बुलंदशहर हिंसा इनसाइड स्टोरी: आखिर क्या हुआ था उस दिन कि हैवान भीड़ ने ले ली दो की जान

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पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में गोकशी के शक में हुई हिंसा में भीड़ ने एक पुलिस इंस्पेक्टर सहित दो लोगों की जान ले ली. पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है. 27 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 50-60 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया और करीब चार लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है. पुलिस ने अपनी एफआईआर में बताया कि गोकशी की सूचना मिलने पर पुलिस वहां गई थी, लेकिन वहां हिंसक भीड़ ने उन्हीं पर हमला कर दिया. पुलिस अपनी जान बचाने के लिए पीछे हटती रही, लेकिन भीड़ इतनी उग्र थी कि वह 'मारो-मारो' के नारे के साथ हम पर हमला करती रही. हम आपको बताते हैं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था कि भीड़ इतनी उग्र हो गई.
बुलन्दशहर से मिल रही रिपोर्ट्स के मुताबिक थाना कोतवाली क्षेत्र के गांव महाव के जंगल में रविवार की रात अज्ञात लोगों को कथित तौर पर गोवंश के अवशेष मिले थे. यह सूचना मिलने पर लोगों में आक्रोश फैल गया. गुस्साए लोग घटनास्थल पर पहुंचे और कथित तौर पर गोवंश अवशेषों को ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर सोमवार सुबह चिंगरावठी पुलिस चौकी पर पहुंचे. सूत्रों के अनुसार गुस्साई भीड़ ने बुलंदशहर-गढ़ स्टेट हाईवे पर ट्रैक्टर ट्रॉली लगाकर रास्ता जाम कर दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. सूचना मिलने पर एसडीएम अविनाश कुमार मौर्य और सीओ एसपी शर्मा पहुंचे.
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हिंसा और पुलिस पर हमले के मामले में एक सब इंस्पेक्टर की ओर से लिखवाई गई एफआईआर में बजरंग दल के नेता योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है. पुलिस ने आरोप लगाया है कि योगेश राज ने भीड़ को कई बार उकसाया, जिससे उसने उग्र होकर पुलिस पर हमला कर दिया. एफआईआर में कहा गया है, '3 दिसंबर को हमें गोकशी की सूचना मिली थी. जिसके बाद हम लोग वहां पहुंचे, वहां भीड़ काफी गुस्से में थी. भीड़ में शामिल पुरुष और महिलाएं विरोध कर रहे थे, जिस पर प्रभारी निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह ने भीड़ को काफी समझाया, लेकिन भीड़ नहीं मानी और पथराव कर दिया. मौके पर मौजूद एसडीएम स्याना और क्षेत्राधिकारी स्याना भीड़ को लाउड स्पीकर के जरिए समझाते रहे कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इसके बाद भी भीड़ और ज्यादा उग्र हो गई.'
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साथ ही बताया, 'अवैध हथियारों, लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने जान से मारने की नीयत से हम पर हमला कर दिया. प्रभारी निरीक्षक सुबोध सिंह को गोली मार दी गई और उन्हें घेरकर उनकी निजी लाइसेंसी पिस्टल और तीन मोबाइल फोन छीन लिए गए और वायरलैस सेट तोड़ दिए गए. चौकी में तोड़फोड़ की गई और रिकॉर्ड्स और वाहनों में आग लगा दी गई. स्याना क्षेत्राधिकारी जब अपनी जान बचाने के लिए चौकी के कमरे में घुसे तो भीड़ ने चौकी को ही आग के हवाले कर दिया. पुलिस अपनी रक्षा के लिए लगातार पीछे हट रही थी और भीड़ 'मारो-मारो' के नारे के साथ लगातार हमारी ओर बढ़ रही थी.'
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वहीं पुलिस की एफआईआर में मुख्य आरोपी योगेश राज ने गोकशी की एफआईआर दर्ज करवाई है. इसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया है. इस एफआईआर में योगेश राज ने कहा है, 'तीन दिसंबर को सुबह करीब नौ बजे हम लोग महाव के जंगलों में घूमने आए थे, तभी हमने देखा कि सुदैफ चौधरी, इल्यास, शराफत, अनस, शाजिद, परवेज, सरफुद्दीन, लोग गायों को काट रहे थे. जब हमने शोर मचाया तो वे हमें देखकर मौके से भाग गए. इससे हिंदू धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं.'
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