सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी को फटकारा- हम ‘रूल ऑफ लॉ’ पर चल रहे हैं या ‘रूल ऑफ मॉब’ पर?

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दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: दिल्ली में सीलिंग तोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद मनोज तिवारी को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने मनोज तिवारी से पूछा है, 'हम रूल ऑफ लॉ पर चल रहे हैं या रूल ऑफ मॉब पर? आप जनता के प्रतिनिधि हैं, आपकी क्या जिम्मेदारी है? अगर सील गलत तरीके से लगाई गई तो आपको अथॉरिटी के पास जाना चाहिए था? वहीं सासंद और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सील तोड़कर उन्होंने अवमानना का मामला नहीं किया है. तिवारी की ओर से पेश वकील विकास सिंह ने कहा कि मॉनीटरिंग कमेटी दिल्ली में गैरकानूनी तरीके से सीलिंग कर रही है. कमेटी ये सीलिंग सिर्फ अपने पब्लिसिटी के लिए और दिल्ली के लोगों को आतंकित करने के लिए कर रही है.
दिल्ली में सीलिंग एक उद्योग बन गया है: मनोज तिवारी
टिप्पणियां मनोज तिवारी के वकील ने कहा कि दिल्ली में एक कानून है और इसके तहत 2020 तक अवैध निर्माण को सरंक्षण दिया गया है. किसी भी अदालत ने इस कानून को बुरा नहीं बताया है मॉनीटरिंग कमेटी पुलिस की मदद से मनमाने तरीके से सीलिंग करा रही है. कई इमारतें व्यावसायिक हैं और उन्हें भी सील कर दिया गया. अगर वो सील नहीं तोड़ते तो करीब 15 सौ लोगों की भीड़ थी और हिंसा हो सकती थी. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस नज़ीर कि आप जनप्रतिनिधि हैं इतना गैरज़िम्मेदाराना काम कैसे कर सकते हैं? इस पर मनोज तिवारी के वकील विकास सिंह ने कहा कि जवाबदेही जनता के प्रति भी है. एसी में बैठकर बाहर की स्थिति का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता. लॉर्डशिप आपसे कोई नहीं पूछता हमसे तो सभी सवाल पूछते हैं.​
दिल्ली सीलिंग : मनोज तिवारी के खिलाफ अवमानना केस पर उठे सवाल
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