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एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप: भारत के सात पदक पक्के, आज से शुरू हो रहा टूर्नामेंट

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एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप
– फोटो : social media

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सोमवार यानी 24 मई से शुरू होने वाली एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में छोटे ड्रॉ के कारण भारत के सात पदक पक्के हो गए। महिलाओं में शीर्ष वरीयता प्राप्त छह बार की विश्व चैम्पियन एमसी मैरीकॉम (51 किग्रा), गत चैम्पियन पूजा रानी (75 किग्रा), अनुपमा (81 किग्रा से अधिक), स्वीटी (81 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा), लालबुतसाई (64 किग्रा) और मोनिका (48) सेमीफाइनल मुकाबले से अपने अभियान को शुरू करेंगे। महिलाओं के वर्ग में 10 भार वर्ग में कुल 47 मुक्केबाज भाग ले रही हैं। भारत के कुल 19 मुक्केबाज इस प्रतियोगिता में अपना कौशल दिखाएंगे। इनमें नौ पुरुष और 10 महिला मुक्केबाज शामिल हैं। इस बार विजेताओं को पुरस्कार राशि भी मिलेगी।मैरीकॉम की निगाह एक और गोल्डन पंच पर  रिंग की रानी 38 वर्षीय एमसी मैरीकॉम (51 किग्रा) दुबई में जब एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उतरेंगी तो उनकी निगाह रिकॉर्ड छठे स्वर्ण पदक पर होगी। रिकॉर्ड सातवीं बार इस चैंपियनशिप में खेलने जा रही मैरी कभी खाली नहीं लौटी हैं। वह पांच बार रिंग की रानी बनीं तो एक बार (2008) में उपविजेता रहीं। तीन बच्चों की मां मैरी की यह शायद आखिरी एशियाई चैंपियनशिप हो सकती है तो वह इसे यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगी।यहां स्वर्णिम पंच जड़कर मैरी टोक्यो ओलंपिक की अपनी तैयारियों को भी पुख्ता करना चाहेंगी। छह बार की विश्व चैंपियन मैरीकॉक के अलावा टोक्यो के लिए क्वालिफाई कर चुकीं सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा) और गत चैंपियन पूजा रानी (75 किग्रा) पर भारतीय उम्मीदें टिकी हैं। सोमवार से शुरू होने वाली इस चैंपियनशिप में 19 भारतीय मुक्केबाज चुनौती पेश करेंगे, जिसमें दस महिलाएं और नौ पुरुष शामिल हैं।   अमित और थापा भी दिखाएंगे दमओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले और गत चैंपियन अमित पंघाल (52 किग्रा) और चार बार के पदक विजेता शिव थापा (64 किग्रा) पर भी निगाह रहेगी। विश्व कप में रजत पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय पुरुष मुक्केबाज अमित इस चैंपियनशिप से टोक्यो की अपनी तैयारियां भी परखना चाहेंगे। यह ओलंपिक से पहले आखिरी अतंरराष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप है। उनके अलावा आशीष कुमार (75 किग्रा) और पूर्व पदक विजेता विकास कृष्ण (69 किग्रा) भी ओलंपिक की अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना चाहेंगे।  भारत में होनी थी चैंपियनशिपपहले यह टूर्नामेंट भारत में आयोजित किया जाना था लेकिन कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण दुबई को इसकी मेजबानी सौंपी गई। भारत सह मेजबान रहेगा। भारत के अलावा, इंडोनेशिया, ईरान, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, किर्गिस्तान, फिलीपींस और उज्बेकिस्तान आदि देश भी इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में चुनौती पेश करेंगे।ओलंपिक से पहले खामियां सुधारने का मिलेगा मौका इससे हमें यह आकलन करने का मौका मिलेगा कि ओलंपिक के लिए पहले हम किस स्थिति में हैं और हमें कहां सुधार की जरूरत है। इस लिहाज से यह प्रतियोगिता हमारे लिए बहुत  महत्वपूर्ण है। हम हमेशा जीत के लिए आते हैं। हम जानते हैं कि यह बेहद कड़ी प्रतियोगिता होगी। कई देशों ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके मुक्केबाजों को उतारा है और कई विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता हैं। लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि टीम अच्छे परिणाम हासिल करेगी। -सैंटियागो नीवा, हाई परर्फोमेंस, डायरेक्टर 400,000 डॉलर की पुरस्कार राशिअंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने प्रतियोगिता के लिए इस बार 400,000 डॉलर की पुरस्कार राशि की घोषणा की है। इसमें स्वर्ण पदक विजेता को 10,000 डालर, रजत पदक विजेता को 5000 डालर और कांस्य पदक जीतने वाले दोनों खिलाड़ियों में से प्रत्येक को 2500 डालर का पुरस्कार मिलेगा। 17 देशों के मुक्केबाज चुनौती पेश करेंगेटूर्नामेंट में 27 देशों को भाग लेना था लेकिन कोविड-19 के कारण लागू यात्रा प्रतिबंधों की वजह से इसमें सिर्फ 17 देशों के मुक्केबाज चुनौती पेश करेंगे। गत चैम्पियन अमित पंघाल (52 किग्रा) के साथ कुल छह भारतीय खिलाड़ियों को पहले दौर में बाई मिला है और वे क्वार्टरफाइनल से अपने अभियान को शुरू करेंगे।
ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले मुक्केबाजों में अमित पंघाल (52 किग्रा), पिछली बार के रजत विजेता आशीष कुमार (75 किग्रा) और पूर्व पदक विजेता विकास कृष्ण (69 किग्रा) पुरुष वर्ग में भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगे। वहीं, महिलाओं में मैरीकॉम, सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लवलीना और गत चैम्पियन पूजा रानी (75 किग्रा) पर भारतीय उम्मीदें टिकी हैं। मैरीकॉम ने पूर्व में इस प्रतियोगिता में पांच स्वर्ण पदक जीते हैं। ये चारों ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं। चार बार के पदक विजेता शिव थापा (64 किग्रा) पर भी निगाहें टिकी होंगी। वह अब तक इस प्रतियोगिता में एक स्वर्ण (2013), एक रजत (2017) और दो कांस्य पदक (2015 और 2019) जीत चुके हैं।2019 में रहा था अच्छा प्रदर्शनभारतीय मुक्केबाज शनिवार को यहां पहुंचे। विनोद तंवर (49 किग्रा) को कोविड-19 का परीक्षण पॉजिटिव आने के कारण इस प्रतियोगिता से हटना पड़ा था। दरअसल, पहले यह टूर्नामेंट भारत में आयोजित किया जाना था लेकिन कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण दुबई को इसकी मेजबानी सौंपी गई। बता दें कि भारत ने एशियाई चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2019 में थाईलैंड में किया था। तब उसने दो स्वर्ण, चार रजत और सात कांस्य सहित कुल 13 पदक जीते थे। इस बार टीम से इससे भी अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद की जा रही है।
पुरुष: अमित पंघाल (52 किग्रा), मोहम्मद हुसामुद्दीन (56 किग्रा), वरिंदर सिंह (60 किग्रा), शिव थापा (64 किग्रा), विकास कृष्ण (69 किग्रा), आशीष कुमार (75 किग्रा), सुमित सांगवान (81 किग्रा), संजीत (91 किग्रा) और नरेंद्र (+91 किग्रा)।महिला: मोनिका (48 किग्रा), एमसी मैरीकॉम (51 किग्रा), साक्षी (54 किग्रा), जैस्मीन (57 किग्रा), सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लालबुतसाई (64 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा), पूजा रानी (75 किग्रा), स्वीटी (81 किग्रा) ) और अनुपमा (+81 किग्रा)।

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सोमवार यानी 24 मई से शुरू होने वाली एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में छोटे ड्रॉ के कारण भारत के सात पदक पक्के हो गए। महिलाओं में शीर्ष वरीयता प्राप्त छह बार की विश्व चैम्पियन एमसी मैरीकॉम (51 किग्रा), गत चैम्पियन पूजा रानी (75 किग्रा), अनुपमा (81 किग्रा से अधिक), स्वीटी (81 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा), लालबुतसाई (64 किग्रा) और मोनिका (48) सेमीफाइनल मुकाबले से अपने अभियान को शुरू करेंगे। महिलाओं के वर्ग में 10 भार वर्ग में कुल 47 मुक्केबाज भाग ले रही हैं। भारत के कुल 19 मुक्केबाज इस प्रतियोगिता में अपना कौशल दिखाएंगे। इनमें नौ पुरुष और 10 महिला मुक्केबाज शामिल हैं। इस बार विजेताओं को पुरस्कार राशि भी मिलेगी।

मैरीकॉम की निगाह एक और गोल्डन पंच पर  
रिंग की रानी 38 वर्षीय एमसी मैरीकॉम (51 किग्रा) दुबई में जब एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में उतरेंगी तो उनकी निगाह रिकॉर्ड छठे स्वर्ण पदक पर होगी। रिकॉर्ड सातवीं बार इस चैंपियनशिप में खेलने जा रही मैरी कभी खाली नहीं लौटी हैं। वह पांच बार रिंग की रानी बनीं तो एक बार (2008) में उपविजेता रहीं। तीन बच्चों की मां मैरी की यह शायद आखिरी एशियाई चैंपियनशिप हो सकती है तो वह इसे यादगार बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेंगी।

यहां स्वर्णिम पंच जड़कर मैरी टोक्यो ओलंपिक की अपनी तैयारियों को भी पुख्ता करना चाहेंगी। छह बार की विश्व चैंपियन मैरीकॉक के अलावा टोक्यो के लिए क्वालिफाई कर चुकीं सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा) और गत चैंपियन पूजा रानी (75 किग्रा) पर भारतीय उम्मीदें टिकी हैं। सोमवार से शुरू होने वाली इस चैंपियनशिप में 19 भारतीय मुक्केबाज चुनौती पेश करेंगे, जिसमें दस महिलाएं और नौ पुरुष शामिल हैं।  
 
अमित और थापा भी दिखाएंगे दम
ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाले और गत चैंपियन अमित पंघाल (52 किग्रा) और चार बार के पदक विजेता शिव थापा (64 किग्रा) पर भी निगाह रहेगी। विश्व कप में रजत पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय पुरुष मुक्केबाज अमित इस चैंपियनशिप से टोक्यो की अपनी तैयारियां भी परखना चाहेंगे। यह ओलंपिक से पहले आखिरी अतंरराष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप है। उनके अलावा आशीष कुमार (75 किग्रा) और पूर्व पदक विजेता विकास कृष्ण (69 किग्रा) भी ओलंपिक की अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना चाहेंगे।
  
भारत में होनी थी चैंपियनशिप
पहले यह टूर्नामेंट भारत में आयोजित किया जाना था लेकिन कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण दुबई को इसकी मेजबानी सौंपी गई। भारत सह मेजबान रहेगा। भारत के अलावा, इंडोनेशिया, ईरान, कजाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, किर्गिस्तान, फिलीपींस और उज्बेकिस्तान आदि देश भी इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में चुनौती पेश करेंगे।

ओलंपिक से पहले खामियां सुधारने का मिलेगा मौका 

इससे हमें यह आकलन करने का मौका मिलेगा कि ओलंपिक के लिए पहले हम किस स्थिति में हैं और हमें कहां सुधार की जरूरत है। इस लिहाज से यह प्रतियोगिता हमारे लिए बहुत  महत्वपूर्ण है। हम हमेशा जीत के लिए आते हैं। हम जानते हैं कि यह बेहद कड़ी प्रतियोगिता होगी। कई देशों ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर चुके मुक्केबाजों को उतारा है और कई विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता हैं। लेकिन हमें पूरी उम्मीद है कि टीम अच्छे परिणाम हासिल करेगी। -सैंटियागो नीवा, हाई परर्फोमेंस, डायरेक्टर 
400,000 डॉलर की पुरस्कार राशि
अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने प्रतियोगिता के लिए इस बार 400,000 डॉलर की पुरस्कार राशि की घोषणा की है। इसमें स्वर्ण पदक विजेता को 10,000 डालर, रजत पदक विजेता को 5000 डालर और कांस्य पदक जीतने वाले दोनों खिलाड़ियों में से प्रत्येक को 2500 डालर का पुरस्कार मिलेगा। 
17 देशों के मुक्केबाज चुनौती पेश करेंगे
टूर्नामेंट में 27 देशों को भाग लेना था लेकिन कोविड-19 के कारण लागू यात्रा प्रतिबंधों की वजह से इसमें सिर्फ 17 देशों के मुक्केबाज चुनौती पेश करेंगे। गत चैम्पियन अमित पंघाल (52 किग्रा) के साथ कुल छह भारतीय खिलाड़ियों को पहले दौर में बाई मिला है और वे क्वार्टरफाइनल से अपने अभियान को शुरू करेंगे।

इन मुक्केबाजों पर टिकी रहेंगी निगाहें

ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले मुक्केबाजों में अमित पंघाल (52 किग्रा), पिछली बार के रजत विजेता आशीष कुमार (75 किग्रा) और पूर्व पदक विजेता विकास कृष्ण (69 किग्रा) पुरुष वर्ग में भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगे। वहीं, महिलाओं में मैरीकॉम, सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लवलीना और गत चैम्पियन पूजा रानी (75 किग्रा) पर भारतीय उम्मीदें टिकी हैं। मैरीकॉम ने पूर्व में इस प्रतियोगिता में पांच स्वर्ण पदक जीते हैं। ये चारों ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं। चार बार के पदक विजेता शिव थापा (64 किग्रा) पर भी निगाहें टिकी होंगी। वह अब तक इस प्रतियोगिता में एक स्वर्ण (2013), एक रजत (2017) और दो कांस्य पदक (2015 और 2019) जीत चुके हैं।2019 में रहा था अच्छा प्रदर्शनभारतीय मुक्केबाज शनिवार को यहां पहुंचे। विनोद तंवर (49 किग्रा) को कोविड-19 का परीक्षण पॉजिटिव आने के कारण इस प्रतियोगिता से हटना पड़ा था। दरअसल, पहले यह टूर्नामेंट भारत में आयोजित किया जाना था लेकिन कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण दुबई को इसकी मेजबानी सौंपी गई। बता दें कि भारत ने एशियाई चैंपियनशिप में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2019 में थाईलैंड में किया था। तब उसने दो स्वर्ण, चार रजत और सात कांस्य सहित कुल 13 पदक जीते थे। इस बार टीम से इससे भी अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद की जा रही है।

भारतीय टीम इस प्रकार है :

पुरुष: अमित पंघाल (52 किग्रा), मोहम्मद हुसामुद्दीन (56 किग्रा), वरिंदर सिंह (60 किग्रा), शिव थापा (64 किग्रा), विकास कृष्ण (69 किग्रा), आशीष कुमार (75 किग्रा), सुमित सांगवान (81 किग्रा), संजीत (91 किग्रा) और नरेंद्र (+91 किग्रा)।महिला: मोनिका (48 किग्रा), एमसी मैरीकॉम (51 किग्रा), साक्षी (54 किग्रा), जैस्मीन (57 किग्रा), सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), लालबुतसाई (64 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा), पूजा रानी (75 किग्रा), स्वीटी (81 किग्रा) ) और अनुपमा (+81 किग्रा)।

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इन मुक्केबाजों पर टिकी रहेंगी निगाहें

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राजनीति: शरद पवार के मन में कौन सी खिचड़ी पक रही है, क्या पीके के साथ मिल कर हो रही महागठबंधन बनाने की तैयारी?

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सार
शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मायावती, अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है…

शरद पवार और प्रशांत किशोर की मुलाकात
– फोटो : अमर उजाला (फाइल)

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।
क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।
होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

विस्तार

एनसीपी प्रमुख शरद पवार बिना किसी को भनक लगे राजनीति की चिड़िया के पर गिन लेने के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनकी राजनीति की चाल को उनके दोस्त भी समझ पाने में गच्चा खा जाते हैं। इन दिनों भी कुछ ऐसा ही है। एनसीपी प्रमुख ने सप्ताह के भीतर दो बार चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भेंट की है। इस भेंट का कोई रहस्य बाहर नहीं आया है। एनसीपी के एक सांसद कहते हैं कि जब तक पवार साहब कुछ नहीं बताएंगे, पता भी नहीं चलेगा। इसलिए मैं क्या कह सकता हूं। उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले के सचिवालय को भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हां, इतना जरूर है कि प्रशांत किशोर सक्रिय राजनीति में उतरकर पारी खेलने के लिए तैयार हैं।

क्या राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने का होगा प्रयास?
प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही घोषणा कर दी थी कि वह चुनाव प्रचार अभियान में रणनीतिकार की भूमिका का काम छोड़ देंगे। इससे पहले प्रशांत किशोर 12 जून को शरद पवार से मिले थे। एनसीपी के नेता नवाब मलिक को फिलहाल देश में समान विचारधारा वाले दलों के एक महागठबंधन की जरूरत महसूस हो रही है।

ऐसे में विपक्ष के खेमे में सबसे ज्यादा हलचल शरद पवार और प्रशांत किशोर की दूसरी भेंट को लेकर ही है। भाजपा छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए और राष्ट्र मंच बनाने वाले यशवंत सिन्हा भी 22 जून को शरद पवार के घर में आयोजित बैठक में शामिल होंगे। शरद पवार के अलावा करीब 12-14 दलों के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।
संघ के विचारकों में गिने जाने वाले भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री और नब्बे के दशक में राजनीति में छाये रहने वाले एक पूर्व राजनेता का कहना है कि हो सकता है पवार साहब राजनीतिक गोलबंदी करने की योजना बना रहे हों। क्या पता किसी तीसरे मोर्चे की कोशिश चल रही हो? क्योंकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन तथा पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बस का कुछ खास नहीं है।

होगा वही जो शरद पवार चाहेंगे
कांग्रेस के नेता महेंद्र जोशी ने भी शरद पवार के तमाम दौर देखे हैं। वह कहते हैं कि आखिर मैं शरद पवार के बारे में क्या बता सकता हूं। न जाने उनके मन में क्या खिचड़ी पक रही है। दरअसल शरद पवार राजनीति की शतरंज के मंजे खिलाड़ी हैं और घोड़े की ढाई कदम की चाल की कला उनके अंगुलियों पर रहती है।हालांकि महाराष्ट्र के ही कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उनके प्रदेश के अध्यक्ष नाना पटोले को थोड़ा संभलकर और अपने शब्दों को तोलकर बोलना चाहिए। यह समझाइश इस बिना पर आई है कि 22 जून को विपक्ष के नेताओं से मिलकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार कांग्रेस पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना को खास संदेश दे रहे हैं।महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता इस राजनीतिक संदेश को मानते भी हैं और उनका कहना है कि देश में कोई महागठबंधन या शरद पवार द्वारा उसके नेतृत्व का मामला अभी बहुत प्रारंभिक स्थिति में है। कुछ भी कहना जल्दबाजी है। लेकिन फिर भी महाराष्ट्र में वही होगा जो शरद पवार चाहेंगे।एनसीपी के एक नेता मानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार की पहली निगाह यथाशीघ्र महाराष्ट्र की मौजूदा शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस की सरकार को गिरा देने की है। इसकी कोशिशें भी चल रही हैं। वह शिवसेना के विधायक के बयान का भी जिक्र इसी से जोड़कर करते हैं।कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि महाराष्ट्र फिलहाल उद्धव ठाकरे और शरद पवार का सबकुछ दांव पर है। इसलिए हमारी विवशता है कि हम महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ बने रहें और शिवसेना की सरकार चलती रहे। बताते हैं 22 जून की बैठक का इससे भी एक बड़ा लेना-देना है।

क्या प्रधानमंत्री मोदी का विकल्प बनेंगे शरद पवार?
शरद पवार राजनीति में क्या करेंगे, क्या सोचेंगे और कब क्या कहेंगे और अंत में क्या निर्णय लेंगे, यह उनके सिवाय कोई नहीं जानता। फिलहाल 22 जून को विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके वह देश में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ एक माहौल जरूर बनाते नजर आएंगे। शरद पवार की इस बैठक को कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा संदेश माना जा रहा है। मौजूदा समय में देश में शरद पवार ही एक मात्र ऐसे राजनीति के सरदार हैं, जिनकी हर दल में पैठ है। विपक्ष में उनके कद का कोई दूसरा राजनीतिक चेहरा नहीं है।शरद यादव, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव के शिथिल स्वास्थ्य के कारण विपक्षी दलों में अन्य लीड करने वाले नेताओं का अभाव है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद जरूर बढ़ा है, लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, बसपा प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी या फिर डीएमके के एमके स्टालिन का चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर इतना मजबूत अभी नहीं बन सका है। इसलिए राजनीति के दिग्गजों की निगाहें भी 80 साल के मराठा सरदार की अगली रणनीति पर ही टिकी हैं।

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महाराष्ट्र में कोरोना : 24 घंटे में 6270 नए मामले, 21 लोगों में मिला डेल्टा प्लस वेरिएंट, 94 की मौत

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एएनआई, मुुंबई।
Published by: योगेश साहू
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:59 PM IST

सार
महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है।  

कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
– फोटो : PTI

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महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

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महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में कोरोना के 6,270 नए मामले सामने आए हैं। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकरी के अनुसार, इस दौरान 94 लोगों की मौत हुई है। वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि 21 लोगों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। बता दें कि डेल्टा प्लस वेरिएंट, डेल्टा वेरिएंट का बदला हुआ रूप है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, महाराष्ट्र में सक्रिय मामलों की संख्या 1,24,398 हो गई है, जबकि कुल 57,33,215 मरीज डिस्चार्ज हुए हैं। प्रदेश में अब तक कुल 1,18,313 लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है।

बात करें मुंबई की तो यहां पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 521 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 685 लोग ठीक हुए हैं। इस दौरान 7 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। मुंबई में सक्रिय मामलों की संख्या 14,637 हो गई है। कुल 6,89,675 लोग ठीक हो चुके हैं और अब तक यहां 15,305 लोगों की मौत हुई है।

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कोलकाता: ममता का गंभीर आरोप, कहा- यूपी से बहकर बंगाल में आ रहीं लाशें, राज्य में फैल सकता है कोरोना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 21 Jun 2021 09:44 PM IST

सार
ममता ने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
– फोटो : ANI

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।ममता को हाईकोर्ट से झटकावहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भड़की हिंसा को लेकर भारतीय जनता पार्टी लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोल रही है। वहीं अब ममता बनर्जी ने भी भाजपा को घेरने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधा है।

उन्होंने कहा है कि गंगा नदी में यूपी से शव बहकर बंगाल आ रहे हैं और इससे राज्य में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि हमने ऐसे कई शवों को देखा है। इससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। हम नदी से शवों को निकाल रहे हैं और उनका सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कर रहे हैं। 

बता दें कि इससे पहले भी चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने यूपी के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा यूपी से गुंडे लाकर बंगाल का माहौल खराब कर रही है। उन्होंने भाजपा पर कोरोना फैलाने का भी आरोप लगाया था।
ममता को हाईकोर्ट से झटका

वहीं चुनाव के बाद भड़की हिंसा मामले में आज यानी सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के बाद एक समिति बनाई गई है, जो हिंसा के मामलों की जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगी। समिति के गठन का विरोध कर रहीं बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए इसे करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले सोमवार को हाई कोर्ट ने टीएमसी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें 18 जून के उस आदेश को रोकने की मांग की गई थी, जिसके तहत समिति के गठन का फैसला दिया गया था।

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