Sawan 2019: आज है सावन का पहला सोमवार, ऐसे करें महादेव को प्रसन्न

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Sawan Somvar: सावन के पहले सोमवार का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है

नई दिल्‍ली:

आज सावन का पहला सोमवार (First Sawan Somvar) है. सावन के पहले सोमवार (Sawan Somwar) के मौके पर सुबह से ही देश भर के शिव मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं. लोग बड़ी संख्या में मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए पहुंचे हैं और पूजा-अर्चना कर रहे हैं. सावन (Sawan) के पहले सोमवार को वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, आगरा, गोरखपुर, लखीमपुर, कानपुर, लखनऊ, गोंडा और उत्तर प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में बड़ी संख्या में भक्त मंदिरों में उमड़े हुए हैं.

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इलाहाबाद में सोमवार सुबह से ही मनकामेश्वर मंदिर के साथ ही हनुमत निकेतन में शिवालय में लोग लाइन में लगकर जलाभिषेक कर रहे हैं. लखनऊ के मनकामेश्वर मंदिर तो कानपुर में बाबा आनंदेश्वर मंदिर में भी बड़ी संख्या में लोग जलाभिषेक करने पहुंचे हैं.

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वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन को आतुर लोग रविवार रात से ही लाइन में लगे थे. बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने कांवड़ियों के जत्थों का वाराणसी पहुंचने का सिलसिला रविवार देर रात तक जारी रहा. बाबा को जल चढ़ाने के लिए काशी आने वाले रास्ते कांवड़ियों के बोल-बम के जयकारों से गूंज उठे. मंदिर की ओर जाने वाले हर रास्ते पर केसरिया वस्त्रों में कांवड़ियों का जत्था नजर आ रहा था.

वहीं, मध्य प्रदेश में सावन के पहले सोमवार को मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई है. उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी निकलेगी. मान्यता है कि बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए सावन महीने के सोमवार को सवारी पर निकलते हैं.

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सावन के सोमवार का महत्‍व
मान्‍यता है कि सावन के महीने में शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कहा जाता है कि जो महिलाएं सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं उनके पति को लंबी आयु प्राप्‍त होती है. साथ ही अविवाहित लड़कियों को मनपसंद जीवनसाथी मिलता है.

सावन पर ऐसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न
पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार सावन के महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है. सबसे पहले जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगा जल और गन्ने के रस से महादेव का अभिषेक किया जाता है. इसके बद बेलपत्र, नीलकमल, कनेर, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, राई और फूल चढ़ाए जाते हैं. फिर धतूरा, भांग और श्रीफल चढ़ाने का विधान है. शिवलिंग के अभिषेक के बाद विधिवत् भगवान भोलेनाथ की आरती उतारी जाती है.

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