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Cyclone Yaas Live: बंगाल और ओडिशा में कई जगहों पर बारिश शुरू, बिहार, झारखंड और यूपी में भी अलर्ट

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11:09 AM, 25-May-2021
ओडिशा के गृह मंत्री को बालासोर पहुंचने के दिए निर्देश
बालासोर तट पर चक्रवात यास के मद्देनजर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के गृह मंत्री को आज बालासोर पहुंचने और वहीं रहकर स्थिति की निगरानी के लिए निर्देश दिया है।
बालासोर तट पर चक्रवात यास के मद्देनज़र ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने राज्य के गृह मंत्री को आज बालासोर पहुंचने और वहीं रहकर स्थिति की निगरानी के लिए निर्देश दिया है। #CycloneYaas— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 25, 2021

10:52 AM, 25-May-2021
भुवनेश्वर में बारिश हुई
चक्रवात यास की वजह से ओडिशा के भुवनेश्वर में बारिश हुई।
Odisha’s Bhubaneswar receives rainfall due to cyclone Yaas pic.twitter.com/yUtIsgc2Ez— ANI (@ANI) May 25, 2021

10:29 AM, 25-May-2021
लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया
ओडिशा के चांदीपुर में ज़िला प्रशासन मरीन पुलिस के साथ मिलकर मछुआरों के गांवों को खाली करा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि हम सभी लोगों को दोपहर तक स्कूल और कॉलेज में बनाए गए अस्थायी आश्रय केंद्रों में शिफ्ट कर देंगे। वहां सभी के लिए खाने- पीने का इंतजाम किया गया है। वहां कोविड गाइडलाइन के हिसाब से व्यवस्था की गई है। लोगों से अपील है कि नजदीक के सुरक्षित घरों में पहुंच जाएं।
 

Odisha | Balasore district admin along with Marine Police Force  evacuating people to cyclone shelters in Chandipur
Will shift people at shelters by today afternoon.  Arrangements of sanitization & face masks are being done: Narendra Khamari, BDO Balasore#CycloneYaas pic.twitter.com/Glhs24ISsQ
— ANI (@ANI) May 25, 2021
 

10:13 AM, 25-May-2021
भुवनेश्वर में बारिश शुरू
 चक्रवात यास की वजह से भुवनेश्वर में बारिश हो रही है। 

 

#WATCH Rain lashes Digha, West Bengal as cyclone Yaas is expected to cross West Bengal-Odisha coast tomorrow pic.twitter.com/2SLm3Ej6F1

— ANI (@ANI) May 25, 2021
 

09:41 AM, 25-May-2021
एनडीआरएफ के डीजी एस.एन. प्रधान ने बताया कि चक्रवात यास के मद्देनज़र पश्चिम बंगाल में एनडीआरएफ की 10 और टीमें तैनात की गई हैं। राज्य में कुल 45 टीमें तैनात हैं।
 

10 more NDRF teams deployed in West Bengal ahead of cyclone Yaas. Total 45 teams deployed in the State: DG NDRF SN Pradhan
— ANI (@ANI) May 25, 2021
 

09:07 AM, 25-May-2021
एक लाख लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए
ओडिशा सरकार ने निचले इलाकों बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। इन जिलों में चक्रवात का खतरा ज्यादा है।

09:03 AM, 25-May-2021
कल दोपहर तक बालासोर के निकट दे सकता है दस्तक
चक्रवाती तूफान यास के उत्तरी ओडिशा के बालासोर के निकट 26 मई की दोपहर के आसपास दस्तक देने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने बताया कि इस दौरान 155 से 165 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने की उम्मीद है जो 185 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती है।

08:44 AM, 25-May-2021
26 मई की दोपहर को उत्तरी ओडिशा-बंगाल से टकराएगा चक्रवात यास
भारतीय मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 26 मई की दोपहर को चक्रवात यास उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों से टकरा सकता है। इस दौरान तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

 

Cyclonic storm Yaas is very likely to cross north Odisha-West Bengal coasts between Paradip and Sagar Island around Balasore, during noon of 26th May as a Very Severe Cyclonic Storm: India Meteorological Department (IMD)
— ANI (@ANI) May 25, 2021

08:29 AM, 25-May-2021
पश्चिम बंगाल के दीघा और पूर्व मेदिनीपुर से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा
पश्चिम बंगाल के दीघा और पूर्व मेदिनीपुर जिले में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। एनडीआरएफ की टीम ने चक्रवात यास को देखते हुए यह काम किया।

 

#WATCH People were evacuated by NDRF in East Medinipur district, Digha yesterday, ahead of #CycloneYaas. #WestBengal pic.twitter.com/o6hA44y7jF
— ANI (@ANI) May 25, 2021

08:16 AM, 25-May-2021
ओडिशा में बारिश, चक्रवात यास बुधवार को टकराएगा
चक्रवात यास के ओडिशा के बालासोर से टकराने से पहले राज्य में बारिश होने लगी। 

 

#WATCH Rain lashes Odisha’s Chandipur as cyclone Yaas is expected to make landfall at Balasore coast on May 26#Odisha pic.twitter.com/YBh696l2eC
— ANI (@ANI) May 25, 2021

08:09 AM, 25-May-2021
एनडीआरएफ की 149 टीम तैनात
एनडीआरएफ ने कुल 149 टीमों को तैयार किया है, इनमें से 99 को राज्यों के तटीय क्षेत्र में तैनात किया गया है। वहीं 50 को देश के अलग अलग हिस्सों में स्टैंडबाय में रखा गया है और जरूरत पड़ने पर इन्हें एयरलिफ्ट कर मोर्चे पर लगाया जाएगा। 52 टीमें ओडिशा, 35 बंगाल, पांच तमिलनाडु, तीन विशाखापत्तनम व झारखंड व एक अंडमान निकोबार में तैनात की गई हैं। 

07:47 AM, 25-May-2021
बिहार-यूपी में बारिश का अलर्ट
भारतीय मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि 26 मई को चक्रवात यास ओडिशा के बालासोर के पास दस्तक देगा और 26 मई को ही इसकी तीव्रता बढ़ जाएगा। हालांकि इस तूफान का असर अभी से दिखने को मिल गया है। इसे लेकर मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार समेत कई राज्यों के अधिकांश जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है।

07:35 AM, 25-May-2021
Cyclone Yaas Live: बंगाल और ओडिशा में कई जगहों पर बारिश शुरू, बिहार, झारखंड और यूपी में भी अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी कर दी कि अगले 24 घंटे में चक्रवात यास बेहद गंभीर चक्रवात तूफान में तब्दील हो जाएगा। बुधवार को यास बंगाल और ओडिशा के तट पर पहुंचेगा। चक्रवात के टकराने के बाद भारी तबाही से बचने के लिए लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। वहीं गृह मंत्रालय ने चक्रवात यास से प्रभावित होने वाले सभी राज्यों को आश्वासन दिया है कि मंत्रालय उनकी मदद के लिए 24 घंटे तैयार रहेगा। इसके अलावा शाह ने बंगाल और ओडिशा से उनके यहां ऑक्सीजन संयंत्रों पर तूफान के संभावित प्रभावों की जानकारी ली। राज्यों को कोविड अस्पतालों, जांच लैब, टीका भंडारों और ऑक्सीजन संयंत्रों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा है। बंगाल और ओडिशा देश के बड़े मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता राज्य हैं। सभी राज्यों से अपने यहां कम से कम दो दिन के लिए ऑक्सीजन का बफर स्टॉक रखने को कहा गया है।

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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