Lok Sabha Election 2019 : विपक्षी पार्टियों की जीत के लिए यूपी में ‘एक्स फैक्टर’ साबित होंगे मुस्लिम वोटर, पढ़ें प्रणॉय रॉय का विश्लेषण

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उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता एक बड़ी भूमिका निभाएंगे

लखनऊ:

भारत के चुनाव इहितास में धर्म और जाति का एक बड़ा महत्व है. और यह महत्व यूपी में आकर और भी बढ़ जाता है. पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) में विपक्ष के बंटे होने की वजह से बीजेपी का एक बड़ा फायदा हुआ था. ऐसे मे इस आधार पर वोट के बंटने का सीधा फायदा बीजेपी को हो सकता है. हालांकि, पिछले चुनाव (Lok Sabha Election 2019) से अलग इस बार मायावती की बसपा, अखिलेश यादव की सपा और कांग्रेस ने वोटों के बंटने की किसी भी तरह की संभावना को खत्म करने की कोशिश की है. 2011 की जनगणना के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल मुस्लिम आबादी 19 फीसदी है. जो देश में रहने वाले औसत 14 फीसदी मुस्लिमों से भी ज्यादा है. जबकि यूपी में एससी जाति के लोगों कुल आबादी में से 21 फीसदी हैं. जबकि देश में कुल एससी की आबादी 17 फीसदी है.

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लेकिन उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य में जहां की जनसंख्या दूसरे राज्यों से कही ज्यादा है, ये आंकडे़ मतदाताओं के बड़े आंकड़ों में तबदील हो जाते हैं. 2014 में हुए चुनाव के आंकड़ों और एक्जिट पोल के अनुसार कांग्रेस अकेले यादव वोट को प्रभावित नहीं कर सकती है, यह वजह है कि ऐसे 80 फीसदी वोट मायावती की बसपा और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के खाते में गए थे. और कांग्रेस यादवों का महज चार फीसदी वोट ही ले पाने में सफल हुई थी.

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वहीं अगर एससी जाति के वोट की बात करें तो जाति के कुल वोट प्रतिशत का 79 फीसदी हिस्सा समाजवादी पार्टी और बीएसपी के हिस्से में गया था. जबकि कांग्रेस एससी जाति का भी तीन फीसदी वोट ही अपने खाते में कर पाई थी. वहीं बीजेपी के खाते में 17 फीसदी वोट गए थे.

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अखिलेश यादव और मायावती की पार्टी से जुड़े नेता मानते हैं कि इस बार भी कांग्रेस की वजह से उनकी पार्टी को मिलने वाले वोट प्रतिशत में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा. हालांकि उनका कहना है कि कांग्रेस इस बार बीजेपी को मिलने वाले उच्च जाति के वोट को काट सकती है. आंकड़ों पर ध्यान दें तो उच्च श्रेणी की जाति के कुल 67 फीसदी वोट बीजेपी के खाते में जाते हैं. जबकि कांग्रेस इस जाति के 12 फीसदी वोट पर कब्जे की बात करती है जो सपा-बसपा को मिलने वाले 21 फीसदी वोट प्रतिशत से काफी कम है.

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हालांकि जब मुस्लिमों के वोट की बात आती है तो सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच यह 80-20 फीसदी के अंतर से बंटते हैं. हालांकि इस बार ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों का मानना है कि कांग्रेस के पक्ष में भी इस बार मुस्लिम पहले की तुलना में ज्यादा मतदान कर सकते हैं.

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