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Corona: आठ राज्यों में एक लाख से अधिक मामले, 22 राज्यों में संक्रमण की दर 15 फीसदी से ज्यादा

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सरकार ने कहा कि आठ राज्यों में कोविड के एक लाख से अधिक मामले हैं और 22 राज्यों में संक्रमण की दर 15 फीसदी से अधिक है। महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कोविड के मामलों में कमी आई है और संक्रमण दर भी कम हुई है। 199 जिलों में कोविड-19 के मामलों और संक्रमण दर में पिछले दो हफ्ते में कमी आई है।देश में पहली बार एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना वायरस की जांच की गई है। आईसीएमआर के अनुसार पिछले एक दिन में 20.08 लाख सैंपल की जांच की गई जिनमें 13.31 फीसदी सैंपल संक्रमित मिले हैं। तीन दिन पहले तक यह दर 19 फीसदी तक दर्ज की गई थी लेकिन अब यह आंकड़ा तेजी से नीचे आ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार की प्रतिदिन रोजाना 25 लाख जांच करने की तैयारी है।जानिए किस राज्य में कितने मामले कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश , गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में बुधवार को कोविड-19 के क्रमश: 34,281, 34,875, 23,160, 5,246, 34,031 और 1,209 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही इन राज्यों में क्रमश: 468, 365, 106, 71, 594 तथा 31 और मरीजों ने महामारी से दम तोड़ दिया।कर्नाटककर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में अब संक्रमितों की संख्या बढ़कर 23,06,655 हो गई है जबकि अब तक 23,306 लोग इस वायरस से जान गंवा चुके हैं। बंगलूरू शहरी क्षेत्र में बुधवार को 11772 नए मामले सामने आए।विभाग के अनुसार बुधवार को 49,953 मरीज स्वस्थ हुए जो सामने आए नए मामलों से अधिक हैं। राज्य में अब तक 17,24,438 मरीज ठीक हो चुके हैं। फिलहाल 5,58,890 मरीज उपचाराधीन हैं। आज राज्य में संक्रमण दर 26.46 प्रतिशत रही जबकि मृत्युदर 1.36 फीसद रही।तमिलनाडु तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 34,875 और मरीजों का पता चलने के बाद राज्य में इस महामारी के मामले बढ़कर 16,99,225 हो गए जबकि 365 मरीजों के जान गंवाने के बाद अब तक राज्य में 18,734 लोगों की इस वायरस के चलते मौत हो चुकी है। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार आज 23,863 रोगी ठीक हुए और अब तक कुल 14,26,915 मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। फिलहाल 2,53,576 मरीज उपचाराधीन हैं। चेन्नई में 6,297 नये मरीज सामने आने के बाद शहर में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,56,496 हो गयी। शहर में अब तक 6,031 मरीजों ने जान गंवायी है। राज्य में बुधवार को 1,70,355 नमूनों की जांच की गयी है। अब तक 2,56,04,311 कोविड-19 परीक्षण हो चुके हैं।आंध्र प्रदेशआंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार राज्य में 23,160 नये मरीज सामने आने से संक्रमितों की संख्या बढ़कर 14,98,532 हो गई। बुलेटिन के अनुसार आज 24,819 मरीज ठीक हुए और लंबे अंतराल के बाद नये मामलों से कहीं अधिक मरीज ठीक हुए हैं। राज्य में अब तक 12,79,110 मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। बुधवार को 106 मरीजों ने दम तोड़ जिसके साथ ही अब तक 9,686 मरीज जान गंवा चुके हैं। फिलहाल 2,09,736 मरीज उपचाराधीन हैं। गुजरातगुजरात के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 5,246 नए मरीज सामने के बाद राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 7,71,447हो गई। साथ ही 71 मरीजों की जान चली गयी। अब तक राज्य में 9,340 लोगों ने इस वायरस के चलते जान गंवाई है।गुजरात में आज 9,001 मरीज ठीक हुए। राज्य में अब तक 6,69,490 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। मरीजों के स्वस्थ होने की दर 86.78 फीसदी है। विभाग के अनुसार फिलहाल राज्य में 92,617 मरीज उपचाराधीन हैं जिनमें 742 वेंटीलेटर पर हैं। अहमदाबाद में सर्वाधिक 1324 नए मामले आए। बुधवार को लगातार तीसरे दिन राज्य में कोविड-19 टीकाकरण नहीं किया गया। रविवार तक कुल 1,47,81,755 खुराक लगायी गयी थीं जिनमें 37,89,777 लाथार्थियों को दूसरी खुराक दी गयी थी।महाराष्ट्रमहाराष्ट्र के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में 34,031 नए मरीज सामने आने से कुल मामले 54,67,537 हो गए और 594 मरीजों की जान जाने से मृतक संख्या 84,371 हो गई। बुधवार को 51,457 मरीजों को छुट्टी दी गई। अब तक राज्य में 49,78,937 मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। फिलहाल 4,01,695 मरीज उपचाररत हैं। राज्य में स्वस्थ होने की दर सुधरकर 91.06 हो गई।मुंबई में 1,329 नए मरीज सामने के बाद महानगर में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 6,91,352 हो गयी और 57 मरीजों की मौत हो जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 14,373 हो गई। गोवागोवा के स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि 1,209 नए मरीज सामने आने प्रदेश में संक्रमितों की संख्या 1,39,985 हो गयी जबकि 31 मरीजों की मौत हो जाने से मृतकों की संख्या बढ़कर 2,228 हो गई।अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में आज 2,160 मरीज स्वस्थ हुए और इसके साथ ही अब तक 1,14,793 रोगी संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। फिलहाल 22,964,मरीज उपचाररत हैं। 

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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