लोकसभा चुनाव 2019: दलितों को लामबंद करने के लिए कांग्रेस शुरू करेगी ‘संविधान से स्वाभिमान अभियान’

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कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ शुरू करेगी अभियान

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha Election 2019) के मद्देनजर कांग्रेस दलितों को लामबंद करने की तैयारी में है. पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार इसे एक अभियान की तरह चलाने की योजना बना रही है. इस पूरे अभियान को 'संविधान से स्वाभिमान' का नाम दिया गया है. इस अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार (Modi Government) की दलित एवं संविधान विरोधी नीतियों के बारे में आम जनता को अवगत कराएगी. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा स्वीकृत इस अभियान के अंतर्गत अगले 90 दिनों तक गांव-गांव जाकर दलित समाज के लोगों के साथ सीधा संपर्क साधा जाएगा तथा छोटे-बड़े सम्मेलनों का भी आयोजन किया जाएगा. 2019 के लिए दलित समाज को अपने पक्ष में लामबंद करने के मकसद से इस अभियान का क्रियान्वयन कांग्रेस पार्टी का अनुसूचित जाति विभाग कर रहा है. इसकी औपचारिक शुरुआत सोमवार को दिल्ली से होगी और यह अभियान अगले साल फरवरी महीने के मध्य तक चलेगा.
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पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष नितिन राउत ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष की मंजूरी के बाद हम ‘संविधान से स्वाभिमान' अभियान शुरू करने जा रहे हैं. इस अभियान के जरिए हम दलित समाज का स्वाभिमान जगाएंगे और उन्हें बताएंगे कि मोदी सरकार किस तरह से बाबा साहेब द्वारा बनाए गए संविधान पर हमले कर रही है. उन्होंने कहा कि हम गांव-गांव जाएंगे और देश भर में सम्मेलन करेंगे. हमारे नेता दलित समाज को मोदी सरकार की दलित एवं संविधान विरोधी नीतियों के बारे में बताएंगे. राउत ने कहा कि पार्टी की ओर से, मोदी सरकार के ‘दलित एवं संविधान विरोधी कदमों' को लेकर पर्चे भी छपवा कर बांटे जाएंगे.
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टिप्पणियां गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार की नीतियों और फैसलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं. कुछ दिन पहले ही राफेल सौदे को लेकर सरकार के विरुद्ध अपना अभियान तेज करते हुए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था कि वह इस डील में सीधे तौर पर शामिल हैं. और उनके पास इसके बारे में छिपाने को काफी कुछ है. सौदे पर मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़ा करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता आंनद शर्मा ने दावा किया कि केवल प्रधानमंत्री को ही पता था कि ऑफसेट अनुबंध हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को नहीं दिया जाएगा. शर्मा ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यह उनका (मोदी का) फैसला था.
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केवल उन्हें ही पता था कि वह क्या करने जा रहे थे.'' उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय महत्व के इस मुद्दे पर बोलेंगे लेकिन उन्होंने इस विषय पर लगातार चुप्पी साधे रखी जबकि अपनी सरकार के बारे में ऊंचे-ऊंचे दावे करते रहे. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के पास राफेल सौदे पर छिपाने को काफी कुछ है. उनकी चुप्पी मौलिक प्रश्न को जन्म देती है क्योंकि वह सीधे तौर पर इसमें शामिल हैं और व्यक्तिगत तौर पर इसके लिए जवाबदेह हैं.राफेल सौदे को देश के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला होने का दावा करते हुए शर्मा ने इसकी संयुक्त संसदीय समिति द्वारा जांच की मांग दोहरायी. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की फ्रांस यात्रा पर भी सवाल खड़ा किया जिस दौरान 58,000 करोड़ रुपये के सौदे के तहत वायुसेना के लिए 36 राफेल जेट विमानों की आपूर्ति के लिए दसाल्ट एविएशन में चल रहे कामों की प्रगति का उनके द्वारा जायजा लेना शामिल था. शर्मा ने कहा कि भारत फ्रांस से जो लड़ाकू विमान खरीद रहा है, उसकी कीमत काफी बढ़ गयी है और प्रधानमंत्री को इस सौदे को लेकर उत्पन्न कई संशयों को दूर करना चाहिए. यदि इस सौदे का फोरेंसिक ऑडिट किया जाए तो और ब्योरा सामने आएगा.
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