सीबीआई में घूसकांड : आलोक वर्मा का इस्तीफा, राकेश अस्थाना को कोर्ट से झटका, बीते 2 दिनों में हुई 10 बड़ी बातें

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सीबीआई ऑफिस (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक के पद पर रहे आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि उनके इस पद पर बने रहने के फैसले पर सेलेक्ट कमेटी फैसला करेगी. सेलेक्ट कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जज सीकरी और कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे. समिति ने 2:1 के फैसले से सीवीसी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आलोक वर्मा को सीबीआई से हटा दिया. के 1979 बैच के आईपीएस वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था. सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो सालों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होने वाला था. हालांकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे हटाने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इस फैसले के खिलाफ डिसेंट नोट भी लिखा है. सीवीसी की रिपोर्ट में आलोक वर्मा के खिलाफ कई गंभीर आरोप थे. जिसमें लालू प्रसाद यादव से जुड़े आईआरसीटीसी घोटाले में एक अधिकारी को बचाने की कोशिश की और गुरुग्राम जमीन अधिग्रहण मामले में भी उनका नाम सामने आया था. 10 बड़ी बातें

  1. सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने शुक्रवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया. वर्मा ने अपने त्याग-पत्र में कहा कि यह ‘‘सामूहिक आत्ममंथन'' का क्षण है. दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को रिश्वत के आरोपों पर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया.
  2. न्यायमूर्ति नाजमी वजीरी ने सीबीआई के उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार और कथित बिचौलिये मनोज प्रसाद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से भी इंकार किया. हाइकोर्ट न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया कि अस्थाना एवं अन्य के खिलाफ मामले की जांच दस हफ्ते में पूरी करें. हाइकोर्ट ने कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ लगे ‘‘दुर्भावना'' के आरोप साबित नहीं होते.
  3. न्यायमूर्ति वजीरी ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए अस्थाना और कुमार के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पहले से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है. हाइकोर्ट ने अस्थाना, कुमार और प्रसाद की याचिकाओं को खारिज कर दिया जिन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी.
  4. अस्थाना पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धाराओं के तहत आपराधिक कदाचार, भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप हैं.हैदराबाद के कारोबारी सतीश बाबू सना ने एक मामले में राहत पाने के लिए कथित रूप से रिश्वत दी थी. सना की शिकायत पर ही प्राथमिकी दर्ज हुई है .सना ने अस्थाना पर भ्रष्टाचार, रंगदारी और गंभीर कदाचार के आरोप लगाये थे.
  5. अंतरिम सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव ने सीबीआई के प्रमुख के रूप में अपने दो दिन के कार्यकाल में आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादलों संबंधी फैसले को रद्द कर दिया और अधिकारियों की आठ जनवरी वाली स्थिति बहाल कर दी.
  6. उच्चतम न्यायालय ने वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया था. इसके बाद वर्मा ने राव द्वारा किए गए सभी तबादले रद्द कर दिए थे.
  7. उन्होंने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामले की जांच के लिए एक नया जांच अधिकारी भी नियुक्त किया था. सरकार ने अतिरिक्त निदेशक नागेश्वर राव को एजेंसी का प्रभार सौंपा.
  8. वर्मा और अस्थाना को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के दौरान भी राव ने 77 दिनों तक प्रभार संभाला था.
  9. सुप्रीम कोर्ट इससे पहले ने राव को कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय से रोक दिया था लेकिन इस बार उनके कार्यकाल में ऐसी कोई शर्त नहीं है.
  10. आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाए जाने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि ‘पिजड़े में बंद तोते को उड़ने नहीं दिया गया क्योंकि वह सत्ता के गलियारे के सारे राज खोल देता.''

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