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DC VS KKR: पृथ्वी शॉ के आगे नाइटराइडर्स जमीं पर, दिल्ली ने 7 विकेट से कोलकाता को हराया

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स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 30 Apr 2021 01:41 AM IST

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दिल्ली के आक्रामक सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ (82 रन, 41 गेंद, 11 चौके, तीन छक्के) की आतिशी पारी ने आईपीएल मैच में यहां कोलकाता नाइट राइडर्स को 21 गेंदें शेष रहते सात विकेट से हरा दिया। दिल्ली को 155 रन का लक्ष्य मिला था जो टीम ने 16.3 ओवरों में तीन विकेट पर 156 रन बनाकर हासिल कर लिया।सात मैचों में पांचवीं जीत के साथ दिल्ली अंक तालिका में दूसरे स्थान पर आ गई। कोलकाता को सात मैचों में 5वीं बार हार का सामना करना पड़ा। इस पारी के साथ पृथ्वी इस सीजन में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में 269 रन बनाकर तीसरे स्थान पर भी आ गए हैं। पहले ही ओवर में छह चौके  दिल्ली कैपिटल्स के पृथ्वी शॉ ने शिवम मावी के पहले ही ओवर में छह चौके जड़े। पहली गेंद वाइड थी, उसके बाद पृथ्वी ने लगातार छह चौके जड़े। वह टी20 में ऐसे पहले बल्लेबाज हो गए हैं जिन्होंने पहले ही ओवर में छह चौके जड़े। इससे पहले टी20 में पहले ओवर में रिकॉर्ड पांच चौकों का था जो पांच बल्लेबाजों ने किया था।पृथ्वी का दूसरा संयुक्त तेज अर्द्धशतक पृथ्वी शॉ का 18 गेंदों पर अर्द्धशतक दिल्ली की ओर से दूसरा संयुक्त तेज अर्द्धशतक है। रिकॉर्ड क्रिस मौरिस के नाम है जिन्होंने  2016 में गुजरात लायंस के खिलाफ 17 गेंदों पर पचासा पूरा किया था। ऋषभ पंत ने मुंबई के खिलाफ 2019 में 18 गेंदों पर ही अर्द्धशतक पूरा किया था।  दिल्ली की आक्रामक शुरुआत दिल्ली ने पावरप्ले के छह ओवरों में बिना विकेट खोए 67 रन बना लिए थे। दिल्ली ने 11 ओवरों में बिना विकेट खोए 104 रन बना लिए थे। शिखर धवन महज चार रन से अपना अर्द्धशतक बनाने से चूक गए। कमिंस ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। कप्तान ऋषभ पंत ने भी नेट रनरेट बेहतर करने के लिहाज से आक्रामक अंदाज दिखाए और प्रसिद्ध कृष्णा के ओवर में लगातार चौका और छक्का जड़ा। कमिंस ने 16वें ओवर में पृथ्वी और पंत को आउट कर दिया। जब पंत आउट हुए तब चार रन चाहिए थे और स्टोइनिस ने जीत की औपचारिकता पूरी कर दी। जन्मदिन पर चमके रसेल इससे पहले कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए शीर्ष क्रम का प्रदर्शन कमजोर कड़ी बना हुआ है।  दिल्ली के खिलाफ शुभमन गिल के 43 रन छोड़ दें तो एक बार फिर बल्लेबाजों ने निराश किया। अपने 33वें जन्मदिन पर आंद्रे रसेल ने निचले क्रम में 27 गेंदों में 45 रन की नाबाद पारी खेली जिससे टीम छह विकेट पर 154 रन बनाने में सफल रही। रसेल ने अपनी पारी में दो चौके और चार छक्के लगाए। आंद्रे रसेल का बृहस्पतिवार को 33वां जन्मदिन था और उन्होंने इस पर उन्होंने टी20 में 6 हजार रन भी पूरे कर लिए। मोर्गन-नारायण नहीं चले  पावरप्ले में टीम ने एक विकेट पर 45 रन बनाए थे। नीतीश राणा (15) चौथे ओवर में अक्षर पटेल(2/32) की गेंद स्टंप आउट हो गए थे। कप्तान इयोन मोर्गन और सुनील नारायण ने तीन गेंदों के अंतराल में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। चोटिल अमित मिश्रा की जगह टीम में आए ललित यादव (2/13) ने दोनों विकेट अपनी झोली में डाले। जो स्कोर दसवें ओवर में एक विकेट पर 69 था, वो ही 11वें ओवर में 4 विकेट पर 75 रन हो गया। 

 14 गेंदों पर लगा है आईपीएल में सबसे तेज अर्द्धशतक जो पंजाब के लोकेश राहुल ने दिल्ली के खिलाफ 2016 में बनाया था।
 82 रन की पारी खेली पृथ्वी ने 41 गेंदों पर जिसमें 11 चौके और तीन छक्के शामिल थे 
132 रन की साझेदारी हुई पृथ्वी और शिखर धवन के बीच पहले विकेट पर

विस्तार

दिल्ली के आक्रामक सलामी बल्लेबाज पृथ्वी शॉ (82 रन, 41 गेंद, 11 चौके, तीन छक्के) की आतिशी पारी ने आईपीएल मैच में यहां कोलकाता नाइट राइडर्स को 21 गेंदें शेष रहते सात विकेट से हरा दिया। दिल्ली को 155 रन का लक्ष्य मिला था जो टीम ने 16.3 ओवरों में तीन विकेट पर 156 रन बनाकर हासिल कर लिया।

सात मैचों में पांचवीं जीत के साथ दिल्ली अंक तालिका में दूसरे स्थान पर आ गई। कोलकाता को सात मैचों में 5वीं बार हार का सामना करना पड़ा। इस पारी के साथ पृथ्वी इस सीजन में सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में 269 रन बनाकर तीसरे स्थान पर भी आ गए हैं। 

पहले ही ओवर में छह चौके  
दिल्ली कैपिटल्स के पृथ्वी शॉ ने शिवम मावी के पहले ही ओवर में छह चौके जड़े। पहली गेंद वाइड थी, उसके बाद पृथ्वी ने लगातार छह चौके जड़े। वह टी20 में ऐसे पहले बल्लेबाज हो गए हैं जिन्होंने पहले ही ओवर में छह चौके जड़े। इससे पहले टी20 में पहले ओवर में रिकॉर्ड पांच चौकों का था जो पांच बल्लेबाजों ने किया था।
पृथ्वी का दूसरा संयुक्त तेज अर्द्धशतक 
पृथ्वी शॉ का 18 गेंदों पर अर्द्धशतक दिल्ली की ओर से दूसरा संयुक्त तेज अर्द्धशतक है। रिकॉर्ड क्रिस मौरिस के नाम है जिन्होंने  2016 में गुजरात लायंस के खिलाफ 17 गेंदों पर पचासा पूरा किया था। ऋषभ पंत ने मुंबई के खिलाफ 2019 में 18 गेंदों पर ही अर्द्धशतक पूरा किया था।  
दिल्ली की आक्रामक शुरुआत 
दिल्ली ने पावरप्ले के छह ओवरों में बिना विकेट खोए 67 रन बना लिए थे। दिल्ली ने 11 ओवरों में बिना विकेट खोए 104 रन बना लिए थे। शिखर धवन महज चार रन से अपना अर्द्धशतक बनाने से चूक गए। कमिंस ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। कप्तान ऋषभ पंत ने भी नेट रनरेट बेहतर करने के लिहाज से आक्रामक अंदाज दिखाए और प्रसिद्ध कृष्णा के ओवर में लगातार चौका और छक्का जड़ा। कमिंस ने 16वें ओवर में पृथ्वी और पंत को आउट कर दिया। जब पंत आउट हुए तब चार रन चाहिए थे और स्टोइनिस ने जीत की औपचारिकता पूरी कर दी। 

जन्मदिन पर चमके रसेल 

इससे पहले कोलकाता नाइटराइडर्स के लिए शीर्ष क्रम का प्रदर्शन कमजोर कड़ी बना हुआ है।  दिल्ली के खिलाफ शुभमन गिल के 43 रन छोड़ दें तो एक बार फिर बल्लेबाजों ने निराश किया। अपने 33वें जन्मदिन पर आंद्रे रसेल ने निचले क्रम में 27 गेंदों में 45 रन की नाबाद पारी खेली जिससे टीम छह विकेट पर 154 रन बनाने में सफल रही। रसेल ने अपनी पारी में दो चौके और चार छक्के लगाए। आंद्रे रसेल का बृहस्पतिवार को 33वां जन्मदिन था और उन्होंने इस पर उन्होंने टी20 में 6 हजार रन भी पूरे कर लिए। 

मोर्गन-नारायण नहीं चले  
पावरप्ले में टीम ने एक विकेट पर 45 रन बनाए थे। नीतीश राणा (15) चौथे ओवर में अक्षर पटेल(2/32) की गेंद स्टंप आउट हो गए थे। कप्तान इयोन मोर्गन और सुनील नारायण ने तीन गेंदों के अंतराल में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। चोटिल अमित मिश्रा की जगह टीम में आए ललित यादव (2/13) ने दोनों विकेट अपनी झोली में डाले। जो स्कोर दसवें ओवर में एक विकेट पर 69 था, वो ही 11वें ओवर में 4 विकेट पर 75 रन हो गया। 

 14 गेंदों पर लगा है आईपीएल में सबसे तेज अर्द्धशतक जो पंजाब के लोकेश राहुल ने दिल्ली के खिलाफ 2016 में बनाया था।
 82 रन की पारी खेली पृथ्वी ने 41 गेंदों पर जिसमें 11 चौके और तीन छक्के शामिल थे 
132 रन की साझेदारी हुई पृथ्वी और शिखर धवन के बीच पहले विकेट पर

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एक्सक्लूसिव: दूसरे जंगल में छोड़ने के बाद भी अपने ‘घर’ लौट आए तेंदुए, रेडियो कॉलर से पहली बार मिले साक्ष्य

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विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: अलका त्यागी
Updated Thu, 24 Jun 2021 02:01 AM IST

सार
रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। 

तेंदुआ
– फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

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उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।
मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

विस्तार

उत्तराखंड वन विभाग की ओर से पकड़कर करीब सौ किलोमीटर दूर दूसरे जंगल में छोड़े गए तेंदुए अपने पुराने वास स्थल में लौट रहे हैं। रेडियो कॉलर लगाकर छोड़े गए तेंदुओं के अपने पुराने वास स्थल में लौट आने से इसकी पुष्टि हुई है।  

बाघ, तेंदुए अपने वास वाले भूभाग की सीमा निर्धारण के लिए पेड़ों पर पंजे से निशान बनाने से लेकर सीमा पर यूरिन करने तक के उपाय करते हैं। जब उनके क्षेत्र में कोई अन्य बाघ या तेंदुआ आ जाता है तो उनमें संघर्ष भी होता है। इसमें जो कमजोर साबित होता है, उसे इलाके से हटना पड़ता है।

कई बार आपसी संघर्ष में ये जीव मारे भी जाते हैं। अब रेडियो कॉलर लगाए जाने से पता चला है कि तेंदुओं में अपने वास स्थल को पहचानने का खास गुण होता है। बागेश्वर वन प्रभाग में पिछले साल नवंबर और मार्च-2021 में दो तेंदुए पकड़े गए थे।
इन तेंदुओं की हलचल पर नजर रखने के लिए वीएचएस तकनीक पर आधारित और सेटेलाइट पर काम करने वाले रेडियो कॉलर लगाया गया। बागेश्वर वन प्रभाग के तत्कालीन डीएफओ और वर्तमान में तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही बताते हैं कि नवंबर में पकड़े गए करीब सात साल के तेंदुए को उसके वास स्थल से करीब अस्सी किमी दूर दूसरे जंगल में छोड़ा गया।
इसी तरह मार्च में दूसरे तेंदुए को भी सौ किमी दूर छोड़ा गया। उनकी गतिविधि कीजानकारी रेडियो कॉलर से मिल रही थी। ये तेंदुए कई किमी चलकर अपने पुराने प्राकृतिक वास स्थल में पहुंच गए। उन्हें अपने पुराने वास स्थल में पहुंचने में कई दिन भी लगे थे।

लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. तेजिस्वनी पाटिल का कहना है कि यह पहली बार है जब वास स्थल से दूर छोड़े गए तेंदुओं के अपने वास स्थल को पहचान कर वापस वहीं पहुंचने का पुष्ट साक्ष्य मिला है। वन्यजीवों और पक्षियों को दूसरे क्षेत्र में छोड़ने पर उनके फिर से अपने इलाके में लौटने की क्षमता को घर लौटने की प्रवृत्ति (होमिंग इन्स्टिंक्ट) कहते हैं। मसलन कबूतर, बिल्ली आदि में भी इस प्रकार की प्रवृत्ति होती है।हल्द्वानी अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर के पूर्व उप निदेशक व वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कार्की का कहना है कि तेंदुए का वास स्थल कई बातों पर निर्भर करता है। एक तो एक ही इलाके में दो नर तेंदुए तो नहीं हैं। ऐसी स्थिति में नर तेंदुओं में आपसी संघर्ष होगा। दूसरा, वास स्थल में तेंदुए के शिकार और भोजन के लिए जानवर  हैं कि नहीं। तेंदुए अपनी सीमा बनाने के साथ पहचान के निशान छोड़ते हैं। वह लंबी दूरी भी तय करते हैं। ऐसे में संभावना है कि वह परिस्थितियों और सीमा बनाने की आदत के चलते अपने इलाके में पहुंच गए हों। यह एक संयोग भी हो सकता है।

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लंबी दूरी तय करते हैं तेंदुए

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नैनीताल: कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही पर्यटकों से गुलजार हुई सरोवर नगरी, पार्किंग भी फुल, तस्वीरें… 

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 24 Jun 2021 12:16 AM IST

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप कम होते ही नैनीताल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को नैनीताल में पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहा। इसके चलते मल्लीताल डीएसए कार पर्किंग में दोपहर के बाद पार्किंग फुल का बोर्ड लग गया। दूसरी ओर पुलिसकर्मी भी दिनभर यातायात व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
शहर में बीते एक सप्ताह से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। बुधवार को भी नैनीताल के पर्यटक स्थलों पर बड़ी संख्या में सैलानी नजर आए। देर शाम तक तल्लीताल स्थित लेक ब्रिज और बारापत्थर से लगभग एक हजार पर्यटक वाहनों ने शहर में प्रवेश किया।
उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में मिले 149 नए संक्रमित, पांच की मौत, 95.36 फीसदी पहुंचा रिकवरी रेट
इससे नैनीताल के डीएसए की पार्किंग फुल हो गई। इधर पूरे दिन पंतपार्क, मॉलरोड, चाट बाजार और बैंड स्टैंड में पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ था। सैलानियों ने पूरे दिन नैनीझील में नौकायन का लुत्फ उठाया।
बारिश से आफत: 30 घंटे में तय हो रहा चार घंटे का सफर, लकड़ी के लट्ठों के सहारे नाले पार कर रहे लोग, तस्वीरें…
बारापत्थर में पर्यटकों ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। पर्यटकों ने सुहावने मौसम के बीच खूब मौजमस्ती की। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखकर कारोबारियों के चेहरे पर भी रौनक आ गई है।

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शर्मनाक: जिस लैब से फैला कोरोना, चीन ने अवार्ड के लिए किया नामित

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वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 24 Jun 2021 01:45 AM IST

सार
चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए वुहान लैब को शीर्ष अवार्ड देने के इरादे से उसे नामित किया है

वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी
– फोटो : विकी कॉमन

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कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोनाडॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

विस्तार

कोरोना वायरस ने दुनिया भर में एक साल से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है, लाखों जानें ले चुका ये वायरस दुनिया जानती है कि चीन स्थित वुहान लैब से निकला। पहला केस भी वुहान में पाया गया था। वहीं हैरान करने वाली बात यह है इस विवादित लैब को चीन ने अवार्ड के लिए नामित किया है।

चीन ने वुहान की इस विवादित लैब को चाइनीज अकाडेमी ऑफ साइंसेज ने कोविड-19 पर बेहतरीन रिसर्च करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए सबसे बड़े अवार्ड को देने के इरादे से उसे नामित किया है। 

कई रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि चीन की अकाडेमी ऑफ साइंसेज की तरफ से कहा गया है कि इस लैब द्वारा किए गए महत्वपूर्व रिसर्च की बदौलत कोरोना वायरस की उत्पति, महामारी विज्ञान और इसके रोगजनक मैकनिज्म को समझने में मदद मिली है। 
इसके परिणामों के फलस्वरूप कोरोना वायरस के खिलाफ दवाओं और वैक्सीन को बनाने का रास्ता साफ हुआ। साथ ही वुहान लैब ने महामारी के प्रसार को रोकने और बचाव के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी समर्थन मुहैया कराया। अकाडेमी के अनुसार, वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रिसर्च ने कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम और कोरोना की काट यानी कोरोना की वैक्सीन बनाने की दिशा में अभूतपूर्व योगदान दिया है। 
डॉ. फॉसी ने जताई थी आशंका, लैब से फैला कोरोना
डॉ. फॉसी ने कहा था, वह शुरू से ही कोरोना वायरस के प्रयोगशाला लीक होने की थ्योरी को लेकर तैयार थे। उन्होंने माना कि ये संभवतया एक इंजीनियर्ड वायरस हो सकता है जिसका प्रयोगशाला से आकस्मिक रिसाव हो गया। 

हालांकि लीक थ्योरी का समर्थन करने के बावजूद फॉसी का मानना है कि जानवरों के प्रसार के कारण इस महामारी की उत्पत्ति की अधिक संभावना है। 
एक फरवरी को वैज्ञानिकों से फोन कॉल पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए फॉसी ने कहा, मुझे अच्छी तरह याद है कि हमने तत्कालीन स्थिति पर सावधानीपूर्वक गौर करने का निर्णय लिया। उस कॉन्फ्रेंस कॉल पर जुड़े कई वैज्ञानिकों में से एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ क्रिस्टन एंडरसन भी थे। 

एंडरसन ने ही इस कॉल से एक दिन पहले फॉसी को लिखे ईमेल में कोरोना वायरस की असामान्य विशेषताओं का जिक्र किया था। उन्होंने इसके कुछ इंजीनियर्ड दिखने वाले गुणों का पता लगाने के लिए इसके सभी अनुक्रमों की करीबी पड़ताल करने की जरूरत बताई थी। 

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