मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 : नाराज नेताओं से बढ़ी बीजेपी की मुश्किल…

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शिवराज सिंह चौहान पर्चा भरने से पहले मंदिर गये, फिर नर्मदा मैया की आरती भी की

भोपाल: मध्य प्रदेश बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. पिछले 13 साल से शिवराज सिंह चौहान राज्य के मुख्यमंत्री हैं. इन 13 सालों में शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी के संगठन पर भी अपनी पकड़ काफी मजबूत की है, कई विरोधियों को घर बिठा दिया लेकिन इस बार टिकट बंटवारे के बाद जिस तरह का असंतोष सामना आ रहा उससे पार्टी ही नहीं संघ भी परेशान है. सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्चा भरने से पहले मंदिर गये, फिर नर्मदा मैया की आरती भी की फिर बुधनी से पर्चा भरा. कोशिश चौथी बार सरकार बनाने की, लेकिन रतलाम जैसी तस्वीरें इस सपने पर ग्रहण लगा सकती हैं. रतलाम ग्रामीण से दिलीप मकवाना को बीजेपी ने टिकट दिया, वो मौजूदा विधायक मथुरा लाल डामर से आर्शिवाद लेने आए, लेकिन डामर ने उनपर डेढ़ करोड़ में टिकट खरीदने का आरोप लगाकर उन्हें बैरंग रवाना कर दिया.
वाजपेयी सरकार में केन्द्रीय मंत्री रहे, सरताज सिंह को पार्टी ने सिवनी मालवा से मौका नहीं देने का इशारा दिया तो वो भी बिफर पड़े. फोन पर नरेन्द्र तोमर को खरी खोटी सुना दी. भोपाल की गोविंदपुरा सीट पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल गौर की दावेदारी से फंसा है, वो खुद को या बहू को टिकट देने की मांग कर रहे हैं. एक दिन तेवर कड़क किये तो दूसरे दिन नरम, कहा 'मुझे पूरा विश्वास है कि मुझे ही टिकट मिलेगा. मुझे प्रधानमंत्री कह के गए तो टिकट क्यों नही मिलेगी, पीएम खुद कह के गए कि बाबूलाल गौर एक बार और. बीजेपी से ही लड़ूंगा और गोविंदपुरा से ही चुनाव लड़ूंगा.'
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नाराजगी ऐसी कि लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन टिकट बंटवारे पर कुछ बोलना नहीं चाहतीं, कहती हैं, 'चुनाव की बात मेरे पास कुछ नहीं है इसलिये वो प्रश्न मत पूछो ना टिकट की बात करो.' बात बढ़ी तो नरेन्द्र तोमर विनय सहस्रबुद्धे के साथ उनसे मिलने पहुंचे, पौन घंटे बात की चर्चा है कि ताई अपने बेटे मंदार के लिये टिकट चाहती हैं. बैठक के बाद तोमर ने कहा, 'ताई हमारी वरिष्ठ नेता हैं, उनके प्रति सबका आदर है, मैं और विनय सहस्रबुद्धे चर्चा के लिये आए थे. कोई नाराज़गी नहीं है.'
टिप्पणियां पार्टी कह रही है, सारी नाराजगी परिवार की है वक्त रहते दूर कर ली जाएगी. बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कहा, 'बड़े परिवार में छोटी बातें आ जाती हैं, लेकिन जबतक चुनाव आएंगे सारे मामले शांत हो जाएंगे, चौथी बार सरकार बनाने सक्षमता से पार्टी के सारे लोग आगे आएंगे.' वैसे परिवार से याद आया कि मु्ख्यमंत्री के साले नाराज़गी के बाद अपना परिवार छोड़ कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं, ये आरोप लगाकर कि बीजेपी में कामदारों की नहीं नामदारों की पूछ है. अपनी तैयारी वो कुछ सेकेंड में अपने इलाके के गांवों के नाम गिनाकर बता चुके हैं.
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