस वीर की कहानी

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सार
26 मई 1886 को बंगाल के बर्धमान जिले के सुबालदह नामक एक गांव में रास बिहारी बोस का जन्म हुआ था।

रास बिहारी बोस
– फोटो : सोशल मीडिया

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अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध में ‘गदर’ एवं ‘आजाद हिन्द फौज’ का संगठन बनाया। दिल्ली में भारत के तत्कालीन वाइसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाई, जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना की। भारत को आजादी दिलाने के लिए कुछ इसी प्रकार भारतीय क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने अपनी पूरी जिंदगी अंग्रेजों के हुकूमत के खिलाफ लड़ते रहे। आज उनके 135वें जन्मदिवस के अवसर पर आई जानते उनके संघर्ष के कुछ खास किस्से। बंगाल के बर्धमान जिले में हुआ था जन्म26 मई 1886 को बंगाल के बर्धमान जिले के सुबालदह नामक एक गांव में रास बिहारी बोस का जन्म हुआ था। मात्र तीन वर्ष की आयु में रास बिहारी ने अपनी मां को खो दिया। मां के निधन के पश्चात रास बिहारी की मामी ने ही उनका पालन –पोषण किया। चन्दननगर के विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा हासिल करने के पश्चात रास बिहारी चिकित्सा शाष्त्र और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए क्रमश: फ्रांस और जर्मनी चले गए। 
वर्ष 1905 में भारत के तत्कालीन वाइसराय कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया था। इसी दौरान रास बिहारी पहली बार क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े। विभाजन को रोकने के लिए अरबिंदो घोष और जतिन बनर्जी के साथ मिलकर रास बिहारी ने बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजी हुकूमत की मनसा का खुलासा करने का प्रयास किया। इसी दौरान उनका परिचय बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारियों जैसे युगान्तर क्रान्तिकारी संगठन, संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) और आर्य समाजी क्रांतिकारियों से हुआ।
1911 तक आते-आते रास बिहारी के अंदर का क्रांतिकारी जग चुका था। दिसंबर माह की बात है ‘दिल्ली दरबार’ के बाद तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड हार्डिंग की सवारी दिल्ली के चांदनी चौक में निकाली जा रही थी। तब रास बिहारी ने उन पर बम फेंकने की योजना बनाई। युगांतर दल के सदस्य बसन्त कुमार विश्वास ने हार्डिंग की बग्गी पर बम फेंका, लेकिन निशाना चूक गया और पुलिस ने बसंत तो पकड़ लिया। बम की वजह से मची भकदड़ का फायेदा उठाकर रास बिहार पुलिस से बच निकले और रातों-रात रेलगाड़ी से देहरादून चले गए। बम फेंकने के अगले ही दिन अपने कार्यालय में इस तरह काम करने जैसे कुछ हुआ ही न हो। अंग्रेजी प्रशासन को उनपर कोई शक न हो इसलिए उन्होंने देहरादून में ही सभी बुलाई और अंग्रेजों को दिखाने के लिए वाइसराय हार्डिंग पर हुए हमले की निंदा करने लगे।
वर्ष 1913 की बात है, बंगाल बाढ़ आने की वजह से रास बिहारी राहत कार्य में जुट गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात जतिन मुखर्जी से हुई।  उन्होंने रास बिहारी के अंदर एक नया जोश भर दिया। जिसके बाद वह दोगुने उत्साह से साथ काम करने लगे। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत को आजादी दिलाने के लिए गदर की योजना बनाई। वर्ष 1915 के फरवरी माह में उन्होंने अपने भरोसेमंद क्रांतिकारियों को सेना से युद्ध करने की योजना बनाई। उनका मानना था कि प्रथम विश्वयुद्ध के वजह से अधिकतर सैनिक देश से बाहर गए हुए हैं, ऐसे में देश में मौजूद सैनिकों के साथ युद्ध करना सरल हो सकता है। किंतु उनकी यह योजना असफल साबित हुई। परिणामस्वरूप कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 
सेना से युद्ध के बाद से ही ब्रिटिश पुलिस रास बिहारी को ढूंढने लगी। जिसकी वजह से वर्ष 1915 के जून माह में उन्हें भारत से भागना पड़ा। रास बिहारी छुपने के लिए जापान में राजा पी. एन. टैगोर के नाम से रहने लगे और वहां रहकर भारत की आजादी के लिए काम करने लगे। जापान में जापानी क्रान्तिकारी मित्रों के साथ मिलकर भारत को आजाद कराने के लिए काम करते रहे। इसी दौरान उन्होंने अंग्रेजी अध्यापन, लेखन और पत्रकारिता का कार्य किया। ‘न्यू एशिया’ नामक समाचार-पत्र शुरू किया और जापानी भाषा में कुल 16 पुस्तकें लिखीं। यहां तक कि उन्होंने हिन्दू धर्म ग्रन्थ ‘रामायण’ का जापानी भाषा में अनुवाद किया। 
सन 1916 में रास बिहारी बोस ने प्रसिद्ध पैन एशियाई समर्थक सोमा आइजो और सोमा कोत्सुको की पुत्री से विवाह कर वर्ष 1923 में जापानी नागरिकता हासिल की। उन्होंने इस दौरान भारतीय स्वाधीनता आंदोलन और राष्ट्रवादियों के पक्ष में जापानी अधिकारियों का समर्थन पाने की कोशिश की और वे इसमें सफल भी हुए। उन्होंने मार्च 1942 में टोक्यो में ‘इंडियन इंडिपेंडेंस लीग’ की स्थापना की और भारत की स्वाधीनता के लिए एक सेना बनाने का प्रस्ताव भी पेश किया।
वर्ष 1942 में रास बिहारी ने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की सैन्य शाखा के रूप इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) का गठन किया और सुभाषचंद्र बोस को अध्यक्ष बनाया गया।। जापानियों की सहायता से नेताजी की फौजें चटगांव, कोहिमा, इंफाल तक जा पहुंचीं। लेकिन जापान पर हुए आक्रमण ने विश्वयुद्ध की दिशा बदल दी। जापानी सैन्य कमान ने रास बिहारी बोस और जनरल मोहन सिंह को आईएनए के नेतृत्व से हटा दिया। लेकिन आईएनए का संगठनात्मक ढांचा बना रहा। 21 जनवरी 1945 को रास बिहार का निधन हो गया। उनके निधन के चार साल बाद आजाद भारत का उनका सपना पूरा हुआ और सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के नाम से आईएनए का पुनर्गठन किया। मरणोपरांत के बाद जापानी सरकार द्वारा रास बिहारी को जापान का तीसरा सर्वोच्च पुरस्कार ‘आर्डर आफ द राइजिंग सन’ से सम्मानित किया गया।

विस्तार

अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध में ‘गदर’ एवं ‘आजाद हिन्द फौज’ का संगठन बनाया। दिल्ली में भारत के तत्कालीन वाइसराय लार्ड चार्ल्स हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना बनाई, जापान जाकर इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आजाद हिंद फौज की स्थापना की। भारत को आजादी दिलाने के लिए कुछ इसी प्रकार भारतीय क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने अपनी पूरी जिंदगी अंग्रेजों के हुकूमत के खिलाफ लड़ते रहे। आज उनके 135वें जन्मदिवस के अवसर पर आई जानते उनके संघर्ष के कुछ खास किस्से। 

बंगाल के बर्धमान जिले में हुआ था जन्म

26 मई 1886 को बंगाल के बर्धमान जिले के सुबालदह नामक एक गांव में रास बिहारी बोस का जन्म हुआ था। मात्र तीन वर्ष की आयु में रास बिहारी ने अपनी मां को खो दिया। मां के निधन के पश्चात रास बिहारी की मामी ने ही उनका पालन –पोषण किया। चन्दननगर के विद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा हासिल करने के पश्चात रास बिहारी चिकित्सा शाष्त्र और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए क्रमश: फ्रांस और जर्मनी चले गए। 

1905 में पहली बार इस वजह से किया विरुद्ध प्रदर्शन

वर्ष 1905 में भारत के तत्कालीन वाइसराय कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया था। इसी दौरान रास बिहारी पहली बार क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़े। विभाजन को रोकने के लिए अरबिंदो घोष और जतिन बनर्जी के साथ मिलकर रास बिहारी ने बंगाल विभाजन के पीछे अंग्रेजी हुकूमत की मनसा का खुलासा करने का प्रयास किया। इसी दौरान उनका परिचय बंगाल के प्रमुख क्रांतिकारियों जैसे युगान्तर क्रान्तिकारी संगठन, संयुक्त प्रान्त (वर्तमान उत्तर प्रदेश) और आर्य समाजी क्रांतिकारियों से हुआ।

तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड हॉर्डिंग की बग्गी पर फेंका बम

1911 तक आते-आते रास बिहारी के अंदर का क्रांतिकारी जग चुका था। दिसंबर माह की बात है ‘दिल्ली दरबार’ के बाद तत्कालीन वाइसराय लॉर्ड हार्डिंग की सवारी दिल्ली के चांदनी चौक में निकाली जा रही थी। तब रास बिहारी ने उन पर बम फेंकने की योजना बनाई। युगांतर दल के सदस्य बसन्त कुमार विश्वास ने हार्डिंग की बग्गी पर बम फेंका, लेकिन निशाना चूक गया और पुलिस ने बसंत तो पकड़ लिया। बम की वजह से मची भकदड़ का फायेदा उठाकर रास बिहार पुलिस से बच निकले और रातों-रात रेलगाड़ी से देहरादून चले गए। बम फेंकने के अगले ही दिन अपने कार्यालय में इस तरह काम करने जैसे कुछ हुआ ही न हो। अंग्रेजी प्रशासन को उनपर कोई शक न हो इसलिए उन्होंने देहरादून में ही सभी बुलाई और अंग्रेजों को दिखाने के लिए वाइसराय हार्डिंग पर हुए हमले की निंदा करने लगे।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बनाई गदर की योजना

वर्ष 1913 की बात है, बंगाल बाढ़ आने की वजह से रास बिहारी राहत कार्य में जुट गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात जतिन मुखर्जी से हुई।  उन्होंने रास बिहारी के अंदर एक नया जोश भर दिया। जिसके बाद वह दोगुने उत्साह से साथ काम करने लगे। उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत को आजादी दिलाने के लिए गदर की योजना बनाई। वर्ष 1915 के फरवरी माह में उन्होंने अपने भरोसेमंद क्रांतिकारियों को सेना से युद्ध करने की योजना बनाई। उनका मानना था कि प्रथम विश्वयुद्ध के वजह से अधिकतर सैनिक देश से बाहर गए हुए हैं, ऐसे में देश में मौजूद सैनिकों के साथ युद्ध करना सरल हो सकता है। किंतु उनकी यह योजना असफल साबित हुई। परिणामस्वरूप कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। 

इस वजह से जापान में नाम बदलकर रहने लगे रास बिहारी

सेना से युद्ध के बाद से ही ब्रिटिश पुलिस रास बिहारी को ढूंढने लगी। जिसकी वजह से वर्ष 1915 के जून माह में उन्हें भारत से भागना पड़ा। रास बिहारी छुपने के लिए जापान में राजा पी. एन. टैगोर के नाम से रहने लगे और वहां रहकर भारत की आजादी के लिए काम करने लगे। जापान में जापानी क्रान्तिकारी मित्रों के साथ मिलकर भारत को आजाद कराने के लिए काम करते रहे। इसी दौरान उन्होंने अंग्रेजी अध्यापन, लेखन और पत्रकारिता का कार्य किया। ‘न्यू एशिया’ नामक समाचार-पत्र शुरू किया और जापानी भाषा में कुल 16 पुस्तकें लिखीं। यहां तक कि उन्होंने हिन्दू धर्म ग्रन्थ ‘रामायण’ का जापानी भाषा में अनुवाद किया। 

टोक्यो में की इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना

सन 1916 में रास बिहारी बोस ने प्रसिद्ध पैन एशियाई समर्थक सोमा आइजो और सोमा कोत्सुको की पुत्री से विवाह कर वर्ष 1923 में जापानी नागरिकता हासिल की। उन्होंने इस दौरान भारतीय स्वाधीनता आंदोलन और राष्ट्रवादियों के पक्ष में जापानी अधिकारियों का समर्थन पाने की कोशिश की और वे इसमें सफल भी हुए। उन्होंने मार्च 1942 में टोक्यो में ‘इंडियन इंडिपेंडेंस लीग’ की स्थापना की और भारत की स्वाधीनता के लिए एक सेना बनाने का प्रस्ताव भी पेश किया।

जापानी सैन्य ने रास बिहारी को आईएनए के नेतृत्व से हटाया

वर्ष 1942 में रास बिहारी ने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की सैन्य शाखा के रूप इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) का गठन किया और सुभाषचंद्र बोस को अध्यक्ष बनाया गया।। जापानियों की सहायता से नेताजी की फौजें चटगांव, कोहिमा, इंफाल तक जा पहुंचीं। लेकिन जापान पर हुए आक्रमण ने विश्वयुद्ध की दिशा बदल दी। जापानी सैन्य कमान ने रास बिहारी बोस और जनरल मोहन सिंह को आईएनए के नेतृत्व से हटा दिया। लेकिन आईएनए का संगठनात्मक ढांचा बना रहा। 21 जनवरी 1945 को रास बिहार का निधन हो गया। उनके निधन के चार साल बाद आजाद भारत का उनका सपना पूरा हुआ और सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिन्द फौज के नाम से आईएनए का पुनर्गठन किया। मरणोपरांत के बाद जापानी सरकार द्वारा रास बिहारी को जापान का तीसरा सर्वोच्च पुरस्कार ‘आर्डर आफ द राइजिंग सन’ से सम्मानित किया गया।

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1905 में पहली बार इस वजह से किया विरुद्ध प्रदर्शन

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महाराष्ट्र: अकेले चुनाव लड़ने वालों को जनता चप्पल मारेगी, उद्धव के इस बयान पर छिड़ी सियासी जंग

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 20 Jun 2021 11:52 AM IST

सार
महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस के बीच खींचतान और तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के स्थापना दिवस के मौके पर दिए गए बयान के बाद सियासी हलचल और तेज हो गई है। 

उद्धव ठाकरे और नाना पटोले
– फोटो : अमर उजाला

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महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में अनबन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। शनिवार को पार्टी के 55वें स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बयान के बाद से गठबंधन सरकार में खटास की अटकलें और तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के बयान के बाद शिवसेना और कांग्रेस के बीच दरार की खाई और गहरी होती नजर आ रही है।मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर कहा कि हिंदुत्व और मराठा की अस्मिता पार्टी की प्राथमिकता है। उन्होंने इस मौके पर कांग्रेस का नाम लिए बिना, उस पर हमला बोला है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, जनता उन्हें चप्पलों से मारेगी। बता दें कि नाना पटोले कई बार अकेले चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। वहीं दादर इलाके में शिवसेना और भाजपा समर्थकों के बीच हुई झड़पों के स्पष्ट संदर्भ में, ठाकरे ने कहा कि जब कोई शोर करता है तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ता धमाकेदार जवाब देते हैं। उन्होंने किसी पार्टी या घटना का उल्लेख किए बिना कहा, ‘एक संदेश चारों ओर जा रहा है कि अगर कोई शोर करता है, तो आप धमाकेदार जवाब देते हैं। मुझे यकीन है कि आप जानते हैं कि यह संदेश पिछले कुछ दिनों में क्यों प्रसारित हो रहा है।’ ठाकरे ने कहा कि सड़कों पर खूनखराबा शिवसेना कार्यकर्ताओं की असली पहचान नहीं है। लेकिन एक सच्चा शिवसेना कार्यकर्ता अन्याय का सामना करने वालों की मदद करने के लिए दौड़ता है। जिन्होंने हमारे खिलाफ आरोप लगाए, क्या वे ऐसे काम के लिए जाने जाते हैं? 

संजय राउत का बयान
उद्धव ठाकरे के बयान के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी मुख्यमंत्री की बात को दोहराते हुए कहा कि जो लोग चुनाव अकेले लड़ने की बात कर रहे हैं, वो लड़ सकते हैं। संजय राउत ने कहा कि क्या हम चुपचाप बैठकर देखेंगे? जो लोग अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं, वो लड़ सकते हैं। शिवसेना ने अपने बल पर राजनैतिक युद्ध लड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के समय भले ही गठबंधन हो सकता है लेकिन चुनाव अपने बल पर लड़ा जाता है। संजय राउत ने कहा कि चाहे ये मुद्दा महाराष्ट्र की साख का हो या शिवसेना के अस्तित्व का हो, अगर हमें लड़ना होगा, तो हम लड़ेंगे। 
 

नाना पटोले ने अकेले चुनाव लड़ने की बात कही 
 बता दें कि पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले लगातार बयान दे रहे हैं कि महाराष्ट्र का अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस अकेले ही लड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर आलाकमान फैसला लेता है तो वह मुख्यमंत्री का चेहरा बनने को तैयार हैं। पटोले के इस बयान के बाद से ही महाराष्ट्र की सियासी हलचल और बढ़ गई है। 

विस्तार

महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार में अनबन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। शनिवार को पार्टी के 55वें स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बयान के बाद से गठबंधन सरकार में खटास की अटकलें और तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री के बयान के बाद शिवसेना और कांग्रेस के बीच दरार की खाई और गहरी होती नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर कहा कि हिंदुत्व और मराठा की अस्मिता पार्टी की प्राथमिकता है। उन्होंने इस मौके पर कांग्रेस का नाम लिए बिना, उस पर हमला बोला है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि जो लोग अकेले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, जनता उन्हें चप्पलों से मारेगी। बता दें कि नाना पटोले कई बार अकेले चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। 

वहीं दादर इलाके में शिवसेना और भाजपा समर्थकों के बीच हुई झड़पों के स्पष्ट संदर्भ में, ठाकरे ने कहा कि जब कोई शोर करता है तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ता धमाकेदार जवाब देते हैं। उन्होंने किसी पार्टी या घटना का उल्लेख किए बिना कहा, ‘एक संदेश चारों ओर जा रहा है कि अगर कोई शोर करता है, तो आप धमाकेदार जवाब देते हैं। मुझे यकीन है कि आप जानते हैं कि यह संदेश पिछले कुछ दिनों में क्यों प्रसारित हो रहा है।’ ठाकरे ने कहा कि सड़कों पर खूनखराबा शिवसेना कार्यकर्ताओं की असली पहचान नहीं है। लेकिन एक सच्चा शिवसेना कार्यकर्ता अन्याय का सामना करने वालों की मदद करने के लिए दौड़ता है। जिन्होंने हमारे खिलाफ आरोप लगाए, क्या वे ऐसे काम के लिए जाने जाते हैं? 

संजय राउत का बयान

उद्धव ठाकरे के बयान के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी मुख्यमंत्री की बात को दोहराते हुए कहा कि जो लोग चुनाव अकेले लड़ने की बात कर रहे हैं, वो लड़ सकते हैं। संजय राउत ने कहा कि क्या हम चुपचाप बैठकर देखेंगे? जो लोग अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं, वो लड़ सकते हैं। शिवसेना ने अपने बल पर राजनैतिक युद्ध लड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के समय भले ही गठबंधन हो सकता है लेकिन चुनाव अपने बल पर लड़ा जाता है। संजय राउत ने कहा कि चाहे ये मुद्दा महाराष्ट्र की साख का हो या शिवसेना के अस्तित्व का हो, अगर हमें लड़ना होगा, तो हम लड़ेंगे। 

 

It was the party’s 55th foundation day yesterday. CM and our party chief told the people who are speaking of contesting elections alone in Maharashtra, that if they do that what will we do? Will we keep sitting? Those who want to contest, let them do it: Shiv Sena MP Sanjay Raut pic.twitter.com/ebMW4TDbEs

— ANI (@ANI) June 20, 2021

नाना पटोले ने अकेले चुनाव लड़ने की बात कही 

 बता दें कि पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले लगातार बयान दे रहे हैं कि महाराष्ट्र का अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस अकेले ही लड़ेगी। उन्होंने कहा कि अगर आलाकमान फैसला लेता है तो वह मुख्यमंत्री का चेहरा बनने को तैयार हैं। पटोले के इस बयान के बाद से ही महाराष्ट्र की सियासी हलचल और बढ़ गई है।
 

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बड़ी खबर: सर्वदलीय बैठक में नहीं शामिल होंगी महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला करेंगे गुपकार का नेतृत्व

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 20 Jun 2021 12:22 PM IST

सार
केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 

पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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केंद्र सरकार इस महीने 24 जून को जम्मू-कश्मीर की सभी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ बातचीत करेगी। इसमें प्रदेश के 14 नेताओं को बुलाए जाने की चर्चा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होंगी। पीडीपी ने यह निर्णय लिया है कि पीएजीडी(पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन) का नेतृत्व करते हुए नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला बैठक में शामिल होंगे।पीडीपी प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने बताया कि दिल्ली में सर्वदलीय बैठक से पहले राजनीतिक मामलों की समिति(पीएसी) की आज बैठक हुई। इसमें सभी सदस्यों ने तय किया है कि इस संबंध में अंतिम फैसला महबूबा मुफ्ती ही लेंगी। उन्होंने कहा कि दो दिन में पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन की बैठक होगी। इस मामले पर वहां भी चर्चा होगी।शनिवार को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि इस बैठक के संबंध में उनके पास एक कॉल आई है। लेकिन अभी तक औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मैं उसी पर चर्चा और बैठक में भाग लेने या न लेने पर निर्णय करने के लिए कल पीएसी की बैठक करूंगी।बताया जा रहा है कि यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होगी। जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेता रहेंगे। इस बैठक के बारे में जब माकपा नेता और पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डेक्लेरेशन के प्रवक्ता एमवाई तरिगामी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, हमें सरकार से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि अगर ऐसा कुछ होता है तो इसका स्वागत किया जाएगा। तरिगामी ने कहा, हमने केंद्र के साथ सार्थक बातचीत के लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं। इस अलायंस में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी भी हैं, जिसका गठन जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाए जाने और उसे केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद किया गया था।यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: अमरनाथ यात्रा को लेकर आतंकी धमकी, बढ़ाई गई सुरक्षा, पुलिस ने कही ये बात
अधिकारियों ने कहा कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के संसद में पारित होने के तुरंत बाद जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई के नेतृत्व में बना परिसीमन आयोग अपने काम में तेजी लाएगा और अपनी रिपोर्ट जल्द सौंपेगा। आयोग को फरवरी 2020 में स्थापित किया गया था और इस वर्ष मार्च में एक वर्ष का विस्तार दिया गया है।

विस्तार

केंद्र सरकार इस महीने 24 जून को जम्मू-कश्मीर की सभी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ बातचीत करेगी। इसमें प्रदेश के 14 नेताओं को बुलाए जाने की चर्चा है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं होंगी। पीडीपी ने यह निर्णय लिया है कि पीएजीडी(पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन) का नेतृत्व करते हुए नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला बैठक में शामिल होंगे।

पीडीपी प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने बताया कि दिल्ली में सर्वदलीय बैठक से पहले राजनीतिक मामलों की समिति(पीएसी) की आज बैठक हुई। इसमें सभी सदस्यों ने तय किया है कि इस संबंध में अंतिम फैसला महबूबा मुफ्ती ही लेंगी। उन्होंने कहा कि दो दिन में पीपुल्स एलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन की बैठक होगी। इस मामले पर वहां भी चर्चा होगी।

शनिवार को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि इस बैठक के संबंध में उनके पास एक कॉल आई है। लेकिन अभी तक औपचारिक आमंत्रण नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मैं उसी पर चर्चा और बैठक में भाग लेने या न लेने पर निर्णय करने के लिए कल पीएसी की बैठक करूंगी।
बताया जा रहा है कि यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होगी। जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेता रहेंगे। इस बैठक के बारे में जब माकपा नेता और पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डेक्लेरेशन के प्रवक्ता एमवाई तरिगामी से पूछा गया तो उन्होंने कहा, हमें सरकार से इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि अगर ऐसा कुछ होता है तो इसका स्वागत किया जाएगा। तरिगामी ने कहा, हमने केंद्र के साथ सार्थक बातचीत के लिए अपने दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं। इस अलायंस में नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी भी हैं, जिसका गठन जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा हटाए जाने और उसे केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद किया गया था।
यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: अमरनाथ यात्रा को लेकर आतंकी धमकी, बढ़ाई गई सुरक्षा, पुलिस ने कही ये बात

परिसीमन आयोग सौंपेगा अपनी रिपोर्ट

अधिकारियों ने कहा कि जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के संसद में पारित होने के तुरंत बाद जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई के नेतृत्व में बना परिसीमन आयोग अपने काम में तेजी लाएगा और अपनी रिपोर्ट जल्द सौंपेगा। आयोग को फरवरी 2020 में स्थापित किया गया था और इस वर्ष मार्च में एक वर्ष का विस्तार दिया गया है।

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परिसीमन आयोग सौंपेगा अपनी रिपोर्ट

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दोहरी मार: कोरोना काल में महंगाई ने बिगाड़ा किचन का जायका, पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों ने सब्जियों में लगाई आग

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अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 20 Jun 2021 03:04 PM IST

सार
बढ़ती महंगाई ने कोरोनाकाल में लोगों की दोहरी परेशानी बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे है, जिससे लोगों की जेब ढीली होने लगी है। तेल के बढ़े दामों ने माल ढुलाई की कीमत भी बढ़ा दी है।  इसका  सीधा असर सब्जियों पर दिख रहा है। 

आजादपुर सब्जी मंडी
– फोटो : एएनआई

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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का सीधा असर घर की रसोई पर पड़ रहा है। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में प्याज और टमाटर की कीमतें सीधे दोगुनी तक हो गई हैं तो आसपास के इलाकों से आने वाली सब्जियों की कीमत भी 50 फीसदी तक बढ़ गई है। खाद्य तेल 200 रुपये प्रति लीटर और दालों की कीमत 120-140 रुपये प्रति किलो पहुंचने से घर का बजट  बिगड़ गया है।एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी आज़ादपुर में शनिवार 19 जून को आलू की कीमत 4 रुपये से 16 रुपये के बीच थी तो खुदरा बाज़ार में यही आलू 15 से 30 रुपये किलो में बिक रहा था। एक महीने पहले आलू की यही कीमतें लगभग आधी थीं। इसी प्रकार, प्याज की कीमतें शनिवार को 12.50 रूपये प्रति किलो से 27.50 रूपये प्रति किलो थीं जो खुदरा बाज़ार में 40 से 60 रूपये प्रति किलो तक बिक रही थीं। प्याज की कीमतों में भी लगभग दोगुने की वृद्धि हुई है। व्यापारी इसे सीधे तौर पर डीजल कीमतों में बढ़ोतरी का असर मान रहे हैं।      वहीं, आजादपुर मंडी में टमाटर की कीमत केवल 1.25 रूपये प्रति किलो से 8 रुपये प्रति किलो तक है, लेकिन खुदरा बाज़ार में टमाटर की कीमतें 15-20 रुपये प्रति किलो से लेकर 35 रुपये किलो तक है। मंडी से बाज़ार तक पहुंचने में सब्जियों के दाम कई गुना बढ़ जाते हैं।  प्रमुख सब्जियों के आसमान छूते दाम-

(दिल्ली के खुदरा बाज़ार में 20 मई और 20 जून 2021 की कीमतों में अंतर के आधार पर)  
आलू- पहले- 10-12 रु/किग्रा, अब 20-30 रु/किग्रा
प्याज- 20 रु/किग्रा से अब 40-50 रु/किग्रा
टमाटर- 10-15 रु/किग्रा से अब 20-40 रु/किग्रा
भिंडी- 20 रु/किग्रा से अब 40-50 रु/किग्रा  
तोरी- 20 रु/किग्रा से अब 40-50 रु/किग्रा
लौकी- 20 रु/किग्रा से अब 40 रु/किग्रा 
सीताफल- 20 रु/किग्रा से अब 30-40 रु/किग्रा
बैगन- 20 रुपये प्रति किलो से अब 40 रुपये प्रति किलो  

दालों-खाद्य तेलों के दाम भी आसमान पर
सब्जियों के आलावा खाद्य तेलों की कीमतों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सरसों तेल की कीमत 200 रुपये प्रति लीटर तो रिफाइंड तेलों की कीमत 180-190 से 250 रुपये प्रति लीटर तक हो गई है। दाल की कीमतें 90-100 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 120-130 रुपये प्रति किलो से प्राइम दलों की कीमत 160-200 रूपये प्रति किलो तक हो गई है।  पेट्रोल-डीजल की कीमतआज रविवार 20 जून को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 29 पैसे प्रति लीटर की बढ़त के साथ 97.22 रुपये/लीटर हो गई है तो डीजल भी 28 पैसे प्रति लीटर की बढ़त के साथ 87.97 रुपये प्रति लीटर हो चुका है। देश के अनेक हिस्सों में पेट्रोल-डीजल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो चुके हैं।

विस्तार

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का सीधा असर घर की रसोई पर पड़ रहा है। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में प्याज और टमाटर की कीमतें सीधे दोगुनी तक हो गई हैं तो आसपास के इलाकों से आने वाली सब्जियों की कीमत भी 50 फीसदी तक बढ़ गई है। खाद्य तेल 200 रुपये प्रति लीटर और दालों की कीमत 120-140 रुपये प्रति किलो पहुंचने से घर का बजट  बिगड़ गया है।

एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी आज़ादपुर में शनिवार 19 जून को आलू की कीमत 4 रुपये से 16 रुपये के बीच थी तो खुदरा बाज़ार में यही आलू 15 से 30 रुपये किलो में बिक रहा था। एक महीने पहले आलू की यही कीमतें लगभग आधी थीं। इसी प्रकार, प्याज की कीमतें शनिवार को 12.50 रूपये प्रति किलो से 27.50 रूपये प्रति किलो थीं जो खुदरा बाज़ार में 40 से 60 रूपये प्रति किलो तक बिक रही थीं। प्याज की कीमतों में भी लगभग दोगुने की वृद्धि हुई है। व्यापारी इसे सीधे तौर पर डीजल कीमतों में बढ़ोतरी का असर मान रहे हैं।      

वहीं, आजादपुर मंडी में टमाटर की कीमत केवल 1.25 रूपये प्रति किलो से 8 रुपये प्रति किलो तक है, लेकिन खुदरा बाज़ार में टमाटर की कीमतें 15-20 रुपये प्रति किलो से लेकर 35 रुपये किलो तक है। मंडी से बाज़ार तक पहुंचने में सब्जियों के दाम कई गुना बढ़ जाते हैं।  
प्रमुख सब्जियों के आसमान छूते दाम-

(दिल्ली के खुदरा बाज़ार में 20 मई और 20 जून 2021 की कीमतों में अंतर के आधार पर)  
आलू- पहले- 10-12 रु/किग्रा, अब 20-30 रु/किग्रा
प्याज- 20 रु/किग्रा से अब 40-50 रु/किग्रा
टमाटर- 10-15 रु/किग्रा से अब 20-40 रु/किग्रा
भिंडी- 20 रु/किग्रा से अब 40-50 रु/किग्रा  
तोरी- 20 रु/किग्रा से अब 40-50 रु/किग्रा
लौकी- 20 रु/किग्रा से अब 40 रु/किग्रा 
सीताफल- 20 रु/किग्रा से अब 30-40 रु/किग्रा
बैगन- 20 रुपये प्रति किलो से अब 40 रुपये प्रति किलो  

दालों-खाद्य तेलों के दाम भी आसमान पर

सब्जियों के आलावा खाद्य तेलों की कीमतों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। सरसों तेल की कीमत 200 रुपये प्रति लीटर तो रिफाइंड तेलों की कीमत 180-190 से 250 रुपये प्रति लीटर तक हो गई है। दाल की कीमतें 90-100 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 120-130 रुपये प्रति किलो से प्राइम दलों की कीमत 160-200 रूपये प्रति किलो तक हो गई है।  
पेट्रोल-डीजल की कीमत
आज रविवार 20 जून को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 29 पैसे प्रति लीटर की बढ़त के साथ 97.22 रुपये/लीटर हो गई है तो डीजल भी 28 पैसे प्रति लीटर की बढ़त के साथ 87.97 रुपये प्रति लीटर हो चुका है। देश के अनेक हिस्सों में पेट्रोल-डीजल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा हो चुके हैं।

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