सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा को हटाने के मुद्दे पर विवाद बढ़ा

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सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर आलोक वर्मा ने उन पर लगे आरोपों और ट्रांसफर के विरोध में नौकरी से इस्तीफा दे दिया. उनको सीबीआई डायरेक्टर पद से हटाने के हाई लेवेल सिलेक्शन कमेटी के फैसले पर राजनीति और विरोध फिर तेज हो गई है.

आलोक वर्मा को सीबीआई के डायरेक्टर पद से जिस तरह हटाया गया उस पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं. पार्टी का आरोप है कि हाई लेवेल सिलेक्शन कमेटी ने CVC की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर यह फैसला किया जो गलत है.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सीवीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि आलोक वर्मा के खिलाफ घूस लेने के जो आरोप हैं उसके पुख्ता सबूत उसे नहीं मिले हैं और IRCTC केस में आरोपी राकेश सिन्हा को बचाने का आलोक वर्मा पर लगा आरोप भी साबित नहीं हो पाया है. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि आलोक वर्मा को सिलेक्शन कमेटी के सामने अपनी बात कहने का मौका भी नहीं दिया गया जो गलत है. इस मामले में न कोई अलग से जांच हुई, न ट्रायल हुआ और न ही कोर्ट का कोई आदेश था.

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उधर बीजेपी ने सिलेक्शन कमेटी के फैसले को सही ठहराया है. बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने कहा कि सिलेक्शन कमेटी का फैसला नियमों के मुताबिक था.

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हालांकि कई विपक्षी दल इस मसले पर कांग्रेस के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे नहीं पता कि मोदी सरकार जल्दबाजी में बिना होमवर्क के क्यों ऐसे फैसले कर रही है. ये सब राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है. आप किसी व्यक्ति को नहीं पसंद करते और उसे हटा देते हैं."

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साफ है आलोक वर्मा ने भले ही इस्तीफा दे दिया हो लेकिन उनके सीबीआई चीफ के पद से हटाए जाने को लेकर राजनीति जारी है.

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