मिशन इंद्रधनुष के तहत चार सालों में 3.15 करोड़ से ज्यादा बच्चों को लगाया गया टीका

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Mission Indradhanush: मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत साल 2014 में हुई थी.

नई दिल्ली: मिशन इंद्रधनुष को देशभर के लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत साल 2014 में हुई थी. मिशन इंद्रधनुष के तहत पिछले चार सालों में 3.15 करोड़ से ज्यादा बच्चों और 80.63 लाख गर्भवती महिलाओं को रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाए जा चुके हैं. मिशन इंद्रधनुष की शुरुआत पूर्ण टीकाकरण कवरेज हासिल करने या कम से कम 90 प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण करने के उद्देश्य से हुई थी. यूएनआईजीएमई (यूएन इंटर एजेंसी ग्रुप फॉर चाइल्ड मोर्टैलिटी एसटिमेशन) की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल गुजरे पांच वर्षों में नवजात शिशुओं की मौत के सबसे कम मामले रिकॉर्ड हुए. 2016 में यह संख्या 867,000 से 2017 में 802,000 हो गई.
2017 में पांच से कम के 1000 जीवित प्रसव में 39 लड़कों और 40 लड़कियों की मौत हुई. मिशन इंद्रधनुष की सफलता से भारत सरकार को भारत के यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) को मजबूत करने में सहायता मिली है. यह अब 12 वैक्सीन्स को कवर करता है. इनमें जापानी एनसेफ्लाइटिस, रोटा वायरस, पीसीवी और मिजिल्स रुबेला से बचाव के टीके शामिल हैं. आईएमआई को 11 अन्य मंत्रालयों और विभागों का समर्थन है.
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इनमें महिला और बाल विकास मंत्रालय, पंचायती राज, शहरी विकास और युवा मामलों के मंत्रालय शामिल हैं.अप्रैल 2018 की स्थिति के अनुसार एमआई ने देश के 528 जिलों को कवर किया है और करीब दो लाख जानें बचाई जा चुकी हैं. टीका (टीके की दवाई) का वितरण केंद्रीय भंडार से राज्यों को और फिर जिलों को और फिर वहां से कोल्ड चेन प्वाइंट्स को भेजा जाता है और इस तरह इस वितरण देश भर में किया जाता है.

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टिप्पणियां मिशन इंद्रधनुष के लिए सरकार और पार्टनर्स ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मिलते हैं ताकि मिशन के विस्तृत माइक्रोप्लान का विकास हो और उसे अद्यतन किया जा सके. इसमें भूमिका और जिम्मेदारियां भी तय होती हैं, हर दिन किन घरों को कवर करना है से लेकर टीका लगाने वालों, उनके सुपरवाइजर और गांवों में मुख्य रूप से प्रभाव डालने वालों के नाम तय किए जाते हैं. ये विस्तृत माइक्रो प्लान इस अभियान की सफलता का राज है.
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