सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवालों से यूं लौट आई आम्रपाली ग्रुप के सीएफओ की ‘याददाश्त’

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: आम्रपाली ग्रुप के सीएफओ की ‘ याददाश्त' सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवालों से लौट आई. पिछली सुनवाई के दौरान फॉरेंसिक ऑडिटर के धनराशि के साइफन मामलों के सवालों के जवाब 'याद नहीं आ रहा' देने वाले सीएफओ ने शुक्रवार को कोर्ट के सारे सवालों के जवाब दिए. कोर्ट ने कहा था अगली सुनवाई पर हम आपकी याददाश्त वापस लाने की कोशिश करेंगे. कोर्ट ने मेमोरी टेस्ट के लिए उन्हें तलब भी किया था. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के ऑडिटर को आदेश दिया. कंपनी से जुड़े सभी दस्तावेज 24 घंटे के भीतर कोर्ट के द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर्स को सौंपे. आम्रपाली के ऑडिटर -मी लार्ड,क्लोजिंग टाइम है (वित्तीय वर्ष के तीसरे क्वार्टर की), थोड़ा टाइम दे दीजिए. कोर्ट-आप तो ख़ुद अपना कैरियर क्लोज कर रहे है. आपके पास सिर्फ 24 घण्टे का वक़्त है, दस्तावेज जमा कराने के लिये. मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी.
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दरअसल, बुधवार को फोरेंसिक ऑडिटर ने जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ को बताया कि अब तक उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, गौरीसुता इंफ्रास्ट्रक्चर के निदेशक आशीष जैन और विवेक मित्तल हैं. दोनों आम्रपाली समूह के ऑडिटर के रिश्तेदार हैं. साथ ही फोरेंसिक ऑडिटर ने आम्रपाली समूह के ऑडिटर पर बड़े पैमाने पर अनियमितता बरतने का आरोप लगाया. बताया गया कि समूह की ओर से ऑडिटर को फ्लैट भी मिले हैं. फोरेंसिक ऑडिटर ने पीठ को बताया कि उन्होंने समूह के सीएफओ चंदर वाधवा से भी बातचीत की, लेकिन वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. सीएफओ का कहना है कि उन्हें समूह के वित्तीय लेन-देन याद नहीं हैं. सीएफओ का कहना है कि वह अपनी याददाश्त खो बैठे हैं.
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टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आम्रपाली समूह ने फ्लैट खरीदारों से लिए करोड़ों रुपये फर्जी कंपनियों को ट्रांसफर किए हैं. इनमें से 100 करोड़ से अधिक रकम गौरीसुता इंफ्रास्ट्रक्चर को ट्रांसफर किए गए. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम्रपाली समूह ने बड़ा फ्रॉड किया है. साथ ही कोर्ट ने समूह के वकीलों को आगाह किया कि वह अपनी दलीलें बार-बार न बदलें, नहीं तो परिणाम गंभीर होंगे. कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिटर को गुरुवार तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने कहा था और सीएफओ को तलब किया था.
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फॉरेंसिक ऑडिटर के मुताबिक, फ्लैट खरीदारों से ली गई रकम प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए पर्याप्त है. समूह को दूसरी जगह से रकम लेने की जरूरत नहीं है. समूह ने कई दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए हैं. नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सात में से छह परिसरों से दस्तावेजों को सूचीबद्ध कर लिया गया है, जबकि सातवें परिसर में रखे दस्तावेजों को सूचीबद्ध करने का काम एक-दो दिन में पूरा कर लिया जाएगा. बिहार के राजगीर वाले परिसर में रखे दस्तावेजों को सूचीबद्ध कर लिया गया है. बक्सर का काम पूरा नहीं हो सका है.
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