मध्य प्रदेश के इस गांव में रहते हैं केवल बच्चे और बुजुर्ग, जानें क्या है इसकी वजह

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रोजगार की तलाश में गांव से लोग पलायन कर चुके हैं.

भोपाल: मध्य प्रदेश के गोरा गांव में हर एक दूसरे घर पर ताला लगा है. पूरा गांव सूनसान पड़ा है. चार साल से लगातार सूखे की मार झेल रहे गांव के जवान पुरुष और महिलाएं रोजगार की तलाश में पलायन कर गए. अच्छे भविष्य की उम्मीद के साथ आपको इस गांव में केवल बुजुर्ग और बच्चे ही देखने को मिलेंगे. एक जवान लड़के जयहिंद ने बताया, 'मेरा परिवार गांव छोड़कर जा चुका है. मैं यहां पढ़ाई के लिए अकेला रहता हूं. मैं एक पुलिस वाला बनना चाहता हूं.' वही एक अन्य लाल नाम के लड़के ने बताया कि वह गांव में रहकर काम करना चाहता है. उसने कहा, 'मेरे माता-पिता गांव छोड़कर जा चुके हैं और मैं और मेरे दो भाई यहां रहते हैं. मैं एक इंजीनियर बनना चाहता हूं. मैं यहां रुकककर काम करना चाहता हूं.' गांव में विकल्पों के नाम पर कुछ नहीं है.
गांव छोड़ने की योजना बना रहे राजकुमार ने बताया, 'मैं दिल्ली-नोएडा जाकर मजदूरी करूंगा या किसी फैक्ट्री में काम तलाश करूंगा. यहां बहुत कम मजदूरी मिलती है, इसलिए यहां काम नहीं कर सकता. मैं मेरे परिवार का खर्च भी नहीं चला सकता.'
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टिप्पणियां बता दें, सूखें की वजह से राज्य में जमीन का जलस्तर नीचे चला गया है. राज्य सराकर ने बुंदेलखंड के जिलों सहित 13 जिलों की 110 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया है. यहां पिछले साल भी बारिश नहीं हुई, जिसकी वजह से इन क्षेत्रों को दोबारा को सूखे का सामने करना पड़ा.
मध्य प्रदेश की 230 सीटों के लिए 28 नवंबर को मतदान होगा और नतीजों का एलान 11 दिसंबर को किया जाएगा. विधानसभा चुनाव में सीधे तौर पर कांग्रेस और भाजपा के बीच जंग देखी जा रही है. शिवराज सिंह चौहान जहां चौथी बार सीएम बनने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस साल 2003 के बाद दोबारा से सत्ता में आना चाह रही है.
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