वेस्टर्न-पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे का पीएम ने किया उद्घाटन, लाइट का इंतजाम नहीं!

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वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर लाइटें लगाने का काम पूरा नहीं हुआ है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुरुग्राम के गांव सुल्तानपुर में जिस वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया उसके 50 फीसदी हिस्से में लाइट का इंतजाम है ही नहीं. एनडीटीवी इंडिया की टीम ने जब नए खुले एक्सप्रेस-वे का जायजा लिया तो सबसे पहले जो कमी नजर आई वह यही थी. जिस जगह प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया वहीं से एक्सप्रेस वे पर चढ़ते ही कई किलोमीटर दूर तक लाइट का कोई प्रबंध नहीं था. डिवाइडर पर खंबे तो लगे थे लेकिन न लाइट है न कनेक्शन. और कुछ जगह तो ऐसी हैं जहां खंभे तक नहीं लग पाए हैं.
दरअसल 136 किलोमीटर लंबे कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे में से 53 किलोमीटर का मानेसर-पलवल हिस्सा दो साल पहले ही चालू कर दिया गया था. जबकि 83 किलोमीटर लंबे कुंडली-मानेसर हिस्से का प्रधानमंत्री ने सोमवार को उद्घाटन किया. कुंडली-मानेसर एक्सप्रेस वे बनाने वाली कंपनी के मैनेजर धंजू राठौड़ ने बताया 'HSIIDC ने पहले 41 किलोमीटर में ही लाइट की व्यवस्था करने का ठेका दिया था जिसको बाद में पूरे 83 किलोमीटर में करने के लिए कहा. इसलिए 41 किलोमीटर में लाइट लग गई हैं और 42 किलोमीटर में लगाने का काम चल रहा है.'
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सवाल उठना लाजमी है कि जब वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे नौ साल की देरी से खुल रहा है तो ऐसे में बिना लाइट लगाए इस एक्सप्रेस-वे को खोलकर कहीं सरकार ने जल्दबाजी तो नहीं कर दी? क्योंकि एक्सप्रेस वे पर कार की स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रखी गई है जबकि 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार भारी और हल्के कमर्शियल व्हीकल की हो सकती है. ऐसे में रात के अंधेरे में दुर्घटना होने की प्रबल संभावनाएं हैं. rbotvhdk
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की तरह वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर भी सोलर पैनल लगाने की बात है लेकिन फिलहाल अभी कहीं पर भी सोनल पैनल नहीं लगाए गए हैं. एक्सप्रेस वे की शोभा बढ़ाने के लिए रास्ते में अलग-अलग तरह की मूर्तियां साइड में लगाई गई हैं.
कुछ जगहों पर डिवाइडर टूटे हुए दिखाई दिए जिससे लोग या तो यू टर्न ले रहे हैं या फिर रॉन्ग टर्न ले रहे हैं जिससे तेजी से आ रहे वाहनों के साथ भिड़ंत होने की आशंका बनी रहती है.
एक्सप्रेस वे पर जसबीर सिंह से मुलाकात हुई जो कि एक कोरियर कंपनी के लिए ट्रक चलाते हैं और रोजाना रेवाड़ी से अम्बाला तक अप-डाउन करते हैं. जसबीर ने बताया कि 'पहले घूमकर जाने में आठ घंटे और 70 लीटर डीज़ल लगता है लेकिन अब सीधा बिना रोक टोक और बिना ट्रैफिक के दो घंटे और 10 लीटर डीजल की बचत करेंगे.' cc7rrmfk
एक अंदाजा के मुताबिक ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे बनने से चूंकि दिल्ली के इर्द-गिर्द एक रिंग रोड का निर्माण हो गया है इसलिए रोजाना 50 हजार वाहन दिल्ली में घुसने से बचेंगे.
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एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्दियों में दिल्ली में 20 से 25 फीसदी प्रदूषण वाहनों से होता है और वाहनों में भी सबसे ज्यादा ट्रकों से. ऐसे में वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे खुलने से दिल्ली में जाम और प्रदूषण से कुछ राहत की उम्मीद की जा सकती है.
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