शशि थरूर ने ग़ालिब के नाम से साझा की गलत शायरी, तो जावेद अख़्तर बोले- जिसने भी आपको ये…

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शशि थरूर ने जो शायरी साझा की वो ग़ालिब की थी ही नहीं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली :

कांग्रेस नेता शशि थरूर को अंग्रेज़ी ज़बान के भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल करने में महारत हासिल है, लेकिन उर्दू शायरी के मैदान में उन्होंने क़दम रखने की कोशिश की तो लड़खड़ा गए. दरअसल, थरूर (Shashi Tharoor) ने ट्विटर पर तीन शेर लिखे जो यूं थे – 'ख़ुदा की मोहब्बत को फ़ना कौन करेगा? सभी बंदे नेक हों तो गुनाह कौन करेगा? ऐ ख़ुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना, वरना मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा और रखना मेरे दुश्मनों को भी महफ़ूज़, वरना मेरी तेरे पास आने की दुआ कौन करेगा. ' थरूर ने आगे लिखा कि मिर्ज़ा ग़ालिब की 220वीं सालगिरह. कितने महान शेर.

ख़ुदा की मोहब्बत को फ़ना कौन करेगा?
सभी बन्दे नेक हों तो गुनाह कौन करेगा?
ऐ ख़ुदा मेरे दोस्तों को सलामत रखना
वरना मेरी सलामती की दुआ कौन करेगा
और रखना मेरे दुश्मनों को भी महफूज़
वरना मेरी तेरे पास आने की दुआ कौन करेगा…!!!
Mirza Ghalib's 220th birthday. So many great lines….

— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 20, 2019

हालांकि न तो मिर्ज़ा ग़ालिब की सालगिरह थी न ही ये शेर उनके थे. इसके बाद तमाम लोगों ने ट्वीट कर शशि थरूर (Shashi Tharoor) को इसकी जानकारी दी, जिनमें जावेद अख़्तर भी शामिल थे. जावेद अख़्तर (Javed Akhtar) ने ट्वीट कर कहा, 'शशि जी, जिस किसी ने आपको ये लाइनें दी हैं उसपर कभी भरोसा मत कीजिएगा. साफ़ है कि किसी ने ये लाइनें आपके ज़ख़ीरे में इस मक़सद से रख दीं ताकि आपकी साहित्यिक साख को नुक़सान पहुंचे.'

Shashi ji , who ever has given you these lines should never be trusted again . It is obvious that some one had planted these lines in your repertoire to sabotage you literary credibility .

— Javed Akhtar (@Javedakhtarjadu) July 20, 2019

टिप्पणियां

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हालांकि बाद में शशि थरूर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माफी मांगी. थरूर ने ट्वीट कर कहा 'ग़ालिब मेरे पसंदीदा हैं, लेकिन आज उनका जन्मदिन नहीं है. मुझे गलत जानकारी दी गई थी.' थरूर ने आगे अपने ट्वीट में जावेद अख़्तर (Javed Akhtar) को टैग करते हुए लिखा, 'जावेद अख़्तर और अन्य दोस्तों का शुक्रिया जिन्होंने मुझे मेरी गलती का एहसास करवाया.'

Thanks to @Javedakhtarjadu & other friends, I realize I've been had. The lines are not Ghalib's. Just as every clever quote is attributed to Winston Churchill even if he never said it, so it seems that whenever people like a shayari, they credit Ghalib for it! Apologies.

— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) July 21, 2019

शशि थरूर ने कहा कि जिस तरह हर अच्छा कोट विंस्टन चर्चिल का बताया जाता है, भले ही उन्होंने इसे नहीं कहा हो ठीक उसी तरह जब लोगों को कोई शायरी पसंद आ जाती है तो इसको ग़ालिब से जोड़ देते हैं. मैं माफी चाहता हूं. बता दें कि शशि थरूर के इस ट्वीट के जवाब में कई और लोगों ने भी ग़ालिब के नाम से गलत शायरी साझा की. कुछ ट्वीटर यूजर को जावेद अख़्तर ने इसकी जानकारी दी.

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