सपा में उठी BSP के साथ गठबंधन के खिलाफ आवाज, MLA बोले- हमारे अध्यक्ष जब तक घुटने टेकते रहेंगे, तब तक चलेगा गठबंधन

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अखिलेश यादव और मायावती. (फाइल तस्वीर)

लखनऊ:

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election)को लेकर हुए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन (BSP-SP Alliance) के खिलाफ सपा से ही आवाज उठने लगी है.समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party)के ही एक विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह गठबंधन ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला. उन्होंने कहा कि यह गठबंधन तब तक चल रहा है कि जब तक अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav), मायावती की बात मान रहे हैं. उत्तर प्रदेश के सिरसागंज (Sirsaganj)से सपा विधायक हरिओम यादव ने यह बयान दिया है. बता दें, अखिलेश यादव और मायावती (Mayawati) ने शनिवार को ही साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सपा-बसपा गठबंधन का ऐलान किया था.

विधायक हरिओम यादव ने कहा, 'सपा-बसपा गठबंधन फिरोजाबाद में काम नहीं करेगा. यह यहां कामयाब नहीं होगा. यह गठबंधन तब तक चल रहा है, जब तक हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष (अखिलेश यादव) बहनजी (मायावती) की हां में हां मिलाते रहेंगे और घुटने टेकते रहेंगे.'

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SP MLA Hariom Yadav on SP-BSP alliance, yesterday: SP-BSP alliance will not work in Firozabad. It won't be successful here. Yeh gathbandhan tabhi tak chal sakta hai jab tak humare rashtriya adhyakshji Behenji ki haan mein haan milate rahenge aur ghutne tekte rahenge. pic.twitter.com/cvLLfagJcC

— ANI UP (@ANINewsUP) January 14, 2019

बता दे, बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की है कि दोनों दल लोकसभा का चुनाव मिलकर लड़ेंगे. मायावती ने बसपा-सपा गठबंधन को 'नई राजनीतिक क्रांति का आगाज' करार देते हुए कहा कि इस गठबंधन से 'गुरू-चेला' (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) की नींद उड़ जाएगी. उन्होंने कहा, 'नए वर्ष में यह एक प्रकार की नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत है. इस गठबंधन से समाज की बहुत उम्मीदें जग गई हैं. यह सिर्फ दो पार्टियों का मेल नहीं है बल्कि सर्वसमाज (दलित, पिछड़ा, मुस्लिम, आदिवासी, गरीबों, किसानों और नौजवानों) का मेल है. यह सामाजिक परिवर्तन का बड़ा आंदोलन बन सकता है.'

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यह पूछे जाने पर कि यह गठबंधन कितना लंबा चलेगा, इस पर मायावती ने कहा कि गठबंधन 'स्थायी' है. यह सिर्फ लोकसभा चुनाव तक नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में भी चलेगा और उसके बाद भी चलेगा. मायावती ने बसपा और सपा के 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल का नाम तक नहीं लिया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि दो सीटें अन्य दलों के लिए छोड़ी गई हैं.

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इसके बाद कांग्रेस ने रविवार को ऐलान किया कि वह सभी 80 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. इसके साथ ही कांग्रेस ने कहा कि भाजपा को हराने में हमारी मदद करने के लिए आने वाले हर एक दल का स्वागत है. यूपी कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

(इनपुट- एएनआई)

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