मोदी सरकार ने चार नए सूचना आयुक्त नियुक्त किए, इन रिटायर्ड अफसरों को मिली आयोग में जगह

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केंद्रीय सूचना आयोग में चार नए आयुक्तों की नियुक्ति हुई हैं.

नई दिल्ली:

केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में खाली चल रहे चार पदों पर नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की है. अभी तक आयोग महज तीन सूचना आयुक्तों के साथ काम कर रहा था, जबकि उसमें मुख्य सूचना आयुक्त समेत 11 ऐसे अधिकारी होने चाहिए. सरकारी आदेश के अनुसार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व आईएफएस अधिकारी यशवर्द्धन कुमार सिन्हा, पूर्व आईआरएस अधिकारी वनजा एन सरना, पूर्व आईएएस अधिकारी नीरज कुमार गुप्ता और पूर्व विधि सचिव सुरेश चंद्र की सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी.सिन्हा 1981 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं जो ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त थे. पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल और दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र सिन्हा अहम पाकिस्तान-अफगानिस्तान-ईरान संभाग के अगुवा समेत विदेश मंत्रालय में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. उन्होंने अतिरिक्त सचिव के इस संभाग की अगुवाई की थी.सीआईसी में एकमात्र महिला 1980 बैच की भारतीय राजस्व सेवा (सीमाशुल्क एवं उत्पाद शुल्क) की अधिकारी सरना होंगी. वह केंद्रीय सीमाशुल्क एवं उत्पाद शुल्क बोर्ड की प्रमुख थीं. वर्ष 1982 बैच के आईएएस अधिकारी नीरज कुमार गुप्ता निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग में सचिव थे.

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भारतीय विधि सेवा के अधिकारी चंद्रा इसी साल केंद्रीय कानून सचिव के रुप में सेवानिवृत हुए थे और वह 2002-04 तक तत्कालीन कानून मंत्री अरुण जेटली के निजी सचिव भी रहे थे. सरकार द्वारा नियुक्त किये गये सभी चारों इसी साल सेवानिवृत हुए थे.मुख्य सूचना आयुक्त आर के माथुर और सूचना आयुक्तों- यशोवर्द्धन आजाद, श्रीधर आचार्यलु और अमिताव भट्टाचार्य के हाल ही में सेवानिवृत हो जाने के बाद आरटीआई मामलों के शीर्षतम न्यायिक प्राधिकरण में तीन सूचना आयुक्त ही बच गये थे. इस रिक्तता पर कई सामाजिक कार्यकर्ता उच्चतम न्यायालय चले गये थे.

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उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्यों से मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्तियों में पारदर्शिता बरतने और सर्च समितियों एवं आवेदकों का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा था.नियुक्ति प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए एक याचिकाकर्ता– कोमोडोर लोकेश बत्रा ने कहा कि सरकार वेबसाइट पर ब्योरा डालने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देश का पालन करने में विफल रही.

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