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यूपी में बढ़ा लॉकडाउन: प्रदेश में 31 मई तक जारी रहेंगी पाबंदियां, एक जून से हर जिले में 18 पार वालों का होगा टीकाकरण

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 22 May 2021 09:09 PM IST

सार
यूपी में 31 मई की सुबह सात बजे तक आंशिक कोरोना कर्फ्यू को विस्तार दिए जाने का निर्णय लिया जा रहा है। वैक्सीनेशन, औद्योगिक गतिविधियों, मेडिकल संबंधी कार्य आदि आवश्यक अनिवार्य सेवाएं यथावत जारी रहेंगी। 

कोरोना कर्फ्यू में बंद बाजार
– फोटो : अमर उजाला

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कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए योगी सरकार ने आंशिक कोरोना कर्फ्यू 31 मई सुबह सात बजे तक बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आंशिक कोरोना कर्फ्यू से कोविड संक्रमण की चेन तोड़ने व इसके नियंत्रण में काफी मदद मिल रही है। इससे पहले 24 मई सुबह सात बजे तक कोरोना कर्फ्यू बढ़ाया गया था। इसके साथ ही सीएम ने एक जून से प्रदेश के सभी जिलों में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने की घोषणा की है।मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शनिवार को टीम-9 की बैठक में यह फैसला लिया गया। सीएम योगी ने कहा कि कोरोना कर्फ्यू के कारण सक्रिय केस लगातार कम हो रहे हैं। इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए इसे और बढ़ाने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान वैक्सीनेशन, औद्योगिक गतिविधियां, मेडिकल संबंधी कार्य, आवश्यक अनिवार्य सेवाएं यथावत जारी रहेंगी।अभी 23 जिलों में 18 से 44 वर्ष वालों का टीकाकरणप्रदेश में एक जून से सभी 75 जिलों में 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों के लिए टीकाकरण की सुविधा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीम-09 के साथ हुई बैठक में इसके निर्देश दिए हैं। प्रदेश में 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए 23 जिलों में ही टीकाकरण की व्यवस्था थी। अब इसे सभी जिलों में बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने शनिवार को टीम-09 के साथ हुई बैठक में कहा कि कोविड से बचाव के लिए टीका लगवाना बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में प्रदेश के 23 जिलों में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण का कार्यक्रम चल रहा है। अब अगले चरण में आगामी 01 जून से सभी जिला मुख्यालयों पर इस आयु वर्ग के लोगों का वैक्सीनेशन किया जाए। जिन जिलों में संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक है, उनके ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैक्सीनेशन कराया जाना चाहिए। गौरतलब है कि प्रदेश में एक मई को सात जिलों से 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू हुआ था। इसके बाद दूसरे चरण में 17 मई से इसे बढ़ाकर 23 जिलों तक कर दिया गा था। अब एक जून से पूरे प्रदेश में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को टीका लग सकेगा।दवाओं की कालाबाजारी करने वालों की जब्त होंगी संपत्तियांकोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर के हालातों की तैयारियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इटावा और कानपुर जनपदों का दौरा किया। अधिकारियों के साथ बैठक के अलावा उन्होंने गांवों का निरीक्षण भी किया। इटावा के सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि तीसरी लहर आने के पहले 10 साल या इससे कम उम्र के बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता के आधार पर कोरोनारोधी टीका लगवाया जाएगा। कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह से सतर्क है। इस माह के अंत तक कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि हर जिले में सीएचसी स्तर पर 100-100 पीडियाट्रिक बेड के वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कालाबाजारी करने वाले बक्शे नहीं जाएंगे। पहले एफआईआर होगी, इससे बात न बनी तो इनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जाएगा। अफसरों को भी चेतावनी दी कि जिस जिले में ज्यादा कालाबाजारी हुई, वहां के अफसरों पर भी कार्रवाई होगी।एक दिन में तीन लाख से अधिक टेस्ट, यूपी पहला राज्यसीएम ने कहा कि बेहतर प्रबंधन से प्रदेश में कोविड संक्रमण को नियंत्रित किया है। 24 अप्रैल को सर्वाधिक 38 हजार नए केस आए थे। आज छह हजार केस आए हैं। पिछले 24 घंटे में तीन लाख सात हजार टेस्ट किए गए हैं। एक दिन में तीन लाख टेस्ट करने वाला यूपी पहला राज्य है। रिकवरी रेट 93 प्रतिशत से अधिक है।

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कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए योगी सरकार ने आंशिक कोरोना कर्फ्यू 31 मई सुबह सात बजे तक बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आंशिक कोरोना कर्फ्यू से कोविड संक्रमण की चेन तोड़ने व इसके नियंत्रण में काफी मदद मिल रही है। इससे पहले 24 मई सुबह सात बजे तक कोरोना कर्फ्यू बढ़ाया गया था। इसके साथ ही सीएम ने एक जून से प्रदेश के सभी जिलों में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शनिवार को टीम-9 की बैठक में यह फैसला लिया गया। सीएम योगी ने कहा कि कोरोना कर्फ्यू के कारण सक्रिय केस लगातार कम हो रहे हैं। इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए इसे और बढ़ाने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना कर्फ्यू के दौरान वैक्सीनेशन, औद्योगिक गतिविधियां, मेडिकल संबंधी कार्य, आवश्यक अनिवार्य सेवाएं यथावत जारी रहेंगी।

अभी 23 जिलों में 18 से 44 वर्ष वालों का टीकाकरण
प्रदेश में एक जून से सभी 75 जिलों में 18 से 44 वर्ष की आयु के लोगों के लिए टीकाकरण की सुविधा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीम-09 के साथ हुई बैठक में इसके निर्देश दिए हैं। प्रदेश में 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए 23 जिलों में ही टीकाकरण की व्यवस्था थी। अब इसे सभी जिलों में बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। 
मुख्यमंत्री ने शनिवार को टीम-09 के साथ हुई बैठक में कहा कि कोविड से बचाव के लिए टीका लगवाना बहुत महत्वपूर्ण है। वर्तमान में प्रदेश के 23 जिलों में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण का कार्यक्रम चल रहा है। अब अगले चरण में आगामी 01 जून से सभी जिला मुख्यालयों पर इस आयु वर्ग के लोगों का वैक्सीनेशन किया जाए। जिन जिलों में संक्रमण अपेक्षाकृत अधिक है, उनके ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैक्सीनेशन कराया जाना चाहिए। गौरतलब है कि प्रदेश में एक मई को सात जिलों से 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू हुआ था। इसके बाद दूसरे चरण में 17 मई से इसे बढ़ाकर 23 जिलों तक कर दिया गा था। अब एक जून से पूरे प्रदेश में 18 से 44 आयु वर्ग के लोगों को टीका लग सकेगा।

दवाओं की कालाबाजारी करने वालों की जब्त होंगी संपत्तियां
कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर के हालातों की तैयारियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इटावा और कानपुर जनपदों का दौरा किया। अधिकारियों के साथ बैठक के अलावा उन्होंने गांवों का निरीक्षण भी किया। इटावा के सैफई चिकित्सा विश्वविद्यालय में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि तीसरी लहर आने के पहले 10 साल या इससे कम उम्र के बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता के आधार पर कोरोनारोधी टीका लगवाया जाएगा। कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह से सतर्क है। इस माह के अंत तक कोरोना की दूसरी लहर खत्म होने की संभावना है। 

उन्होंने कहा कि हर जिले में सीएचसी स्तर पर 100-100 पीडियाट्रिक बेड के वार्ड की व्यवस्था की जा रही है। दवाओं और ऑक्सीजन की कालाबाजारी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कालाबाजारी करने वाले बक्शे नहीं जाएंगे। पहले एफआईआर होगी, इससे बात न बनी तो इनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जाएगा। अफसरों को भी चेतावनी दी कि जिस जिले में ज्यादा कालाबाजारी हुई, वहां के अफसरों पर भी कार्रवाई होगी।
एक दिन में तीन लाख से अधिक टेस्ट, यूपी पहला राज्य
सीएम ने कहा कि बेहतर प्रबंधन से प्रदेश में कोविड संक्रमण को नियंत्रित किया है। 24 अप्रैल को सर्वाधिक 38 हजार नए केस आए थे। आज छह हजार केस आए हैं। पिछले 24 घंटे में तीन लाख सात हजार टेस्ट किए गए हैं। एक दिन में तीन लाख टेस्ट करने वाला यूपी पहला राज्य है। रिकवरी रेट 93 प्रतिशत से अधिक है।

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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