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महामारी: संक्रमण दर घटी पर बढ़ती मौतों ने बढ़ाई चिंता, अब इस तरह काबू करेगी सरकार 

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अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sun, 16 May 2021 06:12 PM IST

सार
दिल्ली में संक्रमण दर 34 से घटकर 10 फीसदी तक आ गई है, लेकिन मौतों का आंकड़ा इसी अनुपात में कम नहीं हुआ है। इससे चिंता और चुनौती बढ़ गई है।   

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दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक कोरोना के सक्रिय मामलों में तेजी से कमी आ रही है। दिल्ली में पहले रोज 32 से 34 हजार नए संक्रमित मिल रहे थे, जो अब घटकर 6456 तक आ गए हैं। संक्रमण दर 34 फीसदी के भयावह स्तर तक जाने के बाद गिरकर अब 10.40 प्रतिशत तक आ गई है। इन आंकड़ों ने कुछ राहत दी, लेकिन महामारी से रोज होने वाली मौतें सरकार के लिए अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। दिल्ली में रोजाना मौत का आंकड़ा 448 तक पहुंचने के बाद 300 के आसपास आ गया है। रविवार को बीते 24 घंटे में 262 कोरोना मौतें दर्ज की गई हैं। ऐसे में कोरोना मौतों को रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक कोरोना की स्थिति नियंत्रण में आती दिख रही है। अब यह रोज नए मरीजों का आंकड़ा 10 हजार से भी नीचे आ गया है। अगर एक हफ्ते तक इसी प्रकार का ट्रेंड चलता रहा तो हम अधिकार के साथ कह सकेंगे कि दिल्ली ने कोरोना की दूसरी लहर को काबू में कर लिया है।इसलिए हो रही ज्यादा मौतेंकोरोना मौतें अभी भी सरकार के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं। ज्यादा मौतों की वजह क्या है, इस सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि इस लहर में कोरोना के गंभीर रोगियों की संख्या ज्यादा आ रही है। इस कारण भी ज्यादा लोगों की मौत हो रही है।अधिकारी के मुताबिक पहले अस्पताल में सुविधाओं की कमी और बाद में ऑक्सीजन की कमी ने लोगों को बहुत तकलीफ दी। इस कारण राजधानी में मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। हालांकि, सरकार अब रणनीति बदलकर इन मौतों पर पूरी तरह लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।घर पर इलाज भी बढ़ा रहा खतराबीएल कपूर अस्पताल के कोरोना मामलों के नोडल डॉक्टर संदीप नायर ने कहा कि इस बार अस्पतालों में बेड्स की कमी लोगों को अपने घरों पर रहकर इलाज कराने के लिए मजबूर कर रही थी (हालांकि, अब ऐसी स्थिति नहीं है)।  घर पर उचित देखभाल न होने के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ रही थी। जब मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर होने लगती थी तब परिवार के लोग उन्हें अस्पतालों में लेकर आते हैं। इसका दुष्परिणाम होता है कि मरीजों को बचने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। कोरोना से ज्यादा मौतें होने के पीछे यह एक बड़ा कारण हो सकता है। अब इस तरह मौतों को रोकेगी सरकारकोरोना मौतों को रोकना अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए इंटीग्रेटेड डाटा मॉडल खड़ा कर लिया गया है। इससे प्रतिदिन के स्तर पर यह निगाह रखी जा सकेगी कि किस अस्पताल में कितने बेड्स हैं, कितने गंभीर मरीज हैं और कितने बेड्स खाली हैं। अब प्राइवेट अस्पताल किसी मरीज को बेड देने से इनकार नहीं कर सकेंगे। घर में रह रहे मरीज पर भी रहेगी नजरऑक्सीजन की कमी कोरोना मौतों में सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। लेकिन सरकार अब इस समस्या से पूरी तरह उबर गई लगती है। सभी जिलों में 200-200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रखकर हर मरीज तक ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। अगर मरीज का घर पर भी इलाज चल रहा है तो भी वह सीधे तौर पर डॉक्टरों की निगरानी में होगा।  ये डॉक्टर मरीज की जरा-सी भी स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करने के लिए अधिकृत होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना को अमलीजामा पहनाकर कोरोना मौतों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

विस्तार

दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक कोरोना के सक्रिय मामलों में तेजी से कमी आ रही है। दिल्ली में पहले रोज 32 से 34 हजार नए संक्रमित मिल रहे थे, जो अब घटकर 6456 तक आ गए हैं। संक्रमण दर 34 फीसदी के भयावह स्तर तक जाने के बाद गिरकर अब 10.40 प्रतिशत तक आ गई है। इन आंकड़ों ने कुछ राहत दी, लेकिन महामारी से रोज होने वाली मौतें सरकार के लिए अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। 

दिल्ली में रोजाना मौत का आंकड़ा 448 तक पहुंचने के बाद 300 के आसपास आ गया है। रविवार को बीते 24 घंटे में 262 कोरोना मौतें दर्ज की गई हैं। ऐसे में कोरोना मौतों को रोकना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक कोरोना की स्थिति नियंत्रण में आती दिख रही है। अब यह रोज नए मरीजों का आंकड़ा 10 हजार से भी नीचे आ गया है। अगर एक हफ्ते तक इसी प्रकार का ट्रेंड चलता रहा तो हम अधिकार के साथ कह सकेंगे कि दिल्ली ने कोरोना की दूसरी लहर को काबू में कर लिया है।

इसलिए हो रही ज्यादा मौतें
कोरोना मौतें अभी भी सरकार के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं। ज्यादा मौतों की वजह क्या है, इस सवाल के जवाब में अधिकारी ने बताया कि इस लहर में कोरोना के गंभीर रोगियों की संख्या ज्यादा आ रही है। इस कारण भी ज्यादा लोगों की मौत हो रही है।
अधिकारी के मुताबिक पहले अस्पताल में सुविधाओं की कमी और बाद में ऑक्सीजन की कमी ने लोगों को बहुत तकलीफ दी। इस कारण राजधानी में मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। हालांकि, सरकार अब रणनीति बदलकर इन मौतों पर पूरी तरह लगाम लगाने की कोशिश कर रही है।
घर पर इलाज भी बढ़ा रहा खतरा
बीएल कपूर अस्पताल के कोरोना मामलों के नोडल डॉक्टर संदीप नायर ने कहा कि इस बार अस्पतालों में बेड्स की कमी लोगों को अपने घरों पर रहकर इलाज कराने के लिए मजबूर कर रही थी (हालांकि, अब ऐसी स्थिति नहीं है)।  घर पर उचित देखभाल न होने के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ रही थी। जब मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर होने लगती थी तब परिवार के लोग उन्हें अस्पतालों में लेकर आते हैं। इसका दुष्परिणाम होता है कि मरीजों को बचने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। कोरोना से ज्यादा मौतें होने के पीछे यह एक बड़ा कारण हो सकता है।

 

अब इस तरह मौतों को रोकेगी सरकार

कोरोना मौतों को रोकना अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके लिए इंटीग्रेटेड डाटा मॉडल खड़ा कर लिया गया है। इससे प्रतिदिन के स्तर पर यह निगाह रखी जा सकेगी कि किस अस्पताल में कितने बेड्स हैं, कितने गंभीर मरीज हैं और कितने बेड्स खाली हैं। अब प्राइवेट अस्पताल किसी मरीज को बेड देने से इनकार नहीं कर सकेंगे।

 

घर में रह रहे मरीज पर भी रहेगी नजर

ऑक्सीजन की कमी कोरोना मौतों में सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। लेकिन सरकार अब इस समस्या से पूरी तरह उबर गई लगती है। सभी जिलों में 200-200 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर रखकर हर मरीज तक ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। अगर मरीज का घर पर भी इलाज चल रहा है तो भी वह सीधे तौर पर डॉक्टरों की निगरानी में होगा।  ये डॉक्टर मरीज की जरा-सी भी स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करने के लिए अधिकृत होंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना को अमलीजामा पहनाकर कोरोना मौतों पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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