Birthday: सपोर्ट स्‍टाफ के लिए ‘कोच’ राहुल द्रविड़ ने यूं दिखाई थी दरियादिली, जानें उनसे जुड़ी 15 खास बातें..

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राहुल द्रविड़ को भारतीय टीम के सबसे भरोसमंद बल्‍लेबाजों में शुमार किया जाता था (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली:

टीम इंडिया (Team India)के पूर्व कप्‍तान और भरोसेमंद बल्‍लेबाज रहे राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) शुक्रवार को 46 वर्ष के हो गए. घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक की ओर से खेलने वाले राहुल का जन्‍म 11 जनवरी 1973 को हुआ था. जन्‍मदिन (Birthday) पर कई पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों में राहुल द्रविड़ को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं. राहुल द्रविड़ खिलाड़ी के अलावा कोच की हैसियत से भी भारतीय क्रिकेट को सेवाएं दे चुके हैं. पृथ्‍वी शॉ के नेतृत्‍व में भारतीय टीम ने U-19 वर्ल्‍डकप में जीत हासिल की थी, इस टीम के कोच राहुल ही थे. आइए जानते हैं राहुल द्रविड़ के क्रिकेट करियर और जिंदगी से जुड़ी 10 खास बातें…

1. राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) का जन्‍म 11 जनवरी 1973 को मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ. इंदौर में राहुल का ननिहाल है. राहुल द्रविड़ के अलावा स्‍वरकोकिला लता मंगेशकर का जन्‍म भी इंदौर में ही हुआ था.

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2.द्रविड़ ने अपने करीब 16 साल के इंटरनेशनल करियर के दौरान 164 टेस्‍ट, 344 वनडे और एक टी20 मैच खेला. टेस्‍ट क्रिकेट में उन्‍होंने 36 शतक की मदद से 13288, वनडे में 12 शतक की मदद से 10889 और एकमात्र टी-20 इंटरनेशनल मैच में 31 रन बनाए.

3.राहुल इंटरनेशनल मैचों में अपनी ऑफ स्पिन गेंदबाजी से भी जलवे दिखा चुके हैं. टेस्‍ट क्रिकेट में एक और वनडे में चार विकेट उनके नाम पर दर्ज हैं.

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4. राहुल (Rahul Dravid) ने अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज 3 अप्रैल 1996 को सिंगापुर में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच खेलकर किया. उन्‍होंने अपना पहला टेस्‍ट इंग्‍लैंड के खिलाफ वर्ष 1996 में खेला. इसी टेस्‍ट से सौरव गांगुली ने भी अपने टेस्‍टर करियर का आगाज किया था. जहां सौरव गांगुली ने अपने पहले टेस्‍ट में शतक बनाया था, वहीं राहुल ने 95 रन की जोरदार पारी खेली थी.

5. राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid)की पहचान परफेक्‍ट टीम मैन के रूप में थी. टीम के हित में उन्‍होंने 2003 के वर्ल्‍डकप में विकेटकीपर बनने की जिम्‍मेदारी स्‍वीकार की थी. विकेटकीपर की भूमिका में भी वे पूरी तरह से खरे उतरे थे. उन्‍होंने हमेशा व्‍यक्तिगत हित के बजाय टीम के हितों का ध्‍यान रखा.

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6.राहुल द्रविड़ ने अपना आखिरी टेस्‍ट जनवरी 2012 में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में खेला. उन्‍होंने अपना आखिरी वनडे इंटरनेशनल मैच सितंबर 2011 में इंग्‍लैंड के खिलाफ कार्डिफ में खेला था.

7. राहुल द्रविड़ की छवि ऐसे बल्‍लेबाज के रूप में थी जो विकेट पर लंगर डालकर लंबी पारियां खेलता था. उनका डिफेंस इतना मजबूत था कि विपक्षी गेंदबाजों को उन्‍हें आउट करने में पसीना आ जाता था. यही कारण है कि दुनिया के कई दिग्‍गज बॉलरों ने द्रविड़ को आउट करने के लिहाज से सबसे मुश्किल बल्‍लेबाज माना था.

8. राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid )ने एकमात्र टी20 इंटरनेशनल मैच इंग्‍लैंड के खिलाफ अगस्‍त 2011 में मैनचेस्‍टर में खेला था. हालांकि परंपरागत शैली के बल्‍लेबाज होने के कारण राहुल को शॉर्टर फॉर्मेट के जबर्दस्‍त बल्‍लेबाजों में शुमार नहीं किया जाता था. स्‍ट्राइक को रोटेट करने के मामले में उनकी कुछ सीमितताएं थीं, लेकिन अपने एकमात्र टी20 मैच में राहुल ने लगातार तीन गेंदों पर छक्‍के जड़कर हर किसी का दिल जीत लिया था.

9. बेहद कम उम्र में ही राहुल द्रविड़ ने अपनी खास बल्‍लेबाजी तकनीक से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था. उन्‍होंने अंडर-15, अंडर-17 और अंडर -19 वर्ग में कर्नाटक की टीम का प्रतिनिधित्‍व किया. स्‍कूल के दिनों में वे विकेटकीपिंग भी करते थे लेकिन बल्‍लेबाजी पर ध्‍यान केंद्रित करने के लिए उन्‍होंने विकेटकीपिंग छोड़ दी. जूनियर स्‍तर पर राहुल की प्रतिभा को तराशने में उनके कोच केकी तारापोर का अहम योगदान रहा.

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10. बेहद शांत स्‍वभाव के द्रविड़ विवादों से हमेशा दूर रहे. अपने लंबे क्रिकेट करियर के दौरान उनका नाम बहुत कम बार विवादों में आया. वर्ष 2004 में एक इंटरनेशनल मैच के दौरान द्रविड़ को जैली से गेंद को चमकाते हुए कैमरे में पकड़ा गया था. हालांकि द्रविड़ ने यह काम जानबूझकर नहीं किया था. पाकिस्‍तान के खिलाफ टेस्‍ट सीरीज में कप्‍तान के तौर पर द्रविड़ ने ऐसे समय भारतीय पारी घोषित करने का फैसला लिया था जब सचिन तेंदुलकर 194 रन बनाकर खेल रहे थे. मुल्‍तान टेस्‍ट के दौरान लिए गए द्रविड़ के इस फैसले के कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने आलोचना की थी. उनका मानना था कि द्रविड़ को सचिन को दोहरा शतक पूरा करने के बाद ही पारी घोषित करनी चाहिए थी.

11. द्रविड़ ने टेस्‍ट क्रिकेट में पांच दोहरे शतक लगाए हैं. उनका सर्वोच्‍च स्‍कोर 270 रन है जो उन्‍होंने पाकिस्‍तान के खिलाफ अप्रैल 2004 में रावलपिंडी में बनाया था. खास बात यह है कि द्रविड़ ने अपने पांच में से तीन शतक विदेशी मैदानों पर बनाए थे. वनडे में द्रविड़ का सर्वोच्‍च स्‍कोर 153 रन है.

12. राहुल द्रविड़ ने वर्ष 2006 में पाकिस्‍तान के खिलाफ पहले विकेट के लिए वीरेंद्र सहवाग के साथ 410 रन की पार्टनरशिप की थी. इस पारी के दौरान सहवाग ने 254 और द्रविड़ ने उनके साथ पारी की शुरुआत करते हुए नाबाद 128 रन बनाए थे. ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता में हुए टेस्‍ट में द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्‍मण के बीच 376 रन की साझेदारी की याद अभी भी भारतीय क्रिकेटप्रेमियों के दिमाग में ताजा होगी. वर्ष 2000 में खेले गए इस टेस्‍ट में फॉलोआन का सामना करने के बावजूद टीम इंडिया ने जीत हासिल की थी. द्रविड़ ने वर्ष 2006 में पाकिस्‍तान के खिलाफ पहले विकेट के लिए वीरेंद्र सहवाग के साथ 410 रन की पार्टनरशिप की थी. इस पारी के दौरान सहवाग ने 254 और द्रविड़ ने उनके साथ पारी की शुरुआत करते हुए नाबाद 128 रन बनाए थे.

13. क्रिकेट से संन्‍यास लेने के बाद द्रविड़ ने कोचिंग के क्षेत्र की ओर ध्‍यान केंद्रित किया. अपने मार्गदर्शन में वे भारतीय जूनियर टीम को अंडर-19 वर्ल्‍डकप चैंपियन बना चुके हैं. तकनीक के मामले में युवा खिलाड़ि‍यों को उनके टिप्‍स बेहद उपयोगी साबित होते हैं. भारत की ए टीम के भी द्रविड़ कोच रह चुके हैं.

14. अंडर-19 वर्ल्‍डकप में चैंपियन बनी भारतीय जूनियर टीम से जुड़े सपोर्ट स्‍टाफ के हित में दरियादिली दिखाकर राहुल द्रविड़ ने हर किसी का दिल जीत लिया था. अंडर-19 वर्ल्‍डकप जीतने के बाद बीसीसीआई ने राहुल द्रविड़ को 50 लाख, सपोर्टिंग स्टॉफ के हर सदस्य को 30 लाख और टीम के हर सदस्य को तीस लाख रुपये बतौर इनाम दिए जाने की घोषणा की थी. द्रविड़ ने इसी इनामी रकम की असमानता को लेकर नाखुशी जाहिर की थी. उन्होंने इस फैसले पर कोचिंग स्टॉफ के सदस्यों के साथ भेदभाव खत्म किए जाने का अनुरोध किया था और बीसीसीआई ने द्रविड़ की इस बात को मान लिया था. बीसीसीआई ने इस दिग्गज की मांग को स्वीकार करते हुए वर्ल्‍डकप से जुड़े ही नहीं, बल्कि अंडर-19 टीम से एक साल पहले तक जुड़े स्टॉफ के हर सदस्य को इनामी रकम देने का फैसला किया था. इन सभी को समान राशि दी गई थी.

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15. जूनियर वर्ल्‍डकप में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद सीनियर क्रिकेट में उभरकर सामने आए ऋषभ पंत, पृथ्‍वी शॉ, शुभमन गिल, ईशान किशन, सरफराज खान, अवेश खान जैसे खिलाड़ि‍यों की प्रतिभा को तराशने का काम द्रविड़ ने बखूबी किया है. उम्‍मीद की जानी चाहिए कि 'द्रविड़ सर' आगे भी अपनी कोचिंग से टीम इंडिया के लिए नई बल्‍लेबाजी प्रतिभाएं सामने लाने का काम करते रहेंगे.

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