सीबीआई विवादः आलोक वर्मा को हटाने और नागेश्वर की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

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सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर.

नई दिल्ली: सीबीआई में विवाद के बाद केंद्र के दखल पर हुई कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. आलोक वर्मा से सीबीआई निदेशक का कामकाज छीने जाने और एम नागेश्वर राव की अंतरिम डायरेक्टर के तौर पर नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. वहीं कथित तौर पर दो करोड़ घूस लेने के आरोपी राकेश अस्थाना के खिलाफ कोर्ट की निगरानी में एसआइटी जांच की याचिका कोर्ट में पहुंची है. यह याचिका एनजीओ कॉमन कॉज ने दाखिल की है. इस संस्था की तरफ से याचिका दाखिल करने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि राव पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर मामले हैं. लिहाजा उन्हें सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर नहीं बनाया जाना चाहिए. प्रशांत भूषण ने कोर्ट से जल्द इस मसले की सुनवाई की मांग की और कहा कि शुक्रवार को ही इस मामले की भी सुनवाई हो सकती है. जिस पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि सुनवाई का मामला वो देख लेंगे.
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कांग्रेस ने कार्रवाई को बताया संविधान के खिलाफ
सीबीआई में भारी विवाद( CBI WAR) के बाद दर्जन भर अफसरों के ट्रांसफर हुए. इसमें एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना से भी कामकाज छीन कर छुट्टी पर भेज दिया गया. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कांफ्रेंस कर बीजेपी पर हमला बोला. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गैरकानूनी और न्याय विरुद्ध तरीके से मोदी सरकार की ओर से देश की संस्थाओं को आइसीयू में धकेल दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री को 'रफेलोफोबिया' हो गया है.राफेल घोटाले की पोल खुलने से डरे हुए बीजेपी नेताओं ने गुजरात मॉडल केंद्र में थोप दिया है. CBI को कहीं का नहीं छोड़ा.जिस तरह CBI डाइरेक्टर को हटाया गया है वो गैर कानूनी और असंवैधानिक है.
CBI डायरेक्टर को हटा कर सरकार ने उच्चतम न्यायालय को नकार दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र CBI की जरूरत बताई है. CBI एक्ट में लिखा है कि डायरेक्टर का कार्यकाल दो वर्षों का होगा.सरकार अभियुक्त के समर्थन में खड़ी है जबकि अभियोजक को हटा दिया है.जबकि आरोप उगाही के हैं. प्रधानमंत्री मोदी सीधा सीबीआई के अधिकारियों को बुलाते हैं और एक फौजदारी मामले में सीधी दखल देते हैं. जबकि मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी CBI को लेकर कई तरह की बातें करते थे. यूपीए सरकार में एफिडेविट देखा गया था तो इस्तीफा मांगा गया था.
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