योगी कैबिनेट का विस्तार कल: शामिल हो सकते हैं आठ से 10 नए चेहरे, कइयों की जा सकती है कुर्सी

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बुधवार को होगा योगी कैबिनेट का विस्तार

नई दिल्ली:

उत्तर-प्रदेश की योगी सरकार बुधवार को अपना पहला कैबिनेट विस्तार करने जा रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार योगी सरकार इस बार अपने कैबिनेट में कई नए चेहरों को मंत्री बना सकती है. साथ ही योगी सरकार की कैबिनेट से पांच से छह मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है. इन सब के बीच बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल और स्वतंत्र देव सिंह ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है. इसके अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को भी कुछ लोकसभा चुनाव के बाद मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था. सरकार में वो पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री थे. उनकी जगह भी किसी और को मिलेगी.

CM योगी की सिफारिश पर राज्यपाल ने ओपी राजभर को UP कैबिनेट से किया बर्खास्त तो बोले- हक मांगना बगावत तो समझो हम बागी हैं

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बता दें कि योगी मंत्रिमंडल में तीन जगह खाली हुए हैं. ये सभी जगह सरकार के तीन मंत्रियों रिता बहुगुणा जोशी, एसपी सिहं बघेल और सत्यदेव पचौरी के लोकसबा चुनाव में जीतकर सांसद बन जाने से हुई हैं. मिली जानकारी के अनुसार योगी सरकार अपनी कैबिनेट में आठ से दस नए चेहरे को मंत्री बनाया जा सकता है. गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिफारिश पर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने ओम प्रकाश राजभर को मंत्री पद से हटा दिया था. राजभर के पास पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग जन विकास मंत्रालय था.

लोकसभा चुनाव के बाद योगी मंत्रिमंडल का हो सकता है विस्तार, इन्हें मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजे सामने आने के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओपी राजभर (Om Prakash Rajbhar)को यूपी कैबिनेट से बाहर करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने राज्यपाल से सिफारिश की थी. एग्जिट पोल (Exit Poll Results) के नतीजों में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनती हुई दिख रही थी. सीएम योगी के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओपी राजभर ने कहा था कि यह गरीबों की आवाज उठाने की सजा मिली है. अगर हक मांगना बगावत है तो समझो हम बागी हैं.'

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सुभासपा उत्तरप्रदेश में भाजपा (BJP) की सहयोगी पार्टी है और 2017 के विधानसभा चुनाव में उसने चार सीटें जीती थीं. लेकिन लोकसभा चुनाव राजभर की पार्टी ने भाजपा के साथ मिलकर नहीं लड़ा. राजभर की पार्टी ने खुद 39 उम्मीदवार चुनाव में उतारे थें. वहीं कुछ सीटों पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार भी किया था. हालही, राजभर के पुत्र सुभासपा महासचिव अरूण राजभर ने स्पष्ट किया था कि भाजपा के साथ विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन था ना कि लोकसभा चुनाव के लिए.

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