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कोरोना से जंग: इन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लॉकडाउन, जानें कब तक लागू रहेगा प्रतिबंध

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Sun, 16 May 2021 09:56 AM IST

सार
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए अपने यहां अलग-अलग तरह के प्रतिबंधों को लागू कर रखा है, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। 

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : ANI

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देशभर में व्याप्त कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोग इस घातक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में कोविड-19 के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों ने अपने यहां अलग-अलग तरह के प्रतिबंध को लागू किया हुआ है। किसी प्रदेश में संपूर्ण लॉकडाउन लागू है तो कहीं पर मिनी-लॉकडाउन से काम चलाया जा रहा है जबकि कुछ राज्य नाइट कर्फ्यू लागू कर कोरोना के मामलों को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं।पाबंदियों का सकारात्मक असरइन पाबंदियों का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। कई राज्यों में अब कोरोना के दैनिक मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है। साथ ही मरीजों के स्वस्थ होने की दर बढ़ी है। यहां जानें कि किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए अपने यहां प्रतिबंध लागू कर रखा है। 

दिल्ली में 19 अप्रैल से 17 मई तक लॉकडाउन है।
हरियाणा, जहां 3 मई से सात दिन का लॉकडाउन था, वहां इसे 17 मई तक बढ़ा दिया गया है।
बिहार ने 4 मई को 15 मई तक लॉकडाउन लगाया था जिसे अब 25 मई तक बढ़ा दिया गया है।
ओडिशा में 5 मई से 19 मई तक 14 दिनों का लॉकडाउन है।
राजस्थान ने राज्य में 10 से 24 मई तक सख्त लॉकडाउन लगाया है।
झारखंड ने सख्त प्रावधानों के साथ लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को 27 मई तक बढ़ा दिया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी 28 जिलों में अधिकारियों को कोविड-19 लॉकडाउन का विस्तार 31 मई तक करने के लिए कहा है।
पंजाब ने सप्ताहांत लॉकडाउन और 15 मई तक रात के कर्फ्यू जैसे उपायों के अलावा व्यापक पाबंदियां लगायी हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन ने रात और सप्ताहांत कर्फ्यू पाबंदियां 18 मई तक बढ़ा दी हैं।
मध्य प्रदेश ने केवल आवश्यक सेवाओं की अनुमति के साथ 17 मई तक ‘जनता कर्फ्यू’ लगाया है, जबकि जिले इसे बढ़ाने के लिए अधिकृत हैं।
गुजरात ने 11 मई को 36 शहरों में रात के कर्फ्यू और अन्य दिन के समय की पाबंदियों को 18 मई तक बढ़ा दिया।
महाराष्ट्र ने लॉकडाउन जैसी पाबंदियां 1 जून तक बढ़ा दी हैं।
गोवा सरकार ने 9 मई से 24 मई तक कर्फ्यू लगाया है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 16 मई से 30 मई तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की है।
असम ने 12 मई को राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सभी कार्यालयों, धार्मिक स्थलों और साप्ताहिक बाजारों को 15 दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया था, इसके अलावा अपराह्न 2 बजे से सुबह 5 बजे तक लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है।
नागालैंड ने 14 मई से 21 मई तक सप्ताह भर के लिए पूर्ण लॉकडाउन लागू किया है।
मिजोरम ने आइजोल और अन्य जिला मुख्यालयों में 10 मई से लागया गया लॉकडाउन को 24 मई तक बढ़ा दिया है।
अरुणाचल प्रदेश ने शनिवार से पूरे महीने के लिए शाम 6.30 बजे से सुबह 5 बजे तक रात का कर्फ्यू लगाया है।
मणिपुर सरकार ने 8 मई से 17 मई तक सात जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है।
मेघालय ने सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी खासी हिल्स जिले में लॉकडाउन 24 मई तक बढ़ा दिया है।
सिक्किम सरकार ने 17 मई से 24 मई तक पूरे राज्य में पूर्ण लॉकडाउन करने का फैसला किया।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 17 मई तक लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगा दी हैं।
उत्तराखंड ने 11 मई से 18 मई तक सख्त कोविड कर्फ्यू लगाया है।
हिमाचल प्रदेश ने राज्य में कोरोना वायरस के चलते लागू कर्फ्यू 26 मई तक बढ़ा दिया है।
केरल ने राज्य में 8 मई से लागू पूर्ण लॉकडाउन 23 मई तक बढ़ा दिया है।
तमिलनाडु में 10 मई से 24 मई तक लॉकडाउन है।
पुडुचेरी ने लॉकडाउन को 10 मई से 24 मई तक बढ़ा दिया है।
तेलंगाना ने 12 मई से 10 दिनों का लॉकडाउन लागू किया है।
आंध्र प्रदेश ने 18 मई तक दोपहर 12 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया है।

विस्तार

देशभर में व्याप्त कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोग इस घातक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में कोविड-19 के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से विभिन्न राज्यों ने अपने यहां अलग-अलग तरह के प्रतिबंध को लागू किया हुआ है। किसी प्रदेश में संपूर्ण लॉकडाउन लागू है तो कहीं पर मिनी-लॉकडाउन से काम चलाया जा रहा है जबकि कुछ राज्य नाइट कर्फ्यू लागू कर कोरोना के मामलों को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं।

पाबंदियों का सकारात्मक असर
इन पाबंदियों का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। कई राज्यों में अब कोरोना के दैनिक मामलों में गिरावट दर्ज की जा रही है। साथ ही मरीजों के स्वस्थ होने की दर बढ़ी है। यहां जानें कि किन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने कोरोना वायरस की चेन तोड़ने के लिए अपने यहां प्रतिबंध लागू कर रखा है। 

दिल्ली में 19 अप्रैल से 17 मई तक लॉकडाउन है।

हरियाणा, जहां 3 मई से सात दिन का लॉकडाउन था, वहां इसे 17 मई तक बढ़ा दिया गया है।
बिहार ने 4 मई को 15 मई तक लॉकडाउन लगाया था जिसे अब 25 मई तक बढ़ा दिया गया है।
ओडिशा में 5 मई से 19 मई तक 14 दिनों का लॉकडाउन है।
राजस्थान ने राज्य में 10 से 24 मई तक सख्त लॉकडाउन लगाया है।
झारखंड ने सख्त प्रावधानों के साथ लॉकडाउन जैसी पाबंदियों को 27 मई तक बढ़ा दिया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी 28 जिलों में अधिकारियों को कोविड-19 लॉकडाउन का विस्तार 31 मई तक करने के लिए कहा है।

पंजाब ने सप्ताहांत लॉकडाउन और 15 मई तक रात के कर्फ्यू जैसे उपायों के अलावा व्यापक पाबंदियां लगायी हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन ने रात और सप्ताहांत कर्फ्यू पाबंदियां 18 मई तक बढ़ा दी हैं।
मध्य प्रदेश ने केवल आवश्यक सेवाओं की अनुमति के साथ 17 मई तक ‘जनता कर्फ्यू’ लगाया है, जबकि जिले इसे बढ़ाने के लिए अधिकृत हैं।
गुजरात ने 11 मई को 36 शहरों में रात के कर्फ्यू और अन्य दिन के समय की पाबंदियों को 18 मई तक बढ़ा दिया।
महाराष्ट्र ने लॉकडाउन जैसी पाबंदियां 1 जून तक बढ़ा दी हैं।
गोवा सरकार ने 9 मई से 24 मई तक कर्फ्यू लगाया है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 16 मई से 30 मई तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की है।
असम ने 12 मई को राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सभी कार्यालयों, धार्मिक स्थलों और साप्ताहिक बाजारों को 15 दिनों के लिए बंद करने का आदेश दिया था, इसके अलावा अपराह्न 2 बजे से सुबह 5 बजे तक लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया है।
नागालैंड ने 14 मई से 21 मई तक सप्ताह भर के लिए पूर्ण लॉकडाउन लागू किया है।
मिजोरम ने आइजोल और अन्य जिला मुख्यालयों में 10 मई से लागया गया लॉकडाउन को 24 मई तक बढ़ा दिया है।
अरुणाचल प्रदेश ने शनिवार से पूरे महीने के लिए शाम 6.30 बजे से सुबह 5 बजे तक रात का कर्फ्यू लगाया है।

मणिपुर सरकार ने 8 मई से 17 मई तक सात जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है।
मेघालय ने सबसे अधिक प्रभावित पूर्वी खासी हिल्स जिले में लॉकडाउन 24 मई तक बढ़ा दिया है।
सिक्किम सरकार ने 17 मई से 24 मई तक पूरे राज्य में पूर्ण लॉकडाउन करने का फैसला किया।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 17 मई तक लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगा दी हैं।
उत्तराखंड ने 11 मई से 18 मई तक सख्त कोविड कर्फ्यू लगाया है।
हिमाचल प्रदेश ने राज्य में कोरोना वायरस के चलते लागू कर्फ्यू 26 मई तक बढ़ा दिया है।

केरल ने राज्य में 8 मई से लागू पूर्ण लॉकडाउन 23 मई तक बढ़ा दिया है।
तमिलनाडु में 10 मई से 24 मई तक लॉकडाउन है।
पुडुचेरी ने लॉकडाउन को 10 मई से 24 मई तक बढ़ा दिया है।
तेलंगाना ने 12 मई से 10 दिनों का लॉकडाउन लागू किया है।
आंध्र प्रदेश ने 18 मई तक दोपहर 12 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया है।

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कोरोना से सावधान: एक साल रहेगा सेहत और जीवन को खतरा, अक्तूबर तक तीसरी लहर

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 19 Jun 2021 06:44 AM IST

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

विस्तार

कोरोना महामारी की तीसरी लहर भारत में अक्तूबर में दस्तक दे सकती है। हालांकि इस पर वह हमारी दूसरी लहर की तुलना में नियंत्रित रहेगी इसके बावजूद अगले 1 साल तक महामारी से स्वास्थ्य और जीवन को खतरा बना रहेगा। 

सर्वे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक वैज्ञानिक, वायरोलॉजिस्ट, महामारी रोग विशेषज्ञ और प्रोफेसर शामिल थे। अनुमान है कि टीकाकरण से कोरोना की नई लहर नियंत्रित रहेगी। सर्वे में मानना है कि देश में 85 फीसदी विशेषज्ञों यानी 24 में से 21 का मानना है कि देश में कोरोना की अगली लहर अक्तूबर में दस्तक देगी। वहीं तीन विशेषज्ञों का अनुमान है कि 30 अगस्त की शुरुआत या 12 सितंबर से पहले ही लहर आ सकती है। अन्य तीन का अनुमान है कि तीसरी लहर नवंबर और फरवरी के बीच आ सकती है।

दावा : टीकाकरण से काबू में रहेगी नई लहर 
कोरोना की तीसरी लहर को लेकर 34 में से 24 यानी 70 फीसदी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लहर पहले की तरह नहीं होगी। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ये लहर नियंत्रित रहेगी इसका कारण तेजी से चलने वाला SS टीकाकरण अभियान है। दूसरी लहर में संक्रमण की रफ्तार तेज होने के कारण लोगों में प्राकृतिक इम्यूनिटी भी बनी है इसका लाभ दिखेगा।

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अमर उजाला विशेष: देश में कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन, आठ सबसे गंभीर, 14 की जांच में जुटे वैज्ञानिक

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कोरोना वायरस को लेकर देश में अब तक 38 करोड़ से भी ज्यादा सैंपल की जांच हो चुकी है लेकिन इनमें से 28 हजार की जीनोम सीक्वेंसिंग अब तक हो पाई है। इसके जरिए पता चला है कि देश में अब तक कोरोना के 120 से ज्यादा म्यूटेशन मिल चुके हैं जिनमें से आठ सबसे गंभीर हैं। जबकि 14 म्यूटेशन की पड़ताल में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर वैरिएंट के जो नाम दिए थे वे सभी बीटा, एल्फा, गामा, ईटा, कापा, डेल्टा प्लस, लोटा वैरिएंट भारत में मिले हैं। किसी के मामले ज्यादा है तो किसी के कुछ ही मरीज हैं। 28 लैब में चल रही सीक्वेंसिंग की प्रारंभिक रिपोर्ट के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं।  सूत्रों से पता चला है कि डेल्टा के साथ भारत में कोरोना का कापा वैरिएंट भी है। बीते 60 दिन में 76 फीसदी सैंपल में इनकी पुष्टि हुई है।

सीक्वेंसिंग के जरिये ही वैज्ञानिक वायरस के बदलावों को समझ पा रहे हैं लेकिन स्थिति यह है कि नियमानुसार हर राज्य से पांच फीसदी सैंपल की सीक्वेंसिंग होना जरूरी है लेकिन वर्तमान में ऐसा तीन फीसदी भी नहीं हो पा रहा है। पहली बार यह रिपोर्ट सामने आई है जिसे हाल ही में मंत्री समूह की बैठक में भी प्रस्तुत की गई थी।
अमर उजाला को मिली एक्सक्लुसिव रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब तक 28,043 सीक्वेंसिंग की जा चुकी है जिनमें डेल्टा वैरिएंट के ही कापा और डेल्टा प्लस गंभीर म्यूटेशन सामने आए हैं। वैज्ञानिकों ने एवाई.1(डेल्टा प्लस), बी.1.1.7, बी.1.1.7+, एस:ई484के, बी.1.351(बीटा), बी.1.617.2 (डेल्टा), पी.1(गामा), पी.1.1 और पी.1.2 म्यूटेशन को सबसे गंभीर बताया है। इन सभी आठ गंभीर म्यूटेशन में खास बात है कि यह तेजी से फैलते हैं और लोगों में एंटीबॉडी पर हमला करते हैं। जबकि अन्य 14 म्यूटेशन एवी.1, बी.1.1.318, बी.1.427, बी.1.429, बी.1.525 (ईटा), बी.1.526 (लोटा), बी.1.526.1, बी.1.526.2, बी.1.617.1, बी.1.617.3, सी.36.3, सी.37, पी.2 और पी.3 पर अभी अध्ययन चल रहा है। ये म्यूटेशन इंसानों के लिए कितना गंभीर हो सकते हैं इसके बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
दूसरी लहर के 60 दिन में यह मिली हालत
पिछले 60 दिन की स्थिति देखें तो 76 फीसदी सैंपल में बी.1.617.2 (डेल्टा) वैरिएंट मिला है। जबकि आठ फीसदी सैंपल में  बी.1.617.1 (कापा) वैरिएंट मिला है। यह दोनों ही वैरिएंट बी.1.617 वैरिएंट से निकले हैं जो पिछले वर्ष सबसे पहले महाराष्ट्र में मिले थे। एक से तीन और अब तीन-तीन में अलग अलग म्यूटेशन हो रहा है जिसमें से एक डेल्टा प्लस है। इससे पता चलता है कि वायरस कितनी तेजी से अपना स्वरूप बदल रहा है। इनके अलावा पांच-पांच फीसदी सैंपल में बी.1 और बी.1.1.7 (एल्फा) वैरिएंट भी मिला है।

कोरोना के आठ गंभीर वेरिएंट की स्थिति
गंभीर वैरिएंट        कुल सैंपल         फीसदी में           पहली बार               आखिरी बार

डेल्टा                 6,098                 27%         7 सितंबर 2020              7 जून 2021

एल्फा               3028                   13%          2 सितंबर 2020             15 मई 2021

बीटा                 176                     1%           30 दिसंबर 2020          13 मई 2021

डेल्टा प्लस           08                    0.5%         5 अप्रैल 2021               15 मई 2021

कापा                3,4481                7%           1 दिसंबर 2020               3 जून 2021

ईटा                  182                     1%            6 फरवरी 2021             25 मई 2021

बी.1.617.3        91                     1%             14 दिसंबर 2020           10 मई 2021

लोटा                  3                       0.5%          16 दिसंबर 2020         24 मार्च 2021

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अलविदा फ्लाइंग सिख : बंटवारे से बुलंदियों तक …आसान नहीं था मिल्खा सिंह बनना

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 01:41 AM IST

पाकिस्तान के गोविंदपुरा में जन्मे मिल्खा सिंह का जीवन संघर्षों से भरा रहा। बचपन में ही भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द और अपनों को खोने का गम उन्हें उम्र भर सालता रहा। बंटवारे के दौरान ट्रेन की महिला बोगी में सीट के नीचे छिपकर दिल्ली पहुंचने, शरणार्थी शिविर में रहने और ढाबों पर बर्तन साफ कर उन्होंने जिंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश की। फिर सेना में भर्ती होकर एक धावक के रूप में पहचान बनाई। अपनी 80 अंतरराष्ट्रीय दौड़ों में उन्होंने 77 दौड़ें जीतीं लेकिन रोम ओलंपिक का मेडल हाथ से जाने का गम उन्हें जीवन भर रहा। उनकी आखिरी इच्छा थी कि वह अपने जीते जी किसी भारतीय खिलाड़ी के हाथों में ओलंपिक मेडल देखें लेकिन अफसोस उनकी अंतिम इच्छा उनके जीते जी पूरी न हो सकी। हालांकि मिल्खा सिंह की हर उपलब्धि इतिहास में दर्ज रहेगी और वह हमेशा हमारे लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। 

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