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ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली में 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी, दो फ्रंटलाइन वर्कर ने नहीं ली वैक्सीन, अब तक पूरा नहीं हुआ पहला चरण

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सार
राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 89 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारी पहली खुराक ले चुके हैं। राजस्थान में यह संख्या 95, मध्यप्रदेश में 96 और छत्तीसगढ़ में 99 फीसदी तक पहुंच चुकी है लेकिन दिल्ली इन सबसे काफी पीछे है। 

स्वास्थ्य केंद्र पर जांच स्वास्थ्य कर्मचारी
– फोटो : अमर उजाला

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दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुए चार माह का वक्त गुजर चुका है लेकिन जमीनी हालात यह हैं कि 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी और दो फ्रंटलाइन वर्कर अभी भी वैक्सीन से दूर हैं। छोटा राज्य, बेहतर संसाधन और तकनीकी ज्ञान में माहिर होने के बाद भी चार महीने में दिल्ली टीकाकरण का पहला चरण पार नहीं कर पाया है। इसे लेकर जब अमर उजाला ने जब पड़ताल शुरू की तो सरकारी आंकड़े ही चौंकान्ने वाले सामने आए। 16 जनवरी से देश में स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण चल रहा है। पहले चरण के तहत जनवरी और फरवरी माह में इन्हें प्राथमिकता देते हुए वैक्सीन दी गई थी लेकिन अभी हालात ऐसे हैं कि पहला चरण ही दिल्ली में 80 फीसदी तक नहीं पहुंचा है। केवल 78 फीसदी ही स्वास्थ्य कर्मचारी पहली खुराक ले पाए हैं। वहीं फ्रंटलाइन वर्करों की बात करें तो पहली खुराक इनमें से 80 फीसदी ने ली है। यह भी पता चला कि स्वास्थ्य कर्मचारी, फ्रंटलाइन वर्कर और 45 या उससे अधिक साल वाले लोगों के लिए पांच दिन की कोविशील्ड और एक दिन की कोवाक्सिन उपलब्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार दूसरी खुराक पर अधिक ध्यान देने की वजह वैक्सीन की कमी पर जोर दे रही है। सरकार के पास इस वर्ग के लिए 623 केंद्र हैं जहां 75 हजार लोगों को एक दिन में वैक्सीन दिया जा सकता है। 
राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 89 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारी पहली खुराक ले चुके हैं। राजस्थान में यह संख्या 95, मध्यप्रदेश में 96 और छत्तीसगढ़ में 99 फीसदी तक पहुंच चुकी है लेकिन दिल्ली इन सबसे काफी पीछे है। ठीक इसी तरह 82 फीसदी फ्रंटलाइन वर्कर राष्ट्रीय स्तर पर पहली खुराक ले चुके हैं। गुजरात में 93, राजस्थान में 91 और मध्यप्रदेश में 90 फीसदी तक पूरे हो चुके हैं जबकि दिल्ली में अभी इनकी संख्या 80 फीसदी के आसपास है। यह हालत तब है जब दिल्ली में करीब 3.10 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और 4.79 लाख फ्रंटलाइन वर्करों ने वैक्सीन के लिए पंजीयन कराया था। हर राज्य को करने चाहिए प्रयासनीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि वैक्सीन की आपूर्ति पूरे देश में की जा रही है लेकिन सिर्फ इसी पर ध्यान देना उचित नहीं है। हर राज्य को टीकाकरण सुधारने का प्रयास करना चाहिए। कई राज्य अच्छा कार्य भी कर रहे हैं। अब चूंकि दिल्ली देश की राजधानी है। इसलिए यहां ये उम्मीद नहीं की जा सकती। यहां और भी अधिक टीकाकरण होना चाहिए। 
स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्कर के अलावा दिल्ली में टीकाकरण कार्यक्रम एक और नई चुनौती का सामना कर रहा है। एक मई से युवाओं को वैक्सीन दी जा रही है लेकिन इसके चलते बुजुर्ग अपनी दूसरी खुराक लेने से पिछड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 10 में से सात बुजुर्गों को दूसरी खुराक नहीं मिल पा रही है। 45 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों में 30 फीसदी से भी कम दूसरी खुराक का टीकाकरण हो रहा है। यह गंभीर है क्योंकि इससे टीकाकरण को काफी नुकसान पहुंच सकता है।75 हजार की क्षमता, वैक्सीन लगीं 29 हजारदिल्ली सरकार के ही बुलेटिन के अनुसार स्वास्थ्य कर्मचारी, फ्रंटलाइन वर्कर, 45 या उससे अधिक आयु वालों के लिए दिल्ली में 623 केंद्र हैं जहां एक दिन में 75100 लोगों को वैक्सीन दी जा सकती है। पिछले एक दिन में 90832 को वैक्सीन दी है जिनमें 79353 पहली और 11479 को दूसरी खुराक दी गई। स्वास्थ्यकर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर और 45 से अधिक आयु वाले 29,050 को पहली और दूसरी खुराक मिली है। इस वर्ग के लिए सरकार के पास पांच दिन की कोविशील्ड और एक दिन की कोवाक्सिन भी उपलब्ध है। इन्हें लगी है वैक्सीन की पहली खुराक. 45,81,752 में से 35,23,802 को लगी पहली खुराक।. 2,42,546 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ली है पहली खुराक।. 3,83,917 फ्रंटलाइन वर्कर ही ले पाए हैं पहली खुराक।. 22,57,410 (45 या उससे अधिक) वालों को लगी वैक्सीन।. 6,39,929 (18 से 44 वर्ष) वालों को लगी है पहली खुराकदूसरी खुराक : 35 में से अभी 10 लाख लोगों को ही मिली। 

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दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुए चार माह का वक्त गुजर चुका है लेकिन जमीनी हालात यह हैं कि 10 में से तीन स्वास्थ्य कर्मचारी और दो फ्रंटलाइन वर्कर अभी भी वैक्सीन से दूर हैं। छोटा राज्य, बेहतर संसाधन और तकनीकी ज्ञान में माहिर होने के बाद भी चार महीने में दिल्ली टीकाकरण का पहला चरण पार नहीं कर पाया है। इसे लेकर जब अमर उजाला ने जब पड़ताल शुरू की तो सरकारी आंकड़े ही चौंकान्ने वाले सामने आए। 

16 जनवरी से देश में स्वास्थ्य कर्मचारियों का टीकाकरण चल रहा है। पहले चरण के तहत जनवरी और फरवरी माह में इन्हें प्राथमिकता देते हुए वैक्सीन दी गई थी लेकिन अभी हालात ऐसे हैं कि पहला चरण ही दिल्ली में 80 फीसदी तक नहीं पहुंचा है। केवल 78 फीसदी ही स्वास्थ्य कर्मचारी पहली खुराक ले पाए हैं। वहीं फ्रंटलाइन वर्करों की बात करें तो पहली खुराक इनमें से 80 फीसदी ने ली है। 

यह भी पता चला कि स्वास्थ्य कर्मचारी, फ्रंटलाइन वर्कर और 45 या उससे अधिक साल वाले लोगों के लिए पांच दिन की कोविशील्ड और एक दिन की कोवाक्सिन उपलब्ध है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार दूसरी खुराक पर अधिक ध्यान देने की वजह वैक्सीन की कमी पर जोर दे रही है। सरकार के पास इस वर्ग के लिए 623 केंद्र हैं जहां 75 हजार लोगों को एक दिन में वैक्सीन दिया जा सकता है। 

दिल्ली में पिछड़ता जा रहा टीकाकरण

राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 89 फीसदी स्वास्थ्य कर्मचारी पहली खुराक ले चुके हैं। राजस्थान में यह संख्या 95, मध्यप्रदेश में 96 और छत्तीसगढ़ में 99 फीसदी तक पहुंच चुकी है लेकिन दिल्ली इन सबसे काफी पीछे है। ठीक इसी तरह 82 फीसदी फ्रंटलाइन वर्कर राष्ट्रीय स्तर पर पहली खुराक ले चुके हैं। गुजरात में 93, राजस्थान में 91 और मध्यप्रदेश में 90 फीसदी तक पूरे हो चुके हैं जबकि दिल्ली में अभी इनकी संख्या 80 फीसदी के आसपास है। यह हालत तब है जब दिल्ली में करीब 3.10 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी और 4.79 लाख फ्रंटलाइन वर्करों ने वैक्सीन के लिए पंजीयन कराया था। हर राज्य को करने चाहिए प्रयासनीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि वैक्सीन की आपूर्ति पूरे देश में की जा रही है लेकिन सिर्फ इसी पर ध्यान देना उचित नहीं है। हर राज्य को टीकाकरण सुधारने का प्रयास करना चाहिए। कई राज्य अच्छा कार्य भी कर रहे हैं। अब चूंकि दिल्ली देश की राजधानी है। इसलिए यहां ये उम्मीद नहीं की जा सकती। यहां और भी अधिक टीकाकरण होना चाहिए। 

गंभीर: 10 में से सात दूसरी खुराक से दूर

स्वास्थ्य कर्मचारी और फ्रंटलाइन वर्कर के अलावा दिल्ली में टीकाकरण कार्यक्रम एक और नई चुनौती का सामना कर रहा है। एक मई से युवाओं को वैक्सीन दी जा रही है लेकिन इसके चलते बुजुर्ग अपनी दूसरी खुराक लेने से पिछड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि 10 में से सात बुजुर्गों को दूसरी खुराक नहीं मिल पा रही है। 45 वर्ष या उससे अधिक आयु वालों में 30 फीसदी से भी कम दूसरी खुराक का टीकाकरण हो रहा है। यह गंभीर है क्योंकि इससे टीकाकरण को काफी नुकसान पहुंच सकता है।75 हजार की क्षमता, वैक्सीन लगीं 29 हजारदिल्ली सरकार के ही बुलेटिन के अनुसार स्वास्थ्य कर्मचारी, फ्रंटलाइन वर्कर, 45 या उससे अधिक आयु वालों के लिए दिल्ली में 623 केंद्र हैं जहां एक दिन में 75100 लोगों को वैक्सीन दी जा सकती है। पिछले एक दिन में 90832 को वैक्सीन दी है जिनमें 79353 पहली और 11479 को दूसरी खुराक दी गई। स्वास्थ्यकर्मी, फ्रंटलाइन वर्कर और 45 से अधिक आयु वाले 29,050 को पहली और दूसरी खुराक मिली है। इस वर्ग के लिए सरकार के पास पांच दिन की कोविशील्ड और एक दिन की कोवाक्सिन भी उपलब्ध है। इन्हें लगी है वैक्सीन की पहली खुराक. 45,81,752 में से 35,23,802 को लगी पहली खुराक।. 2,42,546 स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ली है पहली खुराक।. 3,83,917 फ्रंटलाइन वर्कर ही ले पाए हैं पहली खुराक।. 22,57,410 (45 या उससे अधिक) वालों को लगी वैक्सीन।. 6,39,929 (18 से 44 वर्ष) वालों को लगी है पहली खुराकदूसरी खुराक : 35 में से अभी 10 लाख लोगों को ही मिली। 

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दिल्ली में पिछड़ता जा रहा टीकाकरण

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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