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पीएम की जिलाधिकारियों से सीधी बात: जो करना पड़े वो कीजिए, टीके की उपलब्धता हर जानकारी होगी आपके पास

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सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कई जिलाधिकारियों से सीधा संवाद किया। पीएम मोदी ने कहा कि हर जिले की अलग-अलग चुनौतियां हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अगर जिला जीतता है तो देश जीतता है। यही नहीं पीएम मोदी ने टीकाकरण को ही इस लड़ाई के खिलाफ एकमात्र सशक्त हथियार बताया।

कोविड की स्थिति पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी कर रहे बैठक
– फोटो : ANI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगवार को देश में कोरोना की ताजा स्थिति पर चर्चा करने के लिए जिलाधिकारियों से बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने आठ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों से सीधा संवाद किया। पीएम मोदी ने जिलाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ही इस युद्ध के विंग कमांडर हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों के बारे में भी जानकारी दी और कालाबाजारी करने वाले लोगों पर सख्ती करने को कहा।बता दें कि इस बैठक में आठ राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी शामिल थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, बैठक में कर्नाटक, बिहार, असम, चंडीगढ़, तमिलनाडु, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गोवा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। आइए यहां प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की अहम बातें जानते हैं…1. हर जिले की अलग-अलग चुनौतियां- पीएमइसके अलावा पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में जितने जिले हैं, उतनी ही अलग अलग चुनौतियां भी हैं। आप अपने जिले की चुनौतियों को अच्छे से समझते हैं। इसलिए जब आपका जिला जीतता है, तो देश जीतता है। आपका जिला कोरोना को हराता है, तो देश कोरोना को हराता है।2. वायरस से लड़ाई के खिलाफ ये हैं हथियारप्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि वायरस से लड़ने के खिलाफ हमारे हथियार हैं- लोकल कन्टेनमेंट जोन, एग्रेसिव टेस्टिंग और लोगों तक सही और पूरी जानकारी। पीएम मोदी ने कहा कि अस्पताल में कितने बेड उपलब्ध हैं, कहां उपलब्ध हैं? ये जानकारी आसानी से उपलब्ध होने पर लोगों की सहूलियत बढ़ती है। इसी तरह कालाबाजारी पर लगाम हो, ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।3. नीति के मामले आपको खुली छूटपीएम मोदी ने जिलाधिकारियों से कहा कि अगर आपको लगता है कि सरकार की ओर से बनाई गई पॉलिसी में जिला स्तर पर इनोवेशन की जरूरत है तो मैं आपको खुली छूट देता हूं कि आप इनोवेशन करिए। अगर आपको लगता है कि इन इनोवेशन से देश और राज्यों को भी फायदा होगा तो सरकार तक इन्हें पहुंचाइए। 
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हमारी जिम्मेदारी संक्रमण को फैलने से रोकने की भी है। ये तभी संभव है जब हमें संक्रमण के स्केल की सही जानकारी होगी। टेस्टिंग, ट्रेकिंग, ट्रीटमेंट और कोविड  बिहेवियर पर ध्यान देने की जरूरत है। पीएम ने कहा कि कोरोना की इस दूसरी वेव में अभी ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हमें बहुत ध्यान देना है। गांव में जागरुकता बढ़ानी है और उन्हें इलाज से जोड़ना है।5. हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरतपीएम मोदी ने कहा कि इस समय, कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के आंकड़े कम हो रहे हैं, कई राज्यों में बढ़ रहे हैं। कम होते आंकड़ों के बीच हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। बीते एक साल में करीब-करीब हर मीटिंग में मेरा यही आग्रह रहा है कि हमारी लड़ाई एक एक जीवन बचाने की है। 6. ऑक्सीजन प्लांट लगाने पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम केयर्स के माध्यम से देश के हर जिले के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने पर तेजी से काम किया जा रहा है। कई अस्पतालों में ये प्लांट काम करना शुरु भी कर चुके हैं। हाल ही में चंडीगढ़ में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है।7. इस लड़ाई में टीकाकरण ही एक मात्र सशक्त माध्यमअपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि टीकाकरण कोविड से लड़ाई का एक सशक्त माध्यम है, इसलिए इससे जुड़े हर भ्रम को हमें मिलकर दूर करना है। कोरोना के टीके की सप्लाई को बहुत बड़े स्तर पर बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वैक्सीनेशन को लेकर व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार जारी कर रहा है। अगले 15 दिन का शेड्यूल एडवांस में राज्यों को देने की कोशिश है। आपको भी पता रहेगा कि जिले में कितने लोगों की वैक्सीन उपलब्ध होगी और तैयारी कैसे करें। वैक्सीन वेस्टेज का प्रबंधन भी आप जानते हैं।

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगवार को देश में कोरोना की ताजा स्थिति पर चर्चा करने के लिए जिलाधिकारियों से बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने आठ राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के जिलाधिकारियों से सीधा संवाद किया। पीएम मोदी ने जिलाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप ही इस युद्ध के विंग कमांडर हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले हथियारों के बारे में भी जानकारी दी और कालाबाजारी करने वाले लोगों पर सख्ती करने को कहा।

बता दें कि इस बैठक में आठ राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी शामिल थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, बैठक में कर्नाटक, बिहार, असम, चंडीगढ़, तमिलनाडु, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गोवा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। आइए यहां प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की अहम बातें जानते हैं…
1. हर जिले की अलग-अलग चुनौतियां- पीएम
इसके अलावा पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में जितने जिले हैं, उतनी ही अलग अलग चुनौतियां भी हैं। आप अपने जिले की चुनौतियों को अच्छे से समझते हैं। इसलिए जब आपका जिला जीतता है, तो देश जीतता है। आपका जिला कोरोना को हराता है, तो देश कोरोना को हराता है।
2. वायरस से लड़ाई के खिलाफ ये हैं हथियार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि वायरस से लड़ने के खिलाफ हमारे हथियार हैं- लोकल कन्टेनमेंट जोन, एग्रेसिव टेस्टिंग और लोगों तक सही और पूरी जानकारी। पीएम मोदी ने कहा कि अस्पताल में कितने बेड उपलब्ध हैं, कहां उपलब्ध हैं? ये जानकारी आसानी से उपलब्ध होने पर लोगों की सहूलियत बढ़ती है। इसी तरह कालाबाजारी पर लगाम हो, ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।

3. नीति के मामले आपको खुली छूट

पीएम मोदी ने जिलाधिकारियों से कहा कि अगर आपको लगता है कि सरकार की ओर से बनाई गई पॉलिसी में जिला स्तर पर इनोवेशन की जरूरत है तो मैं आपको खुली छूट देता हूं कि आप इनोवेशन करिए। अगर आपको लगता है कि इन इनोवेशन से देश और राज्यों को भी फायदा होगा तो सरकार तक इन्हें पहुंचाइए। 

4. हर एक जीवन को बचाना हमारी जिम्मेदारी है

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हमारी जिम्मेदारी संक्रमण को फैलने से रोकने की भी है। ये तभी संभव है जब हमें संक्रमण के स्केल की सही जानकारी होगी। टेस्टिंग, ट्रेकिंग, ट्रीटमेंट और कोविड  बिहेवियर पर ध्यान देने की जरूरत है। पीएम ने कहा कि कोरोना की इस दूसरी वेव में अभी ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में हमें बहुत ध्यान देना है। गांव में जागरुकता बढ़ानी है और उन्हें इलाज से जोड़ना है।5. हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरतपीएम मोदी ने कहा कि इस समय, कई राज्यों में कोरोना संक्रमण के आंकड़े कम हो रहे हैं, कई राज्यों में बढ़ रहे हैं। कम होते आंकड़ों के बीच हमें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। बीते एक साल में करीब-करीब हर मीटिंग में मेरा यही आग्रह रहा है कि हमारी लड़ाई एक एक जीवन बचाने की है। 6. ऑक्सीजन प्लांट लगाने पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम केयर्स के माध्यम से देश के हर जिले के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने पर तेजी से काम किया जा रहा है। कई अस्पतालों में ये प्लांट काम करना शुरु भी कर चुके हैं। हाल ही में चंडीगढ़ में ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है।7. इस लड़ाई में टीकाकरण ही एक मात्र सशक्त माध्यमअपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि टीकाकरण कोविड से लड़ाई का एक सशक्त माध्यम है, इसलिए इससे जुड़े हर भ्रम को हमें मिलकर दूर करना है। कोरोना के टीके की सप्लाई को बहुत बड़े स्तर पर बढ़ाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वैक्सीनेशन को लेकर व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं को स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार जारी कर रहा है। अगले 15 दिन का शेड्यूल एडवांस में राज्यों को देने की कोशिश है। आपको भी पता रहेगा कि जिले में कितने लोगों की वैक्सीन उपलब्ध होगी और तैयारी कैसे करें। वैक्सीन वेस्टेज का प्रबंधन भी आप जानते हैं।

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4. हर एक जीवन को बचाना हमारी जिम्मेदारी है

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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