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साइबर हमला: एयर इंडिया के सर्वर हैक, यात्रियों के क्रेडिट कार्ड व पासपोर्ट का डाटा चुराया

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 21 May 2021 10:28 PM IST

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देश की सरकारी एयर लाइन एयर इंडिया पर साइबर हमला हुआ है। एयर लाइंस के सर्वरों को हैक कर उसमें दर्ज यात्रियों का डाटा चुराने की खबर है।  

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एयर इंडिया ने शुक्रवार को बताया कि उसके सर्वर पर साइबर हमला हुआ है। हैकर्स ने कंपनी के सर्वरों को हैक कर विश्व के करीब 45 लाख यात्रियों का डाटा चुरा लिया है। इसमें क्रेडिट कार्ड व पासपोर्ट आदि का का डाटा शामिल है। एयर लाइंस ने बयान जारी कर कहा कि हैकरों ने सैकड़ों यात्रियों की निजी जानकारियां हासिल कर ली हैं। पैसेंजर सर्विस सिस्टम से चुराए गए डाटा में क्रेडिट कार्ड व पासपोर्ट का विवरण भी शामिल है। इससे पूरे विश्व के करीब 45 लाख यात्री प्रभावित हो सकते हैं।  बयान में कहा गया है कि हमारे पैसेंजर सर्विस सिस्टम में यात्रियों की निजी जानकारियां स्टोर रहती हैं। इस पर हाल ही में साइबर हमला हुआ है। इस कारण कुछ यात्रियों का निजी डाटा हैकरों ने हथिया लिया है।  
2011 से 2021 के बीच हुए डाटा लीकएयर इंडिया के मुताबिक, डाटा हैक करने की घटना 26 अगस्त 2011 से 3 फरवरी 2021 के बीच की है। कंपनी ने कहा कि इसमें उपभोक्ताओं की निजी जानकारियां जिसमें नाम, जन्म तिथि, संपर्क नंबर, पासपोर्ट की जानकारी, टिकट की जानकारी, स्टार अलायंस, एयर इंडिया फ्रिक्वेंट फ्लाइर डाटा (पासवर्ड डाटा प्रभावित नहीं हुआ है) और क्रेडिट कार्ड की जानकारी शामिल है। सरकारी एयर लाइन ने बताया कि उसके डाटा प्रोसेसर से डाटा लीक होने की पहली सूचना 25 फरवरी 2021 को मिली थी। हालांकि कौन-कौन सा डाटा चुराया गया इसकी पहचान 25 मार्च से 4 मई 2021 के बीच हुई। सीवीवी व सीवीसी नंबर नहीं रखते कंपनी ने क्रेडिट कार्ड के संबंध में कहा कि हमारे डाटा प्रोसेसर के पास सीवीवी/सीवीसी नंबर नहीं होते हैं। इसके बाद हमारे डाटा प्रोसेसर ने इस बात को सुनिश्चित किया कि प्रभावित सर्वर पर किसी तरह की कोई असमान्य गतिविधि नहीं देखी गई।कंपनी ने उठाए ये कदमएयर इंडिया ने कहा कि साइबर हमले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत इसकी जांच की गई। हमले से प्रभावित सर्वरों को सुरक्षित किया गया। क्रेडिट कार्ड जारीकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें इस बारे में जानकारी दी। एयर इंडिया एफएफपी प्रोग्राम के पासवर्ड को रीसेट किया गया। यात्रियों से पासवर्ड बदलने का अनुरोधकंपीन ने कहा कि डाटा सुरक्षित रहें इसलिए हमने यात्रियों से कहा है कि वे क्रेडिट कार्ड आदि के पासवर्ड बदल लें। हम हमारे डाटा प्रोसेसर को सुरक्षित करने के और कदम उठाएंगे। यात्रियों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है।

विस्तार

एयर इंडिया ने शुक्रवार को बताया कि उसके सर्वर पर साइबर हमला हुआ है। हैकर्स ने कंपनी के सर्वरों को हैक कर विश्व के करीब 45 लाख यात्रियों का डाटा चुरा लिया है। इसमें क्रेडिट कार्ड व पासपोर्ट आदि का का डाटा शामिल है। 

एयर लाइंस ने बयान जारी कर कहा कि हैकरों ने सैकड़ों यात्रियों की निजी जानकारियां हासिल कर ली हैं। पैसेंजर सर्विस सिस्टम से चुराए गए डाटा में क्रेडिट कार्ड व पासपोर्ट का विवरण भी शामिल है। इससे पूरे विश्व के करीब 45 लाख यात्री प्रभावित हो सकते हैं।  बयान में कहा गया है कि हमारे पैसेंजर सर्विस सिस्टम में यात्रियों की निजी जानकारियां स्टोर रहती हैं। इस पर हाल ही में साइबर हमला हुआ है। इस कारण कुछ यात्रियों का निजी डाटा हैकरों ने हथिया लिया है। 

 

Massive Air India data breach, involved personal data registered b/w 26th Aug 2011 & 3rd Feb 2021, with details including name, DOB, contact info, passport info, ticket info, Star Alliance & Air India frequent flyer data (no passwords data affected) & credit cards data: Air India

— ANI (@ANI) May 21, 2021

2011 से 2021 के बीच हुए डाटा लीक
एयर इंडिया के मुताबिक, डाटा हैक करने की घटना 26 अगस्त 2011 से 3 फरवरी 2021 के बीच की है। कंपनी ने कहा कि इसमें उपभोक्ताओं की निजी जानकारियां जिसमें नाम, जन्म तिथि, संपर्क नंबर, पासपोर्ट की जानकारी, टिकट की जानकारी, स्टार अलायंस, एयर इंडिया फ्रिक्वेंट फ्लाइर डाटा (पासवर्ड डाटा प्रभावित नहीं हुआ है) और क्रेडिट कार्ड की जानकारी शामिल है। सरकारी एयर लाइन ने बताया कि उसके डाटा प्रोसेसर से डाटा लीक होने की पहली सूचना 25 फरवरी 2021 को मिली थी। हालांकि कौन-कौन सा डाटा चुराया गया इसकी पहचान 25 मार्च से 4 मई 2021 के बीच हुई। 
सीवीवी व सीवीसी नंबर नहीं रखते 
कंपनी ने क्रेडिट कार्ड के संबंध में कहा कि हमारे डाटा प्रोसेसर के पास सीवीवी/सीवीसी नंबर नहीं होते हैं। इसके बाद हमारे डाटा प्रोसेसर ने इस बात को सुनिश्चित किया कि प्रभावित सर्वर पर किसी तरह की कोई असमान्य गतिविधि नहीं देखी गई।

कंपनी ने उठाए ये कदम

एयर इंडिया ने कहा कि साइबर हमले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत इसकी जांच की गई। हमले से प्रभावित सर्वरों को सुरक्षित किया गया। क्रेडिट कार्ड जारीकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें इस बारे में जानकारी दी। एयर इंडिया एफएफपी प्रोग्राम के पासवर्ड को रीसेट किया गया। 
यात्रियों से पासवर्ड बदलने का अनुरोध
कंपीन ने कहा कि डाटा सुरक्षित रहें इसलिए हमने यात्रियों से कहा है कि वे क्रेडिट कार्ड आदि के पासवर्ड बदल लें। हम हमारे डाटा प्रोसेसर को सुरक्षित करने के और कदम उठाएंगे। यात्रियों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है।

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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