CBI ने राकेश अस्थाना के खिलाफ जिस कानून के तहत ठोका केस, वह कानून अब है ही नहीं

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फाइल फोटो

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो, यानी CBI ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जो केस किया है, उसमें कानूनी कमियों की भरमार है. NDTV को यह जानकारी तब मिली, जब CBI के दोनों शीर्ष अधिकारियों की लड़ाई मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई. इस मामले की एक अहम कमी यह है कि 15 अक्टूबर को राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई FIR भ्रष्टाचार-रोधी कानून के एक ऐसे पहलू पर आधारित है, जिसका अब अस्तित्व ही नहीं है. जांच एजेंसी द्वारा रिश्वत कांड में प्रमुख अभियुक्त बनाए गए राकेश अस्थाना ने अपने खिलाफ की गई FIR को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. उन्हीं की तरह उनकी टीम के सदस्य DSP देवेंद्र कुमार ने भी FIR को चुनौती दी है, जिन्हें सोमवार को ही गिरफ्तार किया गया था. राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम 13 (1) डी के तहत केस दर्ज किया गया है, जबकि कानून का यह हिस्सा उस समय निरस्त हो गया था, जब जुलाई में इस कानून में संशोधन किया गया था. किसी को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का इस्तेमाल करने वाले सरकारी नौकरों के खिलाफ इस क्लॉज़ का इस्तेमाल लगातार होता रहा है.
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जुलाई में इसमें संशोधन कर दिया गया था. कानून के मौजूदा संस्करण के तहत जांच एजेंसियों को साबित करना होगा कि आरोपी को स्वयं वित्तीय लाभ मिला, वरना उसे भ्रष्टाचार का दोषी करार नहीं दिया जा सकता. नए कानून के तहत अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए पूर्वानुमति ली जानी भी अनिवार्य है, जो राकेश अस्थाना के मामले में नहीं ली गई है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अर्थ यह है कि राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई FIR कानूनन वैध नहीं है, और इसे रद्द किया जा सकता है. बहरहाल, CBI का दावा है कि उसका केस टिकेगा. CBI प्रवक्ता ने कहा, "यह कृत्य उस समय किया गया था, जब यह कानून रद्द नहीं हुआ था… कोर्ट को फैसला करने दें…" DSP देवेंद्र कुमार पहले ही कोर्ट से FIR को रद्द कर देने की अपील कर चुके हैं. मंगलवार सुबह हाईकोर्ट में अपील दाखिल करने वाले देवेंद्र कुमार ने जम़ानत की भी अर्ज़ी दी है. मामले की सुनवाई दोपहर बाद की जाएगी.
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टिप्पणियां दरअसल, देवेंद्र कुमार उस मनी लॉन्डरिंग केस के जांच अधिकारी थे, जिसमें मीट-निर्यातक मोइन कुरैशी भी शामिल था. इसी मामले में राकेश अस्थाना का नाम सामने आया था. राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज की गई FIR हैदराबाद निवासी व्यापारी सतीश साना के दावों पर आधारित है, जिसके खिलाफ जांच चल रही है. CBI का कहना है कि सतीश साना ने एक मजिस्ट्रेट को बताया था कि उसने पिछले साल दिसंबर के बाद 10 माह की अवधि में राकेश अस्थाना को रिश्वत के तौर पर दिए, ताकि उसे छोड़ दिया जाए.
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