मध्य प्रदेश: पॉवर प्लान्ट में ज़हरीली राख लीक होने के मामले में एस्सार किसानों को देगा मुआवजा!

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एस्सार कंपनी से निकले राख ने तबाह किए कई खेत

सिंगरौली:

मध्यप्रदेश के सिंगरौली में एस्सार पावर के राख के कृत्रिम तालाब के फटने से कई गांव तबाह हो गए. इस मामले में अब किसानों का कहना है कि जिनके खेतों में राख बिछी वो जमीन हमेशा के लिए बंजर हो चुकी है जिस पर अब खेती नहीं की जा सकती. आलम कुछ ऐसा है कि खेती पर आश्रित किसान अब भूखों मरने की कगार पर पहुंच गए. स्थानीय लोगों और पीड़ितों ने इस भीषण तबाही के मंजर को देख इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुये दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं जिला प्रशासन ने 50 लाख मुआवजा देने के लिए एस्सार पावर सिंगरौली को निर्देशित किया है. सिंगरौली में एस्सार के पावर प्लांट के कृत्रिम तालाब के टूटने से जो ज़हरीली राख निकली उससे करसुआ की रहने वाली मानवती के घर का सारा सामान बर्बाद हो गया. जब तालाब टूटा तो घर में फंसे 5 बच्चों को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया.

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दो एकड़ ज़मीन में धान, मक्का, तीली बोया गया था सब बर्बाद हो गया. फूलमती खेत में धान रोप रही थीं, तालाब फूटा तो उनका भी सबकुछ बर्बाद हो गया. अब परेशान हैं जाएं तो जाएं कहां. लेकिन जानते हैं मानवती और फूलमती जैसे किसानों की नुकसान की भरपाई के लिये प्रशासन का आंकलन क्या है, 50 लाख रुपये जी पांच गांवों में ज़हरीली राख फैली प्रशासन का कहना है कि लोगों को जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई 50 लाख में हो जाएगी. ज़िला कलेक्टर केवीएस चौधरी ने कहा प्राथमिक आंकलन में 450 किसान थे जिनकी 198 एकड़ फसल और घर का नुकसान लगभग 50 लाख रुपये है, एस्सार से कह दिया है उन्होंने भी मान लिया है पैसा आते ही एक दो दिन में भुगतान कर देंगे. ग्रामीणों ने तालाब टूटने वाले दिन जो वीडियो मोबाइल से बनाया था उसमें पावर प्लान्ट के आसपास के इलाकों में गाद की बाढ़ को देखा जा सकता है, जिसमें खेतिहर ज़मीनें भी शामिल हैं.

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इस कृत्रिम तालाब का इस्तेमाल उस राख को जमा करने के लिए किया जाता था, जो कोयला आधारित पावर प्लान्ट में मूल उत्पाद के साथ-साथ पैदा हो जाती है. कोयले की यह राख बेहद हानिकारक होती है, जिसमें आरसेनिक समेत कई ज़हरीले पदार्थ होते हैं. ज़िला अस्पताल के डॉ. राहुल पाठक ने बताया कई तरह की बीमारी फैल सकती है, उल्टी दस्त तो बहुत आम है. सोनभद्र में भी ऐसा मामला हुआ था जहां कई बच्चे विकलांगता का शिकार हो गये, इससे चर्म रोग हो सकता है. पानी को उबालकर छानकर भी साफ नहीं किया जा सकता. बहुत सतर्क रहने की जरूरत है. वैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पावर प्लान्टों के आसपास इस तरह राख के लीक हो जाने से ज़मीन के भीतर मौजूद पानी बहुत ज़हरीला हो सकता है, और इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.

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राज्य प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी वाल्मीकि ने बताया नाला जो है वो गर्रा नदी में मिल रही है, गर्रा नदी म्यार में मिल रही है पूरा पैच सर्वे और आईएसटीजी लेवल का काम है अभी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, सैंपल ले रहे हैं एक विस्तृत सर्वेक्षण चल रहा है पूरा नहीं हुआ है अभी. कंपनी कह रही है जो जुर्माना लगेगा वो भर देंगे, हालांकि उनका ये भी कहना है कि तालाब का फूटना दुर्घटना नहीं षडयंत्र है. एस्सार पावर प्लांट के पीआरओ सुधांशु चतुर्वेदी ने कहा, 'एनजीटी की टीम जिले में है, और एनजीटी की टीम हर प्लांट का दौरा कर रही है, तो योजनाबद्ध तरीके से हमारे प्लांट को बदनाम कर उसका काम बाधित करने की एक साजिश है. वास्तविक तौर पर जिनके घर में पानी गया, फसल नुकसान हुआ, गिने चुने तीन लोगों के घर में पानी गया, बांध टूटने के बाद जिस जमीन पर पानी गया वो कंपनी की अधिगृहीत जमीन है.

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लोगों ने पजेशन कंपनी को नहीं दिया, कंपनी उसका टैक्स भर रही है, एसडीएम एसपी कलेक्टर दौरा करके गये हैं. जैसा निर्देशित करेंगे हम करने को तैयार हैं.' वैसे सरकार और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के अनुसार, राख के तालाबों के चारों और कंक्रीट की दीवार बनाई जानी चाहिए, और नियम यह भी कहते हैं कि राख के तालाबों को क्षमता से ज़्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. सिंगरौली, जिसका कुछ हिस्सा उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में आता है, में 10 कोयला आधारित पावर प्लान्ट हैं, जिनकी कुल क्षमता देश के किसी भी इलाके में सबसे ज़्यादा 21,000 मेगावॉट है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, इन्हीं पॉवर प्लान्टों ने सिंगरौली को गाज़ियाबाद के बाद देश का दूसरा सबसे ज़्यादा प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र बना दिया है.

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