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ग्राउंड रिपोर्ट: बहुत तेजी से पैर पसार रहा ब्लैक फंगस, जानिए क्या है आपके शहर का हाल

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सार
कोरोना संक्रमण के बीच ब्लैक फंगस घातक होता जा रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या और मौतों से स्वास्थ्य विभाग के साथ ही राज्य सरकारें सतर्क हो गईं हैं। इस पर काबू पाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं।

अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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ब्लैक फंगस लोगों के लिए नई मुसीबत बनकर आया है। कई राज्यों में इस बीमारी के चलते लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। सरकारें इस बीमारी पर जीत सुनिश्चित करने के लिए दिन रात जुटी हुई हैं। इलाज में काम आने वाली दवाई एंफोटेरिसिन-बी के उत्पादन पर भी काम चल रहा है। इस बीमारी ने कहां कहां अपने पैर पसार लिए हैं और क्या है आपके राज्य और शहर का हाल, जानने के लिए पढ़ें अमर उजाला की यह ग्राउंड रिपोर्ट…लखनऊ: ब्लैक फंगस के 22 नए मामले मिले, अब तक आठ मरीज दम तोड़ चुके हैंयूपी में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। अब तक इसके करीब आठ मरीज दम तोड़ चुके हैं। हालांकि, राहत की बात है कि अब सरकार ने ब्लैक फंगस की दवा एम्फोटेरीसीन-बी उपलब्ध कराने की बात कही है…और पढ़ेंमेरठ: फिर मिले ब्लैक फंगस के 19 नए मरीज, दो की मौत, ये लक्षण न करें नजर अंदाजमेरठ में ब्लैक फंगस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। बुधवार को 19 नए केस मिलने से ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 73 पहुंच गई है। पढ़िए इस समय मेरठ के हालात कैसे हैं…और पढ़ेंकानपुर: ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ा, कई दिन से रखा हुआ मास्क न लगाएं, इन चीजों से बचेंकानपुर में ब्लैक फंगस के रोगी बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में लगातार बारिश ने और मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश की वजह से वातावरण में नमी का प्रतिशत बढ़ गया है। ऐसे में ब्लैक फंगस पनप सकता है…और पढ़ेंवाराणसी में ब्लैक फंगस: बीएचयू में एक मरीज का ऑपरेशन, अब तक आ चुके हैं 30 मामलेवाराणसी में कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बीएचयू समेत निजी अस्पतालों को मिलाकर ब्लैक फंगस के 30 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में बुधवार को एक मरीज का ऑपरेशन किया गया…और पढ़ेंमहराजगंज : मिला ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज, मेडिकल कॉलेज हुआ रेफरमहराजगंज जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां परतावल क्षेत्र में कोविड-19 संक्रमण के बाद अब ब्लैक फंगस ने दस्तक दी है। परतावल क्षेत्र के एक गांव में एक मरीज ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज पाया गया हैं। उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया है…और पढ़ेंगोरखपुर: कमजोर इम्यूनिटी वालों को हो रहा है ब्लैक फंगस, मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाककोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच लोग ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) का शिकार हो रहे हैं। यह बीमारी प्रतिरोधक क्षमता कम होने वाले लोगों को होती है। कोविड और शुगर के मरीजों के लिए यह संक्रमण और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुनीता पटेल ने बताया कि इस बीमारी के बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से एडवाइजरी जारी हुई है…और पढ़ेंबरेलीः ब्लैक फंगस से पीड़ित छह मरीज मिलेबुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने छह मरीजों में ब्लैक की पुष्टि की है। इसमें तीन बरेली, एक-एक रामपुर, कासगंज और पीलीभीत के हैं।…और पढ़ेंझांसी में ब्लैक फंगस के चार और नए मरीज मिलेझांसी जिले में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) लगातार अपना दायरा बढ़ाता जा रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में चार नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़कर सात हो गई है…और पढ़ें
दिल्ली में ब्लैक फंगस : सात दिन में 300 मामले, अब तक हो चुकी है दो की मौत
एक ओर दिल्ली में कोरोना के नए मामले कम हो रहे हैं तो दूसरी ओर ब्लैक फंगस तेजी से बढ़ रहा है। हालात ये हैं कि बीते सात दिनों में 300 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। इंजेक्शन की कमी के कारण इन मरीजों को आपरेशन कराने पड़ रहे हैं…और पढ़ेंउत्तराखंड: हल्द्वानी में ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज की मौत, अब तक तीन लोगों की जा चुकी जानउत्तराखंड में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में बुधवार को ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज की मौत हो गई। एसटीएच में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन नहीं है, जबकि बाजार में भी इसकी उपलब्धता नहीं है…और पढ़ेंउत्तराखंड में कोरोना : सीएमओ दफ्तर से मिलेंगे ब्लैक फंगस के इंजेक्शन, शासन ने जारी की है एसओपीब्लैक फंगस की दवा के इंजेक्शन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से अस्पतालों को दिए जाएंगे। इसके लिए बाकायदा शासन की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत इंजेक्शन मुहैया कराए जाएंगे…और पढ़ेंब्लैक फंगस: उत्तराखंड में तैयार होगी ब्लैक फंगस की दवा, दो फैक्ट्रियों में होगा उत्पादनकोरोना संक्रमण के बाद मुसीबत बनते दिख रहे ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली दवाई एंफोटेरिसिन-बी का उत्पादन जल्द ही उत्तराखंड में शुरू होने जा रहा है। प्रदेश में इसके लिए दो फैक्ट्रियां तैयार हो चुकी हैं, जिनके निरीक्षण के लिए बुधवार को केंद्र की टीम उत्तराखंड पहुंची…और पढ़ें
हरियाणा में बढ़े ब्लैक फंगस के मामले: अब तक प्रदेश में 190 लोग संक्रमित, 14 मरीजों की गई जान
हरियाणा में जहां एक ओर कोरोना के मामले घटने लगे हैं तो वहीं दूसरी तरफ ब्लैक फंगस से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रदेश में अब तक 190 मामले सामने आ चुके हैं। 14 लोगों ने इसकी वजह से जान गंवाई है। हरियाणा सरकार ने चार मेडिकल कॉलेजों में ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों के लिए 20-20 बेड आरक्षित कर दिए हैं…और पढ़ेंहरियाणा: सिरसा में एक दिन में ब्लैक फंगस के नौ नए मरीज मिले, तीन की संक्रमण से मौतहरियाणा के सिरसा जिले में अब तक ब्लैक फंगस के 25 मरीज मिलने से हड़कंप मच गया। वहीं पांच मरीजों की मौत भी हो चुकी है। अकेल बुधवार को ही नौ मरीज मिले और तीन ने अपनी जान गंवाई। जिले में अभी तक ब्लैक फंगस का इलाज नहीं है…और पढ़ेंपंजाब: पटियाला में दो संदिग्ध मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, एक को चंडीगढ़ पीजीआई भेजा गयापंजाब के पटियाला स्थित सरकारी राजिंदरा अस्पताल में दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। एक गंभीर मरीज को चंडीगढ़ स्थित पीजीआई भेजा गया है। वहीं एक संदिग्ध मरीज की रिपोर्ट का इंतजार है। निजी अस्पताल में दाखिल दो मरीज भी ब्लैक फंगस से पीड़ित मिले हैं…और पढ़ेंहिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस का पहला मामला, आईजीएमसी में हो रहा है महिला का उपचारहिमाचल प्रदेश में म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) का पहला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है हमीरपुर की महिला मंडी से रेफर की गई थी। महिला मरीज शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में उपचाराधीन है…और पढ़ें

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ब्लैक फंगस लोगों के लिए नई मुसीबत बनकर आया है। कई राज्यों में इस बीमारी के चलते लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। सरकारें इस बीमारी पर जीत सुनिश्चित करने के लिए दिन रात जुटी हुई हैं। इलाज में काम आने वाली दवाई एंफोटेरिसिन-बी के उत्पादन पर भी काम चल रहा है। इस बीमारी ने कहां कहां अपने पैर पसार लिए हैं और क्या है आपके राज्य और शहर का हाल, जानने के लिए पढ़ें अमर उजाला की यह ग्राउंड रिपोर्ट…

लखनऊ: ब्लैक फंगस के 22 नए मामले मिले, अब तक आठ मरीज दम तोड़ चुके हैं
यूपी में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। अब तक इसके करीब आठ मरीज दम तोड़ चुके हैं। हालांकि, राहत की बात है कि अब सरकार ने ब्लैक फंगस की दवा एम्फोटेरीसीन-बी उपलब्ध कराने की बात कही है…और पढ़ें

मेरठ: फिर मिले ब्लैक फंगस के 19 नए मरीज, दो की मौत, ये लक्षण न करें नजर अंदाज
मेरठ में ब्लैक फंगस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। बुधवार को 19 नए केस मिलने से ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 73 पहुंच गई है। पढ़िए इस समय मेरठ के हालात कैसे हैं…और पढ़ें
कानपुर: ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ा, कई दिन से रखा हुआ मास्क न लगाएं, इन चीजों से बचें
कानपुर में ब्लैक फंगस के रोगी बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में लगातार बारिश ने और मुसीबत खड़ी कर दी है। बारिश की वजह से वातावरण में नमी का प्रतिशत बढ़ गया है। ऐसे में ब्लैक फंगस पनप सकता है…और पढ़ें
वाराणसी में ब्लैक फंगस: बीएचयू में एक मरीज का ऑपरेशन, अब तक आ चुके हैं 30 मामले
वाराणसी में कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बीएचयू समेत निजी अस्पतालों को मिलाकर ब्लैक फंगस के 30 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। वाराणसी के बीएचयू अस्पताल में बुधवार को एक मरीज का ऑपरेशन किया गया…और पढ़ें

महराजगंज : मिला ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज, मेडिकल कॉलेज हुआ रेफर

महराजगंज जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां परतावल क्षेत्र में कोविड-19 संक्रमण के बाद अब ब्लैक फंगस ने दस्तक दी है। परतावल क्षेत्र के एक गांव में एक मरीज ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज पाया गया हैं। उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया है…और पढ़ें
गोरखपुर: कमजोर इम्यूनिटी वालों को हो रहा है ब्लैक फंगस, मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच लोग ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) का शिकार हो रहे हैं। यह बीमारी प्रतिरोधक क्षमता कम होने वाले लोगों को होती है। कोविड और शुगर के मरीजों के लिए यह संक्रमण और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुनीता पटेल ने बताया कि इस बीमारी के बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की ओर से एडवाइजरी जारी हुई है…और पढ़ें
बरेलीः ब्लैक फंगस से पीड़ित छह मरीज मिले
बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने छह मरीजों में ब्लैक की पुष्टि की है। इसमें तीन बरेली, एक-एक रामपुर, कासगंज और पीलीभीत के हैं।…और पढ़ें
झांसी में ब्लैक फंगस के चार और नए मरीज मिले
झांसी जिले में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) लगातार अपना दायरा बढ़ाता जा रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में चार नए मरीज सामने आए हैं। इसके साथ इस बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़कर सात हो गई है…और पढ़ें

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– फोटो : अमर उजाला

दिल्ली में ब्लैक फंगस : सात दिन में 300 मामले, अब तक हो चुकी है दो की मौत
एक ओर दिल्ली में कोरोना के नए मामले कम हो रहे हैं तो दूसरी ओर ब्लैक फंगस तेजी से बढ़ रहा है। हालात ये हैं कि बीते सात दिनों में 300 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। इंजेक्शन की कमी के कारण इन मरीजों को आपरेशन कराने पड़ रहे हैं…और पढ़ेंउत्तराखंड: हल्द्वानी में ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज की मौत, अब तक तीन लोगों की जा चुकी जानउत्तराखंड में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में बुधवार को ब्लैक फंगस के संदिग्ध मरीज की मौत हो गई। एसटीएच में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन नहीं है, जबकि बाजार में भी इसकी उपलब्धता नहीं है…और पढ़ेंउत्तराखंड में कोरोना : सीएमओ दफ्तर से मिलेंगे ब्लैक फंगस के इंजेक्शन, शासन ने जारी की है एसओपीब्लैक फंगस की दवा के इंजेक्शन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से अस्पतालों को दिए जाएंगे। इसके लिए बाकायदा शासन की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत इंजेक्शन मुहैया कराए जाएंगे…और पढ़ेंब्लैक फंगस: उत्तराखंड में तैयार होगी ब्लैक फंगस की दवा, दो फैक्ट्रियों में होगा उत्पादनकोरोना संक्रमण के बाद मुसीबत बनते दिख रहे ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली दवाई एंफोटेरिसिन-बी का उत्पादन जल्द ही उत्तराखंड में शुरू होने जा रहा है। प्रदेश में इसके लिए दो फैक्ट्रियां तैयार हो चुकी हैं, जिनके निरीक्षण के लिए बुधवार को केंद्र की टीम उत्तराखंड पहुंची…और पढ़ें

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हरियाणा में बढ़े ब्लैक फंगस के मामले: अब तक प्रदेश में 190 लोग संक्रमित, 14 मरीजों की गई जान
हरियाणा में जहां एक ओर कोरोना के मामले घटने लगे हैं तो वहीं दूसरी तरफ ब्लैक फंगस से पीड़ितों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रदेश में अब तक 190 मामले सामने आ चुके हैं। 14 लोगों ने इसकी वजह से जान गंवाई है। हरियाणा सरकार ने चार मेडिकल कॉलेजों में ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों के लिए 20-20 बेड आरक्षित कर दिए हैं…और पढ़ेंहरियाणा: सिरसा में एक दिन में ब्लैक फंगस के नौ नए मरीज मिले, तीन की संक्रमण से मौतहरियाणा के सिरसा जिले में अब तक ब्लैक फंगस के 25 मरीज मिलने से हड़कंप मच गया। वहीं पांच मरीजों की मौत भी हो चुकी है। अकेल बुधवार को ही नौ मरीज मिले और तीन ने अपनी जान गंवाई। जिले में अभी तक ब्लैक फंगस का इलाज नहीं है…और पढ़ेंपंजाब: पटियाला में दो संदिग्ध मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि, एक को चंडीगढ़ पीजीआई भेजा गयापंजाब के पटियाला स्थित सरकारी राजिंदरा अस्पताल में दो और मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। एक गंभीर मरीज को चंडीगढ़ स्थित पीजीआई भेजा गया है। वहीं एक संदिग्ध मरीज की रिपोर्ट का इंतजार है। निजी अस्पताल में दाखिल दो मरीज भी ब्लैक फंगस से पीड़ित मिले हैं…और पढ़ेंहिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस का पहला मामला, आईजीएमसी में हो रहा है महिला का उपचारहिमाचल प्रदेश में म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) का पहला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है हमीरपुर की महिला मंडी से रेफर की गई थी। महिला मरीज शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में उपचाराधीन है…और पढ़ें

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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