लोकसभा चुनाव 2019 : खंडवा के चुनावी शोर में किशोर कुमार के गीत और उनके नाम पर राजनीति भी!

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खंडवा शहर में स्थित प्रख्यात गायक किशोर कुमार का स्मारक.

खंडवा:

मध्यप्रदेश की खंडवा (Khandwa) लोकसभा सीट में दो चिर-परिचित प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस (Congress) के अरुण यादव और बीजेपी (BJP) के नंदकुमार सिंह चौहान तीसरी बार लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) के मैदान में हैं. दोनों ही अपने दलों के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं. सन 2009 में अरुण यादव ने पटखनी दी तो 2014 में चौहान ने बदला चुका लिया. इस सीट में कई और मुद्दों के अलावा एक और मुद्दा है … किशोर कुमार.
पब्लिक क्या जानती है ये समझने हम खंडवा पहुंचे जहां पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव के प्रचार अभियान में किशोर दा के सियासी गाने लाउडस्पीकर पर खूब बज रहे हैं. हालांकि इमरजेंसी के दौरान किशोर कुमार (Kishore Kumar) के गानों पर पाबंदी लगाने के लिए खंडवा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) कांग्रेस पर निशाना साध चुके हैं. प्रधानमंत्री ने अपनी रैली में कहा था "किशोर कुमार का जिक्र आता है तो खंडवा का नाम होता है, इमरजेंसी के दौरान वे अपनी ज़िद पर अड़े रहे दबाव में नहीं आए, देश को जेलखाना बना दिया था उनको मंजूर नहीं था. बदले में इन कांग्रेसियों ने रेडियो पर किशोर कुमार के गानों पर रोक लगा दी थी.
खैर भावनात्मक मुद्दों से इतर जब हम खंडवा लोकसभा की समस्याएं जानने निकले तो बातें पुरानी किसान कह रहे हैं राहत नहीं मिली, कर्जमाफी छलावा है. वहीं कुछ किसानों का कहना था आवेदन आगे बढ़ गया है. उनको उम्मीद है चुनाव के बाद कर्ज़माफ हो जाएगा. नेतनगांव के राधेश्याम पटेल रोते हुए कहते हैं वे हमेशा कर्ज़ भरते थे अब डिफॉल्टर हो गए. न भावांतर के पैसे मिले. दो लाख के चक्कर में फंस गए. भोगांव के देवीकिशन कहते हैं 3 लाख 63 हजार के लिए जो आवेदन दिया है उम्मीद है हो जाएगा कुछ लोगों का हो गया है.

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सन 1991 से लगातार पांच लोकसभा चुनाव जीतने वाले बीजेपी के नंदकुमार सिंह चौहान का विजयरथ खंडवा में 2009 में अरुण यादव ने रोका. वे एक ढाबे पर रुके, आरोप लगाया कि अरुण यादव के भाई कृषि मंत्री सचिन यादव के दबाव में इसे तोड़ दिया गया… लोग भैय्या भैय्या … नंदू भैय्या के नारों में व्यस्त हैं. खुद छह दफे सांसद रहे, 15 साल पार्टी ने सरकार चलाई लेकिन बदहाली के लिए 3 महीने पुरानी सरकार को कोस रहे हैं." मध्यप्रदेश की सरकार बौरा गई है, कर्जमाफी का वायदा किया एक भी किसान के खाते में पैसे नहीं डाले, बैंक में नो ड्यूज मांगने जाते हैं तो अधिकारी कहते हैं सरकार ने फूटी कौड़ी नहीं दी, हम नो ड्यूज कहां से देंगे. आज ये ढाबा उखाड़ा है, कुदरत कमलनाथ का ढाबा चुनावों बाद उखाड़ देगी.

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…इलाके में लगभग दो लाख यादव समाज के मतदाता हैं और अरुण यादव को उम्मीद है कि उनके भरोसे इस बार वे अपनी पिछली हार का बदला ले लेंगे. अरुण यादव ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत में ही बीजेपी के दिग्गज नेता कृष्णमुरारी मोघे को हराया था. पीसीसी अध्यक्ष का पद गया तो कांग्रेस कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए, केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहे. बीजेपी के भावनात्मक आरोपों का जवाब कुछ यूं देते हैं "हम उस पीएम को ढूंढ रहे हैं जिन्होंने 2014 में बहुत सारे आश्वासन दिए. हमारे तमाम साथी रास्ते में खड़े हैं. वो 15 लाख हमारे खाते में कब जमा होंगे.. पेंशनर्स के साथ मेरी मीटिंग हुई दो करोड़ नौकरी देने वाले प्राइम मिनिस्टर कहां हैं हम ढूंढ रहे हैं."

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खंडवा लोकसभा में 8 विधानसभा सीटे हैं, जिसमें खंडवा, पंधाना, बागली बीजेपी के पास हैं तो मंधाता,बड़वाह, नेपानगर, भीकनगांव कांग्रेस के पास हैं. बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक शेरा भैय्या ने कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया है. विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी की पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस को शिकस्त दी. चौहान और चिटनीस के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है. शेरा भैय्या अरुण यादव के विरोधी बताए जाते हैं. राजपूत, गुर्जर और मुस्लिम मतदाता इस सीट पर निर्णायक हैं. इलाके में सड़क, बेरोजगारी, शिक्षा के समुचित संसाधनों का अभाव है. लेकिन मौजूदा सांसद इन सबके बीच राष्ट्रवाद की हुंकार भरते हैं, " हर व्यक्ति ये मानने लगा है राष्ट्रवादी पार्टी के साथ खड़े रहेंगे, हम सब भारत देशवासी हैं हमको हमारे देश को सशक्त बनाना है, आतंकवाद का खात्मा करना है.''
जवाब में अरुण यादव कहते हैं "हम सब राष्ट्रभक्त हैं लेकिन ये चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ रहे हैं. 15 साल में राज्य में सरकार इनकी, केन्द्र इनका, पानी की व्यवस्था तक नहीं कर पाए, रिंग रोड नहीं है. हमने स्थानीय लोगों के साथ विजन बनाया है. पांच साल में राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे.''

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विधानसभा चुनाव को देखा जाए तो निर्दलीय विधायक के समर्थन को जोड़ने पर बीजेपी को कांग्रेस से 26,024 वोट ज्यादा लाने होंगे. तय पब्लिक को करना है, जो प्रधानमंत्री के किशोर कुमार पर भावनात्मक भाषण सुन रही है, उनकी समाधि पर टूटी लाइट देख रही है … और दोनों को शायद आज भी किशोर दा अपने अंदाज में देख रहे हैं.

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