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इस्राइल-हमास युद्ध: हर तरफ से घिरा गाजा कैसे कर रहा जंग, जानें कौन देश करते हैं मदद

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, गाजा
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 18 May 2021 02:30 AM IST

सार

इजरायल और मिस्र की नाकाबंदी के बावजूद कैसे युद्ध झेल रहा है गाजा
गाजा की अर्थव्यवस्था नाम की है, फिर कौन से देश इस्राइल के साथ युद्ध में कर रहे हैं मदद
हमास का इतिहास और इस्राइल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक करियर में क्या हैं संबंध

गाजा में इस्राइल का हवाई हमला
– फोटो : पीटीआई

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इस्राइली लड़ाकू विमानों द्वारा गाजा में हमास के खिलाफ लगातार भीषण हवाई हमले हो रहे हैं। पिछले सोमवार को शुरू हुई ताजा हिंसा के बाद से गाजा पट्टी में 58 बच्चों व 34 महिलाओं समेत करीब 197 लोग मारे जा चुके हैं। इस्राइल में भी दो बच्चों समेत 10 की मौत की सूचना है। सोमवार तड़के करीब 10 मिनट तक हुए धमाकों से गाजा शहर का उत्तर से दक्षिण का इलाका थर्रा उठा।एक बड़े इलाके पर हुई बमबारी पिछले 24 घंटों में सबसे भीषण रही। इस हवाई हमले में दक्षिणी गाजा सिटी के बड़े हिस्सों को बिजली पहुंचाने वाले एकमात्र संयंत्र से बिजली की एक लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। इस्राइल ने हमास आतंकियों पर यह कार्रवाई उसके कई कमांडरों के घरों को निशाना बनाकर करने का दावा किया है। इन सबके बीच आपको बताते हैं कि सालों से नहीं रहने लायक गाजा आखिर इस्राइल से कैसे युद्ध कर रहा है और इस युद्ध में कौन देश उसकी मदद कर रहे हैं।संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने साल 2012 में एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि ‘2020 तक गाजा रहने लायक नहीं होगा।’ अभी 2021 चल रहा है और गाजा सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले इलाकों में से एक है। गाजा साल 2007 से इस्राइल और मिस्र की नाकाबंदी झेल रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था नाम की है, बेरोजगारी हद से ज्यादा है, बिजली-पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, फिर भी इस इलाके में 20 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। ये कैसे मुमकिन हो रहा है?
गाजा पर हमास का शासन है। हमास ने 2006 में फिलिस्तीनी चुनाव जीते थे, जिसके बाद संगठन ने 2007 में फतह पार्टी की अध्यक्षता वाली फिलिस्तीनी अथॉरिटी की सेना को गाजा पट्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद से ही इस्राइल और मिस्र ने गाजा की नाकेबंदी कर दी। दोनों देशों ने गाजा पट्टी से सामान और लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है।
हमास क्या है?मौजूदा समय में इस्राइल और गाजा के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इस दौरान एक बार फिर हमास का नाम उभर कर सामने आया है। हमास का इतिहास और इस्राइल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक करियर आपस में संबंधित है।फिलिस्तीन के कई उग्रवादी इस्लामी समूहों में हमास सबसे बड़ा और प्रभावशाली है। इसका असली नाम इस्लामिक रजिस्टेंस मूवमेंट है और यह 1987 में पहले इंतिफादा (विद्रोह) के बाद एक आंदोलन के रूप में सामने आया था। हमास ने फिलिस्तीन की राजनीतिक प्रक्रिया में भी मौजूदगी दर्ज कराई है। इस्राइल के साथ इसका मिलिट्री विंग ‘कसम ब्रिगेड’ तीन युद्ध भी लड़ चुका है।
1993 में इस्राइल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) के बीच पहला ऑस्लो शांति समझौता हुआ था। फिर 1995 में दूसरा समझौता हुआ। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और दुनिया को उम्मीद थी कि समझौतों के बाद इस्राइल-फिलीस्तीन का मुद्दा कुछ शांत हो जाएगा।लेकिन हमास ने 1996 की फरवरी और मार्च में इस्राइल में एक के बाद एक सुसाइड बॉम्बिंग की, जिसकी वजह से माना जाता है कि इस्राइल के लोग शांति समझौतों के खिलाफ हो गए। दक्षिणपंथी नेता बेंजामिन नेतन्याहू भी उसी साल प्रधानमंत्री बने। नेतन्याहू शांति समझौते के सख्त खिलाफ थे। सुसाइड बॉम्बिंग से पहले तक नेतन्याहू की जीत के आसार कम थे। 
सालों से रहने लायक नहीं है गाजागाजा को गाजा पट्टी इसलिए ही कहते हैं क्योंकि वह जमीन का एक छोटा टुकड़ा भर है। कुल मिलाकर गाजा पट्टी 40 किलोमीटर लंबी और लगभग 8-10 किलोमीटर चौड़ी है, लेकिन यह इलाका तेल अवीव या लंदन, शंघाई जैसे शहरों से भी ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला है।इस छोटे से इलाके की जनसंख्या 20 लाख से ज्यादा है। जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने की वजह से इस्राइल की टार्गेटेड एयर स्ट्राइक से भी नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का खतरा इतना ज्यादा रहता है।
यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुताबिक, गाजा में रहने की परिस्थितियां बेहद खराब हैं। 95 फीसदी आबादी के पास पीने का साफ पानी नहीं है। गाजा में पावर कट आम बात है क्योंकि डिमांड ज्यादा है और सप्लाई कम।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर वाले इलाकों में गाजा भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि लगभग 80 फीसदी आबादी जिंदा रहने और बुनियादी सुविधाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर है।
कैसे कायम है गाजा?हमास को अमेरिका, यूके, यूरोपियन यूनियन समेत कई देश आतंकी संगठन मानते हैं। इसलिए सीधे उसे वित्तीय और मानवीय मदद देने की बजाय ज्यादातर देश यूएनआरडब्ल्यूए के जरिए गाजा तक मदद पहुंचाते हैं।
खाद्य, राहत, चिकित्सा संबंधी सामग्री गाजा में पहुंचाने के लिए इस्राइल ने एक कॉरिडोर बना रखा है। गाजा तीन तरफ से इस्राइल से घिरा हुआ है। एक बहुत छोटी सी सीमा मिस्र से भी मिलती है।साल 2000 में हुए दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के बाद से गाजा के आयत-निर्यात में भारी कमी आई है। इस सबके बीच गाजा में ‘टनल इकनॉमी’ फल-फूल रही है। गाजा में मिस्र से गैरकानूनी तरीके से सामान लाने के लिए सैंकड़ों-हजारों टनल बनाई गई हैं। ये टनल हमास के नियंत्रण में हैं।
हालांकि, अमेरिका इस्राइल का साथी है, फिर भी वो लाखों-करोड़ों डॉलर की मदद फिलिस्तीन भेजता है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस वित्तीय मदद में कमी कर दी गई थी, लेकिन जो बाइडन प्रशासन 235 मिलियन डॉलर की मदद देने को तैयार है।सुन्नी मुसलमानों का समूह होने के बावजूद हमास को अरब देश ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। सिर्फ कतर ही ऐसा देश है, जो हमास को सभी तरह की मदद देता है। इस साल कतर ने गाजा को दी जाने वाली मदद को 360 मिलियन डॉलर कर दिया था।
कतर सरकार ने अपने बयान में कहा था, ‘इस मदद से गाजा के कर्मचारियों की तनख्वाह, जरूरतमंद परिवारों को वित्तीय सहायता, पावर स्टेशन चलाने के लिए ईंधन खरीदा जा सकेगा।’

विस्तार

इस्राइली लड़ाकू विमानों द्वारा गाजा में हमास के खिलाफ लगातार भीषण हवाई हमले हो रहे हैं। पिछले सोमवार को शुरू हुई ताजा हिंसा के बाद से गाजा पट्टी में 58 बच्चों व 34 महिलाओं समेत करीब 197 लोग मारे जा चुके हैं। इस्राइल में भी दो बच्चों समेत 10 की मौत की सूचना है। सोमवार तड़के करीब 10 मिनट तक हुए धमाकों से गाजा शहर का उत्तर से दक्षिण का इलाका थर्रा उठा।

एक बड़े इलाके पर हुई बमबारी पिछले 24 घंटों में सबसे भीषण रही। इस हवाई हमले में दक्षिणी गाजा सिटी के बड़े हिस्सों को बिजली पहुंचाने वाले एकमात्र संयंत्र से बिजली की एक लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। इस्राइल ने हमास आतंकियों पर यह कार्रवाई उसके कई कमांडरों के घरों को निशाना बनाकर करने का दावा किया है। इन सबके बीच आपको बताते हैं कि सालों से नहीं रहने लायक गाजा आखिर इस्राइल से कैसे युद्ध कर रहा है और इस युद्ध में कौन देश उसकी मदद कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने साल 2012 में एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि ‘2020 तक गाजा रहने लायक नहीं होगा।’ अभी 2021 चल रहा है और गाजा सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले इलाकों में से एक है। गाजा साल 2007 से इस्राइल और मिस्र की नाकाबंदी झेल रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था नाम की है, बेरोजगारी हद से ज्यादा है, बिजली-पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, फिर भी इस इलाके में 20 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। ये कैसे मुमकिन हो रहा है?

गाजा पर हमास का शासन है। हमास ने 2006 में फिलिस्तीनी चुनाव जीते थे, जिसके बाद संगठन ने 2007 में फतह पार्टी की अध्यक्षता वाली फिलिस्तीनी अथॉरिटी की सेना को गाजा पट्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद से ही इस्राइल और मिस्र ने गाजा की नाकेबंदी कर दी। दोनों देशों ने गाजा पट्टी से सामान और लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध लगा रखा है।
हमास क्या है?
मौजूदा समय में इस्राइल और गाजा के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। इस दौरान एक बार फिर हमास का नाम उभर कर सामने आया है। हमास का इतिहास और इस्राइल के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का राजनीतिक करियर आपस में संबंधित है।

फिलिस्तीन के कई उग्रवादी इस्लामी समूहों में हमास सबसे बड़ा और प्रभावशाली है। इसका असली नाम इस्लामिक रजिस्टेंस मूवमेंट है और यह 1987 में पहले इंतिफादा (विद्रोह) के बाद एक आंदोलन के रूप में सामने आया था। हमास ने फिलिस्तीन की राजनीतिक प्रक्रिया में भी मौजूदगी दर्ज कराई है। इस्राइल के साथ इसका मिलिट्री विंग ‘कसम ब्रिगेड’ तीन युद्ध भी लड़ चुका है।
1993 में इस्राइल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन (पीएलओ) के बीच पहला ऑस्लो शांति समझौता हुआ था। फिर 1995 में दूसरा समझौता हुआ। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और दुनिया को उम्मीद थी कि समझौतों के बाद इस्राइल-फिलीस्तीन का मुद्दा कुछ शांत हो जाएगा।
लेकिन हमास ने 1996 की फरवरी और मार्च में इस्राइल में एक के बाद एक सुसाइड बॉम्बिंग की, जिसकी वजह से माना जाता है कि इस्राइल के लोग शांति समझौतों के खिलाफ हो गए। दक्षिणपंथी नेता बेंजामिन नेतन्याहू भी उसी साल प्रधानमंत्री बने। नेतन्याहू शांति समझौते के सख्त खिलाफ थे। सुसाइड बॉम्बिंग से पहले तक नेतन्याहू की जीत के आसार कम थे। 
सालों से रहने लायक नहीं है गाजा
गाजा को गाजा पट्टी इसलिए ही कहते हैं क्योंकि वह जमीन का एक छोटा टुकड़ा भर है। कुल मिलाकर गाजा पट्टी 40 किलोमीटर लंबी और लगभग 8-10 किलोमीटर चौड़ी है, लेकिन यह इलाका तेल अवीव या लंदन, शंघाई जैसे शहरों से भी ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाला है।
इस छोटे से इलाके की जनसंख्या 20 लाख से ज्यादा है। जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने की वजह से इस्राइल की टार्गेटेड एयर स्ट्राइक से भी नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का खतरा इतना ज्यादा रहता है।

यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के मुताबिक, गाजा में रहने की परिस्थितियां बेहद खराब हैं। 95 फीसदी आबादी के पास पीने का साफ पानी नहीं है। गाजा में पावर कट आम बात है क्योंकि डिमांड ज्यादा है और सप्लाई कम।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर वाले इलाकों में गाजा भी शामिल है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि लगभग 80 फीसदी आबादी जिंदा रहने और बुनियादी सुविधाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर है।
कैसे कायम है गाजा?

हमास को अमेरिका, यूके, यूरोपियन यूनियन समेत कई देश आतंकी संगठन मानते हैं। इसलिए सीधे उसे वित्तीय और मानवीय मदद देने की बजाय ज्यादातर देश यूएनआरडब्ल्यूए के जरिए गाजा तक मदद पहुंचाते हैं।
खाद्य, राहत, चिकित्सा संबंधी सामग्री गाजा में पहुंचाने के लिए इस्राइल ने एक कॉरिडोर बना रखा है। गाजा तीन तरफ से इस्राइल से घिरा हुआ है। एक बहुत छोटी सी सीमा मिस्र से भी मिलती है।
साल 2000 में हुए दूसरे इंतिफादा (विद्रोह) के बाद से गाजा के आयत-निर्यात में भारी कमी आई है। इस सबके बीच गाजा में ‘टनल इकनॉमी’ फल-फूल रही है। गाजा में मिस्र से गैरकानूनी तरीके से सामान लाने के लिए सैंकड़ों-हजारों टनल बनाई गई हैं। ये टनल हमास के नियंत्रण में हैं।
हालांकि, अमेरिका इस्राइल का साथी है, फिर भी वो लाखों-करोड़ों डॉलर की मदद फिलिस्तीन भेजता है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस वित्तीय मदद में कमी कर दी गई थी, लेकिन जो बाइडन प्रशासन 235 मिलियन डॉलर की मदद देने को तैयार है।
सुन्नी मुसलमानों का समूह होने के बावजूद हमास को अरब देश ज्यादा पसंद नहीं करते हैं। सिर्फ कतर ही ऐसा देश है, जो हमास को सभी तरह की मदद देता है। इस साल कतर ने गाजा को दी जाने वाली मदद को 360 मिलियन डॉलर कर दिया था।
कतर सरकार ने अपने बयान में कहा था, ‘इस मदद से गाजा के कर्मचारियों की तनख्वाह, जरूरतमंद परिवारों को वित्तीय सहायता, पावर स्टेशन चलाने के लिए ईंधन खरीदा जा सकेगा।’

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चीन की उन्नत समाजवादी देश परियोजना: उपनिवेशवाद तथा कब्जे के नए तरीके जिनसे दुनिया है हैरान

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इस समय चीन न केवल भारत, बल्कि अमेरिका सहित दुनिया के कई अन्य देशों के लिए भी अलग-अलग वजहों से परेशानी का कारण बना हुआ है। एक साल पहले गलवां घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद केंद्र सरकार ने टिकटॉक समेत ढेरों चाइनीज एप्स पर देश में पाबंदी लगा दी थी। इन एप्स से भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा बताया गया था। हालांकि विशेषज्ञ एप्स पर लगे प्रतिबंध को चीन के प्रति आशंकाओं का एक बहुत ही छोटा-सा हिस्सा मानते हैं। उस समय युद्ध जैसे हालात बनते बनते रह गए थे।दूसरी ओर यह देश भारत के पड़ोसी देशों में अपनी पकड़ लगातार बढ़ाता जा रहा है। पाकिस्तान को उसने पहले ही अपने कर्ज के जाल में फंसा रखा है। श्रीलंका में भी उसकी पैठ गहराती जा रही है। नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार में भी उसका दखल बढ़ रहा है।दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझने में जुटी हुई है और चीन विस्तारवाद की राह पर अपनी गति बढ़ा रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों में कोविड से बचाव के टीकों को अधिक से अधिक लोगों को लगाने की जद्दोजहद चल रही है। वहीं विकासशील देशों में टीकों का टोटा चल रहा है और चीन इसका फायदा उठाने में जुटा हुआ है। भारत अभी भी अपनी पहली स्वदेशी कोविड वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन से मान्यता दिलाने की प्रक्रिया में है और चीन की दो वैक्सीन को यह अनुमति दी जा चुकी है।इतना ही नहीं चीन दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता और उत्पादक देश अमेरिका को पीछे छोड़ने से कुछ ही कदम पीछे रह गया है। उसने अब तक औसतन प्रत्येक 100 में से 50 नागरिकों को कोविड का टीका लगा दिया है। इतना ही नहीं चीन दुनिया के 60 देशों को मुफ्त या सस्ती वैक्सीन भी उपलब्ध करा चुका है।कोरोना से बढ़ रही मौतों से चिंतित अमेरिका ने दुनिया के जरूरतमंद देशों को वैक्सीन देने का काम कुछ समय के लिए रोक दिया था। भारत में भी कोरोना की दूसरी लहर ही वजह से यह काम रोक दिया गया था। उसी समय चीन ने दुनिया के अलग अलग भौगोलिक स्थिति वाले देशों को अपनी वैक्सीन दी। चीन में इस समय 49 वैक्सीन पर शोध किया जा रहा है और छह को वह अपने नागरिकों को लगा रहा है। चीन ने पिछले साल 2020 में ही छह कोविड वैक्सीन को देश के भीतर उपयोग की अनुमि दे दी थी और अब तक इनका प्रयोग किया जा रहा है।वैक्सीन उपनिवेशवादअमेरिका में इस समय 66 वैक्सीन पर शोध और उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। चीन इस मामले में दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है और तीसरे नंबर पर यूरोप के देश हैं। 2021 की शुरुआत के बाद चीन ने वैक्सीन राष्ट्रवाद का फायदा उठाया और मेक्सिको, पेरू, चिली, अर्जेंटीना, रूस, पाकिस्तान और इंडोनेशिया जैसे एक दर्जन से ज्यादा देशों में अपनी वैक्सीन का ट्रायल किया।वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश को ‘एडवांस्ड सोशलिस्ट कंट्री’ बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इससे अमेरिका और अन्य विकसित देश परेशान हैं। ‘एडवांस्ड सोशलिस्ट कंट्री’ प्रोजेक्ट के तहत चीन खुद को 2049 तक दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक ताकत के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहता है। यदि वह इसे प्राप्त कर लेता है तो अमेरिका दूसरे पायदान पर पहुंच जाएगा। वहीं तकनीकी मोर्चे पर आगे दिखाई दे रहे कई यूरोपीय देशों की हैसियत भी कम हो जाएगी।चीन की डरावनी योजनाएंचीन की कई ऐसी भावी योजनाएं हैं, जो इस समय दुनिया को आश्चर्यचकित करने के साथ-साथ डरा भी रही हैं। निवेश और कर्ज के भी जाल में वह कई देशों को फांस चुका है। हमारा पड़ोसी देश बांग्लादेश भी उसके इस जाल में फंसता जा रहा है। चीन वहां 2030 तक 100 स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) स्थापित करने की घोषणा कर चुका है। इसमें अरबों डॉलर का निवेश करने के लिए कई चीनी कंपनियां भी तैयार हैं।बीआरआई योजनाइसी तरह चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) योजना है जिसके तहत 2049 तक दुनिया के करीब 70 देशों में बुनियादी संरचनाओं का निर्माण कर उन्हें एकसाथ लाया जा रहा है, लेकिन इसका असली मकसद व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करना व भारत और अमेरिका को घेरना है। इन तमाम योजनाओं में एक और महत्वाकांक्षी योजना है – ‘मेड इन चाइना 2025’ जिसे चीन ने साल 2015 में लॉन्च किया था। फिर अंतरिक्ष का क्षेत्र भी है जहां चीन अपनी जबरदस्त उपस्थिति दर्ज कर दुनिया पर नजर रखने की महत्वाकांक्षा पाले हुए है। हाल ही में उसने अपने तीन अंतरिक्षयात्रियों को पृथ्वी की कक्षा में भेजा है। ये तीनों चीन के निर्माणाधीन अंतरिक्ष स्टेशन में तीन महीने तक रहेंगे।अंतरिक्ष में चुनौतीअंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण के लिए चीन ने 2021 से 2022 के बीच 11 बार अंतरिक्ष यानों को भेजने की योजना बनाई है जिनमें तीन अभियान पूरे हो चुके हैं। वह तियांजू-2 कार्गो शिप को पहले ही अंतरिक्ष में भेज चुका है। चीनी एजेंसी के अनुसार 11 में से तीन बार उसके यानों से स्टेशन के मॉड्यूल, चार बार कार्गो स्पेसशिप और चार बार अंतरिक्ष यात्री स्टेशन के लिए रवाना होंगे। वह साल 2022 तक 10 ऐसे ही और मॉड्यूल लॉन्च करना चाहता है जो पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे।आशंकित अमेरिकाअमेरिका कई बार आशंका जता चुका है कि चीन भविष्य में अपनी अंतरिक्ष परियोजनाओं का इस्तेमाल अमेरिका और उसके मित्र देशों की जासूसी करने में कर सकता है। यही वजह है कि वो खुद को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से अलग कर चुका है और अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन पूरा करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।जासूसी का खतरा?अब तक अंतरिक्ष में अमेरिका का वर्चस्व था। वह स्पेस सुप्रीमेसी का फायदा भी उठा रहा था। लेकिन अब चीन पर अंतरिक्ष से जासूसी करने के आरोप लगने लगे हैं। ताइवान पहले ही अपने सरकारी कर्मचारियों को उन स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने से मना कर चुका है जिसमें नेविगेशन के लिए चीनी सॉफ्टवेयर बाइदू इंस्टॉल हैं। उसे शक है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल कर जरूरी सूचनाएं चीन की सेना व सरकार तक पहुंचाई जा सकती हैं।आशंका की वजह क्या है?दरअसल, चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ‘चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ सेना का अंग है। इसलिए वह अपने हर प्रोजेक्ट के लिए सेना के प्रति उत्तरदायी है। हालांकि अंतरिक्ष अनुसंधान में चीन अब भी अमेरिका से काफी पीछे है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसकी प्रगति चौंकाने वाली है। चीन ने पिछले साल बाइदू नेटवर्क अभियान के तहत पांच टन वजनी उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किया था। बाइदू नेटवर्क अमेरिका के विश्वव्यापी ‘ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम’ (जीपीएस) के विकल्प के रूप में बनाया गया है। चीन ने अपने इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 10 अरब डॉलर खर्च किए हैं।

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अनुच्छेद 370: केंद्रीय मंत्री तोमर बोले- दिग्विजय सिंह का बयान देश का कांग्रेस मुक्त कराने वाला

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Fri, 18 Jun 2021 06:01 PM IST

सार
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान पर अब केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पलटवार किया है। तोमर ने कहा कि इसे बहाल करना संभव नहीं होगा।  

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
– फोटो : एएनआई

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा हाल ही में अनुच्छेद 370 को लेकर दिए गए बयान को देश को कांग्रेस से मुक्त कराने वाला करार दिया है।तोमर ने शुक्रवार को ग्वाालियर में मीडिया से बातचीत में कहा, ‘सारा देश अनुच्छेद 370 को बहाल करने के खिलाफ है और दिग्विजय सिंह का बयान भारत को कांग्रेस से मुक्त करने वाला है। अभी तो कांग्रेस सरकार बनने की संभावना भी नहीं दिखाई देती है, और यदि बन भी गई तो इसे दोबारा बहाल करना संभव नहीं होगा। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने कथित रूप से कहा था कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लागू करने पर पुनर्विचार किया जा सकता है ।कानूनी वापसी को छोड़कर किसानों से बात को तैयारकेंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा कई माह से किए जा रहे आंदोलन के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों से बात करने को तैयार है। कानूनों को वापस लेने की बात को छोड़कर, कानून संबंधित प्रावधानों को लेकर कोई किसान यूनियन आधी रात को भी बात करने को तैयार है तो नरेंद्र सिंह तोमर उसका स्वागत करेंगे।उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल में मेडिकल सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है और कोविड संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी हो रही है। अस्पतालों में पीएम केयर फंड और राज्य सरकार ने ऑक्सीजन प्लांट से लेकर मेडिकल उपकरण दिए हैं और इसके बाद भी जरुरत होने पर कई निजी कंपनियों से मदद लेकर प्रत्येक जिले में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोरोना के टीके को लेकर उन्होंने कहा कि अगस्त महीने से ज्यादा मात्रा में टीके उपलब्ध रहेंगे और यह काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

विस्तार

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा हाल ही में अनुच्छेद 370 को लेकर दिए गए बयान को देश को कांग्रेस से मुक्त कराने वाला करार दिया है।

तोमर ने शुक्रवार को ग्वाालियर में मीडिया से बातचीत में कहा, ‘सारा देश अनुच्छेद 370 को बहाल करने के खिलाफ है और दिग्विजय सिंह का बयान भारत को कांग्रेस से मुक्त करने वाला है। अभी तो कांग्रेस सरकार बनने की संभावना भी नहीं दिखाई देती है, और यदि बन भी गई तो इसे दोबारा बहाल करना संभव नहीं होगा। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने कथित रूप से कहा था कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लागू करने पर पुनर्विचार किया जा सकता है ।

कानूनी वापसी को छोड़कर किसानों से बात को तैयार
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा कई माह से किए जा रहे आंदोलन के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार हमेशा किसानों से बात करने को तैयार है। कानूनों को वापस लेने की बात को छोड़कर, कानून संबंधित प्रावधानों को लेकर कोई किसान यूनियन आधी रात को भी बात करने को तैयार है तो नरेंद्र सिंह तोमर उसका स्वागत करेंगे।
उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल अंचल में मेडिकल सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है और कोविड संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने की तैयारी हो रही है। अस्पतालों में पीएम केयर फंड और राज्य सरकार ने ऑक्सीजन प्लांट से लेकर मेडिकल उपकरण दिए हैं और इसके बाद भी जरुरत होने पर कई निजी कंपनियों से मदद लेकर प्रत्येक जिले में मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कोरोना के टीके को लेकर उन्होंने कहा कि अगस्त महीने से ज्यादा मात्रा में टीके उपलब्ध रहेंगे और यह काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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वार : कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल बोले- प्रधानमंत्री ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया

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पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: योगेश साहू
Updated Fri, 18 Jun 2021 06:37 PM IST

सार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक साक्षात्मकार में कहा कि प्रधानमंत्री ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है।

कपिल सिब्बल
– फोटो : PTI

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक साक्षात्मकार में कहा कि प्रधानमंत्री ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है, लेकिन अपने राजनीतिक भाग्य को सुरक्षित मानते हुए वह कर्तव्यों का निर्वहन करना बंद नहीं कर सकते।सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री को कोविड के दौरान चिकित्सा सहायता की जरूरत वाले लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन वह पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में व्यस्त थे। समाचार एजेंसी पीटीआई से चर्चा में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पीएम मोदी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय राजनीतिक नेतृत्व के अभाव का मतलब यह नहीं है कि पीएम को अपने कर्तव्य का निर्वहन रोक देना चाहिए और यह मान लेना चाहिए कि उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित है। सिब्बल ने सरकार पर कोविड-19 टीकाकरण की रणनीति के लिए अपनी अयोग्यता के लिए भी हमला किया। उन्होंने कहा कि यह आपराधिक लापरवाही की हद है। महामारी से निपटने में सरकार की प्राथमिकताएं गलत और दोषपूर्ण हैं और ईमानदारी की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि टूलकिट मुद्दा और कुछ नहीं बल्कि उनकी सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए जालसाजी का एक प्रयास है।सिब्बल ने दूसरी लहर के दौरान लोगों की जिंदगियों को बचाने में निष्क्रियता के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि कोई विश्वसनीय विकल्प हो भी सकता है और नहीं भी, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित मानते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना बंद कर देना चाहिए।

विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक साक्षात्मकार में कहा कि प्रधानमंत्री ने शासन करने का नैतिक अधिकार खो दिया है, लेकिन अपने राजनीतिक भाग्य को सुरक्षित मानते हुए वह कर्तव्यों का निर्वहन करना बंद नहीं कर सकते।

सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री को कोविड के दौरान चिकित्सा सहायता की जरूरत वाले लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन वह पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में व्यस्त थे। समाचार एजेंसी पीटीआई से चर्चा में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पीएम मोदी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय राजनीतिक नेतृत्व के अभाव का मतलब यह नहीं है कि पीएम को अपने कर्तव्य का निर्वहन रोक देना चाहिए और यह मान लेना चाहिए कि उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित है। 

सिब्बल ने सरकार पर कोविड-19 टीकाकरण की रणनीति के लिए अपनी अयोग्यता के लिए भी हमला किया। उन्होंने कहा कि यह आपराधिक लापरवाही की हद है। महामारी से निपटने में सरकार की प्राथमिकताएं गलत और दोषपूर्ण हैं और ईमानदारी की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि टूलकिट मुद्दा और कुछ नहीं बल्कि उनकी सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए जालसाजी का एक प्रयास है।
सिब्बल ने दूसरी लहर के दौरान लोगों की जिंदगियों को बचाने में निष्क्रियता के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि कोई विश्वसनीय विकल्प हो भी सकता है और नहीं भी, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि उन्हें अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित मानते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना बंद कर देना चाहिए।

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